Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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गाहा १९७१
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(१९७१) दूसेउं न पडिच्छति न संति ते यावि तस्स जदि दोसा ताहे जं सो वदती तं दोसं अप्पणाऽऽवजे
(१९७२) जंच असुद्ध पडिच्छति रागेणं तस्स जे भवे दोसा वसतिगाणादि ते उ सो अप्पणा पावे
(१९७३) अरुहा अणरुह उवसंपदा य भणिया उ होति दोड़ देते अयमण्णो उ अणरिहो सूरी उवसंपदाते उ (१९७४) आहारे उवहिम्मिय पगासणा होइ अणरिहमसड्ढे एतनिरा संविग्गजणम्मि उद्देसो
(१९७५) आहारउवहिसेज्जा लभिहामी तेण संगहं कुणति होहामि वा पगासो लोए न ऊ निजरट्ठाए (१९७६) एए होति अणरिहा तिंतिणिचलचित्तमादिणो जे य अहबावि मंदसड्ढे आकट्टिविकट्टिए बावि (१९७७) जो पुण इमेहिं पंचहिं ठाणेहिं वादे सो भवे अरुहो संगहुवग्गहनिज्जरसुतपञ्जयजातऽवोच्छिती (१९७८) तस्स पुण निजरड्डा बाइंतस्स नियमेण सूरिस्स आहारोबहिपूजापगासणा चैव भवती तु (१९७९) विणएणाहारादी उक्कोसा तस्स होंति दायव्दा काले कालगुरूवा जे वावि सभाय अणुरुवा (१९८०) उच्छुढसरीरो उ जइविय सो मंडलीय मुंजति ऊ तहविय मत्तगगहणं सीसपडिच्छेहिं कायव्वं (१९८१) एस अनुधम्रता ऊ जह गोतमसामि सामिणो गेहे हिंडतस्स पुर्ण इमे तस्स उ दोसा भवंती उ (१९८२) वाए पित्ते गणालीए कायकिलेसे अर्चितता मेढी अकारए वाले गणचिंतावट्टि वादिणो (१९८३) एतेसिं दाराणं वक्काणुवरिं बितिज्जउद्दे
यवहारे मण्णिहिती वित्थरओ इह समासेणं (१९८४) मत्तीए तु गुणाणं पगासणा तस्स तेहिं कायव्या एयारिसी महप्प उत्तो अणनकालीओ (१९८५) थामावहारविजढीतवसंजमसुद्धिओ जियकसाओ 'बहुहुसुय बहुआगमिओ मत्तीऍ पगासए एवं (१९८६) एसुवसंपदकप्पो वोच्छं उद्देसकम्पम्हुणा उ उद्दिसण वायणत्ति य पाढणया चेद एगट्ठ (१९८७) सुतत्यतदुभयाइं पयायते ताव जाव संधाणं बहुपचवाययाए विजते भजियंतु संघाणं (१९८८) संघाणमंतगमणं असिवाई पञ्चावादऽ नेगविहा विजढेत्ती निक्खित्ते जोगे भइओ पुणुक्खेवो
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