Book Title: Saraswati 1937 01 to 06
Author(s): Devidutta Shukla, Shreenath Sinh
Publisher: Indian Press Limited

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Page 468
________________ सरस्वती [भाग ३८ वर्ष १३५ " १४१ , ur ० UNU १ 2 al २२३ " पड़ता है कि निराशा का कोई स्थान नहीं है। १९२१ के प्रतिवर्ष नया काम बढ़ा है, उसी के साथ निरन्तर प्रतिवर्ष असहयोग-अान्दोलन के स्थगित होने के बाद जब बहुत-से प्रीमियम तथा अन्य चीज़ों में भी वृद्धि होती रही है। देशभक्त जेलों से बाहर निकले और उन्होंने अपने पुराने . नीचे के कोष्ठक से मालूम होगा कि प्रीमियम और जीवनपेशों को करना पसन्द न किया तब राष्ट्रीय नेताओं का फंड में पिछले सालों में कैसी वृद्धि होती रही है.. ध्यान इस ओर गया और यह उन्हीं के उद्योग का फल प्रीमियम से है कि १९२४ में जहाँ बीमा कम्पनियों की कुल संख्या ७५ आमदनी कुल आमदनी जीवन-फंड थी, वहाँ १९३४ में २१७ हो गई। प्रगति का इतिहास . १९१३ १०३ लाख १२७ लाख ५८३ लाख पिछले सालों में भारतीय बीमा-व्यवसाय ने कितनी १९१४ १०९ " १९१५ प्रगति की है, यह निम्न कोष्ठक से भले प्रकार ज्ञात १०७ " ६७७ " १९१६ होगा १०७ " १९१७ १११ " साल के बीच नया साल के अन्त में १९१८ ११४ काम-काज कुल काम १९१९ १२८ १६७ " ३२० लाख २२३ करें १९२० १४० १९१ " २२४ " २३ " - १९२१ १६० २१९ " ८६३ " १९१६ १७५ २२ " १९२२ १७४ " २३७ " ९३७ " १९१७ . २४ " १९२३ १८६ " २४९ " १०३० - ५ १९१८ २८७ १९२४ २०५ " २९० " १२५७ " १९२६ . २५३ १३७६ " १९२० ५१७ १९२७ २९२ ४२६ " १५७१ ॥ १९२१ ५४७ १९२८ १७१७ १९२२ १९२९ १८७३ १९२३ ५८५ १९३० ४३१ २०५३ १९२४ ६८९ १९३१ ४६८ २२४४ " १९३२ ६८६ " २५०८ १९२६ १०३५ १९३३ ५७७ " ८१६ " २८७२ " १९२७ १२७७ १९३४ ६५८ " ८३५ " ३१८७ " १९२८ १५४१ सरसरी दृष्टि से देखने पर यह प्रगति सन्तोषजनक १९२९ १७२९ मालूम होती है। नये काम, कुल चालू काम, प्रीमियम १९३० सूद की आमदनी, जीवन-बीमा का जमाफंड आदि सब ओर प्रगति ही नज़र आती है। मगर जब हम भारत की १९३२ बढ़ती हुई जन-संख्या और उसके जीवन-निर्वाह आदि २४८३ " बातों को लक्ष में रखकर विचार करते हैं तब ये प्राकडे १९३४ २८९२ " १३७ " प्रभावोत्पादक नहीं मालूम होते। योरपीय देशों और इससे स्पष्ट है कि १९२४ से इसमें झपाटे के साथ अमरीका के जीवन-बीमा की रकमों से जब हम अपनी __ उन्नति हुई है। इसमें उल्लेख योग्य बात यह है कि जहाँ तुलना करते हैं तब मालूम होता है कि इस दिशा ४५० ५६४ ४६२ " ५८७ " १९२५ ८१५ ५१८ १६५० १७७६ " " ११६ " Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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