Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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(५५३) पव्वायण मुंडायण सिक्खावणुवट्ठ भुंज संवसणा पढमपदहीण सेसा पंच पदा तेहि षचंति
(५५७) पव्वा तु अभिश्यिा सा पुण होता कहं तु पव्वञ्जा तं वत्तुमणाऽऽयरिओ गाहासुतं इमं आह
(५५८) छंदा ऐसा परिजुष्णा सुविणणाणा पडिस्सुता सारणिया रोगिणिया अणाढिया देवसण्णती (५५९) ऋाणुसंधिया अजणियकण्णिया बहुजणस्स सम्मुदिया अक्खाता संगारा वेपाकरणे सयंबुद्ध
(५१०) पल्लि सुराऽभय देवी वड तेतलि मूग वासुदेवे य उद्दायण मण केसी जंबुपभव मल्लि सोम जिणा (५६१) गामेगो चोर पडिया वत्यहिरण्यादि गेण्डितुं ते य संपतिय पल्लि रूवती महिलिया भप्मति (५६२) किं न हरह महिलाओ चोरा चिंतति इच्छिया महिला नेतुं पल्लीवतिणो उवणीया तेण पडिवण्णा (५६२) तीय धवो सयणेणं मणितो किं बंदिगं न मोएसि गंतूण चोरपल्लिं येरी ओलग्गए पयओ (५६४ ) किं ओलग्गसि पुत्ता चोरेहिं भारिया इहाणीया विरहे तीऍ कहती इहागतो तुज्झ भत्तत्ति (५६५) कहिए तु चोर अहिवम्मि पउत्ये भणति अझ रत्तीए पविसतु चोरहिवोकं पविट्टे सेनावती आओ (५६६ ) हेडा आसदि पवेस चोरहिवं भणति धुत्ति इणमो तु जदि एज मज्झ भत्ता तस्स तुमं किं करिजासि (५६७) चोराशिवाह सक्कारइत तुम देख तो करे भिउडिं आह ततो चोरहियो दारे थंभम्मि उल्लंबे
(५१८) वद्धेहिं वेढेजा तुझ सण्णेति हेट्ठ संदीए नीतुं चोरहियो खंभे वद्धेहिं वेटेड
(५१९) सुणएण खइय वद्धे पासुत्ताणं च चोरअहिवस्स सगअसिणा छेत्तूनं सीसं गहिंइत्विओ भणति (५००) नीणीअंती सीसं चोरहिवस्सा तु सा गळणं मालती ऊ रुहिरं अह गच्छति मग्गतो तस्स (५७१) जाहे जातव्यासं ताहे सीसं तयं पमोत्तूनं दसियाचीराईणि य साडिंति य जाति चिंधड्डा (५७२ ) जाहे य निट्ठिताई ताहे चतणपूलियाओ बंघंती वचति अवयक्ती पुणो पुणो मग्गतो सातु
(५०३) गोसे य पभायम्मी सेणहिदं धाइयं ततो द लग्गा कुद्रेण चोरा पासंति य ताणि चिंद्याणि
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पंचकम्पो (५५६)
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