Book Title: Sramana 1998 04
Author(s): Shivprasad
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi
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Page #1 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण ŚRAMANA Quarterly Research Journal of Jain Studies) AIM टुक्रवमायण Vol. 49 No. 4-9 APRIL - SEPTEMBER 1998 दमामी चामणि हिटयामा महाशा रहian पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी PĀRSVANATHA VIDYĀPĪTHA, VARANASI खु भगवं www.jajnelibrary.org Page #2 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण श्रमण.. - पार्श्वनाथ विद्यापीठ की त्रैमासिक शोध-पत्रिका अंक ४-९ __ अप्रैल- सितम्बर १९९८ प्रधान सम्पादक प्रोफेसर सागरमल जैन सम्पादक डॉ० शिवप्रसाद प्रकाशनार्थ लेख-सामग्री, समाचार, विज्ञापन एवं सदस्यता आदि के लिए सम्पर्क करें सम्पादक श्रमण पार्श्वनाथ विद्यापीठ आई० टी० आई मार्ग, करौंदी पो० आ० - बी० एच० यू० वाराणसी 22 1005 ( उ० प्र०) दूरभाष : 316521, 318046 फैक्स : 0542- 318046 . वार्षिक सदस्यता शुल्क संस्थाओं के लिए रु० 150.00 व्यक्तियों के लिए : रु० 100.00 इस अंक का मूल्य : रु० 100.00 आजीवन सदस्यता शुल्क संस्थाओं के लिए :रु० 1000.00 व्यक्तियों के लिए : रु० 500.00 नाट : सदस्यता शुल्क का चैक या ड्राफ्ट पार्श्वनाथ विद्यापीठ के नाम से ही भेजें। Page #3 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण श्रमण अतीत के झरोखे मे संकलनकर्ता डॉ० शिवप्रसाद डॉ० विजय कुमार जैन डॉ० सुधा जैन डॉ० असीम कुमार मिश्र प्रस्तुत अङ्क में १. श्रमण : वर्षानुसार लेख सूची २. श्रमण : लेखकानुसार लेख सूची ३. विद्यापीठ के प्रांगण में ४. जैन जगत ५. साहित्य सत्कार पृष्ठ १-१६० १६१-३४८ १-४ ५-८ ८-१४ Page #4 -------------------------------------------------------------------------- ________________ -- - - - श्रमण - -- वर्षानुसार लेख सूची -- - Page #5 -------------------------------------------------------------------------- ________________ .ہی ई० सन् مر २४९ १ १ مر १९४९ १९४९ ।। مر or or or or पृष्ठ १९-२१ २२-२७ २८-३० ३३-३४ ३७-४० ९-११ १३-१५ مر १९४९ १९४९ १९४९ १९४९ x श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक भिक्षु जगदीश काश्यप पृथ्वीराज जैन श्री कृष्णचन्द्राचार्य पं० दलसुख मालवणिया मुनि कांतिसागर पं० कैलाश चन्द्र शास्त्री पं० सुखलाल जी आचार्य विनोबाभावे पृथ्वीराज जैन काका कालेलकर लालजी राम शुक्ल पं० दलसुख मालवणिया आचार्य विनोबा भावे पृथ्वीराज जैन मोहनलाल मेहता आ० चन्द्रशेखर शास्त्री मुनिश्री विद्याविजय जी लेख लोक कल्याण के लिए श्रमण संस्कृति साम्यवाद और श्रमणविचारधारा सबसे पहला पाठ पार्श्वनाथ विद्याश्रम-एक सांस्कृतिक अनुष्ठान मगध में दीपमालिका युद्ध और श्रमण शास्त्र और शस्त्र अहिंसा और शस्त्रबल साम्प्रदायिक कदाग्रह तर्क और भावना अहिंसा का व्यापक अर्थ धर्म का पुनरुद्धार और संस्कृति का नवनिर्माण प्रेम का अभ्यास मानव जीवन का आधार सम्यकत्व की कसौटी प्राचीन भारत में संस्कृतियों का संघर्ष सेवा का अर्थ १९४९ २४-२६ x x or or or or or or or or مر له له له به له له سه له له سه سه سه १९४९ १९४९ १९४९ १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० २७-३० ३१-३२ ३३-३६ ९-१३ २२-२३ २५-२७ २८-२९ ३३-३४ ३५-३८ Page #6 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ४ लेख भिक्षुसंघ और समाज सेवा सेवक सारनाथ - काशी की तपोभूमि श्रमण और ब्राह्मण जैनधर्म की देन सेवाग्राम कुटीर का संदेश श्रमणसंस्कृति और नया संविधान दक्षिण हिन्दुस्तान और जैनधर्म हमारा आज का जीवन महावीर और जातिभेद भगवान् बुनियादी सुधार चरित्र के मापदंड स्त्री शिक्षा अहिंसा की साधना मृत्युञ्जय बौद्धधर्म संस्कृति का प्रश्न श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक भिक्षु जगदीश काश्यप प्रो० इन्द्र प्रो० चन्द्रिका सिंह उपासक प्रो० इन्द्र पी० एस० कुमारस्वामी राजा डॉ० राजेन्द्र प्रसाद पृथ्वीराज जैन पं० दलसुख मालवणिया श्री रतनसागर जैन पृथ्वीराज जैन उमाशंकर त्रिपाठी श्री इन्द्र 5० कांता जैन कु० काका कालेलकर मोहनलाल मेहता पं० दलसुख मालवणिया प्रो० विमलदास जैन वर्ष १ १ १ १ १ १ १ अंक ४ ४ ४ ४ ४ ४ ६ ६ ७ ७ १ ७ ई० सन् १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० पृष्ठ १३-१६ १७-२३ २५-२८ २९-३२ ३३-३५ ३६-३८ ९-१५ १७-१९ २७-३० ११-१६ १७-२० २१-२२ २३-२६ ११-१३ १४-१८ १९-२२ . २३-२७ Page #7 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अंक For x x x x x ई० सन् १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० x श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्रीमती यमुनादेवी पाठक श्री धीरज लाल टोकरशी शाह । पं० सुखलाल जी संघवी श्री गुलाब चन्द्र चौधरी रतन पहाड़ी पृथ्वीराज जैन पं० फूलचन्द्र जी सिद्धान्तशास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा पं० कैलाश चन्द्र जी श्री चन्द्रिका सिंह जी प्रो० महेन्द्र कुमार जी न्यायाचार्य १ पं० सुखलाल संघवी श्री अवध किशोर नारायण श्री गुलाब चन्द्र चौधरी १ पं० दलसुख मालवणिया १ प्रो० लालजी राम शुक्ल १ पं० सुखलाल जी १ पारिवारिक जीवन सुखी कैसे हो? ईर्यापथ-प्रतिक्रमण जैनसाधना आर्यों से पहले की संस्कृति व्यक्ति और समाज हजरतमुहम्मद और इस्लाम संस्कृति का अर्थ जैन आगमों का महत्त्व और अपना कर्तव्य एक समस्या सारनाथ के भग्नावशेष संस्कृति का आधार-व्यक्ति स्वातंत्र्य विकास का मुख्यसाधन (क्रमश:) जैनमूर्तिकला आचार्य विद्यानन्द चातुर्मास विचारों पर नियन्त्रण के उपाय विकास का मुख्य साधन 'ल 9 9 vvvv var or or or 22 23 x पृष्ठ । २९-३३ ३४-३६ ९-११ १३-१९ २०-२४ २५-३१ ३३-३४ ९-१४ २१-२५ २६-३१ ३३-३६ १३-१८ १९-२१ २४-२७ २८-३० ३१-३५ ११-१३ x १९५० x x x x x १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० x १० १० १० ११. x Page #8 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अंक ११ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० दलसुख मालवणिया अगरचन्द नाहटा विमलदास जैन श्रा गुलाबचन्द्र चाधरा श्री हजारीमल जी बांठिया महासती उज्जवल कुमारी श्री देवेन्द्र कुमार श्री कृष्णचन्द्राचार्य मुनि श्री रंगविजय जी रामस्वरूप जैन पं० दलसुख मालवणिया श्री गुलाबचन्द्र चौधरी श्री इन्द्र श्री देवेन्द्र कुमार श्री जेठमल बोथरा पृथ्वीराज जैन गुलाबचन्द्र चौधरी मोहनलाल मेहता जैन और हिन्दू पैंतालीस और बत्तीस सूत्रों की मान्यता पर विचार पर्युषणपर्व संस्कृति-एक विश्लेषण वैराग्य के पथ पर सामायिक की सार्थकता भारतीय समाज का आध्यात्मिक दर्शन जैनत्व की कसौटी सदाचार ही जीवन हो पंजाब में स्त्री शिक्षा न्याय सम्पन्न विभव श्रमण संस्कृति का केन्द्र-विपुलाचल और उसका पड़ोस प्रायश्चित्त श्री तारण स्वामी इंसानियत के उत्तरदायित्वपूर्ण उसूल आचार्य कालक और 'हंसमयूर' नारी के अतीत की झांकी-सतीप्रथा सौन्दर्य का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण . Bor or or or or or or or x rrrrrrrror AMR.AMAR - ~ ~ ~ ~ ~ rar ई० सन् १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० १९५० पृष्ठ १६-१७ २४-२९ ३१-४० १३-१६ १७-२५ २६ २७-२९ ३१-३२ ३५-३७ ३८-४० ९-१२ १५-२२ २३-२८ २९-३२ ३३-३८ ३९-४० ११-१८ २५-२८ Page #9 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख तलाक विजय आत्महित बनाम परहित नारी और त्यागमार्ग संन्यास का आधार-अन्तर्मुखी प्रवृत्ति अतीत, धर्म और साधु संस्था सम्यग्ज्ञान और मिथ्याज्ञान बीसवीं सदी का प्रथमार्ध: राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पलायनवाद जंगम आगम संशोधन मंदिर नेपाल का शाहवंश और उनके पूर्वज परिग्रह मीमांसा जैनत्व या जैन चेतना लंदन में कतिपय अप्राप्य जैन ग्रन्थ भगवान् महावीर का जन्म और निर्वाणभूमि महावीर का व्यक्तित्त्व जैनधर्म और वर्ण व्यवस्था युगपुरुष भगवान् महावीर श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री पृथ्वीराज जैन कु० सत्यवती जैन पं० दलसुख मालवणिया पृथ्वीराज जैन मोहनलाल मेहता बरट्रेन्ड रसल प्रो० इन्द्र श्री गुलाबचन्द्र चौधरी श्री चुन्नीलाल वर्धमान शाह पं० दलसुख मालवणिया मुनि कनक विजय श्री रघुवीरशरण दिवाकर प्रो० विमलदास जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री चौधरी गुलाबचन्द श्री हरजसराय जैन वर्ष २ पं० फूलचन्द्र जी सिद्धान्तशास्त्री २ श्री पृथ्वीराज जैन ४ अंक D ل الله الله ४ ४ ४ ४ ४ ६ ६ ई० सन् १९५० १९५० १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ पृष्ठ २९-३४ ३५-३८ ९-११ १४-२० २३-२६ ३१-३४ ११-१४ १७-२४ २५-२७ २८-३२ ३४-३८ ९-१४ २१-२६ २७-२९ ९-१२ १३-१५ १५-२३ २४-२७ Page #10 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख मंदिरों के झगड़े और जैन समाज भगवान् महावीर का आदर्श और हम अपरिग्रहवाद (क्रमशः ) बनारस से जैनों का सम्बन्ध जैन धर्म और वर्ण व्यवस्था दो प्रेमियों की यह दीक्षा खोज सम्बन्धी कुछ अनुभव और समस्यायें शीलव्रतग्रहण आचार्य हेमचन्द्र स्वामी केशवानन्द आप सम्यग्दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि धर्म के स्थान पर संस्कृति नारी की प्रतिष्ठा भक्तिमार्ग का सिंहावलोकन सोमनाथ गीता संज्ञक जैन रचनाएं यह धर्म प्राण देश है जीवित साहित्य की वाणी श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक ऋषभदास रांका श्रीमती कांता जैन श्री रघुवीरशरण दिवाकर पं० दलसुख मालवणिया पं० फूलचन्द्र सिद्धान्त शास्त्री मोहनलाल मेहता डॉ० धीरेन्द्र वर्मा श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री गुलाबचन्द्र चौधरी स्वामी सत्यस्वरूप जी प्रो० इन्द्र काका कालेलकर श्री किशोरी लाल मशरूवाला पं० दलसुख मालवणिया श्री किशोरी लाल मशरूवाला श्री अगरचन्द नाहटा श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री विजय मुनि वर्ष २ अंक ६ १) ७ ७ ७ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ९ ९ ई० सन् १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ पृष्ठ २८-३२ ३३-३६ ९-१४ १५-१८ २०-२६ २७-२९ ९-१२ १२-१३ १६-२४ २६-३१ ३२-३६ ३६ ४-८ ९-१५ १८-२३ २५-२७ २८-३० ३६-३७ Page #11 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ७ लेख __ वर्ष अंक ९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक क्या धन-सम्पत्ति आदि कर्म के फल हैं पं० फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री २ अपरिग्रहवाद (क्रमश:) श्री रघुवीरशरण अग्रवाल श्री जैनेन्द्र गुरुकुल, पंचकूला प्रो० इन्द्र २ सफेद धोती प्रो० महेन्द्र कुमार न्यायाचार्य - इतिहास की पुनरावृत्ति : एक भ्रामक धारणा श्री गुलाबचन्द्र चौधरी शाक विचार श्री अत्रिदेव गप्त विद्यालंकार २ आत्म शोधन का महान पर्व-पर्युषण अगरचन्द नाहटा २ शुद्ध व्यवहार का आन्दोलन श्री किशोरी लाल मशरूवाला २ सबसे बड़ा प्रश्न- मैं कौन हूँ? मुनि श्री रामकृष्ण जी महाराज २ धर्म का बीज और उसका विकास पं० सुखलाल जी संघवी २ " जैन मन्दिर और हरिजन प्रो० महेन्द्र कुमार जैन न्यायाचार्य २ विवाह और कन्या का अधिकार सुश्री प्रेमकुमारी दिवाकर शतावधानी रत्नचन्द्र पुस्तकालय मोहनलाल मेहता २ लखनऊ अभिभाषण पं० सुखलाल जी संघवी मुनि श्री पुण्य विजय जी के जैसलमेर भण्डार के उद्धार कार्य की रूपरेखा पं० सुखलाल जी ३ अखिल भारतीय प्राच्यविद्या महासम्मेलन श्री गुलाबचन्द्र चौधरी ३ साधु समाज और निवृत्ति पं० दलसुख मालवणिया به به به به به به به #2222222222 ~ ~ ~ r ई० सन् १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ पृष्ठ । ३८-३९ १२-१४ १५-२० २१-२४ ३१-३२ ३३-३६ ७-१३ १४-१८ १९-२३ ९-१४ १८-२४ २५-३० ३१-३६ ३-२८ २८-३७ ३८-४४ ९-१२ سه له १ १ له سه له سه Page #12 -------------------------------------------------------------------------- ________________ و نه سه سه سه سه سه له سه श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री उमाशंकर त्रिपाठी श्री रघुवीरशरण दिवाकर हुकुमचन्द सिंघई सुश्री प्रेमकुमारी दिवाकर प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन सुश्री हीराकुमारी प्रो० पद्मनाभ जैनी पं० महेन्द्र कुमार न्यायाचार्य प्रो० विमलदास जैन श्री मोहन लाल मेहता पं० दलसुख मालवणिया अंक २ २ २ २ २ ३ लेख शिक्षा के साधन अपरिग्रहवाद (क्रमश:) प्रतिज्ञा नारीजागरण " इतिहास की पुनरावृत्ति-यथार्थदर्शन जैन दर्शन स्वामी समन्तभद्र जी शास्त्र की मर्यादा तर्क का क्षेत्र धर्म की उत्पत्ति और उसका अर्थ विद्यामूर्ति पं० सुखलाल जी केवलज्ञान सम्बन्धी कुछ बातें शैतान अपरिग्रहवाद (क्रमश:) श्रद्धा का क्षेत्र हमारे समाज की भावी पीढ़ी महाभिनिष्क्रमण ई० सन् १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५१ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ पृष्ठ १३-१७ १८-२० २१-२५ २६-३१ ३४-३६ ९-१५ १७-२३ २५-२९ ३१-३६ ९-१४ १५-१८ १९-२२ २३-३३ ३४-३६ ९-१२ १६-१८ १९-२२ له ४ खलील जिब्रान श्री रघुवीरशरण दिवाकर पं० दलसुख मालवणिया उदय जैन रसिक त्रिवेदी سه سه له سه سه سه سه سه Page #13 -------------------------------------------------------------------------- ________________ و अंक ५ ५ पृष्ठ २४-३२ ک ३३-३७ ک ३ ६ ک ب کي کيا کی سه له سه له سه له سه سه سه له سه | लेख कलकत्ता विश्वविद्यालय में संस्कृत का उच्च शिक्षण किसकी जय तप के प्रतीक महावीर भगवान् महावीर-उनके जीवन की विविध भूमिकायें हमारे जागरण का शीर्षासन मंगलयमय महावीर कलकत्ता विश्वविद्यालय में संस्कृत का उच्च शिक्षण रुढिच्छेदक महावीर मुनियों का आदर्श त्याग जैन साहित्य निर्माण की नवीन योजना पार्श्वनाथ विद्याश्रम अपरिग्रहवाद (क्रमश:) आत्मा की महिमा यह मनमानी कबतक जैनसमाज और वैशाली सम्मेलन-संस्मरण साधुसमाज की प्रतिष्ठा ज्ञान सापेक्ष है श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक म० म० विधुशेखर भट्टाचार्य प्रो० इन्द्रचन्द्र शास्त्री डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल पं० सुखलाल संघवी मुनि सुरेश चन्द्र प्रो० महेन्द्र कुमार न्यायाचार्य म० म० विधुशेखर भट्टाचार्य पं० बेचरदास दोशी मुनि श्री आईदान जी महाराज डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल प्रो० विमलदास जैन श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री जयभगवान जी एडवोकेट श्री शैलेश पं० पन्नालाल धर्मालंकार मुनि श्री सुशील कुमार जी पं० कृष्णचन्द्राचार्य प्रो० विमलदास जैन ७-८ ई० सन् १९५२ १९५२ ।। १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ ७-८ ७-८ ९-१६ १७-२२ २३-२४ २७-३१ ३२-३७ ७-८ ९-१२ १३-२३ २५-२९ ३० ३१-३३ ३६-३८ ३९-६० ६१-६३ ५-११ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ له سه له له ته له سه ७-८ ७-८ Page #14 -------------------------------------------------------------------------- ________________ و अंक ९ ३ ه ई० सन् १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ ه ३ १० ه ه ه १९५२ ه ه श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मुनि श्री जयन्तीलाल जी श्री महेन्द्र ‘राजा' प्रो० दलसुख मालवणिया श्री अगरचन्द नाहटा श्री जयभिक्खु श्री अमरचन्द पं० सुखलाल जी संघवी मोहनलाल मेहता श्री जयभिक्खु प्रो० पृथ्वीराज जैन श्री अगरचन्द नाहटा मुनि श्री सुशील कुमार शास्त्री प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन श्री माईदयाल जैन श्री जय भिक्खु टॉल्सटाय सुश्री मोहिनी शर्मा डॉ० सन्तोष कुमार 'चन्द्र' लेख ज्ञान की खोज में संसार का इतिहास तीन शब्दों में क्या मैं जैन हूँ ? ओसवंश-स्थापना के समय संबन्धी महत्त्वपूर्ण उल्लेख कवि की हुंकार उज्जयिनी स्वरूप और पररूप जैन परम्परा मृगतृष्णा नैतिक उत्थान और शिक्षण संस्थाएँ पल्लीवालगच्छीय शांतिसूरि का समय एवं प्रतिष्ठा बुझती हुई चिनगारियाँ समन्वय या सफाई जैन साधु और हरिजन परिनिर्वाण धर्म का तत्त्व भारतीय त्यौहार नारी जीवन का आदर्श : : : : : : : : : : : : : : पृष्ठ १७-२१ २२-२४ ९-१२ १५-१८ १९-२६ २७-३३ ५-१० १३-१७ १९-२६ २७-३० ३१-३३ ३५-३७ ७-१० १४-१६ १७-२१ २२-२६ २७-३० ३१-३४ ه ३ ه ه १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ ।। १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ ه ३ ३ ३ ३ ३ १२ १२ १२ १२ १२ Page #15 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख धर्म करते पाप तो होता ही है ! स्याद्वाद की सर्वप्रियता गांधी जी की दृष्टि में अहिंसा का अर्थ मैं स्वयं मंजिल अभी दूर है क्या यही शिक्षा है। अपरिग्रहवाद (क्रमश:) स्वप्न : एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण पितृ हत्या का पुण्य महावीर की जन्मभूमि भगवान् असंयत जीव का जीना चाहना राग अपरिग्रहवाद (क्रमश:) पितृ हत्या का पुण्य जीवन-निर्माण भारतीय चिकित्सा शास्त्र बंधन से अलंकार आलोचक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री प्रवाही श्री चन्द्रशंकर शुक्ल नरेन्द्र गुप्त श्री जय भिक्खु मुनि सुरेशचन्द्र शास्त्री राजाराम जैन श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री मोहनलाल मेहता जय भिक्खु भगवानदास केसरी प्रो० दलसुख मालवणिया श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री जय भिक्खु स्वामी समन्तभद्र जी अत्रिदेव विद्यालंकार सुश्री मोहनी शर्मा श्री विजयमुनि वर्ष ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ अंक १२ १ १ m ४ ܡ ४ ई० सन् १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५२ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९९३ १९५३ १९५३ ११ पृष्ठ ३५-३७ ३-८ ११-१२ १३-२१ २४-२६ ३०-३२ ३-८ ११-१५ १६-२३ २८-३५ ३-६ ८-१२ १३-२१ २२-२६ २९-३४ ३-५ ६-७ Page #16 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पृष्ठ » » » ८-१० ११-१५ २१-२२ २३-२५ २९-३२ » » श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक क्रोध आदि वृत्तियों पर विजय कैसे अरविंद अपरिग्रहवाद श्री रघुवीरशरण दिवाकर साध्वी समाज से मुनि श्री आईदानजी 'निर्मल' आरोग्य पं० सुन्दरलाल जैन वैद्यरत्न काश ! मैं अध्यापिका होती ! सुश्री शरबती जैन महामानव की मानसिक भूमिका प्रो० राजबली पाण्डेय संन्यास मार्ग और महावीर पं० दलसुख मालवणिया जैन शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा श्री धनदेव कुमार दौरे के संस्मरण श्री हरजसराय जैन सच्ची साधना का प्रभाव श्री राजाराम जैन महावीर और क्षमा श्री भूपराज जैन भगवान् महावीर और वर्तमान युग नरेशचन्द्र जैन मानवमात्र का तीर्थ पं० सुखलाल जी भौतिकता और अध्यात्म का समन्वय पं० दलसुख मालवणिया हम किधर बह रहे हैं ? डॉ० इन्द्र क्षमादान जय भिक्खु प्राकृत साहित्य के इतिहास के प्रकारान की आवश्यकता श्री अगरचन्द नाहटा वर्ष अंक ई० सन् ४ ४ १९५३ ।। १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ ४ ५ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ ४ ६ १९५३ ४६ १९५३ ४ ६ १९५३ 3 3 3 3 ७-११ १३-१६ २३-२६ २८-२९ ३०-३४ ३५-३६ १-२ ३-४ ५-१३ १५-१९ २१-२७ u r u Page #17 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३ अंक ४ ६ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक लाला हरजसराय जैन पं० सुखलाल जी । डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल वाल्टर शूबिंग महेन्द्र कुमार न्यायाचार्य डॉ० पी० एल० वैद्य पं० बेचरदास दोशी डॉ० इन्द्र पं० फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री प्रो० के० एस० धरणेन्द्रैया श्री के० भुजबलि शास्त्री मुनि पुण्य विजयं जी पं० सुखलाल जी श्री अगरचन्द नाहटा श्री वासुदेवशरण अग्रवाल श्री अगरचंद नाहटा श्री माईदयाल जैन ७-८ ७-८ लेख. हमारी यात्रा के कुछ संस्मरण एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति जैन साहित्य का नवीन अनुशीलन जैन साहित्य का नवीन संस्करण जैन अनुसंधान का दृष्टिकोण असाम्प्रदायिक जैन साहित्य आगमों के सम्पादन में कुछ विचार योग्य प्रश्न महावीर से पहले का जैन साहित्य जैन पुराण साहित्य कन्नड़ संस्कृति को जैनों की देन जैन कन्नड़ वाङ्गमय जैसलमेर भण्डार का उद्धार जैन व्याख्या पद्धति जैनज्ञान भंडारों के प्रकाशित सूची ग्रन्थ अहिंसा का महान नियम जैनी कौन मूक साहित्य सेवी : श्री पन्नालाल जी ई० सन् १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ पृष्ठ । २८-३३ ३-१० ११-१२ १३-१४ १५-१६ १७-२४ २५-२९ ३०-३४ ३५-३८ ३९-४६ ४७-५१ ६३-७० ७१-७३ ७३-७९ १-२ ३-६ ७-११ ७-८ ७-८ ७-८ ४ ७-८ ७-८ ७-८८ ४ ९ ९ Page #18 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४ लेख वर्ष अंक पृष्ठ १७-२१ २४-२९ १-६ ४ ४ घर जोड़ने की माया धर्म का मर्म आचारांग की दार्शनिक मान्यतायें प्राचीन मथुरा में जैनधर्म का वैभव जैनमूर्तिकला अहमदाबाद के भामाशाह सिद्धसेन दिवाकर (क्रमश:) जैन आगमों का मन्थन अपभ्रंश के जैन साहित्य का महत्त्व कुभार्या जैन लोक साहित्य : एक अध्ययन सिद्धसेन दिवाकर मलधारी अभयदेव और हेमचन्द्राचार्य मेरी बम्बई यात्रा शिष्य मोह जैन आगमों का मंथन आचार्य जिनभद्र जैनसाहित्य के इतिहास निर्माण के सूत्र श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी श्री सुबोध कुमार जैन डॉ० इन्द्र डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल डॉ० विनयतोष भट्टाचार्य श्री जयभिक्खु डॉ० इन्द्र डॉ० इन्द्र डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी श्री जयभिक्खु श्री महेन्द्र राजा डॉ० इन्द्र पं० दलसुख मालवणिया डॉ० इन्द्र श्री जयभिक्खु डॉ० इन्द्र (लेखक का नाम नही हैं) डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल : : : : : : : : : : : : : : : : : ई० सन् १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५३ EEEEEEEEEEEEEEEEEEE ४ १३-१९ २१-२४ २५-३१ ३५-३७ १-३ ४-१२ १३-२८ २९-३५ १-१० ११-१५ १६-२८ २९-३० २-१० ११-१६ ४ - ४ Page #19 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख R ک . ५ ५ ५ ک ک ک ک ک ک श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० सुखलाल जी डॉ० इन्द्र मुनि पुण्यविजय जी डॉ० इन्द्र डॉ० इन्द्र श्री किशोरीलाल मशरूवाला डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० इन्द्र मुनि श्री आईदान जी० महराज श्री नरेन्द्र कुमार जैन पं० बेचरदास जी श्री मनुभाई पंचोली डॉ० इन्द्र श्री महावीर प्रसाद 'प्रेमी' डॉ० इन्द्र पं० दलसुख मालवणिया शास्त्ररचना का उद्देश्य जैन साहित्य के विषय में अजैन विद्वानों की दृष्टियाँ जैन ज्ञान भंडारों पर एक दृष्टिपात जैन साहित्य का विहंगावलोकन जैन साहित्य के संकेत चिन्ह आत्मा का बल सम्यक् दृष्टि और मिथ्या दृष्टि सन्त