Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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गाड़ा-२१४
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(२१४) अण्णे अउणत्तीसं गुरुओ सिक्ने असिक्खि चउलहुया पुनरवि अउष्णत्तीसं लहुगा सिक्खेतरे गुरुगा (२१५) अण्णे अउणत्तीसं गुरुगा सिक्खे असिक्खि छखहुगा छल्लहुगा सिक्खम्मिय असिक्खि गुरुगा अउगतीसं (२१६) अण्णे सिक्खासिक्खे छग्गुरु तबो छेद छग्गुरू चेव मूलऽणवट्टं पारंचिगं च एक्केक्कगं तत्तो (२१७) अहवा सो चैव तवो छेदादी मासमादिया होति सिक्खाविंतमसिक्खे मूलेक्कदुगं तहेक्क्कं (२१८) अहवा सो चेव तबो छेद पणगादि जाव छम्मासा सिक्खावितमसिक्खे लहु गुरु एक्केक्क उगुतीसा (२१९) मूलऽणवङ्कं च तओ पारंचियमेव होति एक्केकंक सिक्खासिक्खपगारा उक्कोसे होति बालेते ( २२० ) अहवा सो चेव गमो दिणेहिं सिक्खतरवज्जिए होति मासादितवच्छेदा मूलाईया दिणेक्केकूकं
( २२१ ) एमेव मज्झिमेऽवी नवरं दिवसा तु वीस वीसं तु एमेव जहणेऽवी उगुवीसुगुवीस दिवसा तु
( २२२ ) अहवा मज्झे मीसा जहण्णछेदादि अत्रपरिवाडी तवछेदेगंतरिया मज्झि जहणणे तु भयणाए (२२३) मज्झिमि वीसं लहुओ सिक्खमसिक्खस्स मासिओ छेदो वीण छेद लहुओ सिक्खमसिक्ने गुरुग तो अड्ढोक्कंती एवं तवछेदेगंतरा तु नेयच्वा
(२२४)
छम्मासा ताव तु परओ मूलादि एक्केकूकं ( २२५) अउणावीस जहण्णे सिखाविंतस्स मासिओ छेदो सोच्चिय असिक्खि गुरुओ जा छग्गुरु तिष्णि परओ तु ( २२६ ) अहवा न होइ छेदो ठाणे चिय मूल तह य अणवट्टो पारंचिए य तत्तो एवं भयणा जहण्णस्स
(२२७) अहवा पढमे छेदो तद्दिवसे चैव हवइ मूलं या एमेव होति बीए तइए पुण होति मूलं तु
( २२८ ) किं कारण सोधेसा दोसा तहियं इमे समक्खाता पव्वाविएस तेसु तु उड्डाहाई मुणेयच्वा
(२२९) बंभस्स वयस्स फलं अयगोले चेव होति छक्काया निसिभत्तमंतराए चारण अजसो य पडिबंधो
( २३०) लोगो बेती पेच्छह इणमो बंभव्वईण तु फलं तु अयगोलोविव तत्तो इहती सो जित्तिए मुक्को ( २३१) भत्त निसि मग्गमाणे दिंते तू रातिमत्तभंगो तु हवइ अदितम्मितऽतराइयं बेइ लोगो य
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