Book Title: Ambad Charitram
Author(s): Muniratnasuri, Vijayjinendrasuri
Publisher: Harshpushpamrut Jain Granthmala
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________________ अम्बड चरित्रम् प्रथम आदेशः मृतप्रायोऽम्बडः सूर्य-मण्डले व्योम्नि तस्थुषि / तदा प्रमुदिता रात्रि-चन्द्रवत् सूर्यलाञ्छनात् // 57 // उपसूर्य तदोपेतो नागडः सारथिःर्दुतम् / दिष्टयाद्य वीक्षितः स्वामी चिरं यः परवानभूत् // 5 // भव्येन वीक्षितु लग्नः काष्यँ कि रविमण्डले / पश्येद्यदन्तरे कोऽपि पुमान मूर्छाङ्गतो हहा ! // 51 सुधामहं समानीय कृपया जीवयाम्यमुम् / दधावे नागडः शीघ्र सो ययौ चन्द्रमण्डले // 60 // न पश्येत्तत्र राजान-ममानं दधती शुचम् / पृष्टवान् भ्रातृजायां स कथं रोदिषि रोहिणी // 61 // गतः कुत्र मम भ्राता चन्द्रमा तव वल्लभः / रुदन्ती प्राह सा गाढं बाढं भूम्यां स पीडयते // 62 // चन्द्रावल्ल्या गृह सोऽस्ति शृणु देवर नागड। अमुल्यां मुद्रिकास्थाने दासीयं रक्षतीदृशम् // 63 // K अगुल्या पीडयन्नित्यं गाढसङ्घट्टनेन तम् / पृथक् मुञ्चति रात्रौ सा भर्ता मे पीड्यतेऽन्यथा // 6 // भतु दुःखं प्रिया वेत्ति तेन रोदीमि नागड ! / गृह्णामि तव दुःखानि तस्य कष्टं निवारय // 65 // भर्तारं मे समानीय हे देवर समर्पय / नागडः प्राह हे भदे ! मा रोदीः सुस्थिता भव // 66 // त्वरितं तव भद्रं मेलयिष्यामि रोहिणि / नागडः कथयित्वेति ययौ चन्द्रावलीगृहम् // 6 //

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