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पूजा विधि के रहस्यों की मूल्यवत्ता - मनोविज्ञान एवं अध्यात्म... ...lxi * पुष्प पूजा संबंधी सावधानियाँ * धूप पूजा संबंधी सावधानियाँ * दीपक पूजा संबंधी सावधानियाँ * अक्षत पूजा संबंधी सावधानियाँ * नैवेद्य पूजा संबंधी सावधानियाँ * फल पूजा संबंधी सावधानियाँ * चामर पूजा संबंधी सावधानियाँ * दर्पण पूजा संबंधी सावधानियाँ * वस्त्र पूजा संबंधी सावधानियाँ * आरतीमंगल दीपक में रखने योग्य सावधानियाँ।
. भावों की वीणा पर बजाएं मुक्ति की सरगम___* जल पूजा से करें अंतर मल का शोधन * चंदन पूजा से करें तन-मन को शीतल * पुष्प पूजा से महकाएँ आत्म सुमन * धूप पूजा से पाएं शील सुगन्ध * दीपक पूजा से जलाएं अध्यात्म दीप * अक्षत पूजा से प्रकटे आत्मा का अक्षय स्वरूप * नैवेद्य पूजा से प्राप्त हो अणाहारी स्वरूप * फल पूजा से प्रकटाएँ गुण सौन्दर्य * चामर पूजा से करें भव नृत्य का नाश * दर्पण पूजा से निहारें स्वयं का जिन रूप * वस्त्र पूजा से तोड़ें आसक्ति का बंधन * आरती
और मंगल दीपक से पाएं मुक्ति की मंजिल। अध्याय-4 : भावे भावना भाविए
172-191 • भाव पूजा के मननीय पहलू • चैत्यवंदन की विविध कोटियाँ • भाव पूजा में उपयोगी विभिन्न सूत्र एवं मुद्राएँ • चैत्यवंदन विधि एक लाभप्रद अनुष्ठान • भाव पूजा का प्रारंभ इरियावहियं सूत्र से ही क्यों? • चैत्यवंदन विधि की पारमार्थिक उपादेयता • आर्य संस्कृति में भाव पूजा का महत्त्व • भाव पूजा में रखने योग्य विवेक • चैत्यवंदन विधि में उपयोग • परमात्मा की स्तुति एवं स्तवन क्यों? • स्तवन के शास्त्रोक्त लक्षण • सौ वर्ष प्राचीन स्तवन की महत्ता क्यों? स्तवन बोलने में रखने योग्य विवेक • स्तवन, मानसिक शान्ति का अचूक उपाय। अध्याय-5 : मन्दिर जाने से पहले सावधान 192-205
• जैन वांगमय में आशातना का स्वरूप • चैत्यवंदन महाभाष्य में वर्णित पाँच आशातनाएँ • जिन मन्दिर संबंधी उत्कृष्ट 84 आशातनाएँ • सावधानी रखने योग्य मुख्य स्थान
* साधर्मिक वर्ग के साथ व्यावहारिक मर्यादाएँ * कर्मचारी वर्ग से कैसा व्यवहार करें? * पदाधिकारियों द्वारा रखने योग्य विवेक।