Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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(४८४) लोगो य तुमं मणिहिति हरियाई मोरगाई बोद्द तुझं तं मा हु पत्तियाही एवं च मणिजसी लोगं (४८५) जो एत्वं भूतत्यो तमहं जाणे कला य मासो य सोऽविय एवं भणती युग्गाहिय अहव अंधलगा (४८५) अंधलगव्यत्तणिवे सयणासणभत्तवसहिमादीहिं सुपरिग्गहितंधलगा तेवि य धुत्तेण भणिता य (४८७) अहयम्मि अंधदासो अहं राया य अंघलगभत्तो इह दुक्खिय तर्हि वचह जह कयपुण्णोव्व दिपलोयं (४८८) इय होतुत्ति य नेहिं नेतुं रत्तिं तु डोंगरंतेणं वेढेऊण पुरिल्लो लाचिउ मग्गिलपट्टीए (४८९) आगह भेजं अत्थि एत्य चोराण पतिभयं ठाणे ह य पत्थर माय हु कासति देहित्य अल्लियितुं (४९०) भणिहिंति चोर तुम्बे केणेत अंधला वरागा तु गिरिडोंगरा चढाविय पहणह ते पत्थरेहिं तु (४९१) इय दोत्तूण पलाओ धित्तूर्णं अत्यजातयं तेसि ते य पभाते दिट्ठा गोवादीएहिं भणिता य
(४९२) केणेते एव कता इय वुत्ते पत्थरेहिं ते पहया नवि दिंति अल्लियावं दुग्गाहियं एवमादीया (४९३) वणि महिल मूढु दव्वे वेयम्पि य मूदु होति राया ऊ वुग्गाहणमूढा पुणदीवादी सेस दव्देवि (४९४) अण्णाणमूढ इणमो दाइजंतं पि कारणसतेहिं जो सम्पहं न याति जच्यंधी चैव जह चंदं (४९५) कोहादिकसाओदयमूढो नवि जाणती माणूसो तु इह य परम्मिय लोए हिताहितं कज्जऽकजं वा (४९६) दव्वेण य भावेण य दुविहो मत्तो तु होति नायव्यो मजमदादी दव्वे माणडुविहेण भावम्मि
(४९७) भोत्तूण वेदमूढं आदिल्लाणं तु नत्थि पडिसेहो दुग्गाहण अण्णाणे कसायमूढो पचि कुट्ठो
(४९८) सचितं च अचित्तं पीसगं जो अणं तु घारेति समणाण व समणीण व न कप्पते तारिसे दिक्खा (४९९) जयसो य अकिती या तंमूलागं तहिं पवयणस्स अणचोप्पडझंझडिया सव्वे एतारिसा मण्णे (५००) बितियपद दानतोसिय अहवा वीसज्जितो पभूणं तु अद्धाण परविदेसे दिक्खा से उत्तिमठ्ठे वा (५०१) चउरो य जुंगिया खलु जाती कम्मे य सिप्प सारीरे जातीय पाणवरुडाडोंबाणिकूकारमादीया
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पंचकप (४८४)
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४८७il
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