Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 47
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पंकप्पो - (३२७) ॥२७॥ ॥२८॥ ॥२९॥ (६३०) ॥३०॥ ॥१३॥ ६३२॥ ३३|| IE३५॥ (६२७) अम्मापितरो पुच्छितुपयझं अभुमो सेसंतु जह उसुगारज्झयणे वक्खातं सुत्तआलावे (६२८) एसा पडिस्सुता खलु पव्यञ्जा सारणी तु नातेसु चौद्दसमे अज्झयणे जह तेतलि पोट्टिला बोहे (१२५) पतिठाणे जुबराया राहायरियाण पासि निक्कतो तगराऍ तस्स भगिणी दिण्णा जितसत्तुरायस्स तगरगताण कदायी उज्जेणीओ य आगतो साहू राहगुरुपुछऽणाबाह बेति बाहेति रायसुतो (६३१) पुत्तो पुरोहियस्सय दोऽवेते निवधरम्मि बाहंति तं सोतुंजुवणिवमुणी बेती मम नत्तुओ सोतु (९३२) सासेमि तं दुरपंआपुच्छिय गुरुगतोउ उज्जेणि निरुवसग्गं तु पुट्ठातंचेव कर्हिति से जतिणो (१२५) भिक्खटु निग्गयम्मिय पणितो अच्छाहि आणइस्सामो मतह अत्तलामीति बेति दसेइ निवओकं (१५) दंसेतूण नियत्तोखुहोइयरोव गंतु निवओकं सद्देण महंतेणं अह कुणतीधम्मलामंतु (१३५) तो तेहिं सो तु दिवो परितुडेहिं चनेहिं सो गहिओ भणितीत नचसुत्ती इय होतू तेण ते मणिता (१३६) गायह तुब्मे हि ततो ते तुपगीता पणधिओसाहू ताते उवहवित्ता साधुणा खित्तिया दोवि (१३७) पुनरविवेति गायसु तुमंतुअम्हें उनधिमो इण्डिं इय होत्तुत्तिय मणिते पणचिता ताहे ते दोवि (६३८) पुणरविय विद्दवेत्ता गोवालगविद्दवेह किं एवं मणिता ते साधणं बितिय किं सवसि तं अपहे (६३९) देहित जखं अम्हलविता सारण दोष्णिवीसमगं आगच्छति सिघं तोते आघाविता तुरितं आधावेंतायत्ततोधेतु वाहासु दोवि साहूर्ण तह विहुताऽणेण दुतंजह संधि विसंधिता सव्वे (१४१) उत्ताणए महीए पाडेतुं निग्गतो तु सो तत्तो उजाणं गंतणं झायति झाणं गणसमग्गो (१४२) अहते दटुंनिहते संभंतो परिजणो कहे स्त्रो रायाविय संभंतो आगंतु नियच्छती तेतु (६४३) पुच्छे तेऽवीय जती बिति य नेत्य ऽह पविसते कोई नयरिक्को पाहुणओआगतो न यतंतु जाणामो (६४) ताहे उमाणादिसु रण्णा गविसायिओ यदिहोय गंतूण सयं राया चलणेसु निवडिओजतिणो ॥६३६॥ ॥३७॥ ॥६३८॥ ।।६३९॥ (६४०) ||६४० IM६४१॥ ॥६४२॥ ॥६४३॥ For Private And Personal Use Only

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