Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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( ११६५) सत्यवि भावेयव्यं सो झिय अत्यो तु होति सव्वासि सामुद्दसिंधवादी अह लवणसहाव सव्वेवि
(११६६) दंसणपभावगाई अरुवा नाणे अहिज्जमाणं तु अत्तट्ट परट्ठा या जहलंचं गेह पणझणी (११६७) भिक्खुत्ति जं पदम्मी भणितं जं वावि तंनिमित्तेणं गच्छंतो कि सेवे असद्दहंतो अणाराही
गुरुणा तु
(११३८) पव्वज्ज अप्पपंचम रायसुतस्स तु दाइगभएणं राजा उसमणुजाणति अंते पडिणीतो सो तेण (११६९) तत्थविथ फासुमोती सुत्तत्याइं करेंत अच्छंति तु सुतेक्क्के अमूढलक्खासु इत्यीसु (११७०) ते रजेसु ठाविय पुणरवि गच्छंति गुरुसमीवं तु आलोइय निस्सला कयपच्छिताण तो तेर्सि (११७१) संकप्पियाणि पुव्विं आयरियादी पदाणि पच्छागताण ताण य तद्दिवसं चैव दिन्नाई ( ११७२) परियायम्मि निरुद्धे जं दिष्ण तगं तु जो न सद्दहति सुहसमुदितस्स जं वा कीरति तू रायपुत्तस्स (११०३) तत्यवि भावेजेवं पत्तिकडाई तु तेहिं पैराणं रायसुतदिक्खितेण य उष्मावण पवयणे होति ( ११७४) असहुस्स जं च कीरति अझसमुद्दस्स चैव गुरुणो तु एवं असद्दते विराहणा दंसणे होति
(११७५) तत्यवि मावेयव्यं जेणायत्तं कुलं तु तं रक्खे अत्रस्सदि कायव्यं गिलाणणस्सेस उयदेसो (११७६) इति एस समासेणं दंसणकप्पो तु आहितो एवं एतो तु नाणकप्पं वोच्छामि अहाणुपुवीए (११७७) सुत्तुद्देसे वायण पडिच्छ पुच्छ परियट्ट अनुपेहा आयरियउवज्झाया अह होति तु सुत्तकष्पविही ( ११७८ ) आयारमादि कातुं सुयं तु जा होति दिडिवादो तु अंगगपवि कालियमुक् कालियं चैव
(११७९) तं पुण सव्वंपि भवे संवादसमुट्ठियं व निजूढं पत्तेयबुद्धमासित अहद समत्तीय होजाहि (११८०) ससमयवादं संवादमाह जह केसिगोयमिजाती पत्रवणादसकालियजीवाभिगमादि निजूढं
(११८१) पत्तेयबुद्धभासियइसिय भासियमादिगं मुणेयव्यं केवलनाणसमत्तीय भासिता धोद्दस उ पुव्वा (११८२) एवं सुतं तु जंजत्य सिक्खितं जेण जह तु जोगेणं तं तह चिय दायव्वं एसो खलु अजझयणकप्पो
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पंचको (११५५)
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