Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 14
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir माह३४ ॥३४॥ (३५) ॥३५॥ ||३|| |३७10 ॥३८110 ॥३९॥ ॥४०॥* ||४९11 ॥४२॥ (३४) समए समए नंता परिहायंते उ यण्णमादीया दव्यादीपाया अहोरत्तं तत्तियं चेव दूसपअनुभावेणं साहुजोगाउ दुलमा खेत्ता कालेविय दुब्मिक्खा अभिक्खणं होति डमराय दूसपअनुभावेण य परिहाणि होति ओसहिबलाणं तेणं मणुयाणंपितु आउगमेहादिपरिहाणी संघयणंपिय हीयइ ततो यहाणीय धितिबलस्स पवे विरियं सारीरबलं तंपिय परिहाति सत्तंच (३८) हायति य सद्धाओ गहणे परिवट्टणेय मणुयाणं उच्छाहो उजोगो अणालसतंच एगट्ठा इय नाउं परिहाणि अनुग्गहटाए एस साहूणं निजूढऽणुकंपाए दिटुंतेहं इमेहिं तु पगरणचेडऽनुकंपा ददविढेहि होयगारीणं जह ओमे बीयभत्तं रण्णा दिण्णं जणवयस्स एवं अप्पत्तन्निय पुव्वगतं केइ मा हु मरिहंति तो उद्धरिऊण ततो हेद्वा उत्तारियं तेहिं मा य हु वोच्छिनिहिति चरणाणुओगोत्ति तेण निजूढं वोच्छिण्णे बहु तम्मी चरणाभायो भवेत्राहि कह पुण तेण गहेतुं दिनाई तत्यिमो तु दिलुतो जह कोइ दुरारोहो सुसुरभिकुसुमो तुकप्पदुमो (४४) पुरिसा केइ असत्तातं आरोढूण कुसुमगहणट्ठा तेसिं अनुकंपडा कोई ससत्तोसमारुज्झे घेत्तुं कुसुमा सुहगहणहेतुगं गंथिउंदले तेसिं तह चोद्दसपुवतलं आरूढो मद्दवास्तु अनुकंपट्टा गयिउंसूयगडस्तुप्परिं ठवे धीरो तं पुण सुतोवएसेणं चैव गहितं नसेच्छाए अण्णह गहिए दोसो असाहगं होति नाणमाईणं केसवमेरीणातं यक्खातं पुव्यसामइए ___ अठवा तिगिच्छओतुऊणहियं यावि ओसहं दिशा तेहि तन कासिद्धी सिद्धी वियरीयए भवति पारिछ परिछितूपकप्पमादी दलंति जोग्गस्स परिणामादीणंतू दारुगमादीहिं नातेहिं पारिच्छ आदिसुत्ते पुव्वं मणिया तु जाउ विहिसुत्ते सेलघणादी परिसा पूरंताई य भणिहिती परिसादार भणितं कप्पद्दार कमेण हु इदाणिं किं पुण उक्कमकरणं बहुक्त्तव्यंति नाऊणं ॥४३॥ ॥४४॥ (४५) Im५॥ (r) ॥४६॥ ॥४७|| ॥४८॥ ||४|| (५०) 11५०॥ 11490 For Private And Personal Use Only

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