एकनाथ के जीवनप्रसंग बीसवीं सदी का जैन साहित्य पितृहीन नारी का महत्त्व विश्वशांति का आधार-गांधीवाद जैन संस्कृति और मिथ्यात्व कला का कौल सम्यग्दृष्टि और मिथ्यादृष्टि वैशाली और भगवान् महावीर का दिव्य संदेश वैशाली के गणतन्त्र की एक झांकी सिद्धिविनिश्चय और अकलंक पृष्ठ २४ २५-२८ १-७ ।। ८-१४ ३०-३८ १-२ ३-१० ११-१९ २०-२४ २५-२९ ३०-३६ ३७-४० <<<<Page #20 -------------------------------------------------------------------------- ________________ م अंक د ई० सन् १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ ک ک ५ ک ک १९५४ ک ک पृष्ठ १-१० ११-२० २१-२५ २९-३८ १-८ १६-१७ १८-१९ २०-२५ २६-३० ३१-३४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० दलसुख मालवणिया डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री डॉ० इन्द्र मुनि जिनविजय जी डॉ० इन्द्र श्री अगरचन्द नाहटा मुनि श्री आईदान जी महाराज डॉ० इन्द्र महो० विनयसागर जी श्री भगवान लाल भांकड़ श्रीमती सत्यवती जैन पं० बेचरदास दोशी श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० इन्द्र डॉ० इन्द्र श्री देवेन्द्र कुमार श्री जयभिक्खु श्री अगरचन्द नाहटा लेख भगवान् महावीर के गणधर सूत्रकृतांग में वर्णित मतमतांतर महात्मा हुसेन बसराई जैनकथा साहित्य का सार्वजनीन महत्त्व अभय का अराधक चन्द्रवेध्यक आदि ४ सूत्र अनुपलब्ध नहीं हैं । मनुष्य की प्रगति के प्रति भयंकर विद्रोह संसार के धर्मों का उदय अविद पद शतार्थी जीवन-रहस्य नारी का स्थान घर है या बाहर ? हमारा क्रांतिवारसा (क्रमश:) जिनधर्म का तमाशा गुरु नानक आस्तिक और नास्तिक अपने को जानिए सांपू सरोवर अमरवाणी ک १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ 33 33 ur ur ur or ur r 9 9 9 9 9 9 1 ک ک १९५४ ک ३५ ک ک ک १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १-८ ९-११ १२-२५ २७-३० ३१-३३ ३४-३९ ک ک ک १-४ ک Page #21 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १७ ۴ अंक ک . ५ ८ ५८ ५८ ک ک ک ५ ک पृष्ठ । ६-१५ १७-२० २३-३० ३१-३३ ३४-३६ ३-१० १२-१८ १९-२३ २८-३१ ३२-३४ ९ ک लेख हमारा क्रांतिवारसा नरसिंह मेहता अपभ्रंश का काव्य सौन्दर्य महावीर की जय ग्रीष्म ऋतु का आहार-विहार, " जैनधर्म का वैशिष्टय बौद्धधर्म का छठा धर्म संगायन संघर्ष करना होगा महावीर का साम्यवाद शिशु की निद्रा बत्तीस प्रकार की नाट्यविधि श्री आत्मारामजी और हिन्दी भाषा वर्षा ऋतु का आहार-विहार कालकाचार्य अगस्त की ऐतिहासिकता काश्मीर की सैर (क्रमश:) उपशमन का आध्यात्मिक पर्व नियुक्ति और नियुक्तिकार श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० बेचरदास दोशी डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री प्रो० सुरेशचन्द्र गुप्त डॉ० इन्द्र वैद्यराज पं० सुन्दरलाल प्रो० विमलदास कोंदिया भिक्षु धर्मरक्षित श्री निर्मल कुमार जैन सुन्दरलाल जैन श्रीमती कमलादेवी डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल श्री पृथ्वीराज जैन वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन श्री इलाचन्द जोशी श्री शरदचन्द्र मुखर्जी पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री पं० दलसुख मालवणिया श्री मोहनलाल मेहता ५ ५९ • uuuuuaaaaa aa ar or a orar ar ई० सन् १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५३ १९५३ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९९४ ک ३-९ ५ ک ११-१५ ک ک ک ک २३-२९ ३०-३२ ३३-३६ ३-५ ९-१५ ک ک ا Page #22 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ई० सन् १९५४ ک ک ک ک ک लेख धर्मबन्धु हर्बर्ट वारन शास्त्रीय पैमाने काश्मीर की सैर मानव और शांति जैन संस्कृति हरिकेशीबल काश्मीर की सैर उपवास से लाभ महावीर का अन्तस्तल ‘सत्यं स्वर्गस्य सोपानम् भद्रबाहु का कालमान दीपावली की जैन परम्परा संसार की सबसे बड़ी पुस्तकों की दुकान संशयात्मक मनोवृत्ति और उससे छुटकारा, यज्ञ का घोड़ा शुभकामना क्या आप असुन्दर हैं ? जैनागमों में ज्ञानवाद श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष अनु० कृष्णचन्द्राचार्य पं० मुनि श्री फूलचन्द्र जी 'श्रमण' ५ पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री ५ श्री बैजनाथ शर्मा पं० महेन्द्रकुमार न्यायाचार्य श्री सुशील ५ पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री श्री अत्रिदेव गुप्त ५ श्री ज्योति प्रसाद जैन डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल मुनिश्री फूलचन्द्र जी ६ पं० महेन्द्रकुमार न्यायाचार्य फोयल्स (नाम उद्धृत नहीं है ) श्री जयभिक्खु ६ प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन कु० रेणुका चक्रवर्ती ६ डॉ० मोहनलाल मेहता ک पृष्ठ १६-२० २५-२८ २९-३० ३१-३२ ३-१३ १५-२४ २५-२७ २८-३० ३१-३४ ३-४ ६-८ ९-११ १२-१७ २०-२५ २६-३० ३१-३३ ३४-३८ ५-९ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ । १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ । १९५४ १९५४ १९५४ .MMM. ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ r ک ک ک که یه که یه که م Page #23 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख कौन भूखे मरेगें शीत ऋतु का आहार-विहार ऐसा क्यों अपने व्यक्तित्व की परख कीजिए जैन साहित्य का इतिहास और इसकी प्रगति दान सम्बन्धी मान्यता पर विचार ईसाइयों का महापर्व - क्रिसमस भारतीय संस्कृति भाष्य और भाष्यकार महात्मा कन्फ्यूशियस बसन्त ऋतु का आहार-विहार बैलून में एक आश्चर्यमय ग्रन्थ विश्व कलेण्डर हिन्दू बनाम जैन पारसनाथ दो क्रान्तिकारी जैन विद्वान् राजस्थानी जैन साहित्य श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री पीटर फ्रीमैन वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन श्री धनदेव कुमार 'सुमन' श्री महेन्द्र 'राजा' पं० दलसुख मालवणिया श्री अगरचन्द नाहटा सुश्री निर्मला प्रीतिप्रेम डॉ० मंगलदेव शास्त्री श्री मोहनलाल मेहता श्री महेशशरण सक्सेना वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन मैक्स एडालोर डॉ० सूर्यदेव शर्मा श्री महेन्द्र कुमार जैन प्रो० महेन्द्र कुमार न्यायाचार्य श्री श्रीरंजन सूरिदेव श्री रतिलाल दीपचन्द देसाई श्री अगरचन्द नाहटा वर्ष ६ ६ ६ ६ w अंक ~ २ २ २ ? m m m ४ ४ ४ ४ ४ ४ ४ ५ ई० सन् १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५४ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९ पृष्ठ १४-१७ १९-२० २१-२६ २७-२९ ३०-३९ ३-१० १२-१६ १८-३१ ४-१२ १४-१७ १९-२० २१-२८ २९-३२ ३३-३७ ३८-४० ३-५ ७-१३ १५-२२ Page #24 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख मानव ५ ک ک ٹ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक सुश्री पुष्पा धारीवाल श्री विजयराज सुश्री निर्मला प्रीतिप्रेम श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० वासूदेवशरण अग्रवाल पं० रत्न श्री ज्ञानमुनिजी पं० दुलसुख मालवणिया श्री सूरजचंद ‘सत्यप्रेमी' श्री रघुवीरशरण दिवाकर श्री धर्मचन्द्र ‘मुखर' डॉ० गुलाबचन्द्र चौधरी श्री महावीर प्रसाद प्रेमी श्री मदनलाल जैन मुनि सुरेशचन्द्र शास्त्री प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा दादा धर्माधिकारी प्रो० वेंकटाचलम सामुद्रिक विज्ञान (क्रमश:) के बर्मा में होली का त्यौहार प्रत्यालोचना-महावीर का अन्तस्सल अहिंसा की युगवाणी भगवान् महावीर और उनका शान्ति संदेश भगवान् महावीर का मार्ग वर्धमान और हनुमान महावीर का संदेश भगवान् महावीर-जीवन और सिद्धान्त भगवान् महावीर का व्यक्तित्त्व सन्मति महावीर और सर्वोदय अहिंसा महावीर के ये उत्तराधिकारी ! भगवान् महावीर की जीवन साधना राजस्थानी जैन साहित्य स्त्री का स्वभाव विश्व कलेण्डर क्यों नहीं अपनाया जाय ? ६-७ Purur ur aur rur ur ur ur ur rur w uru urur अंक ई० सन् १९५५ ६ ५ १९५५ । १९६५ ५ १९५५ ६ ६-७ १९५५ १९५५ ६-७ १९५५ १९५५ ६-७ १९५५ ६-७ १९५५ ६-७ १९५५ ६-७ १९५५ ६-७ १९५५ ६ ६-७ १९५५ ६ ६-७ १९५५ ६ ८ १९५५ ६८ १९५५ ६ ८ १९५५ पृष्ठ २४-२६ २७-२९ ३०.३२ ३३-३६ ३-४ ५-१७ २०-२२ २३ २४-३४ ३६-४० ४१-४६ ५१-५३ ५५-५६ ५७-६० ६२-६४ ४-९ ११-१३ १४-१८ Page #25 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २१ लेख R کی سید ८ بن کی سی که که सच्चा वैभव सामुद्रिक विज्ञान भारतीय संस्कृति का दृष्टिकोण आत्म निरीक्षण मिथिलापति नमिराज ग रविन्द्रनाथ के शिक्षा सिद्धान्त और विश्वभारती हमारी भक्ति निष्ठा कैसी हो ? चूर्णियां और चूर्णीकार सुदर्शन धर्मपुरुष और कर्मपुरुष सच्चरित्रता क्या है ? हैं चलिए और खूब चलिए लेखक और विश्वशान्ति दिवाभोजन ही क्यों ? अपने व्यक्तित्व की परख कीजिए है आधुनिक पुस्तकालय (क्रमश:) प्रतिक्रमण पर्युषणपर्व की आराधना श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री एस० कान्त श्री विजयराज ६ डॉ० मंगलदेव शास्त्री ६ सुश्री शरबती देवी जैन श्री सुशील ६ श्री शिवनाथ ६ श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता गोकुलचन्द शास्त्री 'प्रवासी' ६ पं० फूलचन्द्रजी 'श्रमण' ६ महासती श्री सरलादेवी जी महाराज ६ वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन ६ डॉ० एस० राधाकृष्णन् ६ डॉ० महेशदान सिंह चौहान श्री जे० एन० भारती, श्री महेन्द्र 'राजा' ६ स्वामी सत्यभक्त जी६ पं० मुनि श्री फूलचन्द्रजी 'श्रमण' ६ , v varar 2222222224 ई० सन् १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ पृष्ठ । . १९-३५ ३८-४० ३-१६ २०-२३ २६-३४ ३-७ ८-९ १०-१४ १५-१८ २१-२२ २५-२६ २७-२९ ३०-३२ ३३-३४ ३५-३६ ३७-४० ३-१२ १४-१६ rur w uru Page #26 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख वर्ष urur ur ur १७-२१ २४-२८ ३०-३३ ३४-३८ ३९-४१ २-८ ११-१६ ur ur १२ ur ६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० प्रवर श्री कन्हैयालालजी म०(कमल) ज्ञानमुनि जी महाराज श्री विज्ञ श्री बेचरदास दोशी मुनि श्री सुरेशचन्द्र जी शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा पं० दलसुख मालवणिया प्रिंस क्रोपाटकिन पं० सूरजचंद 'सत्यप्रेमी' कविरत्न श्री अमर मुनिजी श्री देवेन्द्र कुमार जैन शास्त्री श्री शीतल चन्द्र चटर्जी श्री अभयमुनि जी महाराज श्री महेन्द्रराजा पं० बेचरदास जी जोशी श्री कस्तूरमल बांठिया पं० श्री ज्ञानमुनिजी महाराज मुनि फूलचन्द जी 'श्रमण' १७ पर्युषण मीमांसा महापर्व संवत्सरी • संवत्सरी और आचार्य श्री सोहनलाल जी महाराज अस्पृश्यता और जैनधर्म अपने को परखिए कल्पसूत्र का हिन्दी पद्यानुवाद एकान्तपाप और एकान्तपुण्य जिन्दगी किसे कहते हैं ? नमस्कार मंत्र का मौलिक परम अर्थ भारतीय संस्कृति का प्रहरी हम सौ वर्ष जी सकते हैं ? स्वामी विवेकानन्द मन-निग्रह पुस्तकों की व्यवस्था (क्रमश:) अब कहाँ तक ? अधिमास और पर्युषणा दीपमाला : एक आध्यात्मिक पर्व श्रमण भगवान् महावीर की शिष्य संपदा w “ะ * * * * * ; ; ; ; ; ; ; ; ; ; ; ; ई० सन् १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ r ur ur ur ६ ७ ७ १८-२० २६-२८ ३१-३३ ३४-३५ ३६-३७ ३८-४० ८-१४ १७-२३ २५-२८ ३० 9 ७ Page #27 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २३ अंक पृष्ठ . ३१-३३ 9 9 ९-१२ 9 २ 9 9 9 9 लेख जीवन की अंतिम साधना जैनधर्म : एक निर्वचन लोकसाहित्य के आदि सर्जक-जैनविद्वान् ___ मैं मुक्ति चाहता हूँ कुषाणकालीन मथुरा की जैन सभ्यता नया और पुराना मानव कुछ तो विचारकर सच्चा जैन शिक्षा के दो रूप त्याग पूर्वक उपभोग करो पथ-भ्रष्ट आधुनिक पुस्तकालयों में पुस्तक-सूची(क्रमश:) निह्नववाद विद्वदवर विनयसागर आद्यपक्षीय नहीं पिप्पलक शाखा के थे तृष्णा और उसका अन्त ! महावीर भूले ? शिक्षा का जहर चंदनबाला और मृगावती श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री सत्यदेव विद्यालंकार श्री श्रीरंजन सूरिदेव ७ श्री अगरचन्द नाहटा श्री भंवरमल सिंघी ७ डॉ० एस० सी० उपाध्याय मुनि सुरेशचन्द्र जी शास्त्री मुनि श्री महाप्रभ विजयजी महाराज श्री यशोविजय उपाध्याय श्री उमाशंकर त्रिपाठी श्री इन्द्र ७ श्री अभय मुनि जी महाराज श्री महेन्द्र राजा ७ श्री मोहनलाल मेहता ७ श्री अगरचन्द नाहटा ७ श्री ज्ञान मुनि जी महाराज श्री कस्तूरमल बांठिया श्री उमाशंकर त्रिपाठी ७ श्री जयचन्द बाफणा ७ 9 م نه نه نه نه نه نه نه نه نه له ته له سه سه سه له سه ई० सन् १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५५ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ 9 २ 9 १७-१८ २०-२२ २३-२४ २५-२६ २७ २८-३१ ३३-३६ ३७-३८ ५-१२ १७-१८ १९-२० २२-२९ ३० ३१-३२ 9 9 २ ३ ३ 9 9 9 9 ३ Page #28 -------------------------------------------------------------------------- ________________ har 8 लेख अंक 9 9 9 9 9 ७ ४ 9 9 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० महेन्द्रकुमार न्यायाचार्य डॉ० मंगलदेव शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा प्रभुदास बालू भाई पटवारी महेन्द्र राजा श्री विनोद राय जैन साहू शान्ति प्रसाद जी श्री मोहनलाल मेहता श्री प्रेमी जी श्री अगरचन्द नाहटा श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० मङ्गलदेव शास्त्री देवेन्द्र कुमार शास्त्री श्री जमनालाल जैन प्रो० देवेन्द्र कुमार मुनि सुरेशचन्द्र शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा जैन इतिहास की एक झलक जैन दर्शन की देन : अनेकांत दृष्टि जैन रास साहित्य बाल संन्यास दीक्षा प्रतिबन्धक बिल उचित है। पुस्तक सूची (क्रमश:) दुर्बलता का पाप जैन समाज के लिए नई दिशा जैन आगमों की नियुक्तियां संसार की चार उपमाएं ज्योतिर्धर दो जैन विद्वान्-हरिभद्र और यशोविजय अहिंसक मधु भगवान् महावीर : एक श्रद्धांजलि पुनीत स्मरण ! अहिंसक समाज की रचना मानव संस्कृति और महावीर एक नया पुरोहितवाद जैनागमों में महावीर के जीवनवृत्त की सामग्री ई० सन् १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ पृष्ठ ३-८ १३-१४ १५-१६ १८-२३ २७-२९ ३०-३४ ३-७ ९-१२ १३-१४ १६-१९ २४-२९ ३-८ ९ १०-१९ २२-२५ २७-३१ ३४-३८ 9 9 9 9 9 ६-७ ७६-७ ७६-७ ६-७ ६-७ 9 9 Page #29 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २५ 9 9 ६-७ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष अंक सुश्री शरबती जैन ६-७ पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री प्रो० दलसुख भाई मालवणिया ६-७ श्री मदनलाल जैन श्री भगतराम जैन ७६-७ श्री हरजसराय जैन, 9 9 ६-७ 9 ६-७ 9 9 लेख भगवान् महावीर और अहिंसा अहिंसक महावीर महावीर भूले ! भगवान् महावीर हरिजन मंदिर प्रवेश श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम प्राकृत विद्यापीठ, वैशाली भगवान् बुद्ध भारत की अहिंसक संस्कृति (क्रमश:) श्रमण जीवन का बदलता हुआ इतिहास (क्रमश:) जैनसाहित्य में कलिङ्ग तीर्थंकरवाद भारत की अहिंसक संस्कृति पुस्तक सूची श्रमण जीवन का बदलता हुआ इतिहास पुष्पदंत, क्या पुष्पभाट थे ? यह अगस्त का महीना प्राचीनजैन राजस्थानी गद्य साहित्य 9 ई० सन् १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ पृष्ठ .. ४०-४५ ४८-५० ५१-५४ ५५-५६ ५८-६१ ६३-८० ३-१२ १३-२० २१-२५ ३०-३५ ३-६ ९-१६ २०-२३ २५-२६ २९-३४ ३-५ ७-९ ११-१८ 9 भदन्त आनन्द कौसल्यायन मुनि श्रीरामकृष्ण जी म.सा. मुनि श्री आईदान जी श्री अमरचन्द श्री कस्तूरमल बांठिया मुनि श्री रामकृष्ण जी म. सा. श्री महेन्द्र राजा मुनि श्री आईदान जी प्रो० देवेन्द्र कुमार श्री एम० के० भारिल्ल श्री अगरचन्द नाहटा 9 9 ७ 9 9 ७ १० 9 9 Page #30 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६ अंक 9 9 9 9 9 9 लेख जब आप घर से अकेली निकलें वर्षा ऋत का आहार-विहार वैशाली और दीर्घप्रज्ञ भगवान् महावीर जीवन की कला पर्युषण का सामाजिक महत्त्व पर्युषण पर्व पर एक ऐतिहासिक दृष्टिपात श्रमण जीवन में अधिकरण का उपशमन, पर्युषण पर्व और आज की नारी पर्युषण पर्व पर दो महत्त्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान पर्व और धर्मचर्या जैन ज्योतिष तिथि पत्रिका श्रमण संघ की शिक्षा का प्रश्न भोजन और उसका समय अपरिग्रहवाद अहिंसा ईमानदारी के वातावरण वाग्भट्टालंकार वज्रस्वामी श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष कु० रूपलेखा वर्मा वैद्यराज पं० सुन्दरलाल जैन प्रो० वासुदेवशरण अग्रवाल उपाध्याय अमर मुनि ७ जयन्त मुनि पं० मुनि श्री रामकृष्ण जी म० पं० मुनि कन्हैयालाल जी म० 'कमल' ७ सुश्री शरबती देवी जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री जयभगवान जैन श्री विज्ञ पं० मुनि श्री सुरेशचन्द्र जी म० ७ श्री अमृतलाल शास्त्री ७ मुनि श्री रामकृष्ण जी म. सा. ७ श्री राजकुमार जैन भारिल्ल डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल पं० अमृतलाल शास्त्री डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री 9 ई० सन् १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५५ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ पृष्ठ । १९-२० २३-२५ २६-३५ ३-६ १०-१५ १७-२१ २३-२७ ३४-३५ ३७-३९ ३-९ ११-१५ १६-१७ १८-२० २१-२२ २४-२९ ३१-३५ ४-७ ८-११ 9 ७ 9 १२ Page #31 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २७ लेख अंक १ ८ ई० सन् १९५६ १ १९५६ १ अध्ययन : एक सुझाव 'जी' की आत्मकथा - धर्म और दर्शन (क्रमश:) दीपावली : एक साधनापर्व महावीर भूले ? जीवन के दो रूप-धन और धर्म आर्यरक्षित धर्म और दर्शन टमाटर दया-दान की मान्यता प्रज्ञाचक्षु पं० सुखलाल संघवी अहिंसा और शिशु शिशु और संस्कृति डॉ० मारीआ मॉन्तेसरि व्यावहारिक क्रियाएँ विद्यालय से माता-पिता का सम्बन्ध मान्तेसरि शिक्षा पद्धति श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री महेन्द्र राजा प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन, मुनि श्री सुशीलकुमार जी श्री श्रीरंजन सूरिदेव ८ श्री कस्तूरमल बांठिया पं० मुनि श्री आईदान जी डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री मुनि श्री सुशीलकुमार जी आयुर्वेदाचार्य श्री सुन्दरलाल जैन श्री सतीश कुमार 'भैरव' श्री धनपति टुंकलिया श्री ए० एम० योस्तन श्री एस० आर० स्वामी श्री महेन्द्र राजा कु० आरती पात्रा श्रीमती सुशील कु० ऊषा मेहरा पृष्ठ १२-१४ १५-१७ २०-२३ ३३-३५ ४-१५ १६-१८ १९-२२ २३-२८ २९-३१ ३३-३६ ३७-३९ ३-९ १०-१४ १८-२१ २३-२८ २९-३२ ३८-४८ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ १९५६ . १९५६ १९५६ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ २ २ ८ ३-४ ३-४ ८ ८ ३-४ ३-४ ३-४ ३-४ Page #32 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अंक m m m ८ ३-४ o 5 ८ ५ 5 बालक की व्यवस्था प्रियता घरों में बच्चे मॉन्तेसरि शिक्षा के ५० वर्ष मान्तेसरि आन्दोलन शास्त्र वाचना की आज फिर आवश्यकता है कविरत्न श्री अमरमुनि जी, प्रभावशाली व्यक्तित्व बच्चों की मूलभूत आवश्यकताएँ गंगा का जल लेय अरघ गंगा को दीनो जैन कला प्रदर्शनी जनतंत्र के महान् उपासक भगवान् महावीर आधुनिक विज्ञान और अहिंसा भगवान् महावीर का व्यक्तित्त्व भगवान् महावीर की धर्म क्रान्ति भगवान् महावीर की दिव्य देशना वीरसंघ और गणधर महावीर ! आत्म विश्वास 5 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० मारीआ मॉन्तेसरि श्रीमती ब्रजेश कुमारी याज्ञिक श्री ए० एम० योस्तन श्री ए० एम० योस्तन श्री कस्तूरमल बांठिया मुनि श्री कान्तिसागर जी श्री कोमल जैन कु० इला खासनवीस पं० जमनालाल जैन श्री अगरचन्द नाहटा ८ डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री ८ श्री ज्ञानमुनि जी महाराज मुनि कन्हैयालाल जी 'कमल' प्रो० पृथ्वीराज जैन ८ पं० अमृतलाल शास्त्री श्रीरंजन सूरिदेव ८ श्री हरजसराय जैन ई० सन् १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ । १९५७ १९५७ १९५७ पृष्ठ ४९-५३ ५४-६० ६१-६६ ६७-७९ ४-७ ८-१० १२-१४ १५-२० २३-२८ ३६-३८ ३-७ १०-१४ १७-२३ २६-३० ३३-३४ ३५-३८ ४१-४२ 5 ५ ६ 5 w w w w ६ w w ६ 0.1 w Page #33 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९ अंक . که کی ८ ६ که که ८ ८ लेख इन्द्रभूति गौतम महावीर महान थे अस्पृश्यता का पाप आगम झूठे हैं क्या ? शिक्षा और उसका उद्देश्य स्थूलभद्र हमें सामाजिक मूल्यों को बदलना है बौद्धग्रन्थों में जैनधर्म वहाबी विद्रोह श्रमण संस्कृति की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि अक्षय तृतीया है एक दुनिया और एक धर्म डाक्टर अलबर्ट श्वीटजर संस्कृति की दुहाई हमारा उत्थान कैसे ! है मेघकुमार का आध्यात्मिक जागरण धर्म निरपेक्ष या ईश्वर निरपेक्ष समाजोन्नति सोपान के ग्यारह डंडे (क्रमश:) श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री विजयमुनि शास्त्री प्रो० विमलदास कोंदिया श्री रामकृष्ण जैन पं० दलसुख मालवणिया श्री एस० आर० शास्त्री डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री जमनालाल जैन डॉ० गुलाबचन्द्र जैन श्री महेन्द्र राजा श्री मनोहर मुनि जी श्रीमती कलादेवी जैन श्री एस० एस० गुप्त श्री माईदयाल जैन श्री रिषभदास रांका महासती सरला देवी जी श्री विजयमुनि श्री प्रभाकर गुप्त महात्मा भगवानदीन ८ ८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ -८ ९ ९ ई० सन् १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ पृष्ठ ४३-४८ ५०-५२ ५४-५५ ५६-५९ ४-७ ९-११ १३-१७ १८-२८ ३१-३४ ३५-३८ ४०-४३ ४-७ ८-११ १५-१८ २१-२३ २५-२७ ४-८ १०-१५ ८ ७ ८ ८ ८ ८ ९ १० १० ८ Page #34 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३० लेख आगम मर्यादा और संतों के वर्षावास जीवितधर्म किसके साथ क्या न खायें कषाय विजय का महापर्व आज आत्म चिन्तन का दिन है पर्युषण और हमारा कर्तव्य क्षमापना का आदर्श, विकास के नये पहाड़े सीखिए समाजोन्नति सोपान के ग्यारह डंडे आचांराग सूत्र (क्रमश:) आचार्य : एक मधुर शास्ता, जैनधर्म विषयक भ्रांतियां आचार्य प्रवर : आत्माराम जी महाराज आचारांग सूत्र (क्रमश:) धर्म : कल्याण का मार्ग भावनाओं का जीवन पर प्रभाव मैं लंदन में हूँ । मंगल प्रवचन श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मुनि श्री आईदान जी डॉ० राधाकृष्णन पं० सुन्दरलाल जैन वैद्य पं० मुनि श्री कन्हैयालालजी म० श्री सतीश कुमार श्री अगरचन्द नाहटा पं० श्री विजय मुनि, शास्त्र मुनि श्री नेमिचन्द्र जी महात्मा भगवानदीन पं० दलसुख मालवाणिया उपाध्याय अमरमुनि पं० बेचरदास जी दोशी पं० श्री ज्ञानमुनि जी म० पं० श्री दलसुख मालवणिया पं० मुनि श्री रामकृष्ण जी म० प्रो० धर्मेन्द्र कुमार कांकरिया श्री महेन्द्र राजा डॉ० राजेन्द्र प्रसाद वर्ष ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ९ ९ ९ ९ अंक १० १० ११ ११ ११ ११ ११ ११ १२ १२ १२ १२ ई० सन् १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ पृष्ठ २६-३३ ३४ ३५-३६ ३-५ ६-८ ९-१४ १५-१६ २०-२३ ३५-४० ४-७ १२-१६ १९-२७ ३२-३४ ७-९ १६-१९ २५-२६ ३१-३८ ३-९ Page #35 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक २ पृष्ठ १०-१२ २६-२७ २८-३० ३१-३३ ३-५ ई० सन् १९५७ १९५७ १९५७. १९५७ १९५८ १९५८ १९५८ or or or ६-९ or लेख आचारांगसूत्र (क्रमश:) आमिष भोजन मनुष्य का आहार नहीं है इसे दया धर्म कहें या और कुछ ? सब जीवों को समान समझें लिखाई का सस्तापन श्रीकृष्ण की जीवन झाँकी गाय का दूध आचारांगसूत्र (क्रमश:) जीवन संग्राम निरामिष भोजन : एक समस्या अहिंसा की तीन धारायें घृणा, प्रेम और स्वास्थ्य आचारांगसूत्र (क्रमश:) योग और भोग श्रमणसंस्कृति के मौलिक उपादान <<<Page #36 -------------------------------------------------------------------------- ________________ w लेख आचारांगसूत्र (क्रमश:) काव्यकल्पलतावृत्ति आचार्य श्री मोतीरामजी मंगल प्रवचन जैन साहित्य का सिंहावलोकन सर्वोदय निःशस्त्रीकरण साधु सन्तों की सेवा में आचांरागसूत्र आचरण या शोधपीठ अपरिग्रह की नई दिशा जीवन कला की शोध करें भ० महावीर के उपदेश युगानुकूल हैं; लेकिन ? घर न लौटा जमाली का मतभेद समता के प्रतीक महावीर प्रतिज्ञा आचारांग सूत्र श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० दलसुख मालवणिया श्री अगरचन्द नाहटा पं० श्री ज्ञानमुनि जी पं० सुखलाल जी पं० दलसुख मालवणिया श्री रमेशचन्द्र गुप्त मुनि आईदान जी श्री साधक पं० दलसुख भाई मालवणिया पं० मुनि श्री श्रीमल्ल जी म० श्री जमनालाल जैन, श्री सिद्धराज ढड्ढा श्री लक्ष्मीनारायण श्री विजय मुनि श्री मनोहरमुनि श्री ऋषभ दास रांका मुनि श्री सन्तबाल पं० दलसुख मालवणिया वर्ष ९ अंक ५ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ६-७ ८ ई० सन् १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ पृष्ठ ३-६ १२-१५ २०-२२ २३-२८ ३०-४० १२-१६ १७-२२ २५-२७ ३४-३७ ४१-४६ ४७-५० ५२-५५ ५८-६२ ६३-६५ ६६-६८ ६९-७२ ७३-७४ ९-१५ Page #37 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अन्न की समस्या महावीर से दूर आज का युग महावीर का युग है मोक्ष अहिंसक शक्तियों का ऐक्य आचारांगसूत्र हम संभलें स्त्री जागृति और समन्वय की साधना सार्वजनिक जीवन की शव परीक्षा जैनसाहित्यसेवा हम अनेकान्तवादी हैं या एकान्तवादी ? जवाहर और विनोबा : दो धाराएँ आचाराङ्गसूत्र भ० महावीर के जीवन की एक झलक एक निवेदन समन्वय आश्रम अब साधु समाज संभले श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक सतीश कुमार श्री माईदयाल जैन डॉ० ओमप्रकाश श्री शादीलाल जैन सतीश कुमार श्री दलसुख मालवणिया श्री सिद्धराज ढड्डा आचार्य विनोबा श्री भंवरमल सिंघी डॉ० इन्द्र श्री कस्तूरमल बांठिया पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री श्री दलसुख मालवणिया पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री मुनि समदर्शी 'आईदान' सतीश कुमार श्री शादीलाल जैन वर्ष ९ ई० सन् १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १० १९५८ १० १९५८ १० १९५८ १० १९५८ १० १९५८ १० १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ अंक ८ ८ ८ ३३ पृष्ठ १७-२० २३-२४ ३०-३४ १८ २०-२५ २६-२९ ३३-३६ ३७-४० ९-१२ १३-१५ १७-२० २२-२४ २५-२७ ३०-३२ १४-१६ १७-२० २१-२२ Page #38 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक महावीर के उपदेश प्रो० महेन्द्र कुमार 'न्यायाचार्य' गांधी सिद्धान्त प्रो० रामचन्द्र महेन्द्र यह नई परम्परा करवट ले रही है आचार्य सर्वे दान की आत्मकथा श्री भग्न हृदय नई समाज व्यवस्था कुमार प्रियदर्शी मूल में भूल श्री ताजमल बोथरा जैन धर्म सिद्धराज ढड्डा जैनसाधु की भिक्षा विधि सतीश कुमार चौथी आगम वाचना का सवाल श्री कस्तूरमल बांठिया श्रमणसंस्कृति का भावी विकास पं० कृष्णचन्द्राचार्य भगवान् महावीर सामाजिक और आर्थिक क्रांति के जनक मुनि श्री नेमिचन्द्र जी महावीर स्तुति श्री अगरचन्द नाहटा विपाकसूत्र की कहानियाँ श्री श्रीरंजन सूरिदेव अपरिग्रह के तीन उपदेष्टा डॉ० गुलाबचन्द्र चौधरी छद्मस्थानां च मतिभ्रमः श्री कस्तूरमल बांठिया गणधरवाद । डॉ० मोहनलाल मेहता चाचा नेहरू या नेहरू मामा श्री उमानीराम शर्मा अन्न का संकट श्री सतीश कुमार are or or or or or or orar22222222 अंक ई० सन् ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ ११-१२ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १९५८ १ १९५८ २ १९५८ २ १९५८ २ १९५८ पृष्ठ २५-२७ २८-२९ ३०-३२ ३३-३६ ४२-५६ ५७-५९ ६०-६३ ६४-६५ ६८-७० ७३-७४ ९-१२ १३-१५ १८-२० २२-२५ २६-३० ३-६ ८-१० १२-१४ Page #39 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३५ वर्ष अंक rrrrrr लेख विपाकसूत्र की कथायें (क्रमश:) भ० राम से दीपमाला का क्या संबंध जैन परम्परा प्राकृत और उसका साहित्य विपाकसूत्र की कथाएँ पक्ष से ऊपर उठकर सोचें जैन गीतों की परम्परा भारतीय दर्शनों में आत्मा बोलने की कला सीखिए समाजवाद, सर्वोदय और सत्याग्रह सर्वोदय : गांधी का मार्ग ग्रामदान से ग्राम-स्वराज्य ये मूल्य बदलें सर्वोदय और राजनीति सर्वोदय और हृदयपरिवर्तन शासन और सर्वोदय जैनसमाज और सर्वोदय सर्वोदय-प्रदर्शनी श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री श्रीरंजन सूरिदेव श्री ज्ञानमुनि जी डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री श्रीरंजन सूरिदेव श्री भ्रमर कुमार श्री प्यारेलाल श्रीमाल श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री मनोहर प्रभाकर श्री जैनेन्द्र कुमार दादा धर्माधिकारी श्री नेमिशरण मित्तल श्री रामकृष्ण शर्मा श्री सतीश कुमार श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री शीतल प्रसाद तायल सन्त विनोबा अनिल सेनगुप्ता 222222222222222 पृष्ठ । १७-२० - २१-२४ ९-११ १३-१९ २०-२६ २७-३० ९-११ १९-२६ ३०-३३ ई० सन् १९५८ १९५८ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ ४ ५ ५ १७-१९ २०-२४ २५-२८ २९-३१ ३२-३४ ३५-३७ ३८-३९ ४०-४२ १० १० १० ५ ५ ५ Page #40 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३६ वर्ष १० १० १० Suruwr rur ur rry श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री लक्ष्मीनारायण 'भारतीय' श्री माईदयाल जैन श्री ज्ञानमनि डॉ० अमरचन्द मित्तल मुनि श्री नेमिचन्द्र जी प्रो० विमलदास जैन श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता श्री कस्तूरमल बांठिया श्री माईदयाल जैन श्री कृष्णचन्द्राचार्य पं० दलसुख मालवणिया श्री हस्तिमल जी साधक डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्रीमती राजलक्ष्मी श्री सत्य सुमन श्री सतीश कुमार कुमारी पुष्पा लेख अहिंसा की कसौटी का क्षण प्रकाश पुंज महावीर वीतराग महावीर की दृष्टि गुप्तकाल में जैनधर्म हर क्षेत्र में अनेकान्त का प्रयोग हो श्रमण महावीर का युग सन्देश जीवनचरित्र ग्रन्थ समता और समन्वय की भावना पहले महावीर निर्वाण या बुद्ध निर्वाण काम बनाम बात दासी की गाथा शॉ का सन्देश, मुझे भूल जाओ? अहिंसा की प्रतिष्ठा का मार्ग भगवान् महावीर का समन्वयवाद अहिंसक भारत हिंसा की ओर शांति की बुनियाद अधूरा समाजवाद अपरिग्रह ही क्यों? १० १० ई० सन् १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ पृष्ठ ७-८ ९-१० ११-१३ १६-२२ २४-२८ २९-३२ ३५-३८ ३९-४४ १०-२१ २२-२३ २४-२६ ३२-३३ ४३-४५ ४६-५० ५१-५५ ५७-५८ ५९-६१ १०-११ ७-८ ७-८ १० १० १० १० ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ 22222 ७-८ ९ Page #41 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३७ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री सूरजचन्द्र ‘सत्यप्रेमी' श्री प्यारेलाल श्रीमाल मुनि समदर्शी कुमार प्रियदर्शी ई० सन् १९५९ - १९५९ १९५९ १९५९ पृष्ठ १७-१८ १९-२२ २३-२४ २५-२६ लेख ध्यान योग की जैन परम्परा समाज का कोढ़-जिम्मनवार क्या अणुव्रत आन्दोलन असाम्प्रदायिक है ? जीवन के दो पक्ष । राजस्थानी लोक कथाओं सम्बन्धी - साहित्य निर्माण में जैनों का योगदान एक दुःखद अवसान आध्यात्मिक साधना और उसकी परम्परायें वह बनजारा जीवन की बुनियाद -विनय वेष का त्यागी बिना पैसे की यात्रा नया विहान-नया समाज पर्यषण की सही आराधना पर्युषण एक चिन्तन सामायिक और तपस्या का रहस्य पर्वराज पर्युषण पर्युषण पर्व के आठ सन्देश श्री अगरचन्द नाहटा श्री रतन पहाड़ी कुमारी इन्दुकला महात्मा भगवानदीन श्री ज्ञानमुनि जी श्री माईदयाल सतीश कुमार श्री बद्रीप्रसाद स्वामी श्री हीराचन्द्र सूरि विद्यालंकार श्री लक्ष्मीनारायण भारतीय उपाध्याय अमरमुनि जी पं० अमृतलाल शास्त्री मुनि श्री नेमिचन्द्र जी #22222222222222222 Mrror arror- 22 2 2 2 2023 १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ २९-३१ ३८-३९ ९-१६ १८-२१ २४-२५ २६-२७ २८-३१ ३२-३५ ६-८, ९-१० ११-१२ १५-१६ १७-२१ Page #42 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ११ ११ लेख एकता की ओर एक कदम पर्युषण पर्व का पावन सन्देश क्षमा का आदर्श क्षमा पहला धर्म है जैन एकता क्षमा का पर्व जैन त्यागी वर्ग के सामने एक विकट समस्या अपरिग्रहवाद का यह उपहास क्यों ? इतिहास बोलता है पर्व की आराधना आत्मशुद्धि और साधना का पर्व जीवन में अनेकान्त दिगम्बर आर्या जिनमती की मूर्ति राम की क्षमायाचना सरस्वती का मंदिर युद्ध और उसके साधनों को खतम करो युवक के सामने एक प्रश्न चिन्ह साहित्य भवन के निर्माण का शुभारंभ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष श्री रिषभदास रांका श्री अगरचन्द नाहटा पं० रत्न श्री ज्ञानमुनि जी डॉ० कोमलचन्द जैन १० श्री भंवरमल सिघी १० मुनि श्री समदर्शी जी पं० बेचरदास जी दोशी पं० श्री मृगेन्द्रमुनि 'वैनतेय' श्री सत्यदेव विद्यालंकार उपाध्याय अमरमनि श्री माईदयाल जैन श्री मनोहर मुनि जी १० श्री अगरचन्द नाहटा पं० मुनि श्री कन्हैयालाल जी 'कमल' १० डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल ११ निकिता त्रुश्चेव ११ श्री अशोक ढड्डा सतीश कुमार ई० सन् १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ पृष्ठ । २२-२४ २५-२६ २९-३१ ३२-३४ ३५-३७ ३८-३९ ४०-४५ ८-१० ११-१६ १७-१९ २०-२१ २६-२८ ३१-३२ ३३-३४ ५-९ १३-१८ २१-२२ २४-२७ १२ : : : : : : Page #43 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख भगवान् महावीर का निर्वाणाब्द २५०० आ रहा है जैन साहित्य और अनुसंधान की दिशा जो विदा हो रहे हैं ! मानवतावादी समाज का आधार - अहिंसा संन्यास की मर्यादा वे आपको कितना चाहते हैं ? बुनियादी समस्या और उसका समाधान तेलगू भाषा के अवधानी विद्वानों की परम्परा ऋषिभाषित का अन्तस्तल संस्कृत कवियों के उपनाम चण्डरुद्र आचार्य जीवन सौरभ जीवन धर्म स्वच्छता: जीवन का अंग क्या जातिस्मरण भी नहीं रहा बढ़ते कदम अहिंसा का क्रमिक विकास सब धर्मों की मंजिल एक है श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री कस्तूरमल बांठिया श्री गोकुलचन्द श्री जमनालाल जैन मुनि श्रीसुशील कुमार जी आचार्य विनोबा श्रीयुत प्रवासी श्री गंगाधर जालान श्री अगरचन्द नाहटा श्री मनोहर मुनि श्री जगन्नाथ पाठक मुनिश्री लक्ष्मीचन्द्र जी चित्रभानु श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा किशोरीलाल मशरूवाला श्री कस्तूरमल बांठिया श्री राजकमल चौधरी पं० सुखलाल जी उपाध्याय श्री अमरमुनि, वर्ष ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ ११ अंक ov ४ ४ ४ ई० सन् १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९५९ १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० ३९ पृष्ठ २८-३२ ३३-३५ ३-६ ७-११ १३-१४ १५-१७ १८-२३ २४-२७ ७-८ १३-१७ १८-१९ २०-२२ २३-२६ २७-२८ २९-३४ ७-८ ९-१५ १६-१७ Page #44 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक पृष्ठ १८ १९-२२ २९-३१ ३४-३८ ७-८ ११ ११ लेख सर्वधर्म समानत्व की कुंजी धर्म का बहिष्कार या परिष्कार संघटन या विघटन अहिंसा-शोधपीठ पंचसूत्री कार्यक्रम जीवन का सही दृष्टिकोण भारतीय विचार प्रवाह की दो धारायें जैन विद्वान् साहित्यिक परम्परा को अक्षुण रखें। तेरापंथ सम्प्रदाय के हस्तलिखित ग्रन्थ संग्रहालय गुरुत्वाकर्षण से परमाणुशक्ति तक भगवान् महावीर की देन अहिंसा का अवतार क्या महावीर सामाजिक पुरुष थे जैनधर्म भगवान् या सामाजिक क्रांतिकारी अहिंसा का व्यावहारिक रूप जैन साहित्य की प्रतिष्ठा श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री अमरमुनि जी श्री अज्ञातशत्रु मुनि श्री नथमल जी काका कालेलकर श्री मनोहरमुनि आचार्य दादा धर्माधिकारी डॉ० मोहनलाल मेहता ___ श्री पूज्य जिनविजयसेनसूरि श्री अगरचन्द नाहटा श्री दुलीचन्द्र जैन पं० अमृतलाल शास्त्री श्री सुरेशमुनि डॉ. मोहनलाल मेहता श्री दिनकर श्री लक्ष्मीनारायण 'भारतीय' पं० मुनि श्रीमल्ल जी श्री गोकुलचन्द्र जैन ११ ११ '» » » » 333333ww wur ur us ई० सन् १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १३-१९ २०-२२ २३-२५ ३०-३४ ११ ११ १२ ११ ११ १३ १५-१६ १७-२३ २५-२७ २८-३१ ३२-३४ ११ Page #45 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अंक ६ ६ ६ ७-८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री जमनालाल जैन मुनि श्री समदर्शी श्री कस्तूरमल बांठिया श्री माईदयाल जैन श्री विजय मुनि श्री अगरचन्द नाहटा श्री शंकरराव देव श्री भरतसिंह उपाध्याय डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन मुनिश्री श्रीमल्ल जी श्री सुबोध मुनि, श्री विमलदास जैन मुनिश्री कन्हैयालाल 'कमल' श्री भागचन्द जैन प्रो० नेमिचरण मित्तल आचार्य जे० सी० कुमारप्पा श्री कस्तूरमल बांठिया अहिंसा, संयम और तप अपरिग्रह और आज का जैन समाज इस चर्चा को खतम कीजिए राष्ट्र निर्माण और जैन निशीथचूर्णि पर एक दृष्टि ज्ञानार्णव (ग्रन्थ परिचय) महावीर का कार्य मानवता के दो अखंड प्रहरी मानव संस्कृति और महावीर सम्यक् दृष्टिकोण सत्य पारखी दृष्टि पुरुष और नारी विकास की तीन सीढ़ियाँ मनुष्य जन्म या मानवता महाकवि हस्तिमल्ल मानव साध्य है या साधन युद्ध के लिए जिम्मेवार कौन ? क्या थे ? क्या हैं ? क्या होना है ? ७-८ & : : : : : : : : : : : : : : : : : ई० सन् १९६० - १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० पृष्ठ । ३५-३९ ४१-४३ ४४-४७ ४९-५० ५४-५८ ५९-६२ ९-११ १४-२० २१-२३ २५-२९ ३०-३१ ३२-३७ ४१-४४ ४७-४९ ९-११ १३-१५ १७-२१ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ Page #46 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ४२ वर्ष ११ ई० सन् १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० ११ ९ ११ १० १११० or or or or or १९६० लेख प्रधानाचार्य या आचार्य श्रमण संघ के सामने एक सवाल ! जैनाचार्य श्री काशीराम जी धार्मिक जीवन की प्रेरणा धर्म और पुरुषार्थ आहार शुद्धि के लिए क्या करें ? निगष्ठनातपुत्त लोंकागच्छीय विद्वानों के तीन संस्कृत ग्रन्थ दुविधा कर्तव्य बोध अध्यात्म साधना कैसी हो आध्यात्मिकखोज पाप क्या है ? असमता मिटाने का उपाय स्वार्थी तो हम भी हैं ? श्री किशनदास कृत 'उपदेश बावनी' उपजीवी समाज श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री सुरेशमुनि शास्त्री मुनिश्री कन्हैयालाल जी 'कमल' श्री समन मुनि उपाध्याय अमर मुनि पं० सुखलाल जी मुनिश्री निर्मल कुमार श्री भरतसिंह उपाध्याय श्री अगरचन्द नाहटा श्री मधुप कुमार डॉ० सर्वपल्ली राधाकृष्णन आचार्य विनोबा पं० बेचरदास दोशी मुनिश्री श्रीमल्ल जी श्री उमेशमुनि रामप्रवेश शास्त्री अम्बाशंकर नागर श्री भ्रमर जी सोनी ११ #rrr222222 AMAXXXX पृष्ठ २३-२५ २६-२९ ३०-३३ ९-१२ १४-१७ १९-२० २१-२३ २४-२८ ३०-३१ ७-८ १०-१२ १३-१५ १९-२१ २२-२३ २४-२७ २८-३२ ३३-३५ or or or or १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० १९६० or or ११ Page #47 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 43 लेख LAIMr दिल मा दिवडो थाय पैसों का मूल्य भ० महावीर के निर्वाण दिन का क्या - संदेश हो सकता है? जीवन दृष्टि भारतीय संस्कृति को भ० महावीर की देन भ० महावीर का निर्वाणोत्सव ! के हम दूसरों को दूसरों के ही दृष्टिकोण से समझें जीव और जगत सभ्यता और संघर्ष अपभ्रंश साहित्य : उपलब्धियाँ और प्रभाव ई भीगी अखियाँ आचार्य सोमदेवसूरि केशी ने पूछा विश्वविज्ञान पार्श्वनाथ के दो पट्टधर नए अपवाद आदर्श गृहस्थी श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक __वर्ष अंक श्री अगरचन्द नाहटा श्री माता जी 11 12 श्री लक्ष्मी नारायण 'भारतीय' पं० बेचरदास जी दोशी श्री कन्हैयालाल भुरड़िया मुनिश्री समदर्शी जी 11 12 श्री कस्तूरमल बांठिया 121 पं० बेचरदास दोशी 12 1 भाई श्री बंसीधर जी 12 1 डॉ० देवेन्द्र कुमार 12 1 श्री नवरत्न कपूर 12 1 श्री गोकुलचन्द्र जैन 121 श्री गोकुलचन्द्र जैन 12 2 पं० बेचरदास जी दोशी 12 श्री अमिताभ 12 मुनिश्री कन्हैयालाल जी 'कमल' 12 श्रीमती कृष्णा मेहरोत्रा 12 x x x x x rrrrr. ई० सन् 1960 1960 / 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 1960 पृष्ठ . 8-9 10-11 13-17 18-20 27-29 31-33 7-12 13-15 17-20 21-25 27-30 31-33 11-13 16-19 20-21 22-28 29-31 Page #48 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक 2 पृष्ठ / 32-33 my 6-7 लेख वैराग्यशतक सन् 1961 श्रमणों का युगधर्म वनस्पति विज्ञान वनस्पति की गतिशीलता क्या लोकप्रियता योग्यता की निशानी है सत्य और बापू आचार्य हेमचन्द्र और उसकी साहित्यिक मान्यताएँ सफलता के तीन तत्त्व जैन इतिहास लेखकों का आवाहन वचन-बोध वैदिक परम्परा शब्दों की शवपूजा न हो श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० नवरत्न कपूर मुनिश्री नेमिचन्द्र जी श्री पं० बेचरदास दोशी श्री कोमलचन्द्र शास्त्री श्री कोमलचन्द्र शास्त्री श्री रामप्रवेश शास्त्री डॉ. देवेन्द्र कुमार डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री कस्तूरमल बांठिया श्री भागचन्द्र जैन पं० बेचरदास दोशी मुनि श्री नथमल जी श्री रतन पहाड़ी श्री गोपीचन्द धारीवाल श्रीरंजन सूरिदेव श्रीमती शकुन्तला मोहन 12 12 12 12 12 123 12 ई० सन् 1960 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 2 <<<<<Page #49 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 45 अंक 5 5 ک ک ई० सन् 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 पृष्ठ / 7-8 9-12 13-14 17-21 22-23 27-35 36-38 7-10 و ی س लेख होली का व्यापक आधार शास्त्र और सामाजिक क्रांति श्राप क्या? वरदान क्या ? एक अज्ञात जैनमुनि का संस्कृति दूतकाव्य-“हंसदूत" पंजाबी में जैन साहित्य की आवश्यकता आचांराग का परिचय जीवन विकास की प्रेरणा : सहयोग तत्वोपदेष्टा महावीर परमार्थनिष्ठ महावीर तीर्थंकर महावीर प्रेमयोगी महावीर प्रणयी महावीर प्रेरणादायी महावीर ध्यान योगी महावीर युगदृष्टा महावीर अन्तरदृष्टा महावीर क्रांतिकारी महावीर मातृ-वत्सल महावीर श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष श्रीअमर मुनि 12 पं० सुखलाल जी 12 प्रो० नेमिशरण मित्तल श्री अगरचन्द नाहटा 12 श्री माईदयाल जैन मुनिश्री कन्हैयालाल जी 'कमल' . पं० श्री प्रकाश मुनि जी. सुश्री कमला जैन 12 श्री हरजसराय जैन 12 श्री कस्तूरमल बांठिया मुनि श्री श्रीमल्ल जी 12 श्री सतीश कुमार श्री लक्ष्मीनारायण भारतीय मुनिश्री नथमल जी 12 श्री साधक श्री मनोहर मुनि जी पं० बेचरदास दोशी 12 श्री जमनालाल जैन 6-7 6-7 6-7 6-7 6-7 1961 6-7 6-7 12-14 15-16 17-20 21-25 28-30 31-37 38-40 41-44 45-47 6-7 6-7 1961 1961 1961 1961 1961 6-7 6-7 Page #50 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख वर्ष 12 अंक 6-7 6-7 6-7 6-7 6-7 6-7 महामानव महावीर शीलपरायण महावीर ब्रह्मनिष्ठ महावीर तपोधन महावीर शांतिदूत महावीर महावीर के समकालीन आचार्य साधु शिक्षक बनें श्रीमद् भागवत में ऋषभदेव जैन साधुओं का संस्थारूपी परिग्रह विचार शक्ति बसुमती महाकाव्य बदलते सामाजिक मूल्य और हमारा चिन्तन जैन दर्शन का शब्द विज्ञान वीतराग महावीर भारतीय दर्शनों की आत्मा सुख की मूर्ति : दुख की परछाई भारतीय दर्शनों की समन्वय परम्परा उपकारी पशुओं की यह दुर्दशा श्रमण : अतीत के झरोखे में . लेखक श्री भ्रमर कुमार मुनिश्री कन्हैयालाल जी 'कमल' वैद्य अमरचन्द्र जैन श्री वृजनन्दन मिश्रा कुमारी ललिता जैन श्री गोकुलचन्द जैन श्री सुबोध मुनि श्री रमाकान्त झा श्री माई लाल जैन श्री माता जी श्री अगरचन्द नाहटा श्री गोकुलचन्द जैन श्री मनोहर मुनि जी श्री कृष्णचन्द्राचार्य उपाध्याय श्री अमरमुनि / श्री मानकचन्द डॉ० देवराज पं० अमृतलाल शास्त्री ई० सन् 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 g g g g g g 2 5 5 5 5 5 5 5 wuuuuuaaaaa पृष्ठ 50-51 52-53 54-55 56-57 58 65-69 70-72 73-75 9-10 12-14 17-20 21-22 28-31 7-8 9-11 13-14 21-25 26-29 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 12 Page #51 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में 47 वर्ष 12 12 12 - लेख महावीर के जीवन पर नया प्रकाश साधुसंस्था और लोकशिक्षण 'नौ' का अंक महावीर का अन्तस्तल अभिमान बुरा है लोकशिक्षण के गुण व योग्यताएँ एक अज्ञात ग्रन्थ की उपलब्धि सात शत्रु, सात मित्र महातपस्वी श्री निहालचन्द्र जी पर्युषण : परिचय और व्याख्या पर्युषण पर्व का मतलब पर्युषण : आत्म चिन्तन से सामाजिक चिंतन की ओर पर्युषण और सामाजिक शुद्धि पर्युषण और बौद्ध धर्म पर्युषण और पश्चाताप संवत्सरी लेखक श्री कस्तूरमल बांठिया मुनिश्री नेमीचन्द जी डॉ० नवरत्न कपूर श्री सूरजचन्द सत्यप्रेमी श्री ज्ञानमुनि जी मुनिश्री नेमिचन्द्र जी श्री अगरचन्द नाहटा श्री सच्चिदानन्द श्री मुनिलाल जैन सुश्री शरबती जैन भाई बंशीधर ई० सन् पृष्ठ 1961 31-33 1961 - 35-40 1961 1961 17-19 1961 22-23 1961 24-25 1961 29-30 1961 31-32 1961 33-38 1961 9-11 1961 13-14 12 12 12 -222222224AARAM डॉ. देवेन्द्र कुमार जैन मुनि श्री नेमिचन्द जी श्री उदयचन्द जैन मुनि श्री कन्हैयालाल श्री समीर मुनि 'सुधाकर' 12 1961 1961 1961 1961 1961 15-17 19-22 27-30 30 31-35 12 Page #52 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 48 o. ई० सन् 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 or or लेख जैन आगम और विज्ञान सेठ भैरोंदान जी सेठिया गांधी जी और अहिंसा पर्युषण: दस लक्षण सन्त श्री गणेशप्रसाद वर्णी विज्ञान राजनीति के चंगुल में वर्णी जी के स्मारक का प्रश्न ? अस्वाद व्रत भी तप है। संस्कृति क्या है ? सोमदेवसूरि और जैनाभिमत वर्ण-व्यवस्था विचारणीय प्रश्न जीवन दृष्टि नई पीढ़ी और धर्म एकदिव्य विभूति मालवीयजी श्रमण : एक व्याख्या समाज का धर्म महावीर की साधना और सिद्धान्त श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष अंक श्री कस्तूरमल बांठिया बीकानेर जैन संघ 12 11 श्री रामप्रवेश शास्त्री 12 12 श्री गुलाबचन्द जैन 12 12 श्री कैलाश चन्द्र शास्त्री 12 12 श्री मनोहर मुनि शास्त्री श्री गोकुल चन्द श्री अगरचन्द नाहटा 12 डॉ० नामवर सिंह 12 श्री गोकुलचन्द जैन श्री समीर मुनि 'सुधाकर 131 श्री विश्व बन्धु श्री सागरमल जैन 'साथी' श्री वासुदेवशरण अग्रवाल 13 2 श्री महेन्द्र कुमार जैन प्रो० देवेन्द्र कुमार जैन 13 2 कु० विजया जैन . 