________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
[श्रीमदनुयोगद्वारसूत्रम् ] हुए साधु को गृहस्थों से विशेष-प्रचुर आहार पानी देते हुए देख कर अनुमान किया कि यहां पर सुभिक्ष-सुकाल है।
अनागत काल के लिये, जैसे कि--निर्मल आकाश में काले पहाड़ जैसे बिजली सहित मेघों की गर्जना तथा अनुकूल वायु, रक्त सन्ध्या, वरुण या महेन्द्र मण्डल के नक्षत्र हों अथवा शुभ उत्पतों को देख कर अनुमान होता है कि सुवृष्टि अवश्य होगी ।
इसी प्रकार ये तीनों उदाहरण विपरीत भी होते हैं, जैसे कि-वन निस्तृण हैं, पृथ्वी में धान्य भी उत्पन्न नहीं हुए, जलाशय भी शुष्क हो गये । इससे अनु. मान होता है कि यहां पर कुवृष्टि हुई है । यह अतीत काल का उदाहरण है।
वर्तमान काल का निम्न प्रकार से जानना चाहिये--नगर में गोचरी लेने के लिये गये हुए किसी साध को भिक्षा प्राप्त नहीं होते हुए देख कर अनुमान किया कि यहां पर दुर्भिक्ष है।
भविष्यत्काल के लिये, जैसे कि-अभी दिशाओं में धू'बाहो रहा है,पृथिवी भी शुरुक है, वायु वर्षा के अनुकूल नहीं है, अाग्नेय और वायव्य मंडल के नक्षत्र हैं, श्राकाश में भी अशुभ उत्पात हो रहे हैं । इस से अनुमान हुआ कि यहां पर कुवृष्टि होगी । इसी प्रकार अन्य उदाहरण भी जानने चाहिये।
उपरोक्त सभी उदाहरण अनुमान प्रमाण के तीनों काल के हैं। इन में पक्ष हेतु और दृष्टान्त, ये तीनों यथासम्भव घटाना चाहिये।
उपमान प्रमाण से कितं ओवम्मे ? दुविहे पण्णत्ते, तं जहा- साहमोवणीए अवेहम्मोवणीए अ।
से कितं साहम्मोवणीए ? तिवहे पण्णत्ते, तं जहाकिंचिसाहम्मोवणोए पायसाहम्मोवणीए सव्वसाहम्मोवणीए।
से कि तं किंचिसाहम्मोवणीए ? जहा मंदरो तहा सरिसवो जहा सरिसवो तहा मंदरो, जहा समु. तहा गो.
For Private and Personal Use Only