Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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: माह--५३८
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( ५३८ ) तम्हा तु न हायव्यो बितियपदेणं हरेज व कयादि होही जुगप्पहाणी न य दोसा तत्य केति भवे (५३९) तो अतिसेसी दिक्खे ओहीमादी अमूढहत्यो वा थिरहत्या व अमूढो विक्खेजा सो तहिं चेव (५४०) केति पुण मंदधम्मा बितियपदणिसेवियं वयदिसंति वडपादयोविव जहा मूलविणट्ठा नहविलग्गा (५४१) निष्फेडियमिच्छंता रक्खियमालंबणं वर्षादिसंति मूलविणडो व घडो जह चिट्ठेति लग्गपादेसु (५४२) एवं तु मूलसुतं तु सेतु लग्ग साहासु
साकारण निप्फेडी निक्कारणओ य पडिकुड्डो (५४३) जे केइ सेहदोसा बालादीता मए समक्खाता
ते चेव प सविसेसा गुव्विणि तह बालवच्छासु (५४४) कह ते तु संभवंती गमम्मी तम्मि चेव बाले य दिष्ट्ठा तु बालदोसा होज कदादी नपुंसो या (५४५) एवं अवसेसादी नवरं मोत्तूणिमे तर्हि अणले बुड्ढं जड्डसरीरं तेणं रायावकारिंच (५४६) दासमणतं च तहा ओबद्धं मतग सेहनिप्फेडिं अवसेस अणलदोसा भइयन्दा गुब्विणीए उ (५४७) अहवावि गुब्विणीए अन्ने दोसा इमे भवंती हु
कायभवत्थो बिंबं चतिकिति चयणम्मि व मरेजा (५४८ ) कीवे तेण रायावकारि दुट्टे य सेहनिष्केडे
गुब्विणीए य जहक्कम वोच्छं आरोवणं इणमो (५४९) मूलं चतुगुरु पारंचिया दुवे चउगुरुं तओ मूलं अहवाऽवकारि मोतुं सेहं वा लेस मूलं तु (५५०) पारंची मूलं या अवकारिऍ सेहे होति चउगुरुगा सेसेस ठाणएसुं चउगुरुगा हू मुणेयव्वा (५५१) वाले बुड्ढे कीये जड्ढे मत्ते अदंसणे चैव करमादिजुंगिए वा जदि पच्छा हो निक्खतो (५५२) गच्छे संगहियाणं संवासो तेसि होति निद्दिष्ट्टो न विड उ त्ताणं नियमा एगट्ठाणेय पाएम (५५३) होजाहि गुव्विणीयवि जह पउमचतिव्द खुकुमाया वा तं तू उवस्सयम्मी भावियसड्ढेसु वा गीवे (५५४) जिनपवयणपडिकुट्टो जो पव्वायेति लोभदो सेणं चरितद्वितो तवस्ती लोवेइ तमेव तु चरितं (५५५ ) पव्वाविओ सियत्ती सेसं पणगं अणायरणजोग्गं अदुवा समायरंते पुरिमपदऽणिवारिया दोसा
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