Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 120
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ॥१९३५॥ ॥१९३६॥ ||१९३७॥ ।।१९३८॥ ॥१९३९॥ ॥१९४०॥ ||१९४१||* ॥१९४२॥ गाहा-१९३५ (१९३५) तंपुण केरिसगस्स उवियडेयव्यं तु जाणतो जो तु अविजाणते नकपति अजाणतोजो अगीयत्यो (१९३६) पायच्छित्तमयाणंतो ठाणे ठाणे अहाविहिं आलोयणाए उवसंपयाएनहहोति पाउग्गो (१९३७) किं कारणं नयाणति सोहिं साहुस्स सोहिकामस्स ठाणे ठाणे पुढवादिएसु मूलुत्तरे वादि (१९५८) पाणतिवातादीसुय कारण निक्कारणे यजयणाए आलोयणगुणदोसदरिसणेणंहु पाउग्गो (१९३९) गुण अणिगूहियमादी दोसा पुण गृहणादिया होति एतेन याणे अगीतो तम्हा उसस्स नालोए (१९४०) पायच्छित्तं वियाणंतो ठाणे ठाणे अहाविहिं आलोयणाए उपसंपयाए सो होइ पाउग्गो (१९४१) पडिसेवणऽतियारे दुविहे काले पबंधवोच्छेदे एकेक्क छक्कएण आलोयण मा पडिच्छाहि (१९४२) पडिसेवणाऽतियारा दुयिहा मूलगुण उत्तरगुणेय पडिसैवणकालेऽविय दुविहो उउबद्ध वासे य (१९४३) अन्योच्छिन्न पबंध तबिवरीयं तु होइ योच्छित्रं वयछक्ककायछक्काकप्पादी छक्कमेक्कक्कं (१९४४) अक्कप्पादिछक्कमिणं अकप्प गिहिमायणं च पलियंको ___ तत्तोय गिहिणिसिज्जा होइ सिणाणं च सोपा य (१९४५) एतेसि छक्कगाणं एक्केक्कंजं तु होइ आवग्णो तं तं आलोऐंतहा पच्छितेयावि आयरिओ (१९४६) आलोयणववहारो संवासिपवासियाऊ अवहारा संवासिया उगच्छे पवासिता कारणगतस्स (१९४७) अहवाजा अणवठ्ठो तासंवासी तुहोति अवराहा पारंचीयपवासी पवसतिगच्छाओजेणं तु (१९४८) पंचयिहोसज्झाओदाणागहणमिमइओसंवासे पाबासिए न दिअति नय गहणं होइ काय, (१९४९) आवनगपरिहरिए अणयहे वेव दोण्हऽवेतेर्सि नवि दिनति नविधेष्यति सेसाणं दान गहणं च (१९५०) आलोयणाऐंकप्पो एसो मणिओ मए समासेणं उपसंपयाएँ कप्पं एत्तो उसमासओ योच्छं (१९५१) दुविहम्मि आगमम्मि उपसवणा चेव आयरणया य पत्रवणगहणअनुपालणाऐं उपसंपया होइ (१९५२) आगमहेउं उवसंपदाउसय आगमो भवे दुविहो सुत्तं अस्थो य तहा पारगए तत्य उपसंपा ॥१९४३|| ॥१९॥४॥ ॥१९४५॥ १९४६॥ ॥१९४७॥ ॥१९४८॥ १९४९॥ ||१९५०॥ १९५१॥ १९५२॥ For Private And Personal Use Only

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