Book Title: Prakaran Samucchay
Author(s): Ratnasinhsuri
Publisher: Rushabhdev Kesarimal Jain Shwetambar Sanstha

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Page 16
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir प्रकरण समुच्चयः । १२ ॥ * नवजोग ९ तेरस य हेऊ । एवं माणे ९.४ माया९-४ चउगे लोभे उ गुणदसगं१०-४॥ ५२ ॥ इतिकषाय द्वारं ।। मइ१सूयरवहि ३नाणेमुं बंधहेतूदय अजयाई नवगणाहि अडयाला ४८ मिच्छा५ण४ वज्जणाओ हारदुगुणा जए देसे ॥ ५३ ॥ मणनाणि पमत्ताई सत्त गुणा केवलमिली दो अंता । मइ१सुयरअन्नाणेसुं विभंगी ३ तह दो गुणाऽऽइल्ला ।। ५४ ॥ इतिज्ञानद्वारं सप्तमं ।। ७ ॥ सामाइयांम छेओवट्ठाणे चउ गुणा पमत्ताई । सहमे दोस सठागं आइमगुणचउ अविरयमि५ ॥ ५५ ।। अहक्खायवरम चउरो अोहुदओ तह पमात्ति परिहारे । थवेदृणा बारस कसाय १२ नवजोग : इगवीसा ॥५६॥ अपमत्तेऽथिय एवं (संयमद्वारं ८) चक्व१ अचक्खसु बार पढमगुणा । चक्खुमि उरलम्मिस्सं बीयं पुण कम्मणं नत्थि ।।५७।। अवहिस्स केवलस्स य नाणसमं दंसणंपि नायव्वं । [इतिदर्शनद्वारं९] गुणछक्कमाइलेसत्तिगंमि उदोऽत्थ सामन्नं ॥ ५८ ॥ तेऊए पउमाए सत्त गुणा सुक्कलेसि तेरसगं १३। [इतिलेश्याद्वारं १०] सव्वगुणा १४ भज्वाणं आइक्वगुणो अभव्वाणं | इतिभव्यद्वारं ११॥ ॥५९॥ तुरियाइ गुणचउर्फ४ खाओवसमे१ इगारस खयम्मिर अड८ उवसमसम्ममी श्राहारदुर्गन तत्थ भवे३ ॥६॥ मिच्छे४ मीसे ५ सासाणगंमि ६ निअनिअगुणमि ओहुदओ। [इतिसम्यग्द्वारं १२] सन्नीणं सव्वगुणा १४ असन्नीणं पढमदुगुणा ।। ६१ ॥ अणभोगमेगमिच्छं १ मणरहिया अविरई ११ पुमिश्स्थिविणा । तेवीसं २३ च कसाया उराल १ वेउव्व२ तम्मिस्सा ४ ॥ ६ ॥ कम्मण | मंतिमवयणं १ छज्जोगा सव्व हुँति इग चत्ता ४१ ( इतिसंशिद्वारं १३) आहारे तेर गुणा श्राइम ३ अणाहारि पंचेए ॥६३।। पढमर तिमदुगर तुरिअं१ छक्काय औरइमिच्छोगं च । सो कसाय २५ कम्मण १ जोगोतित्तीस ३३ हेउदो ॥ ६४ ॥ इतिश्राहारद्वारं ॥१४ || इय मग्गण ठाणेसुं, गुणठाणगजोअपेण हेउदओ । भाणओसपरहिअत्थं सिरिसायर सूरिसीसेणं ॥ ६५ ॥ ॥१२॥ ॥ इति बंधहेतूदयत्रिभंगी सूत्रं समाप्तम् ।। छ । For Private and Personal Use Only

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