Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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गाड़ा- १४३४
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(१४३४) एतेहिं न पडिवजे अनुसट्टी दारिधं परिसमत्तं का पुण सामायारी जिणयप्ये होतिमा सा तु ( १४३५) खेत्ते काल चरिते तित्ये परियाग आगमे वेदे कप्पे लिंगे लेस्सा गणणा झाणे यऽभिग्गाहे (१४३१) पव्वावण मुंडावण मणसाऽऽवण्णेऽवि से अनुग्धाता कारण निप्पडिकम्मे भत्तं पंधो य ततियाए (१४३७) एसो जिनकप्पो खलु समासतो वण्णितो सनविभवेणं एत्तो उ धेरकप्पं समासओ मे निसामेहिं (१४३८) तिविहम्मि संजमम्मि उ बोद्धव्यो होति थेरकप्पो तु सामइयछेदपरिहारिए य तिविहम्मि एयम्मि (१४३९) ठिप अट्ठिए व कप्पे सामाइयसंजमो मुणेयव्वी छेदपरिहारिया पुण नियमाओ होति ठितकप्पे (१४४०) एतेसु थेरकप्पो जह जिनकप्पीण अग्गहो दोसु गहणं चऽभिग्गहाणं पंचहिं दोहिं च न तह इहं (१४४१) बाले वुड्ढे सेहे अगीतत्ये नाणदंसणप्पेही
दुब्बल संघयणम्मिय गच्छं पूड़ नेसणा भणिता (१४४२) जहसंभवं तु सेसा खेत्तादि विभासियव्व दारा उ उवरिंतु मासको वित्यरतो विभासते तेसिं (१४४३) इति एस थेरकप्पो एत्तो वोच्छामि लिंगकप्पं तु तहिय तु लिंगकप्पी इणमो जिणकप्पे भवती तु (१४४४) रूढनहकक्खणयणो मुंडो दुविहोवही जहण्णो सिं एसो तु लिंगकप्पो निव्वाघातेण नायव्यो (१४४५) रयहरणं मुहपोती संखेवेण तु दुविह उवही उ वाघातो विकितलिंगे अरिस पमेहे उ कडिपट्टो (१४४५) दुविहा अतिसेसाविय तेसि इमे वण्णिता समासेणं बाहिर मंतरगा तेसि विसेसं पवक्खामि (१४४७) वाहिरगो सरीरस्सा अतिसेसो तेसिमो उ बोद्धव्वो अच्छिद्दपाणिपातो वइरोसभसंघयणधारी (१४४८) अब्यंतरमतिसेसो इमो उ तेसिं समासतो भणिओ उयहीविव अक्खोभो सूरो इव तेयसा जुत्तो (१४४९) अव्वावण्णसरीरो बइगंधो न भवते सरीरस्स
खतमवि न कुच्छ तेसिं परिकम्पं नयि य कुव्वंति (१४५०) पाणिपडिग्गहधारी एरिसया नियमसो मुणेयत्वा अतिसेसे वृच्छामि अण्णेऽवि समासतो तेसिं ( १४५१) दुविह अतिसेस तेसिं नामातिसयो तहेव सारीरो नाणातिसतो ओही अणपज्जव तदुभयं चेव
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