Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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पाहा-१४७०
||१४७०॥
॥१४७१॥
11१४७२॥
1१४७३॥
||७४ा
||१४७५11
11१४७६||
॥१४७७॥
॥१४७८॥
(१४७०) ओहे उयग्गहे या दुविहो उवही तुहोति नायब्बो
ओहोदही तुतिण्डं ओवग्गहिओभवे दोण्डं (१४७१) जिनकप्पे धेरकप्पे कप्पातीते यतिहमोघोतु
येराणमुवगहिओ साहूणं संजतीणं च (१४७२) वारसचोइस पणुवीस नवय एककोय निरुयही चेव
जिनरअञ्जपतेयबुद्धतित्थकरतित्थकरे (१४७३) पाणीपडिग्गहीता पडिगहधारीय होति जिनकप्पे
येरा पडिग्गहधरा कप्पादीया उ मजियव्या (१४७४) बियतियचउकूकपणए नव दस एक्कारसेवबारसगं
एते अट्ठ विकप्पा उवहिम्मिवि होति जिनकप्पे (१४७५) अहवादुगंच पणगं उवहिस्स उ होति दोनिवि विकप्पा
पाणिपडिग्गहियाणं अपाउयपाउयाणंच (१४७६) रयहरणं मुहपोत्ती एयंदुयगं अपाउयंगाणं
रयहरणंमुहपोत्ती तित्रिय पच्छाद इतरेसिं (१४७७) उग्गहधारीणंपिय दुविहो उवही समासओ होति
नवविह वालसविहो अपाउयसपाउयाणंच (१४७८) पत्तंपत्ताबंधो पायठ्ठवणं च पायकेसरिया
पडलाई रयत्ताणं च गोच्छओ पायनिओगो (१४७९) रयहरणंमुहपोत्ती नवहा एसो अपाउयंगाणं
इयरेसिं एसेयय अतिरेगा तिन्नि पच्छागा (१४८०) एते चेय दुवालसमत्तउ अतिरेग चोलपट्टोय
एसोय चोइसयिहो उवही खलु धेरकप्पम्मि (१४८) अजाणं एसेय य चोलत्याणम्मिनदरि कमदंतु
अतिरेग अंगलग्गा इमे उ अत्रे मुणेयव्या (१४८२) उगह नंतग पट्टो अड्ढोरुग चलणियाय बोद्धन्दा
__ अभितर बाहिनियंसणी य तह कंचुए चेय (१४८३) उक्कच्छिय देकच्छिय संघाडीचेव खंधकरणीय
ओहोवहिम्मि एते अजाणं पत्रवीसंतु। (१४८r) सत्तय पडिग्गहम्मीरयरहरणं चेव होति मुहपोती
एसोतु नवविकप्पो उवही पत्तेयबुद्धाणं (१४८५) एगो तित्वगराणं निक्खममाणाण होइ उवही उ
तेण परंनिरुवहिऊजावज्जीवाए तित्थगरा (१४८६) जिणा वारसरुवाई येरा घोहसरूविणो
अजाणं पन्नवीसंतु अतो उड्ढे उवगहो (१४८७) एसो उयहीकप्पो समासओ वत्रिओजहाकमसो
संभोगकपमहुणा समासतो मे निसामेह
||१४७२॥
119४८०॥
11१४८१11
१४८२||
१४८३||
॥१४८४॥
१४८५10
||१४८६॥
||१४८७॥
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