Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 65
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पंचकपो - (६५०) ॥९५०॥ ॥९५१॥ ||९५२॥ ९५३|| ॥९५४॥ ॥९५५॥ ॥९५६॥ ॥९५७॥ ॥९५८॥ (९५०) अचित्तवियकप्पे संजोगासव्यर्पिडिता कातुं जितकपेक्कादीहिं गुणिते फलरासिणो मुणसु (९५१) तिण्णेवसतसहस्सा ठाणसहस्सा हयंति तेणउती दोय सया य दसहिता एक्कगसंजोगसंगुणिता (९५२) नव चैवसयसहस्सा तेसीति सहस्स तह य पणुवीसा बीयसंजोगचउक्केऽवि एत्तिया चैव नायव्या (९५३) सत्त सय दससहस्सा तेरस लक्खा यतियगसंजोगे पंच यपढमसरिच्छा अचित्तपिंडोउ अंतिमए (९५४) जियपिंडेणं पिंडो अजीवकप्पस्स संगुणा नियमा सोहोति व्यर्पिडो तस्स उ संखाइमा होति (९५५) ईयाल सतसहस्सा अट्ठावीसं मवेसहस्साई सत्त सता पंचहिया ठाणाणं मीसकप्पम्मि (९५६) जियअजियमीसगाणं कप्पाणऽण्णेऽविभंगसंजोगा पत्तेय मीसगाविय नेयव्वा आनुपुब्बीए (९५७) पद्यावेक्को एक्कं एक्को अणेगा अणेग एक्कंच नेगाणेगेयतहा चउभंगो एव एक्केक्के (९५८) एवं एक्कंएक्कसि एक्कमणेगेविएत्थऽदितहेव चउभंगो नेयव्यो एक्केके छह तु पदाणं (९५१) एक्केकसि पव्दावे मुंडावेक्कं तु एक्कसिं चेव एत्य तु दुगसंजोगो चउभंगो होति नायव्यो (९६०) एवं दुततियचतुपंचछक्कजोएहिं अत्तियाजे तु संजोगा भगायतु ते सव्वे होति नायव्या (९६१) पव्वावे मुंडेगंपब्बावेगं च मुंड नेगेय नेगो एक्कं च तहानेगाऽणेगेयएमेय (९६२) एमेव सेसगावी दुगतिगचउपंचछक्कसंजोगा बुद्धीयऽणुगंतव्वा सब्वेविजहक्कमेणं तु (९५३) अचित्तेऽविय एवं एक्को एक्कस्स देति आहारं एवं उवहीमादीसुसब्बेसुवि होति चउभंगा (९६४) दुगमादी संजोगा एत्थंपितहेव हुंति विण्णेया एमेवेकको एकसिं आहारादीणि देजाहिं (९६५) एवंदुगमादीया नेया एत्यंपि सव्वसंजोगा एवंता अचित्ते पीसेऽविय बुद्धिए जोए (९६६) एक्को पव्दावेक्कं आहारादी य देति एत्यऽवि तहेव संजोगा नेयव्याजावतिया संभवे तत्य (९६७) एसो तु दवियकपो तिदिहोऽविसमासतो समक्खातो एतो समासतोऽहं वोच्छामि उखेत्तकप्पंतु ॥२५९॥ ॥९६०॥ ॥९६१॥ ॥९६२॥ ॥२६॥ ॥९६४|| ||९६५॥ ॥९ ॥ ९७॥ For Private And Personal Use Only

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