Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 79
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पंचकम्पो - (०२०) २०१| ||१२०२॥ ॥१२०३॥ ॥१२०४॥ ॥१२०५॥ १२०६॥ ॥१२०७॥ ॥१२०८॥ ॥१२०९॥ (१२०३) आलोयणा य विनए खेत दिसामिग्गहे य कालेय रिक्खगुणसंपदाऽविय अभियाहारे य अट्ठमए (१२०२) अण्णगणागत पुच्छे केवइय सहायगा गुरूणंतु एवं पुट्ठोसोऽथिय वदेश एगादिय इमे उ (१२०३) एगे अपरिणते या अप्पाहेरेय घेरए गिलाणे बहुरोगे य मंदधम्मेय पाहुडे (१२०४) एतारिस विउस आगतते सोहि होति पुवुत्ता आयारकप्पनामे सीसपडिछे य आयरिए (१२०५) एयद्दोसविमुक्कंतु आगतालोइए पडिच्छति तु आलोयणातु एसा सेसादारा जहाऽऽयासे (१२०६) नवरिंकालदारं गुणदारं चैव ईसि भासिस्सं अंगसुयक्खंधाणं उद्देसा सुक्खपस्खम्मि (१२०७) पन्नत्तिमहाकप्पे सुतादि सरदे सुभिक्खकालम्मि नैमित्तियादि पुच्छिय उद्दिसणा होति कायव्या (१२०८) सेसं कालविहाणं पुकुत्तं तंतु होति नायव्वं केहिं गुणेहिं जुतस्स तु उद्दिसियव्वं इमे सुणसु (१२०२) अव्योच्छित्तीसंवेगविनयउववेयवअभीरुस्स पुव्वण्हे जोगसमुतिस्स उद्देसणाकप्पो (१२७०) वायगवाइजूते गुणा तुवापणविहिं च योच्छामि वायगयादिजंते गुणाण दारा इमे होति (१२:१) अप्पणो य ददा रक्खा विपुलो य तहाऽऽगमो सुयनाणस य पूजा जिणाण छिद्देय दुच्छल्लो (१२१२) उमगं वच्चंतो अप्पा रक्खिलते तु नियमेणं सुण्हादिवतेणं सुतवादारोवओगेणं (१२१३) उवउत्तस्स तदढे निगरलामो तवोय विउलो उ इंदियपणिही य तहापसत्यनागोयओगोय (१३१४) जंअत्राणी कम्मखयेइ पहुयाहि वासकोडीहिं तं नाणी तिर्हि गुत्तो खयेइ उस्सासमेत्तेणं (१२१५) बारसविहम्मिवि तवे समितरबाहिरे कुसलदिष्टे नवि अत्यि नविय होहीसरझायसमेतयोकम्म (१२१६) सुयनाणुवदेसेणं याइतेणं च गिण्हगेणंच सुतपूजा होति कया तं च जितं होति वायंते (१२१७) सुयपूजाए य पुणो सुतोवएसेण बहमाणेण धाएंतम हिअंते आणातु कता जिणिदाणं (१२१८) सुयनाणुवदेसेणं वायंता गिण्डतो यपंतेहिं न चइजति छल्लेतु वंतरपादीहिं देवेहि ॥१२१०॥ ॥१२११॥ १२१२|| 11१२१३॥ ||१२१४॥ १२१५॥ १२१६10 ॥१२१७॥ 19२१८॥ For Private And Personal Use Only

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