Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
View full book text
________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
ग144
॥११८३
११८४||
॥११८५||
1११८६॥
11११८७॥
११८८
॥११८९॥
॥११९०॥
॥११९१॥
(1941) एयं पुण सुतनाणं यायणजोगंतु जारिस होति
तंवोच्छामी अहुणा सुत्तस्स य लक्खणंजंतु (1167) जित परिजितं अमिलितं अविधामेलियं अवाविद्धं
घोस निकाइय ईहिय सुविमग्गिय हेतुसव्यावं (११८५) फुडयिसदसुद्धवंजणपदमक्खरसंधिकारणमणूणं
पादप्पयाणुलोमं निउत्तमुत्तेत्ति सुयकप्पो (११८५) निपुणं विपुलं सुद्धं निकाइयं अस्थतो सुपरिसुद्धं
हितनिस्सेसकरं बुद्धिवड्ढणंफलमुदारजुतं (११८७) सगणामं व जितं खलु परिजिय हेदुवरि उवरितो हेट्ठा
मिलिते उधण्णनातं विचामेलोउ अण्णोण्णं (11८८) अज्झयणुदेसाणं सुत्ते मीसेति कोलिपयसंवा
तं वय हेट्टयरिं वाविद्धे आवलीणातं (११८९) घोस उदत्तादीया निकाइयऽक्खेवसिद्धि परिसुद्धं
ईहित सयंमतीए विचारितं एव नेवत्ती (१९९०) साहम्मियवेहम्मियहेऊहिं मग्गिओउ समायो
जस्स तु सुत्तस्स भवे तं होति सुदिवसम्मावं (१७९१) निस्संदिद्ध फुडंसंजुत्तं वाविपुवमवरेणं
विसदं अणिगूढत्यं वंजणसुद्धं सउवयारं (१११२) अत्युवलद्धी जत्यतुतं होति पदंतु अक्खरा वना
संधी संबंधो खलु सुत्ता सुत्तस्स जोकोति (११९३) एतेहिं नूणमहितं पादा तु सिलोगमादिणं होति
गजम्मिय पदसंखा अनुलोमंजण्ण पडिलोमं (११९४) पुचिल्ल परिल्लेणं जन विरुज्झति तु तंतहा तहियं
अत्येण जोइयं तू निउत्तमेतारिस होति (१९९५) नयहेतुवादभंगियगणितादी अत्यमओय निउणं तु
विस्थिन्नत्यं विउलं मूगादीवायणाहिं च (१.९५) सुद्धं तु सुग्गिहीतं अलियादीदोसवञ्जियंदावि
__अत्ये निकाइयं खलु निकाइपं अहव बंधण (१९९७) अविरुद्धो अक्खरेहिं जस्सऽत्यो तह य समयमविरुद्धे
तंअत्यतो विसुद्धं हितं तु इहलोयपरलोए (११९८) अहियं सेपकरं तु निस्सेसका तयं मुणेयर्व
उप्पत्तीमादीण य बुद्धीण विवद्धणंजंतु (११९९) तस्स फलं तु उदारं अव्वाबाई अणोवमं सोक्वं
एसो तु सुत्तकयो एत्तो घोच्छामि उद्देसं (१२००) उद्दिसियव्व उवट्टिएँ अनुवद्वित्तै उदिसते चतुलहुगा
अणलोहएऽवि लहुगातहा आलोइउदिसणा
॥११९२॥
||११९३॥
११९४॥
19१९५॥
11११९६॥
॥११९७॥
॥११९८॥
||११९९॥
||१२००।
For Private And Personal Use Only

Page Navigation
1 ... 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 148 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159 160 161 162 163 164