Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 102
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir गाझा-१६१२ ॥१६१२॥ ॥१६१३॥ ॥१६१४॥ ॥१६१५।० 1१६१६॥ ||१६१७|| 11१६१८॥ ॥१६११॥ ||१२०॥ (१९१२) आदितिएण उगहणं वितियट्ठाणम्मि अब्मणुष्णातं इंदिपरिक्खवणिझो सुहारको सब्दसाहूणं . (११३) आदिति होति कप्पो तिगतिगआगारउवहिसेआओ गहणं तहोति तिविहं उग्गममादी तिगविसुद्ध (१९४४) बितियहाण पकप्पो तत्यवि तिगसुखमेव घेतब्वं असतीय अनुनातं पणहाणीए असुद्धपि (१९७५) केण पुण कारणेणं गच्छे असुद्धपिउग्गमादीहिं धेप्पति भण्णति सुणसूकारणमिणमो समासेणं (१९१६) रयणाकरोव्व जम्हा उ आगरो होइ सव्वसुक्खाणं नाणादीण यपभयो ततो य मोक्खोयतो रक्खे (१६१७) आइत्रता महाणो कालो विसमो सपक्खओ दो सो आदितिगभंगगेणं गहणं भणितंपकप्पम्मि (१९१८) तियतिककंतपमाणे अनुवासोचेव कारणनिमित्तं परिकम्मण परिहरणे उवही अतिरित्तगपमाणो (१९१९) गच्छो सबालवुड्डो गिलाणसेहादिएहिं आतिण्णो एसो व महाणोतूतस्स तु दुलमं तिगविसुद्ध (१९२०) कालो विसमो दुमिक्खमादि दोसा सपक्खओ उ इमे पासत्यादी बहवे ओमाणतो तओहोति (१९२१) अहव असंविग्गावीजह महुराकोट्टलगा केई __मायाए उग्गमती सड्ढाअविकोवि नवि जाणे (१९२२) एएहिं कारणेहि अलभंते आइतिगभंगगहणंतु ___ आदितिगमुग्गमादी भंतो तू भंसणा होति। (११२३) कारणतो तिविहंपी माणं तु अतिक्कमेझ उ कदादि किं पुण तिविहंमाणं भन्नति इणमो निसामेह (११२४) हयति पमाणपमाणं खेत्तपमाणंच कालमाणेच एतं तियिह पमाणं अतिक्कमो तेसिमो होति (१६२५) अतिरेगपमाणेणं तिण्ह परे य के गंपि नाम गिपहेला खेत्तओ अतिक्कमो तू परतोवि दुगाउयामागे (१९२६) कालपमाणातिक्कमे कुझा पाउरणगं अकालेऽवि वसती कालातीतं असिवादणुवासणं एवं (१५२७) परिकम्मणमविहीए बलियऽइदुब्बलम्मि कुनाहि दुल्लमलंभे सीतेण अहिओउत्रियं पंतो (१९२८) अतिरित्तपमामंवा धारिआइ कारणेहिं एएहिं सो सव्यो पकप्पोतूनिक्कारणओ विकप्पो उ (११२९) संकप्पो उइदाणि सोय पसत्यो य अप्पसत्योय एतेसि दोण्हंपी परूवणा होतिमा कमसो . ॥१६२१॥ ॥१६२२॥ ॥१६२३॥ ||१६२४॥ ॥१६२५॥ ||१६२६॥ ॥१६२७॥ ||१६२८॥ १६२९॥ . For Private And Personal Use Only

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