Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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पंचकप्पो - (१५५९)
॥१५५९॥
॥१५६०॥
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॥१५६२॥
॥१५
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||१५६४||*
11१५६५॥
||१५६६॥
॥१५६७॥
(१५५९) अक्कमिऊणंधेतुं दासाणि करेउ अहव लोभेउं
वस्थासणमादीहि तु तत्यपमादो नकायचो (१५६०) गच्छस्स रक्खणहा चारित्तहित अवस्सकायचं
इहरा तू मझाता गच्छस्स उ फेडिया होइ (१५६१) आणाऐं जिणिंदाणं अनुकंपाए य चरणजुताण
परगच्छे य सगच्छे सघपयत्तेण कायव्वं (१५५२) अणवत्थवारणहा उच्छृदिलुतओ कुसीलेऽयि
लिंगं अनुम्भयंते जीवडित्तऽबुद्धधम्मोय (१५५३) अनुसट्टीधम्मकहापत्रविओजइन मुंचती पावो
ताहे अतिसत्तीए इमाईकुत्रा उ करणाणि (१५६४) अंतद्धाणी ओसोवणी य पासायकंप वेयालं
अभिओग यंभ संकम आवेसण वेयणकरीय (१५६५) अंतद्धाणं काउंहरेति ओसोयणं च काऊणं
धेयालमुट्ठवेउं भेसेति तगंअमुचंतं (१५६६) अभिओग वसीकरणं विज्जा संकापणं च अन्नत्य
घंभस्स कंपणं वा आवेसेउं व भेसेति (१५६७) साहम्पियवच्छालं कुणमाणेणं तु एव कत होइ
अन्ने य गणा उ इमेहति ते मे निसामेह (१५६८) मिच्छत्ता संपत्ता संपत्तं सम्मद्दिवी चरित्तओलंमं
चरितद्वितै थिरतंमलणा य पभावणा तित्ये (१५६९) तम्हा साहुनिमित्तं सव्वपयत्तेण एव कायव्यं
अहुणा चेतिनिमित्तंज कायव्वंतगंवोच्छं (७५७०) चोदेइ चेझ्याणं खेतहिरण्णे धगामगावादी
लगंतस्स व जइणो तिकरणसोही कहनु भये (१५७१) मत्रइ एत्य विमासा जोएपाईसय विमग्गेजा
तस्स न होती सोही अह कोइहरेज एयाई (१५७२) तत्थ करेंत उवेहंजासा मणिया उ तिगरणविसोही
सायन होइ अभत्तीय तस्स तम्हा निवारेजा (१५७३) सम्बत्यामेण तहिं संघेणं होइ लग्गियव्यंतु
सचरितऽचरित्ताणतुसव्वेसिं एय कअंतु (७५७४) तत्व पुण कयादि निवोअन्नत्य हविक्ष तत्य उवयंतो
_ लिंगत्येहि समयं का मज्जाता भवेतहियं (१५७५) पत्ते पाणे सयणासणेय सेनोवहीऍ समाए
वायणपडिच्छणासुय सुहसीले अतसंहारो (१५७६) जहियं तु सावयादी कोइ करेाहि संघमत्तं तु
तहियंतुन गेण्हेशानय वस उद्दिसेनासु
॥१५॥८॥
॥१५६९॥
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॥१५७२॥
॥१५७३॥
||१५७४॥
॥१५७५॥
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