Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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१८
पंचकप्पो - (110)
॥१६॥
11१६१॥
॥१६॥
11१६३।।*
|१६||
।।१६५॥
॥१६॥
॥१६७||*
॥१६८॥
(१९०) काले उडुबद्धाणं वासावासंचबुड्ढवासंवा
दसतीजहाविहं खलु उस्सग्गववायसंजुत्तं (१९७) तवसोहिमतिक्कंतं छिंदति पणगादिएहि परियागं
कुणइय तहा पयतंजह तं दिण्णं वहइसम्म (१६२) ओवम्मे जिनकप्पोजाणणगहणे यसो हवति गीतो
अहिवासे मासादिसुऊणतिरित्ते विभासातु (१६३) सव्वेसि कप्पाणं पत्रवण परूवणाउ नवमंमि
आरान उसोयारं पुन्वगते वा इहं चावि । (१६४) एतेसिं सव्येसि छव्यिह कप्पाइयाण कपाणं
पत्रवण पावणता नवमे पुवम्मि निद्दिवा (१६५) सोतारं पुण आस होल इह कपि अहव नवमम्मि
धारणगहणसमत्ये तहितं असमत्ये इहइंतु (१९६) कप्पाणं वक्खाणं पुव्वगते वणितं समत्तंतु
इह योवगन्तिकाउंन हुबहुमानोन कायदो (१६७) दव्वे खेते काले उग्गहसंघयणधारणगुरूणं
तंपी बहु मण्णिअब्जएगपदेपदं अस्थि (१६८) दुस्समअणुमावेणं हाणी विरियस्स ओसहीणंतु
दुलमाणि यदव्याईजाईजोगाईतणुभावे (१६२) खेत्ताणि पहायंती विहारजोग्गाईतदनुमावेण
दुमिक्खपउरकालो तेणनुमावेण मणुयाणं (१७०) लद्धी उग्गहणप्पी संधयणं धारणा य परिहाति
नय सीसायरियाणं सती वतुंच सोतुंवा (१७१) नय संति बहू गुरवोजेवत्तारो यति अत्यस्स
तेविन सव्वस्स लहुं पसादसुहमा भवंती तु (१७२) इय नातुंपरिहाणीं जं एगपदेवि एगमत्यपदं
बहुमंतव्वं तंपिहु किं पुण संतेसुनेगेसु (१७३) तोन पमाएयव्वं न य भत्ती तू तहिं न कायव्वा
सुटुतरं उञ्जोगो कायव्यो तम्मि धित्तब्वे (१७) सोपुण पंचविकप्पो कप्पो इह वण्णिओ समासेणं
वित्थरतो पुवगतो तस्स इमं होति भेदातु (१०५) छब्बिह सत्तविहे य दसविह वीसतिविहे य बायाले
जस्सतु नत्थि विभागो सुव्वत्त जलंधकारो सो (१७६) विभयण विभागु भण्णति जहेरिसो छविहो य सत्तविही
नामादिविभागो वा जस्सेसो नविदित्तो होति (१७७) सुब्वत्त सुट्ट वत्तं तस्स निबुडुस्स वा जलमगाहे
होती सचक्खुयस्सविजहंधकारो मणुस्सस्स
॥१६९॥
॥१७॥
॥१७१|
॥१७२॥
॥१७३॥
||१७४॥
॥१७५||*
१७EI
||१७७॥
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