Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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गाडा-044
१७८८॥
७८९॥
॥७९०॥
१७९१॥
॥७९२॥
॥७९३॥
॥७९४॥
||७९५॥
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(vii) दुयिहो य होति उवही पत्ते वत्धे व ओहुवग्गहिए
जिणथेरऽजाण तहा वोच्छामि अहाणपुव्यीए (७८९) पाए उग्गमउप्पायणेसणा जोयणापमाणे य
इंगाल धूम कारण अट्ठविहा पातनिज्जती (७९०) जहसंभव नेयव्वा पिंडगमेणंतु पातनिञ्जत्ती
सव्वं तु उग्गमादी जहा जहाजे तुजुर्जति (७९१) पातपमाणे तुइमंपमाणदारम्मि होति वत्तव्यं
मझजहण्णुक्कोसं वोच्छामि अहाणुपुवीए (७९२) तिणि विहत्यी चउरंगुलं च माणस मन्झिम पमाणं
एत्तो हीण जहन्नं अतिरेगतरंतु उक्कोसं (७९३) उक्कोसतिसामासे दुगाउअद्धाणमागतो साहू
भुंजति एगट्ठाणे एवं किर मत्तगपभाणं (७९४) एवं चेव पमाणं अतिरेगतरं अनुगह पवत्तं
कंतारे दुब्भिक्खे रोहगमादीसु पइयव्यं (७९५) वट्टसमचउरंसं होति विरंथावरंच वण्णं च
हुंडं वाताइदं भिणं च अधारणिजाई (७९६) संठियप्मि भवे लाभो पतिद्वा सुपतिट्ठिए
निव्वणे कित्तिमारोग्गं सव्वणे वणमादिसे (७९७) यत् उग्गमउप्पायणेसणा जोयणा पमाणे य
इंगाल धूम कारण अट्ठविहा वत्यनिजुत्ती (७९८) एस्थविय जहासंभवघोसेयब्वाइंसव्वदाराई
पडलादिपमाणामी पमाणदारे समोतारो (७९९) गिम्हसिसिरवासासुंपडला उक्कोसमझिमजहन्ना
वणेऊणं कमसो पच्छादा पुरिसे वोच्छामि (८००) एमेव य पच्छादा पुरिसं खेतं व कालमासन
तिण्णादीजासत्ततुपरिजुण्णा पाउणेगाहिं (८०१) पुरिसा असहू कालो सिसिरो खेतंच उत्तरपहादी
गिम्हेऽविपाउणेशा तारिसयं देसपासज्ज (८०२) एवंतु उग्गमादिसु सुद्धो सव्वोवि एस उवही उ
धारेयव्वो नियतं अहाकडो चेवजहविहिणा। (८०३) असतीते पुण जुत्तो जोगो ओहोवही उबग्गहितो
छेदणभेदणकरणे जा जहिं आरोवणा मणिता (८०४) तिविह असतित्तिजा सा दव्वे काले य होति पुरिसेय
दव्यम्मि नत्यि पातं ओमोदरियाय कालम्पि (८०५) पुरोस य उपगमंतो न विनती एस पुरिसअसतीतु
अहवा अणलं अथिरं अधुवं संतासती तिविहा
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॥८०३॥
1८०४॥
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