Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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||११४७||
||११४८॥
॥११४९||*
।।११५०॥
॥११५१॥
॥११५२॥
॥११५३॥
।।११५४॥
गाहा-110 (११४७) एसो अमायकप्पो अहवा नाणादिओ पुणो तिथिहो
दसण पटममण्णति नाणचरित्ता तदायत्ता (११४८) तो देसणस्स चेव तुजेहिं पदेहिं तुहोति उयघातो
ताइंइमाइंयोच्छ निक्खमणादीणि तु कमेण (११४९} निक्खमण गपणमुंजण सदियवयणेय एक्कवायणिए
दसणनाणाभिगमे रायकुमारे गणहरे य (21५०) निक्खमणे बिंतऽहं अंधो वहाएतुणाततो भगवं
एरिसएविन दिक्खे निक्खते जेण साहूणं (११५१) पूजासक्काररुयी तेम पयत्तति कीस यावि जाणतो
तारिसए निखंते जेणुदितो होति सकारो (१९५२) न हुएवं वत्तव्वं सो चिय भगवन्नुजाणए एवं
नहुभानुपमा तीरइ खजोयपमाहिं अतिसतितुं (११५५) गमणे तुरितं साहू गच्छंति अहो सुदिट्ठ मिळूणं
सणियं वयंति नेवं वत्तव्वेवं तु भाविना (११५४) ते लोगरंजणवा सणियं गच्छे न धम्मसद्धाए
नय जुगपेहाए खलु विवरीयं साहुणो भावे (११५५) जंपि कहिंचि सतुरितं तंपिय गेलण्णमादिकजेसु
गच्छंती तु सुविहिता बहुतरसायं मुणेऊणं (११५) मुंजेति चित्तकम्मद्विता व सक्कादिबोडियादीय
न तहा साहू एवं भासते दंसणविरोही (११५७) कुक्कुडताए मोणं करंतिजणरंजणठ्ठताए उ
भावेयव्यं एवं साधू पुणनिज्जरकट्ठाए (११५८) जंपिय मासंति जती तंपिय कशम्मि योवजयणाए
इम मुंच चिऊ या गुरुमादीणं च पाउग्गं (११५१) सक्कयपाढो गुरुगो दियाण एसा तुदेविका मासा
समणाण पागयं तू धीमासाए उवणिबद्धं (११५०) तत्थवि सदियघयणंसदिया चेव नवरिजाणंति
सव्वेसुऽणुग्गहट्ठा इतां धीबालवुड्वादी (१७) दिईतो सिणपल्लीणिवाणकरणेण होति कायब्वो
एक्केण कतो अगडो वावि ससोवाण बितिएण (११६२) ततिएण तलागंतूतत्यऽगडे केयघडियमादीहिं
___ तीरति उवभोत्तुंजे बितियं दुपदाण अभिगम्म (१५६३) दुपदचउप्पदमादीसव्वेसि तलाग होति अभिगम्म
इय सव्यऽणुग्गहत्यं सुतं गहितं गणहरेहिं (१११) सव्यत्य वेदसत्यं चरणे करणे य पढप वादणियं
विवरीयं समणाणं मावितो दंसणविराही
||११५५॥D
||११५६॥
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119१५८॥
११५९HD
1११६०॥
||११६१॥
॥११६२॥
119१६३॥
1११६४॥
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