13 2 पृष्ठ / 36-40 43-45 9-13 14-15 16-18 21:22 23-24 25-31 34-39 9-14 19-21 25-26 31-34 9-10 11-13 21-23 24-26 13 or 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 1961 Ww W Page #53 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 49 वर्ष अंक or الله w الله o الله or الله 13 ov الله الله 13 4 . 0 الله 0 له 0 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री त्रिलोचन पन्त डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल प्रो० उदयचन्द्र जैन प्रो० राजदेव त्रिपाठी श्री गुलाबचन्द जैन श्री गोकुलचन्द जैन मुनिश्री पद्मविजय जी श्री विजयमुनि शास्त्री मुनिश्री सन्तबाल महासती श्री ललित कुमारी जी मुनिश्री शान्तिप्रिय शास्त्री श्री हरजसराय जैन कमल जैन 'दीदी' श्री अगरचन्द नाहटा आचार्य आत्माराम जी श्री सुरेशमुनि शास्त्री श्री जमनालाल जैन . श्री कस्तूरमल बांठिया लेख मेरे संस्मरण : मालवीय जी विश्व मानव महामना मालवीय महामना की महानता अद्भुत भिखारी एवं महान दाता स्व० डॉ० भगवानदास जैनसंस्कृति और विवाह जीवन की सच्ची क्रांति ज्योतिर्मय जीवन समन्वयकार : आचार्य श्री श्रुत और सेवा के प्रतीक: आचार्य श्री प्रथम और अन्तिम दर्शन एक मधुर स्मृति आचार्य श्री का पुण्य जीवन आचार्य श्री आत्माराम जी की आगमसेवा शास्त्रोद्धार की आवश्यकता श्रद्धांजली अर्पित करने वालों से अपरिग्रही महावीर बुद्ध और महावीर का परिनिर्वाण 13 ई० सन् पृष्ठ 1961 . 33-35 1962 9-13 1962 26-28 1962 29-31 1962 38-40 1962 8-21 1962 25-27 1962 17-21 1962 23-25 1962 27-29 1962 30-32 1962 33-35 1962 36-37 40 1962 41 1962 43-45 1962 4-7 1962 8-16 0 rrr mr >> >> 33 ru له 0 له 0 الله 0 الله 0 ow الله 1962 13 الله 5 or الله 136 13 Page #54 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख m श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक भाई श्री बंशीधर जी डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री विजयमुनि शास्त्री श्री माईदयाल जैन श्री महेन्द्रराजा जैन वर्ष अंक 13 6 '. 13 .6 136 13 6 6 - 6 ई० सन् 1962 1962 1962 1962 1962 1962 पृष्ठ 19-21 22-26 29-32 33-42 43-45 47-53 w or महावीर जयन्ती का अर्थ भगवान् महावीर जन्मकालीन परिस्थितियां महावीर का दर्शन कराइए जैन संस्कृति और महावीर नई राहें भगवान् महावीर जैनधर्म में 'एकान्त नियतिवाद और सम्यक् नियति' का भेद मातृभाषा और उसका गौरव जैन शासन तेजस्वी कैसे बने .. बुद्ध और महावीर का निर्वाण काव्य में लोकमंगल महावीर का मंगल उपदेश अनेकांत : अहिंसा का व्यापक रूप श्रमण संघ के दस वर्ष आज का फैशन-धूम्रपान आगमों का आनुयोगिक वर्गीकरण श्रीमद् राजचन्द्र का परिचय الله الله الله 13 - 13 पं० फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री डॉ० वासुदेव शरण अग्रवाल मुनिश्री नथमल जी श्री कस्तूरमल बांठिया श्री गंगासागर राय . डॉ० हरिशंकर वर्मा डॉ० जगदीशचन्द्र जैन डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री सरदारमल जैन मुनिश्री कन्हैयालाल जी 'कमल' श्री रतिलाल दीपचन्द देसाई 7-8 . 7-8 7-8 7-8 7-8 7-8 7-8 7-8 9 9 الله له سه له مه سه سه لبه 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 6-8 9-13 21-23 25-36 42-44 49-50 51-52 17-19 22-25 9-12 13-18 - - - 13 13 13 - 10 - Page #55 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् 1962 13 W or 6 or पृष्ठ 24-25 1-4 9-13 26-30 32-36 1-3 4-5 W or or 13 W or लेख प्राकृत भाषा के चार कर्मग्रन्थ क्षमापना दिन श्रमण संस्कृति में क्षमा वीतराग की उपासना धर्ममय समाज रचना की आधारशिला क्षमापना गांधीजी : व्यक्तित्व और नेतृत्व जैन चेयर की आवश्यकता अरविन्द का अनेकान्त दर्शन सुधार का मूलमंत्र जीवन तो संयम ही है काव्य का प्रयोजन : एक विमर्श व्रत का मूल्य संथारा आत्महत्या नहीं है हिंसा का बोलबाला भगवान् महावीर और दीवाली भगवान् महावीर का निर्वाण उपाध्याय कवि श्री अमर मुनि श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री अगरचन्द नाहटा श्री लक्ष्मीनारायण भारतीय श्री कानजी भाई पटेल श्री ज्ञानमुनि जी मुनिश्री नेमिचन्द जी श्री श्रीप्रकाश श्री शरद कुमार ‘साधक' श्री श्रीप्रकाश दुबे श्री जुगलकिशोर मुख्तार प्रो० दरबारी लाल कोठिया श्री गंगासागर राय डॉ० नेमिचन्द्र शास्त्री श्री दलसुख मालवणिया श्री ताराचन्द्र मेहता डॉ० ज्योति प्रसाद जैन श्री महेन्द्र कुमार शास्त्री श्री विजय मुनि जी 13 13 12 12 6-8 w W 13 13 13 12 12 12 : 12 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1962 21-24 25-27 29-34 35-39 6-7 8. 9-13 15-23 0 or 141 . 14 141 1 Page #56 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 52 वर्ष अंक पृष्ठ 24-26 27-37 14 14 2 14 9-13 26-28 29-33 9-17 लेख शीत ऋतु का आहार-विहार शान्तिपर्व का आचारदर्शन अनेकान्त : अहिंसा दर्शन और धर्म भेद में अभेद का सर्जक स्याद्वाद ख्याल का भविष्य धर्म और विद्या विकास का मार्ग धर्म क्षेत्रे हिम क्षेत्रे रोगों का इलाज जैनों ने भी युग का आह्वान सुना जैन परम्परा का आदिकाल (क्रमश:) जैन और बौद्ध आगमों में विवाह विधि महात्मा भगवानदीन जी संसार की हिंसामय परिस्थिति और हम स्मृति पुरुष : श्री पूज्य गणेश लाल जी महाराज श्री जिनवल्लभसूरि की प्राकृत साहित्य सेवा समाजसेवी स्व० नन्हेमल जी जैन जैन परम्परा का आदिकाल (क्रमश:) श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वैद्यराज सुंदरलाल जैन श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा डॉ० जगदीशचन्द्र शास्त्री पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री श्री छगनलाल शास्त्री श्री प्यारेलाल श्रीमाल पं० सुखलाल जी श्री कानजी भाई पटेल श्री दुर्गाशंकर द्विवेदी श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री कोमलचन्द्र जैन श्री जमनालाल जैन श्री सतीश कुमार मुनिश्री श्रीमल्लजी, श्री अगरचन्द नाहटा श्री माईदयाल जैन डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री ई० सन् 1962 1962 1962 1962 1962 1962 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 14 <<<<<<Page #57 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 53 अंक लेख होली ई० सन् 1963 पृष्ठ 18-19 20-25 27-30 41-47 5 14 14 14 14 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक महात्मा भगवानदीन जी मुनि समदर्शी डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव मुनि समदर्शी उपाध्याय श्री अमरमुनि श्री लक्ष्मीनारायण 'भारतीय डॉ० मंगलदेव शास्त्री डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री समीरमुनि 'सुधाकर' श्री कस्तूरमल बांठिया पं० मुनि श्रीमल्ल जी सुश्री शशिप्रभा जैन पं० चैनसुख दास जैन डॉ० बूलचन्द श्री श्रीप्रकाश दुबे डॉ० गुलाबचन्द्र चौधरी मुनि श्री नेमिचन्द्र जी सेठ रतनलाल जी हिन्दी जैन कवियों का आत्म-स्वातंत्र्य साधना की अमर ज्योति भगवान् महावीर का अध्यात्म दर्शन जैनधर्म : भ० महावीर की कसौटी पर भगवान् महावीर की महामानवता जैन परम्परा का आदिकाल / सबके कल्याण में अपना कल्याण भगवान् महावीर और हरिकेशी अहिंसा निउणा दिट्ठा श्रमण भ० महावीर का दीक्षा-दर्शन शांति के अग्रदूत-भ० महावीर धर्म का सर्वोदय स्वरूप विश्व अहिंसा संघ और प्रवृत्तियाँ कर्म और अनिश्वरवाद भगवान महावीर और उनका उपदेश भगवान् महावीर और धर्म क्रांति . 6-7 6-7 6-7 6-7 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 14 14 14 148 148 148 6-8 9-11 12-18 21-28 29-31 34-43 44-48 49-52 1-2 6-8 9-12 13-17 21-25 Page #58 -------------------------------------------------------------------------- ________________ . लेख 14 14 ........ USS 5 श्रमण : अतीत के झरोखे में | लेखक महात्मा भगवानदीन डॉ० देवेन्द्र कुमार श्री भागचन्द जैन श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० गंगासागर राय डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री शरद कुमार 'साधक' मुनि श्री नेमिचन्द्र जी पं० मुनि श्री कन्हैयालालजी 'कमल' श्री सरदारमल जैन श्री उमाशंकर त्रिपाठी ‘बन्धुजी' मुनि श्री नन्दीषेण विजय श्री प्रतेशचन्द जैन श्री जयभिक्खु पं० मुनि श्री रामप्रसाद जी मुनि श्री पद्मचन्द जी शास्त्री उपाध्याय अमरमुनि , पं० मुनिश्री श्रीमल्ल जी महाराज मैं महावीर को याद क्यों करता हूँ भगवान् महावीर के समसामयिक आचार्य मौलिक चिन्तन की आवश्यकता भारतीय आचार्यों की दृष्टि में काव्य के हेतु स्वामी जी धनीराम जी महाराज अहिंसा से कोई विरोध नहीं शुद्धि प्रयोग की झांकी पद्मलेश्या के रस का उपमेय मद्य क्यों ? रक्षाबंधन भाई साहब जैन धर्म का दृष्टिकोण क्या आप स्वीकार करेंगे धन्य यशोदा, तुम्हे ! गुरुदेव की जीवन रेखाएँ कृपालु गुरुदेव श्रद्धेय वाचस्पतिजी: एक पुण्य स्मृति संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि govora o o o o o o o or 14 14 14 14 14 अंक ई० सन् पृष्ठ 1963 - 26-29 8 1963 31-33 9 1963 9-16 1963 20-23 1963 24-27 1963 28-31 9 1963 36-39 10 1963 5-8 1963 9-11 10 1963 11-145 1963 15-18 10 1963 19-21 10 1963 22-23 10 1963 25-31 11-12 1963 17-28 11-12 1963 30-32 11-12 1963 33-38 11-12 1963 41-45 T 14 14 14 Page #59 -------------------------------------------------------------------------- ________________ . * वर्ष 14 14 14 14 14 14 लेख संयममूर्ति गुरुदेव कुछ संस्मरण और श्रद्धा के फूल में श्री व्याख्यान वाचस्पति जी महाराज स्वामी श्री मदनलाल जी स्थानकवासी समाज का दुर्भाग्य श्री मदनलाल जी महाराज संयम और त्याग की मूर्ति वंदन हो अगणित त्याग-पत्र का स्पष्टीकरण वाणी का जादूगर मेरी कुछ अनुभूतियाँ चरणारविन्द में एक महत्त्वपूर्ण भेंट भाव-विभोर श्रद्धांजलि स्वामी विवेकानन्द जैनधर्म और उनका सामाजिक दृष्टिकोण चीनी आक्रमण: अहिंसा को चुनौती श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री प्रकाश मुनि जी 'विशारद' श्री किशोरीलाल जैन श्री समीर मुनि श्री विमल जैन 'अंशु' पं० श्री ज्ञानमुनि जी पं० बेचरदास जी श्री कस्तूरीलाल जैन श्री मधुकर मुनि श्री हरजसराय जैन श्री विजयमुनि शास्त्री श्री शादीलाल जैन श्री प्रेमचन्द जी महाराज मैडम. लुइस वैस श्री सुदर्शन मुनि जी श्री श्रीप्रकाश दुबे श्री लक्ष्मीनारायण 'भारतीय' डॉ० गोपीचन्द धाड़ीवाल अंक ई० सन् पृष्ठ 11-12 1963 __48-49 11-12 1963 50-53 11-12 1963 54-55 11-12 1963 56-58 11-12 1963 62-64 11-12 1963 65-66 11-12 1963 67-71 11-12 1963 77-79 11-12 1963 81-82 11-12 1963 83-85 11-12 1963 88-91 11-12 1963 91-93 11-12 1963 94-96 11-12 1963 99-106 1 1963 1 1963 9-18 1 1963 21-24 15 7-8 15 Page #60 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 56 अंक लेख प्राच्यभारती का अधिवेशन रघुवंश की अज्ञात जैन टीका पूज्यश्री मंगल ऋषि जी दुर्भाग्य में से सौभाग्य प्राप्त करें डॉ० भयाणी के व्याख्यान चातुर्मास व्यवस्था में सुधार कीजिए हम क्रान्ति का आह्वान करें पूज्य श्री जिनविजयेन्द्र सूरि जी प्रत्येक आत्मा परमात्मा है श्री अतरचन्द जैन साधुओं का शिथिलाचार साहित्य और साहित्यिक सस्ता और सुलभ भोजन २६वां प्राच्यविद्या विश्व सम्मेलन शुद्धि प्रयोग की झांकी मेरी पंजाब यात्रा ऋषिभाषित का परीक्षण वसंत ऋतु का आहार-विहार श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० नवरत्न कपूर श्री अगरचन्द नाहटा श्री कृष्णचन्द्राचार्य मुनिश्री संतबाल जी श्री श्रीप्रकाश दुबे श्री अन्नराज जैन श्री चांदमल कर्णावट श्री शंकरमुनि पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री श्री ओमप्रकाश अग्रवाल श्री सौभाग्यमल जैन संत विनोबा डॉ० कौशल किशोर जैन डॉ० नारायण हेमनदास सम्तानी मुनि श्री नेमिचन्द जी श्री श्रीप्रकाश दुबे श्री मनोहरमुनि शास्त्री वैद्यराज श्री सुन्दरलाल जैन & : : : : : : : : : : : 2 ई० सन् 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1963 1964 1964 1964 1964 1964 1964 1964 1964 पृष्ठ 26-30 31-33 38-40 9-14 19-20 21-23 24-27 28-30 31-33 35-36 9-13 15-28 35-39 3-8 9-13 14-23 26-31 34-35 15 : : : : : : 15 Page #61 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ५७ लेख श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री महेन्द्र कुमार शास्त्री श्री श्रीप्रकाश दुबे पं० दरबारीलाल कोठिया श्री रामजी भाई पटेल डॉ० ज्योति प्रसाद जैन डॉ० मोहनलाल मेहता श्रीरंजन सूरिदेव १५ १५ १५ अंक ५-६ ५-६ ५-६ ई० सन् १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ पृष्ठ ७-१० १२-१४ १७-२० २३-२७ ३३-३४ ३७-४१ ४२-४७ ५-६ १५ ५-६ १५ ५-६ १९६४ तीर्थंकर और उनकी शिक्षाएं पुण्डरीक का दृष्टांत 2स्याद्वाद और अनेकान्तवाद श्रमण परम्परा में धर्म और उसका महत्त्व धर्म और सहिष्णुता महावीर का तप कर्म मुनि वारिषेण और उनका सम्यकत्व भगवान् महावीर के जीवनचरित्र और उन पर विभिन्न परम्पराओं का प्रभाव धार्मिक एकता वर्धमान से महावीर कैसे बने भगवान् महावीर के बाद श्री रत्नमुनि: जीवन परिचय आगरा में श्रीरत्नमुनि शताब्दी समारोह तुलनात्मक दर्शन पर दो दृष्टियाँ .. समता के संदेशदाता : भगवान् महावीर वर्धमान महावीर के जीवन का एक भ्रान्त दृश्य ५-६ ५-६ ५-६ . ५-६ श्री कस्तूरमल बांठिया मुनि श्री नेमिचन्दजी श्री जिनविजयसेन सूरि श्री समीर मुनि 'सुधाकर' श्री विजय मुनि श्री कृष्णचन्द्राचार्य श्री श्रीप्रकाश दुबे श्री लक्ष्मीनारायण भारतीय डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन : : : : : : : : : ७-८ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ ४९-६३ ६५-६८ ६९-७१ ७२-७५ ५-११ १२-१६ १७-२१ २५-२८ ३३-४६ ७-८ १५ ७-८ ७-८ ७-८ ७-८ Page #62 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ७-८ ७-८ लेख उत्तराध्ययन सूत्र- धार्मिक काव्य ग्रीष्म ऋतु का आहार-विहार o मेघदूतम् की एक अज्ञात बालाक्बोध पंजिका सुहृदय श्री मुनिलाल जैनी स्थानांग और समवायांग (क्रमश:) शिवशर्मसूरिकृत 'कर्म प्रकृति' अहिंसा के तीन क्षेत्र (क्रमश:) पंचयाम धर्म का एक पर्यवेक्षण मील का पत्थर भगवान् महावीर के आठ सन्देश सर्वोदय और जैन दृष्टिकोण उद्भट विद्वान् पं० बेचरदास दोशी स्थानांग व समवायांग रायपसेणिय उपांग और उसका रचनाकाल (क्रमश:) अहिंसा के तीन क्षेत्र क्रोध और क्षमा वैराग्य क्या है ? श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक प्रो० कानजी भाई पटेल वैद्यराज श्री सुन्दरलाल जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री हरजसराय जैन पं० बेचरदास दोशी डॉ० मोहनलाल मेहता काका कालेलकर श्री वृजनन्दन विजयेन्द्र 'दर्शी' श्री ज्ञानमुनि श्री महावीरचन्द धारीवाल श्री गुलाबचन्द जैन पं० बेचरदास दोशी . “E : : : : : : : : : : : Stor or or or or or or ई० सन् १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ पृष्ठ । ४८-५७ ५९-६२ ६३-६४ ६६-६८ २-६ ७-१५ १६-१९ २०-२३ २४-२७ २८-३२ ३३-३६ ३७-३८ २-८ १५ १५ ९ १० १५ १५ १० । श्री कस्तूरमल बांठिया काका कालेलकर समीरमुनि स्व० छोटालाल हरजीवन सुशील १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ ९-१६ १६-१७ १८-२१ २२-२९ १५ Page #63 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक अंक १० लेख भगवान् महावीर और समता का आचरण जैनधर्म और आज की दुनिया भगवान् महावीर की देन रायपसेणिय और उसका रचनाकाल (क्रमश:) आत्मबलीसाधक और दैवीतत्त्व क्रांतिकारी महावीर . जैनदृष्टि से चारित्र विकास (क्रमश:) भगवान् महावीर की अहिंसा क्षमा शांति के ये सुशीतल स्रोत रायपसेणिय और उसका रचनाकाल (क्रमश:) भगवद्गीता और जैनधर्म जैनदृष्टि से चारित्र विकास अहिंसा की लोकप्रियता जैन समाज में फोटो प्रचार हमारे कवल (ग्रास) को मुर्गी के अण्डे की उपमा क्यों संस्कृति का स्वरूप मुनि नेमिचन्द्र श्री ऋषभचन्द्र मुनि बसन्तविजय श्री कस्तूरमल बांठिया मुनि श्री संतबाल जी श्री रत्नचन्द जैन शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता श्री नरेन्द्र जैन श्री पारसमल 'प्रसून' श्री कस्तूरमल बांठिया श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता श्री ज्ञानमुनि उपाध्याय हस्तीमल जी E : : : : : : : : : : : : : : ::::::::: ५९ ई० सन् पृष्ठ १९६४ ३०-३४ १९६४ - ३५-३६ १९६४ ३७-४० १९६४ २-८ १९६४ ९-१२ १९६४ १३-१६ १९६४ १७-२३ १९६४ २४-२६ १९६४ २७-२८ १९६४ ३-१० १९६४ ११-१२ १९६४ १३-१८ १९६४ १९-२४ १९६४ २५-२९ g g g g मुनि कन्हैयालाल 'कमल' श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री १२ १२ १९६४ १९६४ ३०-३२ ३३-३४ १५ Page #64 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख भगवान् महावीर और नारी जाति रायपसेणियउपांग और उसका रचनाकाल सत्य के आवरण या मूर्छायें कर्म प्राभृत अथवा षट्खंडागमएक परिचय (क्रमश:) "डॉ० गोविन्द त्रिगुणायक का जैन दर्शन व संत कवि" सम्बन्धी वक्तव्य रायपसेणियउपांग और उसका रचनाकाल अद्वेष दर्शन अंगग्रन्थों का बाह्यरूप अण्डे खाना भी हिंसा ही है जैनधर्म की आचारसंहिता कर्मप्राभृत अथवा षट्खंडागमः एक परिचय (क्रमश:) लवण एवं अंकुश की देवविजय का भौगोलिक परिचय द्वीपसागर प्रज्ञप्ति श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री विमल जैन श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता श्री अगरचन्द नाहटा श्री कस्तूरमल बांठिया काका कालेलकर ० बेचरदास दोशी श्री शिवनारायण सक्सेना श्री रिखबचंद 'लहरी' डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० ऋषभ चन्द्र श्री अगरचन्द नाहटा वर्ष १५ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ अंक १२ १ १ १ १ २ २ २ mr m ई० सन् १९६४ १९६४ १९६४ १९६४ पृष्ठ ३५-३७ ३-११ १२-१९ १९६४ २०-२७ १९६४ २८-३६ १९६४ ३-११ १९६४ १२-१४ १९६४ १५-२२ १९६४ २३-२५ १९६४ २६-२८ २९-३२ १९६५ ३-१५ १९६५ १८-१९ Page #65 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ६१ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० के० भुजबलि शास्त्री मुनि दुलहराज जी वर्ष १६ १६ अंक ३ ३ ई० सन् १९६५ १९६५ पृष्ठ २०-११ २२ लेख डणायक रविकीर्ति उपदेश विधि कर्मप्राभृत अथवा षटखंडागम - एक परिचय (क्रमश:) त्याग का मनोविज्ञान पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान की कार्यदिशा जैनदर्शन और भक्ति-एक थीसिस भगवान् बुद्ध और भगवान् महावीर क्या जैनधर्म जीवित रह सकता है ? रहस्यवादी जैन अपभ्रंशकाव्य का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव कर्मप्राभृत अथवा षट्खंडागमएक परिचय (क्रमश:) रायपसेणियउपांग और उसका रचनाकाल की समीक्षा श्रमण संस्कृति का हार्द रहस्यवादी जैन अपभ्रंशकाव्य का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव (क्रमश:) डॉ० मोहनलाल मेहता श्री माँ, अरविन्दाश्रम पं० सुखलाल संघवी डॉ० देवेन्द्र कुमार पं० दलसुख मालवणिया श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ २३-२८ २९-३३ ३४-३६ ३-८ ९-२१ २२-२५ १६ १६ ४ ४ श्री प्रेमचन्द जैन शास्त्री १९६५ २६-३१ डॉ० मोहनलाल मेहता ४ १९६५ ३२-३७ मुनि कल्याणविजय श्री लक्ष्मीनारायण 'भारतीय' १६ ५ १९६५ १९६५ ३८ २-११ श्री प्रेमचन्द शास्त्री ___१६ ५ १९६५ १२-१७ Page #66 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ६२ वर्ष अंक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मुनिश्री दुलहराज डॉ० मोहनलाल मेहता . Shri Ramchandra Jain श्री शिवनारायण पाण्डेय डॉ० देवेन्द्र कुमार शास्त्री ई० सन् १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ पृष्ठ १८ १९-२२ २३-२८ w ur ३-८ ९-११ Cr लेख विस्मृत परम्परायें कर्मप्राभृत अथवा षट्खंडागम- एक परिचय (क्रमश:) Ahimsa in the Ancient East वीरों का श्रृंगार : अहिंसा क्रांतिदर्शी महावीर रहस्यवादी जैन अपभ्रंशकाव्य का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव (क्रमश:) अतिशय क्षेत्र पपौरा कर्मप्राभृत अथवा षट्खंडागम- एक परिचय पुनरुत्थान हमारी प्रवृत्तियाँ और उनका मूल्यांकन श्रावकज्ञप्ति के रचयिता कौन ? दर्शन और धर्म नन्दीसूत्र की एक जैनेतर टीका रहस्यवादी जैन अपभ्रंशकाव्य का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव अहिंसा पउमचरियं में वर्णित राम की वनयात्रा (क्रमश:) १६६ wr श्री प्रेमचन्द्र जैन शास्त्री डॉ० अमृतलाल शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता श्री विद्याभिशु 'आधुनिक' डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री पं० बालचन्द्र शास्त्री श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा r www w 9 9 9 १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १२-१७ १८-२२ २३-२९ ३०-३१ ३२-३६ ३-९ १०-१२ १३-१४ १६७ 9 श्री प्रेमचन्द्र जैन शास्त्री श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल डॉ० के० ऋषभचन्द्र 9 १९६५ १९६५ १९६५ १५-१९ २०-२८ ३-८ - Page #67 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ६३ वर्ष अंक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री समीर मुनि 'सुधाकर' मुनि दुलहराज श्री शिवनारायण सक्सेना डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री गोकुलचन्द जैन श्री गणेशमुनि शास्त्री डॉ० के० ऋषभचन्द्र डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री अगरचन्द नाहटा श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल १६८ १६ ८ १६ लेख जल में लगी लाय * सचेल-अचेल . ॐ हमारे पतन का मुख्य कारण: हिंसा मूल्यों का संकट और आध्यात्मिकता विवाह-भारतीयेत्तर परम्परायें (क्रमश:) सोमदेवकृत यशस्तिलक दर्शन और विज्ञान : एक चिन्तन पउमचरियं में वर्णित राम की वनयात्रा विवाह-भारतीयेतर परम्परायें कल्याणसागरसूरि को प्रेषित सचित्र विज्ञप्तिलेख आत्म विज्ञान विगत हजार वर्ष के जैन इतिहास का सिंहावलोकन (क्रमश:) अहिंसा की महानता कषायप्राभृत भौतिकवाद व अध्यात्मवाद विगत हजार वर्ष के जैन इतिहास ई० सन् १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ पृष्ठ ९-१० ११-१५ १६-१९ २०-२३ २४-३२ २-७ ८-१२ १३-१८ १९-२८ २९-३० ३१-३८ १६ १६ श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० शिवनारायण सक्सेना डॉ० मोहनलाल मेहता श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल १० १० ३-११ ०५ १ ६ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १६ १० १६-२१ २२-२९ Page #68 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 2 लेख का सिंहावलोकन (क्रमश:) अद्भुत दान पउमचरियं के कुछ भौगोलिक स्थल कषायप्राभृत हृदय का माधुर्य-करुणा आत्म शुद्धि का पर्व पर्युषण विगत हजार वर्ष के जैन इतिहास का सिंहावलोकन धर्म का मूल आधार अहिंसा रामकथा-विषयक कतिपय भ्रांत धारणायें आचार्य दिवाकर का प्रमाण: एक अनुशीलन ब्रह्मचर्य की गुप्ति पुष्पदन्त की रामकथा आस्रव व बंध ज्योतिर्धर महावीर श्रीमद्देवचन्द्र रचित कर्मसाहित्य जैन संस्कृति और परिवार व्यवस्था महान् साहित्यकार आचार्य हरिभद्रसूरि श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री कस्तूरमल बांठिया श्री विद्याभिक्षु डॉ० के० ऋषभचन्द्र डॉ० मोहनलाल मेहता मुनि श्री विनयचन्द जी श्री सरदारमल जैन श्री कस्तूरमल बांठिया श्री शिवनारायण सक्सेना डॉ० के० ऋषभचन्द्र श्रीरंजन सूरिदेव उपाध्याय श्री हस्तिमल जी डॉ० देवेन्द्रकुमार श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल देवेन्द्र शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा प्रेमसुमन जैन डॉ० ज्योति प्रसाद जैन वर्ष १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १६ १७ १७ 2 2 2 2 2 2 2 १७ १७ १७ १७ अंक ११ ११ ११ ११ ११ ११ १२ १२ १२ १-२ १-२ १-२ १-२ १-२ १-२ १-२ १-२ ई० सन् १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ पृष्ठ ३-१४ १५-१६ १७-२१ २२-२६ २७-३३ ३४-३५ ३-१९ २०-२३ २४-३१ ३-६ ७-१३ १४- १८ १९-२५ २६-३२ ३३-३७ ३८-५२ ५३-५५ Page #69 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक १-२ १७ १-२ १७ १७ १-२ ३ ३ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक दिगम्बर परम्परा में श्रावक के गुण और भेद श्री कस्तूरमल बांठिया जैन और बौद्धआगमों में गणिका श्री कोमलचन्द जैन लब्धियां श्री अम्बालाल प्रेमचंद शाह उपासक प्रतिमायें डॉ० मोहनलाल मेहता पउमसिरीचरिउ के मूलस्रोत्र (क्रमश:) डॉ० के० ऋषभचन्द्र समाजशास्त्र की पृष्ठभूमि में जैनों के सम्प्रदाय श्री लक्ष्मी नारायण 'भारतीय' संघर्ष और आंलिगन डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री जैनधर्म में मानवतावाद श्री कस्तूरचन्द ललवानी Concept of Aimsa in the Shantiparvan Shri Bashistha Narayan Sinha श्वेताम्बर-परम्परा में श्रावक के गुण और भेद । श्री कस्तूरमल बांठिया पउमसिरिचरिउ के मूल स्रोत्र । डॉ० के० ऋषभचन्द्र धर्म : मेरी दृष्टि में मुनि श्री नेमिचन्द्र जी लब्धिफल श्री अम्बालाल प्रेमचन्द शाह अपभ्रंश की पूर्वस्वयंभूयुगीन कविता डॉ० देवेन्द्र कुमार संवर और निर्जरा श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल धर्म और विज्ञान आचार्य रजनीश संस्कृत साहित्य के इतिहास के जैन सम्बन्धित संशोधन श्री अगरचन्द नाहटा १७ १७ १७ १७ ई० सन् १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ पृष्ठ ५६-६६ ६७-७२ ७३-८४ ८५-८८ ३-८ ११-१९ २०-२४ २५-३२ ३३-४० ३-१४ १६-२३ २४-२८ २९-३९ ५-९ ११-१७ १८-२१ २२-२६ १७ १७ १७ ५ १७५ १७ ५ Page #70 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 5 3 3 पृष्ठ २७-३४ ३५-३७ ३-११ १२-१३ १४-१९ २०-२२ २३-२८ ३०-३३ लेख डॉ० जैकोबी और वासी चन्दन कल्प (क्रमश:) Rişabhadeva : A study श्रावक के गुण और भेद (क्रमश:) अपूर्वरक्षा मोक्ष जैन समाज द्वारा काव्य सेवा डॉ० जैकोबी और वासी चन्दनकल्प (क्रमश:) उत्सर्ग और अपवाद श्रावक के गुण और भेद (क्रमश:) डॉ० जैकोबी और वासी चन्दनकल्प (क्रमश:) आचारांग में उल्लिखित परमत विश्वव्यवस्था और सिद्धान्तत्रयी जैन समाज व्यवस्था श्रावक के गुण और भेद डॉ० जैकोबी और वासी चन्दनकल्प (क्रमश:) आर्षप्राकृत का व्याकरण (क्रमश:) जैन उपाश्रय व्यवस्था और कर्मचारीतंत्र श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक अंक १७ मुनि श्री महेन्द्र कुमारजी 'द्वितीय' १७ ५ Dr. Bashistha Narayan Sinha १७ ५ श्री कस्तूमल बांठिया १७६ श्री विद्याभिक्षु १७६ श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल श्री रूपचन्द जैन १७६ मुनिश्री महेन्द्र कुमारजी (द्वितीय) १७ मुनिश्री पुण्यविजय जी १७ श्री कस्तूरमल बांठिया १७ मुनिश्री महेन्द्र कुमारजी (द्वितीय) १७ पं० बेचरदास दोशी १७७ श्री अजित मुनि 'निर्मल' १७७ श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा १७ श्री कस्तूरमल बांठिया १७ ८ मुनिश्री महेन्द्र कुमारजी (द्वितीय) १७ पं० बेचरदास दोशी श्री कृष्णलाल शर्मा १७ ८ ơ ơ 9 ई० सन् १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ 9 १४-२० २१-२४ २५-३१ ३२-३६ ३-१० १३-१८ १९-२६ २७-३३ 9 9 9 9 Page #71 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख समग्र जैन संघ को नम्र विज्ञप्ति हेमचन्द्र और भारतीय काव्यालोचना पउमचरियं : संक्षिप्त कथावस्तु आर्षप्राकृत का व्याकरण पुष्कर के सम्बन्ध में शोध अहिंसा की परिणति समन्वय और सत्याग्रह गुणव्रत पिण्डनिर्युक्ति श्वेताम्बर जैनों के पूजाविधियों का इतिहास (क्रमश:) न्यायोचित विचारों का अभिनन्दन पउमचरियं : संक्षिप्त कथावस्तु (क्रमश:) महर्षि अरविन्द जैन दर्शन की दृष्टि में निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थी संघ श्वेताम्बर जैनों के पूजाविधियों का इतिहास (क्रमश:) वीरनन्दी और उनका चन्द्रप्रभचरित श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मुनि श्री न्याय विजयजी डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० के० ऋषभ चन्द्र पं० बेचरदास दोशी श्री अजित मुनि काका कालेलकर डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० जगदीशचन्द्र जैन श्री कस्तूरमल बांठिया पं० श्री जुगल किशोर डॉ० के० ऋषभ चन्द्र श्री लक्ष्मीचन्द जैन मुनिश्री पुण्यविजय जी श्री कस्तूरमल बांठिया पं० अमृतलाल शास्त्री मुख्तार वर्ष १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ १७ अंक ु १० १० १० १० १० av ov ११ ११ ई० सन् १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ ६७ पृष्ठ ३४-३९ २-७ ८-११ १२-१४ १७ १८- २१ २२-२७ २८-३१ ४-१५ १६-२१ २२-२७ २८-३१ ३२-३७ १९६६ २-१४ १९६६ १८-२५ Page #72 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ६८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक अंक ११ १७ डॉ० के० ऋषभचन्द्र श्री सुदर्शन लाल जैन डॉ० के० ऋषभचन्द्र ई० सन् १९६६ १९६६ १९६६ पृष्ठ २६-३० ३१-३८ ३-८ १२ १२००४ पउमचरियं : संक्षिप्त कथावस्तु यज्ञ : एक अनुचिन्तन (क्रमश:) पउमचरियं : संक्षिप्त कथावस्तु 'महावीरचर्या' ग्रन्थ सम्बन्धी महापंडित राहुल जी के दो पत्र जैन समाज का धर्म प्रचार यज्ञ : एक अनुचिन्तन धर्म का एक आधार : स्वस्थ समाज रचना अपभ्रंश की शोध कहानी राक्षस : एक मानव वंश भारतीय विद्याविद् डॉ० ज्हान ज्यार्ज बुहलर थुल्लवंश की एक अपूर्ण प्रशस्ति सेवा : एक विश्लेषण अहिंसा की साधना आचारांग के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द जैनधर्म और व्यावसायिक पूंजीवाद : वेबर की अनुदृष्टि श्री अगरचन्द नाहटा श्री समीर मुनि 'सुधाकर' श्री सुदर्शनलाल जैन साध्वी श्री मंजुला डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० के० ऋषभचन्द्र श्री कस्तूरमल बांठिया श्री भंवरलाल नाहटा श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्री गोपीचन्द धाडीवाल साध्वी श्री कनकप्रभा १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ ९-१० १२-१४ १५-२७ २८-३० ३-७ ८-१२ १३-२० २१-२५ २६-४२ ४३-६० ६१-६४ १८ १८ १८ १८ १-२ १-२ १-२ १९६६ १९६६ १९६६ श्री कृष्णलाल शर्मा १८ १-२ १९६६ ६५-७२ Page #73 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ६९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री नन्दलाल मारु श्री लक्ष्मीनारायण श्री कस्तूरमल बांठिया पं० बेचरदास दोशी डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव अंक १८ १-२ १८ १-२ १८३ ई० सन् १९६६ १९६६ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ पृष्ठ । ७३-७७ ७८-७९ ३-९ १०-२३ २९-३१ ३२-३६ १८३ له » लेख अहिंसा : एक विश्लेषण क्या लोकाशाह विद्वान् नहीं थे? जैनधर्म और नारी श्रावक किसे कहा जाय आर्ष प्राकृत का व्याकरण विश्व का निर्माण तत्त्व : द्रव्य "कुवलयमाला" मध्ययुग के आदिकाल की एक जैन कथा विद्याधर : एक मानव जाति आचार्य हेमचन्द्र के पट्टधर आचार्य रामचन्द्र - के अनुपलब्ध नाटकों की खोज अत्यावश्यक जैन सिद्धान्त और समाजव्यापी प्रयोग जैन संस्कृति का विस्तार पउमचरियं में अनार्य जातियां प्रज्ञाचक्षु राजकवि श्रीपाल की एक अज्ञात रचना-शतार्थी आत्म निरीक्षण श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० के० ऋषभ चंद्र १९६७ १९६७ २-१७ १८-२० » » » श्री अगरचन्द नाहटा मुनि नेमिचन्द्र श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री डॉ० के० ऋषभ चन्द्र १८ १८ ४ ५ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ २१-२५ २६-३० ३१-३७ २-५ تم تم श्री अगरचन्द नाहटा श्री पारसमल 'प्रसून १८ १९६७ १९६७ ६-८ ९-१० تم . Page #74 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ७० लेख १८ १८६ अहिंसा का जैन दृष्टि से विश्लेषण कषाय प्राभृत की व्याख्यायें मुनिरामसिंह कृत 'पाहुडदोहा' : एक अध्ययन अहिंसा : एक विश्लेषण आगम प्रकाशन में सहयोग कौन और कैसे करे ? बौद्ध और जैन आगमों में जननी ज्ञान तपस्वी मुनि श्री पुण्यविजय जी महावीर और बुद्ध : कैवल्य और बोधि पुलिस अष्टलक्षी में उल्लिखित अप्राप्य रचनायें जैनमुनि और मांसाहार परिहार श्री सिद्धर्षिगणि कृत उपमितिभवप्रपंचाकथा आर्षप्राकृत का व्याकरण अक्षय तृतीया : एक चिन्तन जैन और बौद्ध आगमों में जननी- एक पहलू अहिंसा : एक विश्लेषण जैनधर्म में सामाजिक प्रवृत्ति की प्रेरणा श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री नन्दलाल मारु डॉ० मोहनलाल मेहता श्री प्रेमचन्द जैन श्री बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० कोमलचन्द जैन श्री रतिलाल दीपचंद देसाई मुनि श्री नगराज जी पं० बेचरदास दोशी श्री अगरचन्द नाहटा श्री कस्तूरमल बांठिया श्री गोपीचंद धाड़ीवाल पं० बेचरदास दोशी श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री सौ० सुधा राखे श्री गोपीचंद धाड़ीवाल मुनि श्री नथमल # : : : : : : : : : : : : : : पृष्ठ ११-१४ १५-२२ २-९ । १०-१५ १६-२५ २६-३३ ३४-३८ ३-६ ७-८ ई० सन् १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ Tw us ur w us 9 9 9 9.vvvvv १४-२५ २६-३१ ३-६ ७-१२ १४-१७ १८-१९ २०-२३ Page #75 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक १८८ १८९ १८ ९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक बौद्ध और जैन आगमों में पुत्रवधु डॉ० कोमलचन्द जैन महाकवि स्वयंभू और तुलसीदास श्री प्रेमसुमन जैन रोटी शब्द की चर्चा पं० बेचरदास दोशी क्या रावण के दस मुख थे? डॉ० के० ऋषभ चन्द्र श्रमण और श्रमणोपासक श्री कस्तुरंमल बांठिया जैन संस्कृति और प्रचार : एक चिन्तन श्री गजेन्द्र मुनि कुवलयमालाकहा का कथा स्थापत्य संयोजन श्री प्रेमसमन जैन रामकथा के वानर : एक मानवजाति । डॉ० के० ऋषभ चन्द्र बौद्ध और जैन आगमों में जननी : एक स्पष्टीकरण डॉ० कोमलचन्द जैन भारतीय साहित्य और आयुर्वेद श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री आचार्य हेमचन्द्र के योगशास्त्र पर एक प्राचीन टीका श्री जुगल किशोर मुख्तार श्री सिद्धर्षिगणि कृत उपमितिभवप्रपंचाकथा से संकलित 'धर्म की महिमा' श्री गोपीचंद धाड़ीवाल जिनसेन का पार्श्वभ्युदय : मेघदूत का माखौल ___डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव अहिंसा : एक विश्लेषण श्री नन्दलाल मारु पउमचरिउ की अवान्तर कथाओं में भौगोलिक सामग्री डॉ० के० ऋषभ चन्द्र ई० सन् १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ voranoor or ora ७१ पृष्ठ २४-३३ ३-१४ १५-१९ २२-२४ २५-२९ ३०-३६ ३-८ ९-१२ १५-१९ २०-३३ a १९६७ २-१७ १८ १८ १८ ११ ११ ११ १९६७ १९६७ १९६७ १८-२३ २८-३२ ३३-३७ १८ १२ १९६७ ३-१६ Page #76 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख ___ वर्ष अंक १२ ई० सन् १९६७ पृष्ठ । १९-२६ १८ १२ १-२ १९ १९ १-२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक आचार्य हरिभद्रसूरि प्राकृत के एक सशक्त कथाकार श्री प्रेमसुमन जैन अष्टलक्षी में उल्लिखित जयसुन्दरसूरि की शतार्थी की खोज आवश्यक श्री अगरचन्द नाहटा श्रीरंजन सूरिदेव की कुछ मोटी भूलें श्री जुगलकिशोर मुख्तार पुष्पदन्त का कृष्ण काव्य डॉ० देवेन्द्र कुमार तप क्या है। पं० बेचरदास दोशी बौद्ध और जैन आगमों में जननी सौ० सुधा राखे सम्यग्दर्शन श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल भगवान् महावीर की २५वीं निर्वाणशती कैसे मनायें श्री नन्दलाल मारु पार्वाभ्युदयकाव्य : विचार-वितर्क डॉ० श्रीरंजन सूरि देव अपभ्रंश कथाकाव्यों का हिन्दी प्रेमाख्यानों के शिल्प पर प्रभाव श्री प्रेमचन्द जैन । अध्यात्मवाद : एक अध्ययन श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्रमण भगवान् महावीर का जन्मस्थान श्री नरेश चन्द्र मिश्र 'भंजन' पेथड़रास के कर्ता कौन श्री सनत्कुमार रंगाटिया बौद्ध और जैन आगमों में नारी जीवन : एक और स्पष्टीकरण डॉ० कोमलचन्द जैन मगध साम्राज्य का प्रथम सम्राट श्रेणिक श्री गणेश प्रसाद जैन १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ १९६७ २७-२९ ३०-३३ ३-१३ १४-१९ २०-२६ २७-३१ ३२-३६ ३९-४२ १-२ به ر ا م ४३-५३ ५४-६४ १९६७ १९६७ १९६८ १९६८ ३-१५ १९ الله له १६-२० १९३ १९६८ १९६८ २३-२४ २५-३४ Page #77 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख एक प्रतिक्रिया आचार्य हेमचन्द्र और जैन संस्कृति भगवान् महावीर कालीन वैशाली में जैनधर्म प्रसिद्धि प्राप्त श्वेताम्बर जैनों की कुछ कृत्रिम कृतियां जिनचन्द्रसूरिरचित श्रावकसामाचारी की पूरी प्रति की खोज समराइच्चकहा का अविकल गुर्जरानुवाद जैन शिक्षा : उद्देश्य और पद्धतियाँ जैन संस्कृति और राजनीति समवायांगसूत्र में विसंगति लंका में जैन धर्म मुनिरामसिंह का उग्र अध्यात्मवाद सप्तक्षेत्रिरासु अर्थकथानक : हिन्दी भाषा का प्रथम आत्मचरित जैनों में मूर्ति और उसकी पूजा पद्धतियों में विकास और विकार जैन धर्मानुसार जीव, प्राण और हिंसा श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री श्री शांतिलाल मांडलिक श्री कस्तूरमल बांठिया श्री अगरचन्द नाहटा कस्तूरमल बांठिया श्री डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्री नन्दलाल मारु श्री डी० जी० महाजन डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० सनत्कुमार रंगाटिया श्री गणेशमुनि शास्त्री श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा वर्ष १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ १९ अंक ३ k Kaw ४ ४ ४ ४ 29 ७ ई० सन् १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ पृष्ठ ३५ ३-६ ६-८ १९६८ १९६८ ७३ १९६८ ३२-३५ १९६८ ६-१८ १९६८ १९-२३ १९६८ २४-३१ ३२-३४ ५-११ १२-२२ २३-२८ २९-३८ ९-३० ६-१७ १८-२२ Page #78 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ७४ १९७ १९७ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल श्री भंवरलाल नाहटा श्री नन्दलाल मारु श्री कस्तूरमल बांठिया श्री सनत्कुमार रंगाटिया डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव श्री अगरचन्द नाहटा Dr. M. L. Mehta डॉ० देवेन्द्र कुमार डॉ० सुनीति कुमार चाटुा १९ १९ पृष्ठ २३-२५ २६-३४ ३५-३८ ७-११ १२-२५ २६-२९ ३०-३१ ३२-३९ लेख संसार का अन्तरंग प्रदेश मंगलकलश कथा नई पीढी और धर्म अभव्यजीव नवग्रैवेयक तक कैसे जाता है ? विद्याविलासरास आचार्य वादिराजसूरि पं० रामचन्द्रगणिरचित सुमुखनृपति काव्य Some Important Prakrit Work मानवमूल्यों का काव्य भविसयत्तकहा प्राकृत का अध्ययन श्रवणबेलगोला के शिलालेख, दक्षिणभारत में जैनधर्म और गोम्मटेश्वर महावीर का वीरत्व श्री बालाभाई वीरचन्द देसाई 'जयभिक्खू' भारतीय बाङ्गमय में प्राकृतभाषा का महत्त्व कवि रत्नाकर और रत्नाकरशतक अभय कुमार श्रेणिकरास (क्रमश:) दसधर्म योग साधना है ई० सन् १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९ 9 9 9 vvvvv - or १९ १०-१२ १९ or or or श्री गणेश प्रसाद जैन डॉ० भानीराम वर्मा श्री कस्तूरमल बांठिया पं० बेचरदास दोशी डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव डॉ० श्रीसनत्कुमार रंगाटिया श्री अर्हसबंडोबा दिमे १९ १० १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १३-२१ २२-२७ २८-३७ ६-१६ १७-२४ २५-३० ३१-३६ १९ १९ १० Page #79 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० बेचरदास दोशी श्री गणेशमुनि शास्त्री डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा डॉ० सनत्कुमार रंगाटिया ११ ई० सन् १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ ७५ पृष्ठ ५-८ ९-१४ १५-२१ २२-२८ र १९ ११ लेख महाराष्ट्री प्राकृत अहिंसा के इतिहास में निरामिषता आचार्य कुन्दकुन्द और उनका साहित्य अभयकुमारश्रेणिकरास भारतीय विश्वविद्यालयों में जैन साहित्य और संस्कृति विषयक शोध कार्य वास्तविक्तावाद और जैनदर्शन जैनधर्म की प्राचीनता श्री जय भिक्खू के ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद ग्वालियर के तोमरवंशीयराजा जैन वाङ्गमय में आयुर्वेद Progress of Prakrit & Jain Studies आचार्य सिद्धसेन दिवाकर की साहित्य साधना मुनिमेषकुमार-रचित किरातमहाकाव्य की अवचूरि जैन महाकवि पं० बनारसीदास का रहस्यवाद महाकवि रत्नाकर के कतिपय अध्यात्मगीत Compendia of Dęstivāda भगवान् महावीर के जीवनचरित्र १९ १९ १२ १२ डॉ० गोकुलचन्द जैन मुनि श्री महेन्द्र कुमार 'द्वितीय' श्री शांतिलाल मांडलिक श्री कस्तूरमल बांठिया डॉ० राजाराम जैन श्रीरंजन सूरिदेव Dr. Nath Mal Tatia श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री गणेश प्रसाद जैन पं० के० भुजबलि शास्त्री Dr. M.L. Mehta श्री कस्तूरमल बांठिया १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६८ १९६९ २९-३८ ५-१७ १८-२४ २५-३४ ६-१३ १४-२२ २४-३५ ५-१४ २० २० २ २ २० २ २० २ २०३ १५-१७ १८-२२ २३-२५ २६-२८ ५-२२ Page #80 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष २० २० २० २० २० पृष्ठ २३-३१ ३२-३६ ५-७ ८-१७ १८-२४ २० २० २० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री रमेशचन्द्र जैन पं० बेचरदास दोशी डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० देवेन्द्र कुमार श्री कस्तूरमल बांठिया श्री कैलाशचन्द्र जैन डॉ. मोहनलाल मेहता श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्री गोपीचन्द धाड़ीवाल श्री अगरचन्द नाहटा श्री गणेश प्रसाद जैन . डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ. देवेन्द्र मुनि शास्त्री डॉ० कोमलचन्द जैन डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा डॉ० मोहनलाल मेहता श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री लेख राजस्थानी के विकास में अपभ्रंश का योगदान डॉ० नेमिचन्द्र जी शास्त्री और 'अरिहा' शब्द रूपी और अरूपी कवि वीर और उनका जंबूसामिचरिउ जैन साहित्य के इतिहास की पूर्वपीठिका एकपत्र धर्म और अधर्म श्रमण संस्कृति का सार भोग तृष्णा हर्षकुलरचित कमलपंचशतिका जैनपुराणों में रामकथा आकाश भारतीय संस्कृति में दान का महत्त्व (क्रमश:) पालि क्या बोलचाल की भाषा थी जैनधर्म की प्राचीनता (क्रमश:) काल भारतीय संस्कृति में दान का महत्त्व pmm » » » » 33 3 3 3 w www 99 ई० सन् १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ २० २० ५ २० २०६ २० ६ २० ६ ५-७ ८-१७ १८-१९ २०-२२ २३-३५ ५-७ ८-१६ १७-२१ २२-२९ ७-९ १०-२० २० ७ २०७ Page #81 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ৩৩ २० २० लेख अज्ञात कवि कृत शीलसंधि जैनधर्म की प्राचीनता (क्रमश:) तमिल क्षेत्रीय जैन योगदान जिनराजसूरि कृत नैषधमहाकाव्यवृत्ति जैनधर्म की प्राचीनता (क्रमश:) * Jainism in Gujarat जैनधर्म और बिहार २० २० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० सनत्कुमार रंगाटिया डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री डी० जी० महाजन श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा Dr. Harihar Singh डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा Dr. Harihar Singh डॉ० देवेन्द्र कुमार श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री डॉ० सुदर्शनलाल जैन डॉ० राजाराम जैन डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० देवेन्द्र मुनि शास्त्री डॉ० सुदर्शनलाल जैन २० २० २० 99 vvvverooror å å å पुद्गल ई० सन् पृष्ठ १९६९२१-२६ १९६९ २७-३२ १९६९ ५-१० १९६९ १५-१८ १९६९ १९-२७ १९६९ २८-३४ १९६९ ५-१९ १९६९ २०-२२ १९६९ २३-२७ १९६९ २८-३४ १९६९ ५-१४ १९६९ १५-२० १९६९ २१-२९ १९६९ ३०-३६ १९६९ ५-७ ८-१५ . १६-२२ जैनधर्म की प्राचीनता Jainism in Gujarat सिरिपालचरिउ : संदर्भ और शिल्प स्याद्वाद: एक परिशीलन (क्रमश:) आचार्य हरिभद्र और धर्मसंग्रहणी (क्रमश:) राजा डूंगरसिंह तोमर परमाणु स्याद्वाद- एक परिशीलन आचार्य हरिभद्र और धर्मसंग्रहणी २० २० २० २० २० २० १० Page #82 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक ११ ई० सन् १९६९ १९६९ पृष्ठ २३-२६ २७-३४ M १९६९ ३५-४१ ७८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक संवेगरंगशाला क्या देवभद्रसूरि-रचित और अनुपलब्ध है ? श्री अगरचन्द नाहटा श्रीकृष्णः एक समीक्षात्मक अध्ययन (क्रमश:) श्री धन्यकुमार राजेश Jaina System of Education as revealed from the Nisitha Curni Dr. Madhu Sen महावीर और गांधी का अहिंसादर्शनजनजीवन के सन्दर्भ में श्रीरंजन सूरिदेव स्याद्वाद एक परिशीलन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री विग्रहगति एवं अन्तराभव डॉ० कोमलचन्द जैन श्रीकृष्ण : एक समीक्षात्मक अध्ययन श्री धन्यकुमार राजेश संवेगरंगशाला - एक स्पष्टीकरण प्रो० हीरालाल रसिकलाल कापड़िया Jaina System of Education as revealed from the Nisitha Curni Dr. Madhu Sen सावयपण्णत्ति :एक तुलनात्मक अध्ययन (क्रमश:) पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री युवक के प्रति श्री चन्दनमल चांद दक्षिण भारत में जैनधर्म और संस्कृति श्री गणेश प्रसाद जैन कृतिकर्म के बारह प्रकार मुनि श्री नथमल जी संवेगरंगशाला नामक दो ग्रन्थ नहीं एक ही है श्री अगरचन्द नाहटा सावयपण्णत्ति :एक तुलनात्मक अध्ययन (क्रमश:) पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ ५-१२ १३-२१ २२-२५ २६-३१ ३२ २० MMMMMr r r r r r १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ २०१ २० १ २० १ २१ १ २१ २ ३३-३७ ५-१२ १३-१४ १५-२५ २६-३३ ३४ Page #83 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख भगवान् नेमिनाथ के समय सम्बन्धी संशोधन महावीर निर्वाण सम्वत् में शताब्दियों की भूल Tirthakshetras in Jainism सावयपण्णत्ति : एक तुलनात्मक अध्ययन (क्रमश:) पं० मुनिविजय चन्द्रकृत ग्रहदीपिका श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री अगरचन्द नाहटा श्री धन्यकुमार राजेश Dr. Harihar Singh पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री प्रेमचन्द जैन मूलाचार जैन पौराणिक साहित्य में युद्ध उपाध्याय भक्तिलाभ रचित न्यायसार अवचूर्णि सावयपण्णत्ति : एक तुलनात्मक अध्ययन (क्रमश:) जैन रत्न शास्त्र जैन और वैदिक साहित्य में परा विद्या जैन तत्त्वों पर शूब्रिंग के विचार सावयपण्णत्ति : एक तुलनात्मक अध्ययन ( क्रमशः) पद्ममंदिर रचित बालावबोध प्रवचनसार का नहीं प्रवचनसारोद्धार का है श्री अगरचन्द नाहटा भारतीय प्रतीक परम्परा में जैन साहित्य का योगदान डॉ० प्रेमचन्द जैन शास्त्रों की प्रामाणिकता डॉ० मोहनलाल मेहता मांडव : एक प्राचीन जैनतीर्थ (क्रमश:) श्री शांतिलाल मांडलिक जैन श्री धन्यकुमार श्री अगरचन्द नाहटा पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री पं० अम्बालाल प्रेमचन्द शाह श्री धन्यकुमार राजेश श्री कस्तूरमल बांठिया पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री वर्ष २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ २१ अंक WWW ४ ४ ४ ४ ६ ई० सन् १९६९ १९६९ १९६९ १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० ७९ पृष्ठ १२-१३ १४-२१ २२-२६ ५-१३ १५-१७ १८- २४ ५-१७ १९-२१ २२-२८ २९-३२ ५-१५ १६-२३ २४-२९ ३०-३१ ३२-३७ ३८-४० ५-१४ Page #84 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ,a श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक महाकवि पुष्पदंत : एक परिचय श्री गणेश प्रसाद जैन सावयपण्णत्ति :एक तुलनात्मक अध्ययन (क्रमश:) पं० बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री गजेटियर आफ इंडिया (१९६५) में जैनी और जैनधर्म श्री सुबोध कुमार जैन श्रमण संस्कृति में अहिंसा के प्राचीन संदर्भ डॉ० भागचन्द जैन क्या रामकथा का वर्तमान रूप कल्पित है श्री धन्यकुमार राजेश बुन्देलखण्डी भाषा में प्राकृत के देशीशब्द डॉ० कोमलचन्द जैन मांडव- एक प्राचीन जैनतीर्थ श्री शांतिलाल मांडलिक जयप्रभसूरिरचित कुमारसंभवटीका श्री अगरचन्द नाहटा सर्वज्ञता : एक चिन्तन डॉ० मोहनलाल मेहता जैन रासक परिभाषा, विकास और काव्यरूप डॉ० प्रेमचन्द जैन श्रमण संस्कृति में अहिंसा के प्राचीन संदर्भ डॉ० भागचन्द जैन क्या रामकथा का वर्तमान रूप कल्पित है श्री धन्यकुमार राजेश अंगविज्जा श्री श्रीनारायण शास्त्री प्राकृत के विकास में बिहार की देन (क्रमश:) श्रीरंजन सूरिदेव क्या 'व्याख्यापप्रज्ञप्ति का १५वां शतक प्रक्षिप्त है ? डॉ. मोहनलाल मेहता जैन साहित्य का बृहद् इतिहास भाग ५ के कतिपय सशोधन श्री अगरचन्द नाहटा ރު ން ބޭ ނު ން ނަ ން ނަ gur wur 9 9 9 9 9 9 vvvvor ई० सन् १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० पृष्ठ १५-१९ २०-२७ २८-६५ ३-९ १०-१९ २०-२३ २४-३० ३१-३३ ३४-३८ ३-९ १०-१७ १८-२७ २८-३२ ४-१४ ން १९७० १९७० १५-१९ २०-२३ २१ १९७० ९ Page #85 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री गणेश प्रसाद जैन श्री उदय जैन वर्ष अंक ८१ ई० सन् पृष्ठ १९७०२४-२७ १९७० २८-३१ २१ ९ २१ २१ २१ कवि पुष्पदन्त की रामकथा अहिंसा का विराट रूप जैन आचारशास्त्र की गतिशीलता का समाजशास्त्रीय अध्ययन पुराण बनाम कथा साहित्य : एक प्रश्नचिन्ह प्राकृत के विकास में बिहार की देन भक्तामरस्तोत्रके श्लोकों की संख्या ४४या ४८ भारतवर्ष के मूलनिवासी श्रमण जिनमार्ग जैनसाहित्य में स्तूपनिर्माण की प्रथा पावा कहां ? गंगा के उत्तर में या दक्षिण में भम्तामरस्तोत्र के पाद पूर्तिरूप स्तवकाव्य श्रमण संस्कृति की प्राचीनता हेल्मुथ फोन ग्लासनप और जैनधर्म उत्तर भारतीय शिल्प में महावीर ऋषभपुत्र भरत और भारत पुष्पदन्त और सूर का कृष्णलीला चित्रण श्री धन्यकुमार राजेश डॉ० प्रेमचन्द जैन श्रीरंजन सूरिदेव श्री अगरचन्द नाहटा श्री गणेश प्रसाद जैन श्री कस्तरचंद ललवानी डॉ० हरिहर सिंह मुनिश्री महेन्द्र कुमारजी 'प्रथम' श्री अगरचन्द नाहटा श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री सुबोध कुमार जैन श्री मारुति नंदन तिवारी श्री गणेश प्रसाद जैन डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन २१ 0.8.20AMAAAAAA १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० १९७० ३-१२ १३-१९ २०-२६ २७-३१ ३२-३७ ३-१५ १६-२२ २३-२४ २५-२९ ३-१२ १३-१७ १८-२३ २४-३२ ३-११ २१ २१ २१ २१ Page #86 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री मारुति नन्दन तिवारी वर्ष अंक १ ई० सन् १९७० पृष्ठ १२-१७ २२ مر مر مر लेख दक्षिण भारतीय शिल्प में तीर्थंकर महावीर २४ तीर्थंकरों के नामों में नाथ शब्द का प्रयोग कब से जैन-बौद्ध सम्मत कर्म सिद्धान्त महावीर की निर्वाण भूमि पावा की स्थिति प्रवृत्ति मार्ग और निवृत्ति मार्ग । हरिवंशपुराणकालीन समाज और संस्कृति प्राकृत 'पउमचरिय' : रामचरित वाग्भट्टालंकार साधुवन्दना के रचयिता कर्म का स्वरूप अपभ्रंश जैन साहित्य (क्रमश:) अध्यात्मवादियों से Sarasvati in Jaina Sculpture श्रीपालचरित की कथा अपभ्रंश जैन साहित्य (क्रमश:) भक्तामरस्तोत्र की सचित्र प्रतियां द्राविण श्री अगरचन्द नाहटा श्री रामप्रसाद त्रिपाठी पं० कपिलदेव गिरि सुबोध कुमार जैन श्री धन्यकुमार राजेश श्रीरंजन सूरिदेव पं० अमृतलाल शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री पं० उदय जैन Dr. M. N. Tiwari डॉ० देवेन्द्र कुमार शास्त्री श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री गणेश प्रसाद जैन مر له به يه له سه سه سه سه १९७० १८-२२ १९७० - २३-२६ १९७० २७-३३ १९७० ३४-३६ १९७० ३-१३ १९७० १४-१९ १९७० २०-२८ १९७० २९-३२ १९७१ ३-११ १९७१ १२-१७ १९७१ १८-२४ १९७१ २७-३४ १९७१ ३-७ १९७१ ८-१२ १९७१ १३-१९ १९७१ २०-२४ २२ ه ه ه २२ » Page #87 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष २२ अंक ४ २२ ५ 3 3 w श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक Dr. M. N. Tiwari श्री देवेन्द्र मुनि शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता श्री सुबोध कुमार जैन श्री धन्यकुमार राजेश श्रीरंजन सूरिदेव श्री धन्यकुमार राजेश श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री उदयचन्द जैन प्रो० जी० आर० जैन डॉ० मोहनलाल मेहता श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री डॉ० हरिहर सिंह श्री गणेश प्रसाद जैन Dr. L. K. Bharatiya डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री तेजसिंह गौड़ लेख Sarasvati in Jaina Sculpture प्राकृत जैन कथा साहित्य (क्रमश:) कर्मवाद का अन्य वाद उड़ीसी नृत्य और जैन सम्राट खारवेल जैन पुराणों में पुनर्जन्म की कथाएँ (क्रमश:) प्राकृत और उसका विकास स्त्रोत जैन पुराणों में पुनर्जन्म की कथाएँ (क्रमश:) प्राकृत जैन कथा साहित्य जैन साहित्य में शिशु कर्मों का फल देने वाला कम्प्यूटर आगम साहित्य में कर्मवाद भगवान् अरिष्टनेमि की ऐतिहासिकता तीर्थक्षेत्र शत्रुजय दास, दस्यु और पणि Sociology in Jain Literature सिरिपालचरिउ : एक मूल्याकंन मांडव : एक प्राचीन जैनतीर्थ ** # # # # # w ८३ पृष्ठ २५-२८ ३-१० ११-२० २१-२२ २३-३१ ३-९ १०-१५ १६-२१ २२-२९ ३०-३२ ४-१२ १३-१८ १९-२५ २६-३० ३१-३७ ३-७ ८-१२ ई० सन् १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ r 9 9 9 9 9 v v Page #88 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८४ लेख अंक २२ २२ ?? २२ २२ ९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री प्रेमकुमार अग्रवाल श्री अगरचन्द नाहटा Shri Indu Bhushan Pandey श्री धन्यकुमार जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री हुकुमचन्द संगवे श्री उदयचन्द जैन श्री गणेश प्रसाद जैन श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता श्रीरंजन सूरिदेव . श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री प्रेमकुमार अग्रवाल जैनदर्शन में अहिंसा एक अप्रकाशित प्राचीन प्राकृत सूत्र या अध्ययन Jain Influence on Shri Ramanujacharya मोक्ष मीमांसा में जैनदर्शन का योगदान जैनकृष्ण साहित्य (क्रमश:) अजीवद्रव्य श्रीहेमविजयगणि और विजयप्रशस्तिमहाकाव्य असुर जिनचन्द्रसूरिकृत क्षपक शिक्षा का विषय पुण्य और पाप महावैयाकरण आचार्य हेमचन्द्र जैनकृष्ण साहित्य जैनेतर दर्शनों में अहिंसा प्राकृत व्याकरण और भोजपुरी का 'केर' प्रत्यय (क्रमश:) आचार्य हेमचन्द्र और कुमार पालचरित षडावश्यक में सामायिक ई० सन् १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ पृष्ठ १३-२२ २३-२५ २६-३० ३-९ १०-१६ १७-२२ २३-२९ ३०-३३ ३४-३५ ३-७ ८-१३ १४-१९ २०-२८ १० १० पं० कपिलदेव गिरि श्री उदयचंद जैन श्री हुकुमचंद संगवे १९७१ १९७१ १९७१ २९-३८ ३-१० ११-१६ Page #89 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ८५ पृष्ठ १७-१९ २०-२३ २४-३८ ३-४ २२ २२ ११ २२ ५-८ २२ लेख लेखक प्रयाग-एक महान जैन क्षेत्र श्री सुबोध कुमार जैन वहित और अहित श्री गणेश प्रसाद जैन प्राकृत व्याकरण और भोजपुरी का 'केर' प्रत्यय पं० कपिलदेव गिरि उच्चगोत्र और नीचगोत्र डॉ० मोहनलाल मेहता चण्डकौशिक का उपसर्गस्थान योगीपहाड़ी श्री भंवरलाल नाहटा जैनधर्म में शक्ति पूजा का स्वरूप श्री प्रेमकुमार अग्रवाल चतुर्विंशतिस्तव का भेद और एक अतिरिक्तगाथा श्री अगरचन्द नाहटा बंगला आदि भाषाओं के सम्बन्धवाची प्रत्यय पं० कपिलदेव गिरि Jain Concept of Liberation Shri I.B. Pandey पौराणिक साहित्य में राजनीति श्री धन्यकुमार राजेश णायकुमारचरिउ की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि श्रीरंजन सूरिदेव आचार्य हरिभद्रसूरि का दार्शनिक दृष्टिकोण कु० सुशीला जैन कुरलकाव्य श्री फूलचन्द जैन 'प्रेमी' महावीर की निर्वाण भूमि पावा की वर्तमान स्थिति श्री कन्हैयालाल सरावगी कर्म की मर्यादा डॉ० मोहनलाल मेहता भविसयत्तकहा तथा अपभ्रंश कथाकाव्य-कुछ प्रतिस्थापनायें डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन जैनधर्म में उपासना श्री प्रेमकुमार अग्रवाल दानवीरता का कीर्तिमान-वस्तुपाल श्री चम्पालाल सिंघई * * * * * * * ई० सन् १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ १९७१ ९-१२ १३-१७ १८-२९ ३०-३५ ३-१३ १४-१८ १९-२३ २४-२९ ३०-३१ ३-५ ६-११ १२-१७ १७-२० २३ २३ २३ * * * * * * * * * २३ २३ , Page #90 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८६ लेख मूलाराधना में समाधिमरण अपभ्रंश चरितकाव्य तथा कथाकाव्य प्रमेय : एक अनुचिंतन भ० नेमिनाथ का समय - एक विचारणीय समस्या जैनों में सती प्रथा जैन दर्शन में कर्मवाद की अवधारणा उज्जयिनी और जैनधर्म निक्षेप में नय योजना जैन मूर्तियों का क्रमिक विकास Nature and Role of Devotion in Jaina Sadana दासुपूज्यचरितम् - एक अध्ययन पावापुर लेश्या - एक विश्लेषण जैन तीर्थंकर और भिल्ल प्रजाति जैनधर्म में भक्ति का स्थान जैनधर्म भौगोलिक सीमा में आबद्ध क्यों ? श्रमण संस्कृति में मोक्ष की अवधारणा श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री उदयचन्द्र जैन डॉ० देवेन्द्र कुमार श्री रंजन सूरिदेव श्री अगरचन्द नाहटा श्री चम्पालाल सिंघई कु० प्रमिला पाण्डेय तेजसिंह गौड श्री उदयचन्द जैन श्री प्रेमकुमार अग्रवाल Shri I.B. Pandey श्री उदयचन्द जैन 'प्रभाकर' श्री जिनवर प्रसाद जैन कु० सुशीला सिंह डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन कु० प्रमिला पाण्डेय श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री प्रेमकुमार अग्रवाल २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ २३ अक m m m ४ ४ ४ ४ ई० सन् १९७१ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ पृष्ठ २१-३० ३-१० ११-१४ १५-१९ २०-२१ २२-२७ ३-१२ १३-१७ १८-२१ २२-२८ ३-१० ११-१९ २०-२४ २५-२७ २८-३३ ३४-३८ ३-९ Page #91 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८७ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री उदयचन्द जैन श्री चम्पालाल सिंघई ur ur वर्ष अंक २३६ २३ ६ ई० सन् पृष्ठ १९७२ . १०-१७ १९७२ १८-२० ur w 9 श्री बलवन्द सिंह मेहता श्री गणेश प्रसाद जैन डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० कोमलचन्द जैन श्री प्यारेलाल श्रीमाल ७ लेख वासुपूज्यचरित-एक अध्ययन गुप्त सम्राटों का धर्म समभाव परम्परागत पावा ही भगवान् महावीर की निर्वाण भूमि बनारसीदास का रसदर्शन अन्तरायकर्म का कार्य श्रमण संस्कृति और नारी जैनपदों में रागों का प्रयोग जैनग्रन्थों और पुराणों के भौगोलिक वर्णन का तुलनात्मक अध्ययन प्रसाद और तीर्थंकर पद्मचरित और हरिवंशपुराण जैनधर्म : वैदिक धर्म के संदर्भ में कुवलयमालाकहा में उल्लिखित कडंग, चन्द्र और तार द्वीप सात लाख श्लोक परिमित संस्कृत साहित्य के निर्माता जैनाचार्य विजयलावण्यसूरि २१-३० ३१-४१ ३-५ ६-१० २३६ २३ २३७ २३ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ 9 9 ७ श्री अगरचन्द नाहटा डॉ. देवेन्द्र कमार जैन श्री रमेशचन्द जैन श्रीरंजन सूरिदेव २३ २३ २३८ ७ ७ 9 9 vv १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १५-२० २१-२४ ३-७ ८-१२ v श्री प्रेमसुमन जैन २३८ १९७२ १३-१८ श्री अगरचन्द नाहटा २३ ८ १९७२ १९-२३ Page #92 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८८ लेख श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० के० एच० त्रिवेदी س अंक ई० सन् १९७२ पृष्ठ २४-२८ س س س २३ ९ س س س س س जैनधर्म : एक अवलोकन अपभ्रंश का विकासक्रम तथा जैन साहित्यकारों की देन कर्मयोगी कृष्ण के आगामी भव वेदोत्तरकालीन आत्मविद्या और जैनधर्म प्राणप्रिय काव्य के रचयिता व रचनाकाल गर्भापहरण- एक समस्या भगवान् महावीर के निर्वाण का २५००वां वर्ष श्रमण और वैदिक साहित्य में स्वर्ग और नरक ग्वालियर के तोमरकालीन दानवीर कल्चुरीकालीन भ० शांतिनाथ की प्रतिमाएँ श्रमण संस्कृति की मूल संवेदना जैनदर्शन में स्याद्ववाद और उसका महत्त्व अनासक्ति गर्भापहरण सम्बन्धी कुछ बातें Jaina Temples in Karanataka श्रमण भगवान् महावीर पद्मचरित की भाषा और शैली श्रीमती मीना भारती श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री डॉ० अजित शुकदेव श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० रतिलाल म० शाह डॉ० गोपीचन्द धाड़ीवाल श्री धन्यकुमार जैन श्री चम्पालाल सिंघई श्री शिवकुमार नामदेव डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन श्री रामजी डॉ० अजित शुकदेव श्री अगरचन्द नाहटा Dr. K. B. Shastri पं० बेचरदास दोशी श्री रमेशचन्द्र जैन o r oar or or or 2 2 2 2 2 2 2 2 MM سه سد سه سه سه سه سه سه سه १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ २९-३४ ३-९ । १०-१६ १७-२० २१-२५ २६-३१ ३-९ १०-१३ १४-१५ १६-१७ १८-२२ २३-२६ २७-२८ २९-३० १०-१८ Page #93 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ८९ लेख अंक २३ २३ ११ ११ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक जैम और वैष्णव काव्य परम्परा में राम श्री रामदयाल जैन महो० समयसुन्दर का एक संग्रहग्रंथ : गाथासहस्त्री श्री अगरचन्द नाहटा के प्राचीन जैन साहित्य में उत्सव महोत्सव डॉ० झिनकू यादव विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० ऋषभ चन्द्र पउमचरिउ-परंपरा, संदर्भ और शिल्प डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन जैन तर्क शास्त्र में सन्निकर्ष प्रमाणवाद श्री लालचन्द जैन जैन शिल्पकला और मथुरा कु. सुधा जैन विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद डॉ० के० ऋषभ चन्द्र गर्भापहरण -सम्बन्धी स्पष्टीकरण श्री रतिलाल म० शाह भगवान् अरिष्टनेमि और कर्मयोगी कृष्ण श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री वर्ण विचार श्री रमेशचन्द्र जैन जैन एवं न्याय दर्शन में कर्म सिद्धान्त श्री प्रेमकुमार अग्रवाल षट्दर्शनसमुच्चय के लघुटीकाकार सोमतिलकसूरि श्री अगरचन्द नाहटा समराइच्चकहा में चार्वाक दर्शन श्री झिनकू यादव विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरीसट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र प्रमाण स्वरूप विमर्श (क्रमश:) डॉ० सुदर्शनलाल जैन राजगृह श्री गणेश प्रसाद जैन MAA. x x x x x x rr ई० सन् पृष्ठ १९७२ - १९-२२ १९७२ २३-२८ १९७२ २९-३३ १९७२ ३४-३८ १९७२ ३-७ १९७२ ८-१५ १९७२ १६-२९ १९७२ २०-२३ १९७२ २४-२७ १९७२ ३-६ १९७२ ७-११ १९७२ १२-१९ १९७२ २०-२३ १९७२ २४-२७ १९७२ २८-३२ १९७२ ३-१५ १९७२ १६-२७ २४ २४१ २४ १ २४ १ २४ २ २४ Page #94 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ २४ २४ २ २ १९७२ १९७२ २८-२९ ३०-३४ سه २४ ९० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक क्या कृष्णगच्छ की स्थापना सम्वत् १३९१ में हुई थी ? श्री अगरचन्द नाहटा विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरीसट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र मिथ्यात्त्व इन जैनिज्म एण्ड शंकर : ए कम्परेटिव स्टडी ललित किशोरलाल श्रीवास्तव प्रमाण स्वरूप विमर्श डॉ० सुदर्शनलाल जैन क्षत्रचूड़ामणि में उल्लिखित कतिपय नीतिकाव्य श्री उदयचन्द जैन 'प्रभाकर' त्रिरत्न : मोक्ष के सोपान श्रीरंजन सूरिदेव जैनदर्शन में ज्ञान का स्वरूप श्री रामजी सिंह विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरीसट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र गोम्मट आइडोल्स ऑफ कर्णाटक पं० के० भुजबलि शास्त्री पुनर्जन्मसिद्धान्त की व्यापकता श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री पउमचरिउ और रामचरितमानस : एक तुलनात्मक अध्ययन डॉ. देवेन्द्रकुमार जैन आषुतोष म्यूजियम में नागौर का एक सचित्र विज्ञप्तिपत्र श्री अगरचन्द भंवरलाल नाहटा प्राचीन जैनग्रन्थों में कृषि डॉ० अच्छेलाल यादव به سه سه به سه १९७२ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ ३५-४१ ३-११ १२-२१ २२-२६ २७-३२ २४ سه سه » १९७३ १९७३ १९७३ ३३-३५ ३६-३८ ३-१० २४४ २४ » १९७३ ११-१४ २४ २४ ४ » » १९७३ १९७३ १५-१९ २४-२७ Page #95 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक ई० सन् १९७३ ९१ पृष्ठ २८-३१ « २४ ४ २४ २४ २४ K श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक राष्ट्रभाषा के आद्यजनक भगवान् महावीर डॉ० रतिलाल म० शाह विश्वेश्वरकृत शृंगारमंजरी3 सट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र पद्मचरित और उपमचरिउ श्री रमेशचन्द जैन जैन धर्म की प्राचीनता और विशेषता कुमारी मंजुला मेहता सर्वांगसुन्दरी कथानक डॉ० के० आर० चन्द्र ग्यारह गणधर सम्बन्धी ज्ञातव्य बातें श्री अगरचन्द भंवरलाल नाहटा क्या स्त्रियां तीर्थंकर के सामने बैठती नहीं ? श्री नन्दलाल मारु । जैनदर्शन में कर्म का स्वरूप डॉ० राधेश्याम श्रीवास्तव विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र ! महावीर और उनके सिद्धान्त श्री देवेन्द्र कुमार जैन जैन परम्परा में ध्यान-योग श्री धन्यकुमार राजेश प्राचीन भारत में अपराध और दंड । डॉ. प्रमोद मोहन पाण्डेय विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र जैन मिस्टीसिज्म (क्रमश:) प्रो० यू० ए० असरानी भारतीय साहित्य की रमणीय काव्य रचना: गउडवहो श्रीरंजन सूरिदेव د د د د د د « २४ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ । १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ ३२-३७ ३-७ ८-१५ १६-२१ २२-२६ २७-३० ३१-३५ ३६-३८ ३-८ ९-१६ १७-२१ २२-२६ २७-३८ २४ २४ २४६ که ما کن که که د o or २४६ २४ २४ و १९७३ ३-७ Page #96 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अंक २४ २४ ७ ७ २४ २४ २४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक जैनदर्शन में योग का प्रत्यय श्री प्रेमकुमार अग्रवाल कनड़ में जैन साहित्य पं० के० भुजबली शास्त्री भक्तामर की एक और सचित्रप्रति श्री अगरचंद नाहटा विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सड़क का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र ग स्वयंभू की गणधर परम्परा डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन " जैन मिस्टीसिज्म प्रो० यू० ए० असरानी पश्चिम भारत का जैन संस्कृत साहित्य को योगदान श्री प्रेमसुमन जैन जैन संस्कृति के प्रतीक मौर्यकालीन अभिलेख डॉ० पुष्पमित्र जैन तीर्थंकर और दुःखवाद डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद (क्रमश:) डॉ० के० आर० चन्द्र Prakrit Bhasyas Dr. M.L. Mehta . आगमों में राजा एवं राजनीति पर स्त्रियों का प्रभाव डॉ० प्रमोद मोहन पाण्डेय प्राचीन भारतवर्ष में गणतंत्र का आदर्श श्री कन्हैयालाल सरावगी अद्धमागहाए भाषाए भासंति अरिहा श्री नन्दलाल मारु विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद डॉ० के० आर० चन्द्र Jaina View of Kevalin Dr. L.K. L. Srivastava भारतीय कथा साहित्य में पद्मचरित का स्थान श्री रमेशचन्द्र जैन २४ ई० सन् १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ 9 9 9 9 9 9 vvv vvor or or or or or पृष्ठ ८-१२ १३-२० २१-२४ २५-३० ३१ ३२-४१ ३-१६ १७-२५ २६-२८ २९-३४ ३५-३६ ३-८ ९-१२ १३-१५ १६-१९ २०-३० ३-११ २४ २४ २४ २४ २४ २४ २४ Page #97 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ९३ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० अजित शुकदेव अंक ई० सन् पृष्ठ १९७३ । १२-१७ २४ १० २४ २४ २४ श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन डॉ० मनोहरलाल दलाल डॉ० रामजी सिंह श्री कन्हैयालाल सरावगी १० १० १० २४ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १८-२४ २५-२७ २८-३१ ३२-३६ ३-९ २४ लेख जैन धर्म में भावना दान, शील, तप, भाव के रचयिता और दानकुलक पाठ महाकवि स्वयंभू के काव्य विचार भारत का प्राचीन जैन केन्द्र : कसरावद जैन दर्शन में मोक्षोपाय आत्मा : बौद्ध एवं जैन दृष्टि महाकथा कुवलयमाला के रचनाकार का उद्देश्य और पात्रों का आयोजन दक्षिण भारत में जैन धर्म, साहित्य और तीर्थ क्षेत्र १ पद्मचरित में शकुनविद्या वंडगच्छ के युगप्रधान दादा मुनिशेखरसूरि महाकवि स्वयंभू का प्रकृति दर्शन प्राचीन भारतीय श्रमण एवं श्रमणचर्या षड्द्रव्य - एक परिचय जैन मंदिर व स्तूप दर्शाण में जैनधर्म २४ २४ २४ ११ १४ डॉ० के० आर० चन्द्र श्री गणेश प्रसाद जैन डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री अंगरचन्द नाहटा डॉ० देवेन्द्र कुमार शास्त्री डॉ० झिनकू यादव श्री रमेशमुनि शास्त्री कु० सुधा जैन डॉ० मनोहर लाल दलाल १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ १०-१३ १४-१८ २९-३५ ३६-३९ ३-५ ६-१२ १३-१५ १६-१९ २०-२४ २४ २४ २४ १२ १२ १२ or २ Page #98 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ९४ वर्ष श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० रतिलाल म० शाह श्री अजित मुनि डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन २४ २४ अंक १२ १२ १-२ ई० सन् १९७३ १९७३ १९७३ पृष्ठ २५-३० ३१-३२ ३-१३ २५ * १९७३ श्री मारुतिनन्दन प्रसाद तिवारी श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० रमेशचन्द्र जैन * * * १९७३ १४-२१ २२-२८ २९-३४ * १९७३ लेख जैनधर्म में तांत्रिक साधना का प्रवेश स्था० जैन साध्वी संघ का पारम्परिक इतिहास स्वयंभू और उनका पउमचरिउ उड़ीसा में जैनकला एवं प्रतिमा-विज्ञान की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि स्याद्वाद-एक पर्यवेक्षण भट्टारक सकलकीर्ति और उनकी सद्भाषितावली समराइच्चकहा की संक्षिप्त कथावस्तु और उसका सांस्कृतिक महत्त्व तीर्थंकर-प्रतिमाओं का उद्भव और विकास Contribution of Jainism to Indian Philosophy प्राकृत के प्रबन्ध-काव्य : संस्कृत-प्रबन्ध काव्यों के सन्दर्भ में जैन सिद्धान्त में 'योग' और 'आस्व' भगवान् महावीर के युग का जैन सम्राट महाराजा चेटक आचार्य भद्रबाहु और हरिभद्र की अज्ञात रचनाएँ मृत्यु एवं संलेखना महाकवि स्वयंभू और नारी * डॉ० झिनकू यादव श्री हरिहर सिंह Dr. M.L. Mehta * * * * १९७३ १९७३ १९७३ ३५-४२ ४३-५२ ५३-५८ * ه ه ه श्रीरंजन सूरिदेव आचार्य अनन्त प्रसाद जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० हुकुमचन्द संगवे डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ ३-१० ११-१९ २०-२४ २५-३१ ३२-३९ ३-७ ه २५ ४ ه ه Page #99 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख जैन दर्शन में पुद्गल द्रव्य पावा: कसौटी पर तीर्थंकर प्रतिमाओं की विशेषताएँ महावीर - सम्बन्धी साहित्य श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री शिवकुमार नामदेव कु० मंजुला मेहता डॉ० प्रमोद कुमार श्री रमेश मुनि शास्त्री आचार्य राजकुमार जैन श्री जमनालाल जैन श्री रामजी सिंह कु० सुधा जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री डॉ० रमेश चन्द्र जैन जैन कर्म सिद्धान्त निक्षेपवाद : एक परिदृष्टि महावीर का धर्म : सर्वोदय - तीर्थ महावीर और उनकी देशना जैनधर्म में नीतिधर्म और साधना प्राचीन भारत में जैन चित्रकला प्रमाणवाद : एक पर्यवेक्षण पं० जोधराज कासलीवाल और उनका सुखंविलास विदिशा में प्राप्त जैन प्रतिमाएँ और रामगुप्त की ऐतिहासिकता पउमचरिउ में नारी कुंभारिया तीर्थं का कलापूर्ण महावीर मंदिर पच्चीसवीं निर्वाण-शताब्दी के आयोजनों में आगम - वाचना भी हो श्री नन्दलाल मारु श्री शिवकुमार नामदेव डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा वर्ष २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ अंक ४ ४ ४ ४ ६ ६ www w ६ ६ ६ ई० सन् १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ ९५ पृष्ठ ८-१५ १६-२३ २४-२६ २७-३२ ३-९ १०-१५ १६-२० २१-२४ २५-३० ३१-३४ ३-१३ १४-१७ १८- २३ २४-२७ २८-३१ ३२-३५ Page #100 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २५७ २५ २५ २५ लेख पद्मचरित : एक महाकाव्य प्रमाणवाद : एक पर्यवेक्षण कलचुरि-नरेश और जैनधर्म जैनदर्शन में सर्वज्ञता का स्वरूप संडेरगच्छीय ईश्वरसूरि की प्राप्त एवं अप्राप्त रचनाएँ श्रमण धर्म द्विसन्धानमहाकाव्य में राज्य और राजा का स्वरूप प्रमाणवाद : एक पर्यवेक्षण धुबेला संग्रहालय की अद्वितीय जैन प्रतिमाएँ वर्तमान युग के संदर्भ में भगवान् महावीर के उपदेश पद्मचरित में वस्त्र और आभूषण पुराणों में ऋषभदेव जैन साहित्य और संस्कृति का जनजीवन Jain and Buddhist Tradition Regarding the origins of Ajatsattu's war with the Vajjis- A New Interpretation निश्चय और व्यवहार : पुण्य और पाप श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० रमेश चन्द्र जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री शिवकुमार नामदेव श्री एल० के० एल० श्रीवास्तव श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री शिवकुमार नामदेव कन्हैयालाल सरावगी डॉ० रमेशचन्द्र जैन डा० मनोहरलाल दलाल कु० सुधा जैन २५ २५ २५८ ई० सन् १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ पृष्ठ ३-६ ७-१८ १९-२२ २३-२८ २९-३२ १८-२३ ८-१२ १३-२२ २४-२७ २८-३४ ३-१० ११-१४ १५-१८ २५ २५ २५ ९ २५९ Dr. J. P. Sharma पं० दलसुख मालवणिया २५ २५ ९ १० १९७४ १९७४ २७-३५ ३-१० Page #101 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख नालंदा या नागलंदा पुद्गल : एक विवेचन कलचुरि कला में जैन शासन देवियों की मूर्तियों Jain and Buddhist Tradition Regarding the origins of Ajatsattu's war with the Vajjis- A New Interpretataion अपभ्रंश और देशीतत्त्व वराङ्गचरित में राजनीति प्राचीन ऐतिहासिक नगरी : जूना (बाड़मेर) जैन धर्म में तप का स्वरूप और महत्त्व निश्चय और व्यवहार वीर हनुमान : स्वयंभू कवि की दृष्टि में जैन शिल्प का एक विशिष्ट प्रकार : सहस्रकूट जैन कला-तीर्थ : खजुराहो व्यक्ति पहले या समाज भगवान् महावीर की मंगल विरासत श्रमण भगवान् महावीर श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० बेचरदास दोशी मुनि बुद्धमल्ल जी श्री शिवकुमार नामदेव Dr. J. P. Sharma डॉ. देवेन्द्र कुमार जैन डॉ. रमेश चन्द्र जैन श्री भूरचन्द जैन श्री रामजी सिंह पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री श्री श्रीरंजन सूरिदेव श्री अगरचंद नाहटा श्री शिवकुमार नामदेव श्री कन्हैयालाल सरावगी पं० सुखलाल जी पं० बेचरदास दोशी वर्ष २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ २५ अंक १० ११ ११ ११ ११ १२ २५. १२ १२ १२ १२ १-२ १-२ २५ २५ २५. २६ २६ 168222 ई० सन १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ ९७ पृष्ठ ११-१३ १४-१८ २४-२६ २७-३६ ३-८ ८-१६ १७-२१ २२-२७ ३-८ ९-१५ १६-२१ २२-२७ २८-३१ ३-९ १०-१७ Page #102 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ९८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक अंक * * * * * लेख भगवान् महावीर : समता-धर्म के प्ररूपक आगमिक साहित्य में महावीर-चरित्र महावीर क्षत्रिय पुत्र थे या ब्राह्मण पुत्र? भारतीय पुरातत्त्व तथा कला में भगवान् महावीर कुम्भारिया का महावीर-मन्दिर महावीर-सम्बन्धी एक अज्ञात संस्कृत चरित्र महावीरोपदिष्ट परिग्रह परिमाण व्रत भगवान् महावीर का तत्त्व ज्ञान कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ (क्रमश:) जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप (क्रमश:) जैन दर्शन में नारी मुक्ति जैनधर्म आस्तिक या नास्तिक? (क्रमश:) जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) * * * पं० दलसुख मालवणिया डॉ० कोमलचन्द जैन डॉ० मोहनलाल मेहता श्री शिवकुमार नामदेव श्री हरिहर सिंह श्री अगरचन्द नाहटा श्री जमनालाल जैन कु० मंजुला मेहता डॉ० के० आर० चन्द्र श्री रमेश मुनि शास्त्री कु० चन्द्रलेखा पंत श्री कन्हैयालाल सरावगी डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन डॉ० के० आर० चन्द्र श्री रमेश मुनि शास्त्री डॉ. प्रमोद कुमार ई० सन् १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७४ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ पृष्ठ १८-२७ २८-३३ ३४-३८ ३८-४६ ४७-५२ ५२-५६ ५७-६२ ६३-६७ ३-८ ९-१३ १४-१८ १९-२५ २६-३३ ه ه ه ه ه कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ क्रमश:) जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप (क्रमश:) जैन दर्शन में मोक्ष का स्वरूप २६४ २६ ४ २६ ४ १९७५ १९७५ १९७५ ३-८ ९-१३ १४-२० .. Page #103 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख जैनधर्म आस्तिक या नास्तिक ? जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) जैन दर्शन में बन्ध का स्वरूप : वैज्ञानिक अवधारणाओं के सन्दर्भ में मरुधरा का ऐतिहासिक जैनतीर्थ : नाकोड़ा जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप (क्रमश:) जैन न्याय दर्शन : समन्वय का मार्ग जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) मल्लिषेण और उनकी स्याद्वादमंजरी जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप (क्रमश:) कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ (क्रमश:) महावीर विवाहित थे या अविवाहित ? राजस्थान में महावीर के दो उपसर्ग स्थल जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री कन्हैयालाल सरावगी डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री अनिलकुमार गुप्त श्री भूरचन्द जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री रमेशचन्द्र जैन डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री रमेश मुनि शास्त्री डॉ० के० आर० चन्द्र श्री रतिलाल म० शाह श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन वर्ष २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ अंक ४ ४ 55 w w ६ ६ ६ ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ ९९ पृष्ठ २१-२५ २६-३० ३-९ १०-१५ १६-२२ २३-२७ २८-३१ ३-६ ७-९ १०-११ १२-१६ १७-२० २१-२५ Page #104 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०० लेख Problem of Suffering as Conceived in Jainism वरांगचरित में अठारह श्रेणियों के प्रधान : एक विश्लेषण सिरोही के प्राचीन जैन मन्दिर जैन धर्म में सरस्वती जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप (क्रमश:) कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ (क्रमश:) जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) Problem of Suffering as Conceived in Jainism श्रमण- साहित्य में वर्णित विविध सम्प्रदाय भगवान् महावीर की निर्वाण-भूमि- कौन सी पावा कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ (क्रमश:) जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप जैनागम - प - पदानुक्रम (क्रमश:) मूलाचार में मुनि की आहार चर्या हिन्दी काव्यों में महावीर श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक Dr. B.N. Tripathi डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री भूरचन्द जैन श्रीमती सुधा जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० के० आर० चन्द्र डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन Dr. B.N. Tripathi डॉ० भागचन्द्र जैन 'भास्कर' श्री रतिलाल म० शाह डॉ० के० आर० चन्द्र श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री फूलचन्द जैन 'प्रेमी' श्री प्रेमचन्द रावका वर्ष २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ w us २६ २६ २६ २६ अंक ६ w १ १ १ ७ ७ १ १ ८ ८ ८ ९ ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ पृष्ठ २६-२९ ३-८ ९-१२ १३-१४ १५-१८ १९-२१ २२-२६ २७-३२ ३-१३ १४-१८ १९-२२ २३-२९ ३०-३२ ३-१३ १४-२० Page #105 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ श्रीमालपुराण में भ० महावीर और गणधर गौतम विकृत वर्णन का मेड़ता - फलौदी पार्श्वनाथ तीर्थ भरतेशवैभव में प्रतिपादित सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था (क्रमश:) भगवान् महावीर का ईश्वरवाद आचार्य हेमचन्द्रः जीवन, व्यक्तिव एवं कृतित्व गीता के राजस्थानी अनुवादक जैनकवि थिरपाल The Iconography of the Jaina yakshini Chakresvari भरतेशवैभव में प्रतिपादित सामाजिक एवं आर्थिक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० के० आर० चन्द्र श्री अगरचन्द नाहटा श्री भूरचन्द जैन श्री सुपार्श्वकुमार जैन डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा जैन श्री अभयकुमार श्री अगरचन्द नाहटा Shri M.N. P. Tiwari व्यवस्था श्री सुपार्श्वकुमार जैन जैन साधना-पद्धति में सम्यग्दर्शन (क्रमश:) श्री रमेशमुनि शास्त्री जैन रास की दुर्लभ हस्तलिखित प्रति विक्रम लीलावती चौपाई डॉ० सुरेन्द्रकुमार आर्य कारीतलाई की जैन द्विमूर्तिका प्रतिमाएँ जैनकवि जटमल कृत प्रेमविलासकथा शिल्पकला एवं प्राकृतिक वैभव का प्रतीक : जैसलमेर का अमर सागर श्री शिवकुमार नामदेव श्री अशोककुमार मिश्र श्री भूरचन्द जैन वर्ष २६ २६ २६ २६ २६ २६ mmmmm २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ २६ अंक ९ ९ ९ aa aa a १० १० १० १० १० or or or or or ११ ११ ११ ११ ११ ११ ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १०१ पृष्ठ २१-२५ २६-२८ २९-३३ ३-८ ९-१२ १३-१८ १९-२३ २४-३३ ३-८ ९-१२ १३-१४ १५-१९ २०-२३ २४-२७ Page #106 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०२ लेख जैन साधना-पद्धति में सम्यग्दर्शन श्रावक में षट्कर्म मानतुंगसूरिरचित पंचपरमेष्ठिस्तोत्र जैन सरस्वती हंसवाहना या मयूरवाहना ? हीराणंदसूरि का विद्याविलास और उस पर आधारित रचनाएँ जैन दर्शन का स्याद्वाद सिद्धान्त जैन साहित्य में जनपद ब्राह्मी लिपि और ऋषभनाथ जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) संस्कृत और प्राकृत का समानान्तर अध्ययन जालोर में महावीर-मन्दिर की शिल्प सामग्री का मूर्ति वैज्ञानिक अध्ययन जैनशास्त्रों में वर्णित १८ श्रेणियों का उल्लेख विक्रमलीलावतीचौपाईविषयक विशेष ज्ञातव्य जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री शिवकुमार नामदेव श्री अशोककुमार मिश्र जैन श्री अभयकुमार डॉ० अच्छेलाल डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री श्रीरंजन सूरिदेव श्री मारूति नन्दन प्र. तिवारी श्री ज्ञानचन्द श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन वर्ष २६ २६ २६ २६ २६ 2222 २७ २७ २७ २७ २७ २७ अंक १२ १२ १२ १२ १२ १ १ १ WWW २ २ २ २ २ ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ पृष्ठ ३-६ ७-१३ १४-१७ १८-२० २१-२६ ३-१४ १५-२४ २५-२८ २९-३१ ३-८ ९-१७ १८-२१ २२-२३ २४-२७ Page #107 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०३ वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ २७ २७ २७ २७ २७ २ ३ ३ ३ ३ १९७५ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ २८-३५ ३-८।। ९-१४ १५-१८ १९-२२ २३-२६ ه श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक Latitude of the Moon as determined in Jaina Astronomy Dr. S.D. Sharma and Shri S.S. Lishk जैन तर्क-शास्त्र में बौद्ध प्रत्यक्ष प्रमाणवाद (क्रमश:) श्री लालचन्द जैन महाकवि पुष्पदंत की भक्ति चेतना डॉ० देवेन्द्र कुमार जैन श्रमण-धर्म : एक विश्लेषण श्री रमेशमुनि शास्त्री जैन आगमों में जननी एवं दीक्षा डॉ० कोमलचन्द जैन विख्यात जैन तीर्थः प्रभास पाटन श्री भूरचन्द जैन जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन पुष्पदन्त का कृष्ण-काव्य : एक अनुशीलन (क्रमश:) कु० प्रेमलता जैन जैन तर्क शास्त्र में बौद्ध प्रत्यक्ष प्रमाणवाद (क्रमश:) श्री लालचन्द जैन जैन राजनीति में दूतों और गुप्तचरों का स्वरूप (क्रमश:) डॉ० रमेशचन्द्र जैन जैन दर्शन में बंध और मुक्ति श्री हरेराम सिंह जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन पुष्पदन्त का कृष्ण-काव्य : एक अनुशीलन कु० प्रेमलता जैन प्राकृत भद्रबाहु संहिता का अर्धकाण्ड श्री अगरचन्द नाहटा ه ه ه १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ २७-३० ३-९ १०-१५ १६-२४ २५-३० ३१-३३ ه ه ه م १९७६ १९७६ ३-९ १०-१४ م Page #108 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०४ अंक ५ २७ लेख जैन तर्क शास्त्र में बौद्ध प्रत्यक्ष प्रमाणवाद (क्रमश:) चन्दन-मलयागिरि दिगम्बर रहना क्या महावीर का आचार था? जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) ई० सन् १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ पृष्ठ १५-१९ २०-२५ २६-३० ३१-३४ २७६ २७ ६ श्रमण-आचार: एक परिचय जैनधर्म एवं बौद्धधर्म-परस्पर पूरक जैन तर्कशास्त्र में बौद्ध प्रत्यक्ष प्रमाणवाद मूर्त-अंकनों में तीर्थंकर महावीर के जीवन-दृश्य राजस्थान में महावीर-मन्दिर __ जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री लालचन्द जैन पं० अशोककुमार मिश्र श्री रतिलाल म० शाह डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० कोमलचन्द जैन श्री लालचन्द जैन श्री मारुति नन्दन प्र० तिवारी श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री कमलेशकुमार जैन श्री भूरचन्द जैन कु० मंजुला मेहता श्री प्रेमचन्द रावका २७ २७ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ ३-७ ८-११ १२-२० २१-२५ २६-२८ २९-३१ २७ २७६ 9 २७७ वैशाली का सन्त राजकुमार कवि-स्वरूप : जैन आलंकारिकों की दृष्टि में राणकपुर के जैन मन्दिर त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में महावीर-चरित कालिदास के काव्यों में अहिंसा और जैनत्व १९७६ १९७६ १९७६ 9 ३-७ ८-१२ १३-१५ १६-२२ २३-२६ 9 १९७६ २७ ७ 9 १९७६ Page #109 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) आदिपुराण में राजनीति लेश्या: एक विश्लेषण हरिकलशरचित दिल्ली - मेवात देश चैत्य- परिपाटी शुंग-कुषाणकालीन जैन शिल्पकला जैन तीर्थ राता महावीर जी जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) भारतीय चिन्तन में मोक्ष और मोक्षमार्ग (क्रमश:) जैन साहित्य और सांस्कृतिक संवेदना छीहल की एक दुलर्भ प्रबन्ध कृति जैनयक्ष गोमुख का प्रतिमा निरूपण जैनागम - पदानुक्रम (क्रमश:) भारतीय चिन्तन में मोक्ष एवं मोक्षमार्ग (क्रमश:) आचार्य हेमचन्द्र : एक महान् वैयाकरण श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री अगरचन्द नाहटा श्री शिवकुमार नामदेव श्री भूरचन्द जैन डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री गुरुचरणसिंह मोंगिया श्री अशोककुमार मिश्र श्री मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री अभयकुमार जैन वर्ष २७ 22222 २७ २७ २७ २७ २७ 22222 २७ २७ २७ २७ २७ 222 २७ अंक ७ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ९ ९ a år år ९ १० १० ई० सन् १९७६ १९७६. १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १०५ पृष्ठ २७-३० ३-१३ १४-१७ १८- २१ २२-२५ २६-२८ २९-३० ३-१० ११-२१ २२-२८ २९-३६ ३७-३८ ३-७ ८-१३ Page #110 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०६ लेख कर्णाटक में जैन शिल्पकला का विकास १२ वीं शताब्दी की एक तीर्थमाला सौराष्ट्र का प्राचीन जैन तीर्थ तालध्वज गिरि जैनागम-पदानुक्रम (क्रमश:) भारतीय चिन्तन में मोक्ष एवं मोक्षमार्ग (क्रमश:) भारतीय भाषा और अपभ्रंश झारड़ा की जैन देवियों की अप्रकाशित प्रतिमाएँ जैन विद्वानों के कुछ हिन्दी वैद्यक ग्रन्थ निर्वाण : उपनिषद् से जैन दर्शन तक जैनागम पदानुक्रम (क्रमश:) भाषा और साहित्य भारत में प्राचीन जैन गुफाएँ रस-विवेचन : अनुयोगद्वारसूत्र में कुन्दकुन्दाचार्य की साहित्यिक उद्भावनाएँ जैनागम पदानुक्रम श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री शिवकुमार नामदेव श्री अगरचन्द नाहटा श्री भूरचन्द जैन डॉ० मोहन लाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन डॉ० सुरेन्द्रकुमार आर्य आचार्य राजकुमार जैन डॉ० शान्ति जैन डॉ० मोहनलाल मेहता एवं श्री जमनालाल जैन श्री कन्हैयालाल सरावगी डॉ० शिवकुमार नामदेव श्री कमलेशकुमार जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता एवं वर्ष 222 २७ २७ २७ 222222 २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ अंक १० a or or or or or ११ ११ ११ ११ ११ ov ov ११ ११ ११ ११ or or ११ ई० सन् १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ पृष्ठ १४-१८ १९-२३ २४-२८ २९-३१ ३-८ ९-१२ १३-१४ १५-२४ २५-२९ ३०-३२ ३-१४ १५-२२ २३-२९ ३०-३२ Page #111 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख सेवा: स्वरूप और दर्शन पुष्पदन्त की रामकथा की विशेषताएँ शासन-प्रभावक आचार्य जिनप्रभसूरि वर्धमान जैन आगम - मन्दिर महोपाध्याय समयसुन्दर- रचित कथा कोश The Eight Dikpalas as Depicted in the Jaina temple at Kumbharia मानव-संस्कृति का विकास जैन वास्तुकला : संक्षिप्त विवेचन कीर्तिवर्द्धनकृत सदयवत्स - सावलिंगा चउपई सन्देशरासक में उल्लिखित वनस्पतियों के नाम जैन साहित्य और शिल्प में वाग्देवी सरस्वती श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक हरियाणा के सुकवि मालदेव की नवोपलब्ध रचनाएँ पार्श्वाभ्युदय में प्रकृति-चित्रण श्री जमनालाल जैन श्री रमेश मुनि शास्त्री कु० प्रेमलता जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री भूरचन्द जैन श्री भंवरलाल नाहटा Shri Harihar Singh श्री कन्हैयालाल सरावगी डॉ० शिवकुमार नामदेव डॉ० अशोककुमार मिश्र श्री श्रीरजंन सूरिदेव श्री मारुति नन्दन प्रसाद तिवारी गुणस्थान : मनोदशाओं का आध्यात्मिक विश्लेषण (क्रमशः) श्री अभय कुमार जैन त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में रसोद्भावना कु० मंजुला मेहता श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० रमेशचन्द्र जैन वर्ष २७ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ अंक ११ १ १ १ १ १ २ ३ ई० सन् १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १०७ पृष्ठ ३३-३४ ३-४ ५- १२ १३-२० २१-२३ २४-२७ २८-३१ ३-१५ १६-२१ २२-२६ २७-२९ ३०-३४ ३-१४ १५-२० २१-२४ २५-३० Page #112 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १०८ लेख अकलंकदेव की दार्शनिक कृतियाँ आदीश जिन गुणस्थान- मनोदशाओं का आध्यात्मिक विश्लेषण जैनसाहित्य और शिल्प में रामकथा शब्दों की अर्थमीमांसा ऐतिहासिक जैन तीर्थ नांदिया प्राकृतभाषा के कुछ ध्वनि - परिवर्तनों की ध्वनि वैज्ञानिक व्याख्या अन्तराल गति श्रावस्ती का जैन राजा सुहलदेव प्राकृत हिन्दी कोश के महान् प्रणेता : पं० हरगोविन्ददास माणिक्यनन्दिविरचित परीक्षामुख Sixteen Vidyadevis as depicted in Temple at Kumbharia प्राचीन प्राकृत ग्रन्थों में उपलब्ध भगवान् महावीर का जीवन-चरित त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में गणधरवाद व्युत्सर्ग आवश्यक श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० प्रकाशचन्द्र जैन श्री अभयकुमार जैन श्री मारुति नन्दन प्र० तिवारी श्री रमेश मुनि शास्त्री श्री भूरचन्द जैन डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा श्री गणेशप्रसाद जैन श्री अगरचंद नाहटा डॉ० मोहनलाल मेहता Dr. Harihar Singh डॉ० के० आर० चन्द्र कु० मंजुला महेता श्री रमेशमुनि शास्त्री. वर्ष २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ R R R R R २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ अंक ३ ma ४ ४ ㄨㄨ ४ ४ ४ ५ ६ 5 ई० सन् १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ पृष्ठ ३१-२४ १९७७ ३-७ १९७७ ८-१३ १९७७ १४-१८ १९७७ १९-२२ १९७७ २३-२४ १९७७ १९७७ १९७७ ३-८ ९-१८ १९-२१ २२-२६ २७-२९ २५-३२ ३-१० ११-१६ १७-२० Page #113 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख प्राकृत साहित्य में श्रीदेवी की लोक-परम्परा प्राचीन जैन तीर्थ : करेड़ा पार्श्वनाथ सोलंकी - काल के जैन मन्दिरों में जैनतर चित्रण वादिराजसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्व पार्श्वाभ्युदय में श्रृंगार रस उत्तर प्रदेश में मध्ययुगीन जैन शिल्पकला का विकास तीर्थंकरों की निश्चित संख्या क्यों ? हेमचन्द्राचार्य की साहित्य साधना भगवान् महावीर का अचेल धर्म क्या जैनधर्म रहस्यवादी है ? संस्कृत शब्द और प्राकृत- अपभ्रंश प्राचीन जैनतीर्थ श्री गांगाणी मेवाड़ में चित्रित कल्पसूत्र की एक विशिष्ट प्रति Jain Temple Sculptures of Gujarat आचार्य हेमचन्द्र : एक महान् काव्यकार सांख्य और जैन दर्शन राजस्थान में मध्ययुगीन जैन प्रतिमाएँ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री रमेश जैन श्री भूरचन्द जैन डॉ० हरिहर सिंह श्री उदयचन्द्र 'प्रभाकर' डॉ० रमेशचन्द्र जैन डॉ० शिव कुमार नामदेव श्री रतिलाल म० शाह डॉ० मोहनलाल मेहता पं० कैलाशचन्द्र शास्त्री जैन डॉ० प्रद्युम्नकुमार डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री भूरचन्द जी श्री अगरचन्द नाहटा Dr. Harihar Singh श्री अभयकुमार जैन डॉ० रमेशचन्द्र जैन डॉ० शिवकुमार नामदेव वर्ष २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ २८ अंक ६ ६ ७ ७ ७ ७ ७ ८ ८ ८ ८ ८ ई० सन् १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १०९ पृष्ठ २१-२५ २६-२९ ३०-३२ ३-८ ९-१५ १६-२० २१-२६ २६-३१ ३-१० ११-१७ १८-२० २१-२३ २४-२६ २७-३४ ३-१३ १४-१९ २०-२४ Page #114 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक २८९ २८ ९ २८ १० २८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री भूरचन्द जैन डॉ० रमेशचन्द्र जैन श्री अभयकुमार जैन श्री अगरचंद नाहटा श्री भूरचन्द जैन श्री रतिलाल म० शाह श्री जयकुमार जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री अभयकुमार जैन डॉ० मोहनलाल मेहता ११० लेख मन और संज्ञा भांडवा जैन तीर्थ जैन धर्म और बौद्ध धर्म कविवर देवीदास : जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व बीकानेरी चित्र-शैली का सर्वाधिक चित्रोंवाला कल्पसूत्र कुम्भारिया जैनतीर्थ धर्म की छानने की आवश्यकता पार्श्वनाथचरित में प्रतिपादित समाज जैन-दर्शन में पुद्गल-स्कन्ध परमानन्द विलास : एक परिचय 3 श्रमण-संघ कुंभारिया के जैन अभिलेखों का सांस्कृतिक अध्ययन (क्रमश:) उत्तराध्ययन का अनेकान्तिक पक्ष आचार्य : स्वरूप और दर्शन सप्तसन्धानमहाकाव्य में ज्योतिष शब्दरत्न-महोदधि नामक संस्कृत-गुजराती जैन-कोश कुंभारिया के जैन अभिलेखों का सांस्कृतिक अध्ययन ई० सन् १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ २८ पृष्ठ २५-२८ २९-३२ ३-११ १२-१९ २०-२४ २५-२८ २९-३५ ३-९ १०-१२ १३-१७ १८-२९ २८ २८ २८ २८ डॉ० हरिहर सिंह प्रो० श्रीरंजन सूरिदेव श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री श्रेयांसकुमार जैन श्री अगरचंद नाहटा डॉ० हरिहर सिंह २८ २८ १२ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ ३०-३६ ३-१० ११-१६ १७-२१ २२-२४ २५-३४ २८ २८ १२ Page #115 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १११ वर्ष अंक م ई० सन् १९७७ १९७७ पृष्ठ ३-८ ९-१४ م مم مم २९ २९ २९ २९ २९ مه श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक संस्कृत साहित्य में अभ्युदय नामन्त जैन काव्य श्री जयकुमार जैन विपाकसूत्र के आख्यान : एक विहंगावलोकन श्री जमनालाल जैन तर्कप्रधान संस्कृत वाङ्मय के आदि प्रेरक : सिद्धसेन दिवाकर श्री मोहन रत्नेश मेघविजय के समस्यापूर्ति काव्य श्री श्रेयांसकुमार जैन * जैन दर्शन में समता श्री अभयकुमार जैन चित्तौड़ का जैन कीर्तिस्तम्भ श्री भूरचन्द जैन आगमिक प्रकरण डॉ० मोहनलाल मेहता जैन दर्शन श्री उदय मुनि आचेलक्य कल्प-एक चिन्तन श्री रमेशमुनि शास्त्री दशाश्रुतस्कन्ध के विविध संस्करण एवं टीकाएं श्री अगरचन्द नाहटा पार्श्वनाथचरित में राजनीति और शासन-व्यवस्था श्री जयकुमार जैन प्राचीन जैन तीर्थ ओसियाँ श्री भूरचन्द जैन उत्तराध्ययन : नामकरण व कर्तृव्य श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री क्या ‘रूपकमाला' नामक रचनाएँ अलंकार शास्त्र सम्बन्धी हैं ? श्री अगरचन्द नाहटा जैनकला विषयक साहित्य डॉ० ज्योतिप्रसाद जैन Origin and Development of Tirthankara Images Dr. Harihar Singh योग का जनतन्त्रीकरण प्रो० श्रीरंजन सूरिदेव १९७७ ।। १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १९७७ १५-१६ १७-२२ २३-३३ ३४-३५ ३-१३ १४-१७ १८-२० २१-२४ २५-२९ ३०-३२ ३-११ १२-१७ १८-२१ २२-३० ३-७ به به به به به به به سه سه به سه » २९ २९ १९७७ २९ २९ २९४ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ Page #116 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११२ वर्ष २९ २९ अंक ४ ४ लेख शान्त रस : मान्यता और स्थान श्रमरस का स्रोत : श्रावक संप्रतिकालीन आहाड़ के मंदिर का जीर्णोद्धार-स्तवन दशाश्रुतस्कन्ध की बृहद टीका और टीकाकार मतिकीर्ति सामायिक : सौ सयाने एकमत आगम-साहित्य में क्षेत्र प्रमाण-प्रणाली मालपुरा की विख्यात जैन दादावाड़ी महाकवि जिनहर्ष और उनकी कविता तारंगा का अजितनाथ-मंदिर जैन आलंकारिकों की रसविषयक मान्यताएँ अज्ञात प्राचीन जैनतीर्थ : कसरावद सिद्धियोग का महत्त्व समयसार- आचार-मीमांसा रामसनेही सम्प्रदाय के रेणशाखा के दो सरावगी आचार्य वर्ण और जातिवाद: जैनदृष्टि भगवान् महावीर की साधना एवं देशना जैन सिद्धान्त भौतिकवाद एवं समयसार की सप्तभंगी व्याख्या श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री जयकुमार जैन श्री जमनालाल जैन श्री भंवरलाल नाहटा श्री अगरचंद नाहटा श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री भूरचन्द जैन श्री मोहन 'रत्नेश डॉ० हरिहर सिंह डॉ० कमलेशकुमार जैन श्री लक्ष्मीचन्द जैन पं० के० भुजबली शास्त्री डॉ० दयानन्द भार्गव श्री अगरचन्द नाहटा श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री भूरचन्द जैन डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० केवल कृष्ण मित्तल ई० सन् १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ 'ल » » » 377 7 rur ur ur ur 9 9 9 9 vv पृष्ठ ८-१२ १३-२२ २३-३० ३-९ १०-१७ १८-२१ २२-२३ २४-२६ ३-१३ १४-२४ २५-२७ २८-२९ ३-११ १२-१६ १७-२० २१-२७ ३-१३ १४-२० १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ २९ Page #117 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११३ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री गणेशप्रसाद जैन श्री श्रेयांसकुमार जैन २९ अंक ८ ई० सन् १९७८ १९७८ पृष्ठ । २१-२५ २६-३१ २९ २९ २९ २९ लेख जैन तीर्थंकरों का जन्म क्षत्रियकुल में ही क्यों ? काव्यशास्त्रियों की दृष्टि में श्लेष • पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान के मार्गदर्शक पं० सुखलालजी समयसार सप्तदशांगी टीका में गणितीय न्याय एवं दर्शन कर्मशास्त्रविद् रामदेवगणि और उनकी रचनाएँ जैन आगम साहित्य में जनपद आष्टा की परमारकालीन अप्रकाशित जैन प्रतिमाएँ जैनतीर्थ शंखेश्वर पार्श्वनाथ समयसार सप्तदशांगी टीका: एक साहित्यिक मूल्याकंन वैदिक धर्म और जैन धर्म नयवाद : एक दृष्टि जैन रक्षापर्व : वात्सल्य पूर्णिमा Kundakundas View-Points in the Samayasara The Nature of object in Jaina Philosophy श्रावक के मूलगुण प्राचीन पांडुलिपियों का संपादन : कुछ प्रश्न और हल विशालकीर्तिरचित प्रक्रियासारकौमुदी २९ २९ श्री गुलाबचन्द जैन डॉ० लक्ष्मीचंद जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० मायारानी आर्य श्री भूरचन्द जैन डॉ० नेमिचंद जैन पं० के० भुजबली शास्त्री श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री भूरचन्द जैन Dr. M.L. Mehta Shree A. Majumdar श्री सनतकुमार जैन डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा vorror or orar2222224XX १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ ३-५ ६-१० ११-१९ २०-२२ २३-२४ २५-२९ ३-८ ९-१३ १४-१८ १९-२२ २३-२६ २७-३२ ३-१८ १९-२३ २४-२८ २९ २९ २९ M Page #118 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११४ लेख जैनदृष्टि से ज्ञान-निरूपण चन्द्रावती की जैन प्रतिमाएँ : एक परिचयात्मक सर्वेक्षण ज्योतिषशास्त्र और सन्मति वर्धमान महावीर जैन पुराणों में समता ग्यारह प्रतिमा (व्रत) और एकादशी पालनपुर का प्राचीन प्रहलविया जैन मन्दिर श्रमण परम्परा : एक विवेचन समन्तभद्र द्वारा क्षणिकवाद की समीक्षा कलचुरिकालीन जैन शिल्प-संपदा The Purvas जैनधर्म की प्राचीनता तथा इतिहास समन्तभद्र द्वारा क्षणिकवाद की समीक्षा कतिपय जैनेतर ग्रन्थों की अज्ञात जैन टीकाएँ मांडोली का गुरु मन्दिर जैनकला एवं स्थापत्य शीलव्रत : एक विवेचन जयसिंहसूरिरचित अप्रसिद्ध ऋषभदेव और वीरचरित्र श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री विनोद राय डॉ० भूपसिंह राजपूत श्री देवीप्रसाद मिश्र श्री कन्हैयालाल सरावगी श्री भूरचन्द जैन श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री नरेन्द्रकुमार जैन डॉ० शिवकुमार नामदेव Dr. Mohan Lal Mehta डॉ० मोहनलाल मेहता श्री नरेन्द्रकुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री भूरचन्द जैन डॉ० मोहनलाल मेहता श्री सनतकुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा वर्ष २९ २९ २९ २९ २९ २९ ३० ३० ३० ३० ३० 1 m m ३० ३० ३० ३० ३० m m ३० अंक ११ ११ १२ १२ १२ १२ ~ ~ mmmm ई० सन् १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७८ १९७९ १९७९ १९७९ पृष्ठ २९-३५ ३६-३८ ३-११ १२-१७ १८-२३ २४-२७ ३ - १० ११-२२ २३-३२ ३३-३५ ३-१६ १७-२५ २६-३१ ३२-३६ ३-९ १०-१८ १९-२३ Page #119 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११५ वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ ३० ३० ३० लेख युगल काव्य मुनिश्री चौथमल जी की जन्म-शताब्दी पंचास्तिकाय के टीकाकार और टीकाएँ जैन व्याकरण शास्त्र में शोध की संभावनाएँ जैन दार्शनिक साहित्य में अभाव प्रमाण-एक मीमांसा जैन धर्म दर्शन का स्त्रोत-साहित्य पुराणप्रतिपादित शीलव्रत सिंहदेवरचित एक विलक्षण महावीरस्तोत्र धार्मिक एवं पर्यटन स्थल गिरनार क्या जैन दर्शन नास्तिक दर्शन है? जैन श्रावकाचार (क्रमश:) जैनधर्म में शुभ और अशुंभ की अवधारणा जौनपुर की बड़ी मस्जिद क्या जैन मंदिर है ? पातंजल तथा जैन योग : स्वरूप एवं प्रकार जैन श्रावकाचार (क्रमश:) जैनधर्म और भक्ति ध्वन्यालोक एवं दशरूपक की दो प्राकृत गाथाएँ-एक चिन्तन श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री भंवरलाल नाहटा श्री गुलाबचन्द जैन डॉ० लालचन्द जैन श्री रामकृष्ण पुरोहित श्री रमेशमुनि शास्त्री डॉ० मोहनलाल मेहता श्री सनतकुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री भूरचन्द जैन डॉ० लालचन्द जैन डॉ. मोहनलाल मेहता सुभाषचन्द जैन श्री अगरचन्द नाहटा कु० मंगला दूगड़ डॉ० मोहनलाल मेहता श्री गुलाबचन्द जैन श्री विश्वनाथ पाठक ३० ३०५ me » » » 3333 ww w w 9 9 9 9 १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ २४-२७ ३-१२ १३-२२ २३-३५ ३-१४ १५-१९ २०-२५ २६-२९ ३-१५ १६-२२ २३-३२ ३३-३५ ३-१५ १६-२३ २४-३१ ३२-३६ ३० ६ ३०७ ३०७ ३० ७ ३०७ Page #120 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री नरेन्द्रकुमार जैन अंक ३०८ ई० सन् १९७९ पृष्ठ ३-१३ ३० १९७९ ८ १९७९ : लेख जैन तथा अन्य भारतीय दर्शनों में सर्वज्ञता विचार (क्रमश:) प्रवर्तक एवं निवर्तक धर्मों का मनोवैज्ञानिक विकास एवं उनके दार्शनिक एवं सांस्कृतिक प्रदेय । जैन श्रावकाचार स्वयंभू का कृष्णकाव्य और सूरकाव्य के अध्ययन की समस्याएँ जैन तथा अन्य भारतीय दर्शनों में सर्वज्ञता विचार जैन दर्शन में ब्रह्माद्वैतवाद समताशील भगवान् महावीर जिनदत्तसूरि का शकुनशास्त्र एवं हरिभद्र सूरि का व्यवहारकल्प ब्रह्माद्वैतवाद का समालोचनात्मक परिशीलन तीर्थंकर महावीर विनयप्रभकृत जैन व्याकरण ग्रंथ- शब्ददीपिका निर्जरा तत्त्व-एक विश्लेषण प्राचीन जैन तीर्थ-करेड़ा पार्श्वनाथ पर्युषण : संभावनाओं की खोज जैन साधना के मनोवैज्ञानिक आधार जैनधर्म में कर्मयोग का स्वरूप डॉ० सागरमल जैन डॉ० मोहनलाल मेहता डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री नरेन्द्रकुमार जैन डॉ० लालचन्द जैन मुनिश्री महेन्द्रकुमार (प्रथम) श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० लालचन्द जैन डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री रमेशमुनि शास्त्री श्री भूरचन्द जैन डॉ० नेमिचन्द जैन डॉ० सागरमल जैन श्री कन्हैयालाल सरावगी १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १४-२० २१-३२ ३३-३५ ३-१० ११-२६ २७-३० ३१-३३ ३-१३ १४-१६ १७-२१ २२-२९ ३०-३४ ३-७ ८-१४ १५-२० Page #121 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख स्याद्वाद सोमदेवकृत उपासकाध्ययन में शीलव्रत (क्रमश:) आगमिक व्याख्याएँ आधुनिक सन्दर्भ में जैन दर्शन सोमदेवकृत उपासकाध्ययन में शीलव्रत जैन आगम साहित्य में प्रमाणवाद हर्ष कीर्ति सूरि रचित धातु तरंगिणी वज्जालग्ग की कुछ गाथाओं के अर्थ पर पुनर्विचार (क्रमश:) समाज में महिलाओं की उपेक्षा एक विचारणीय विषय गृहस्थ के अष्टमूल गुण- तुलनात्मक अध्ययन जैन वाङ्गमय का संगीत पक्ष देवचन्द्रकृत यंत्रपद्धति का वस्त्र टिप्पणक और महावीर बुद्ध भारत का सर्व प्राचीन संवत् भगवान् महावीर का विचार तथा कृतित्व समस्त विश्व के लिए अनुपम धरोहर श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक कु० कुसुम जैन श्री सनतकुमार जैन डॉ० मोहनलाल मेहता श्री बृजकिशोर पाण्डेय श्री सनतकुमार जैन श्री गणेशमुनि शास्त्री श्री अगर चन्द नाहटा पं० विश्वनाथ पाठक डॉ० प्रेमचन्द जैन श्री अशोक पाराशर श्री प्यारेलाल श्रीमाल 'सरसं पंडित' श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० देवसहाय त्रिवेद पं० के० भुजबली शास्त्री डॉ० रामकुमार वर्मा वर्ष ३० ३० ३० ३० ३० ३० ३० ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ܗ ܗ ३१ ३१ ३१ अंक ११ ११ १२ १२ १२ १२ १ १ १ १ १ १ ई० सन् १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ ११७ पृष्ठ २१-३३ ३४-३८ ३-१७ १८- २२ २३-२८ २९-३४ ३५-३८ ३-७ ८-१९ २०-२४ २५-२७ २८-२९ ३०-३४ ३५ ३६-३७ Page #122 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ११८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक पं० विश्वनाथ पाठक डॉ० लालचन्द जैन श्री रत्नेश कुसुमाकर डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि जी ३१ ३१ ३१ ३१ अंक २ २ २ ३ ई० सन् १९७९ १९७९ १९७९ १९८० १९८० पृष्ठ ३-८ ९-२२ २३-२७ ३-२१ २२-२५ به سه سه سه » लेख वज्जालग्ग की कुछ गाथाओं पर पुनर्विचार ब्रह्माद्वैतवाद का समालोचनात्मक परिशीलन एलाचार्य मुनि श्री विद्यानन्द जी का सामाजिक दर्शन अहिंसा का अर्थ, विस्तार, संभावना और सीमाक्षेत्र माँस का मूल्य बालकों के संस्कार निर्माण में अभिभावक, शिक्षक एवं समाज की भूमिका धर्म क्या है (क्रमश:) त्याग का मूल्य हिंसा-अहिंसा का जैन दर्शन उतार चढ़ाव के बीच उभरती अहिंसा आत्मा और परमात्मा धर्म क्या है सामायिक का मूल्य सुख-दुःख जैन धर्म में भक्ति का स्थान महावीर संदेश दार्शनिक दृष्टि O W ा ा ा ा » २६-३८ १-८ ९-११ १२-१४ १५-१८ » » डॉ० सागरमल जैन डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि डॉ० मोहनलाल मेहता श्री शरदकुमार साधक डॉ० सागरमल जैन डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि श्री कन्हैयालाल सरावगी। डॉ० सागरमल जैन श्री हरिओम सिंह ३ ثم १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० تم تم ३१ ५ تم ६-८ ९-१३ १४-१७ १८-२१ تم ३१ تم Page #123 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि प्रो० श्रीरंजन सूरिदेव श्री गणेशप्रसाद जैन श्री डोंगरे महाराज डॉ० सागरमल जैन सोने की चमक अनेकान्त-एक दृष्टि उपाध्याय अमर मुनि श्री ऋषभचन्द जैन फौजदार महत्त्वपूर्ण जैन कला के प्रति जैन समाज की उपेक्षावृति श्री अगरचंद नाहटा आर्यारत्न श्री विचक्षण श्री जी म० सा० श्री गुलाबचन्द जैन डॉ० सागरमल जैन संयम : जीवन का सम्यक् दृष्टिकोण अधूरी जोड़ी जैनधर्म की प्रासंगिकता भेद विज्ञान : मुक्ति का सिंहद्वार नाथ कौन ? लेख अध्यात्मवाद और भौतिकवाद जीवन दर्शन ईश्वर और आत्मा : जैन दृष्टि जैन तीर्थंकरों का जन्म - क्षत्रिय कुल में ही क्यों जीवन और विवेक धर्म क्या है भिक्षुणी संघ की उत्पत्ति एवं विकास जैन दर्शन में मुक्ति की अवधारणा उपाध्याय अमर मुनि जी डॉ० निजामुद्दीन डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि जी डॉ० अरुण प्रताप सिंह श्री पांडेय रामदास गंभीर वर्ष ३१ m o m ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ अंक ww ६ ६ ७ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ८ ९ १० ई० सन् १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८०. १९८० ११९ पृष्ठ १-६ ७-९ १०- १४ १५-१८ १ २-७ ८-९ १०-१२ १३-१४ १६-२३ २-१३ १४-१८ १९-२५ ३-११ १२-१६ १७-२० २-१२ Page #124 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२० लेख मन की लड़ाई क्या भगवान् महावीर के विचारों से विश्वशांति संभव है ? अनेकान्तवाद की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता पर्युषण उदायन का पर्युषण साधना में श्रद्धा का स्थान 'पर्वराज-दस लक्षणी' पर्युषण पर्व जैन एवं बौद्ध धर्म में स्वहित एवं लोकहित का प्रश्न मनुष्य की परिभाषा शान्ति की खोज में पंडित कौन जैन एवं बौद्ध धर्म में स्वहित और लोकहित का प्रश्न सेवाव्रत नंदीषेण अनेकान्तवाद की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता तीर्थंकर महावीर का निर्वाण दिवस 'दीपावली' ममता दुःख का जनक लोभ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक उपाध्याय अमर मुनि डॉ० (कु० ) मंजुला मेहता श्री शीतलचन्द जैन श्री मधुकर मुनि उपाध्याय अमर मुनि आचार्य श्री आनन्द ऋषि श्री गणेशप्रसाद जैन डॉ० सागरमल जैन श्री महावीरप्रसाद गैरोला श्री प्रवीण ऋषि जी महात्मा भगवानदीन डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय अमर मुनि जी डॉ० सनतकुमार जैन गणेशप्रसाद जैन महात्मा भगवानदीन आचार्य श्री आनन्द ऋषि वर्ष ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३१ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ अंक १० १० १० ११ ११ ११ ११ १२ १२ १२ २ २ ई० सन् १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० १९८० पृष्ठ १३-१६ १७-२२ २३-२७ २-६ ७-११ १२-१८ १९-२५. २-१० १४-१६ १७-१९ १-४ ५-१३ १४- १७ १८-१९ २० - २३ ३-४ ५-१२ Page #125 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख राजा मेघरथ का बलिदान प्राणीमात्र के विकास का आधार : जैन धर्म अनमोलवाणी - संकलन कर्मों का फल साहित्य में गोम्मटेश्वर बाहुबलि शिल्प में गोम्मटेश्वर बाहुबलि बाहुबलि : चक्रवर्ती का विजेता कीर्ति के शत्रु क्रोध और कुशील महाकवि पुष्पदन्त और गोम्मटेश्वर बाहुबलि कल्पना का स्वर्ग या स्वर्ग की कल्पना सदाचार मानदण्ड और जैन धर्म दार्शनिक क्षितिज का दीप्तिमान नक्षत्र चक्षुष्मान प० सुखलाल जी विद्यावारिधि एवं प्रज्ञा-पुत्र भारतीय दर्शनों का समन्वयवादी स्थितप्रज्ञ पुरुष पं० सुखलाल जी - एक संस्मरण प्रज्ञामूर्ति श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक उपाध्याय अमर मुनि डॉ० महेन्द्रसागर प्रचंडिया महात्मा चेतनदास जी डॉ० आदित्य प्रचण्डिया डॉ० सागरमल जैन डॉ० मारुति नन्दन प्र० तिवारी उपाध्याय अमर मुनि आनन्द ऋषि जी म० सा० डॉ० देवेन्द्र कुमार श्री सौभाग्यमल जैन डॉ० सागरमल जैन उपाध्याय श्री अमर मुनि जी उपाध्याय महेन्द्र कुमार जी मुनिश्री नगराज जी पं० श्री विजयमुनि जी श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री श्री रमेशमुनि जी शास्त्री वर्ष ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ m m m ३२ ३२ ३२ अंक マ R R ४ ४ ४ ४ ई० सन् १९८० १९८० १९८० १९८० १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १२१ पृष्ठ १३-१५ १६-१८ १९ २०-२१ १-९ १०-२० २१-२६ १-९ १३-१६ १७-२१ २२-२७ ११-१३ १४-१५ १६ १७-२७ २८-३२ ३३ Page #126 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२२ लेख दार्शनिक पुरुष प्रज्ञापुरुष सदा जागृत नरवीर स्मृति नन्दन गुणों के आगार सुखलाल जी भारतीय मनीषा के उज्जवलतम् प्रतीक पं० पं० रत्न विद्वान् सुखलाल जी - एक सुखद संस्मरण पुरुषार्थ के प्रतीक पं० सुखलाल जी सरस्वती पुत्र स्व० पंडित जी - एक चलते फिरते विश्व-कोष समदर्शी दार्शनिक विद्वत् रत्नमाला का एक अमूल्य रत्न अनन्य साथी का वियोग प्रज्ञाचक्षु पं० सुखलाल जी : एक परिचय पं० सुखलाल जी के तीन व्याख्यानमालाओं के पठनीय ग्रंथ जैन, बौद्ध और वैदिक साहित्य-एक तुलनात्मक अध्ययन प्राचीन भारतीय वाङ्मय में पार्श्वचरित श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मुनिश्री रामकृष्ण साध्वीश्री विचक्षण श्री जी साध्वीश्री मृगावती श्री सुव्रता श्री जी श्री जैनेन्द्र कुमार श्री यशपाल जैन डॉ० रामजी सिंह एवं साध्वी पं० के० भुजबल शास्त्री साहू श्रेयांसप्रसाद जैन सेठ श्री अचलसिंह जी श्री शादीलाल जैन श्री चिमनभाई चकुभाई शाह विद्यानन्द मुनि बेचरदास दोशी श्री गुलाबचन्द जैन श्री अगरचन्द नाहटा श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री डॉ० जयकुमार जैन वर्ष ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ अंक ގ ގ ގ ई० सन् १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ ५ १९८१ द्वितीय भाग १९८१ द्वितीय भाग १९८१ पृष्ठ ३४ ३५ ३६ ३९-४० ४१-४३ ४४-४६ ४७ ४८-४९ ५० ५१ ५२ ५३ ५४ ५५ ५७ १-२८ २९-४५ Page #127 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष अंक ई० सन् शम्बूक आख्यान (जैन तथा जैनेतर सामग्री का तुलनात्मक अध्ययन) श्री विमलचन्द शुक्ल द्वितीय भाग १९८१ आचार्य शाकटायन (पाल्यकीर्ति) और पाणिनि श्री रामकृष्ण पुरोहित द्वितीय भाग १९८१ मुनि श्रीदेशपाल : जीवन और कृतित्व डॉ० सनत्कुमार रंगाटिया द्वितीय भाग १९८१ मेरुतुंग के जैनमेघदूत का एक समीक्षात्मक अध्ययन श्री रविशंकर मिश्र द्वितीय भाग १९८१ जैनाचार्यों द्वारा आयुर्वेद साहित्य में योगदान आचार्य राजकुमार जैन द्वितीय भाग १९८१ महावीर का दर्शन- सामाजिक परिप्रेक्ष्य में डॉ० सागरमल जैन १९८१ महावीर का अखण्ड व्यक्तित्व उपाध्याय श्री अमरमुनि जी ३२ १९८१ भगवान् महावीर का उपदेश और आधुनिक समाज पं० दलसुख भाई मालवणिया ३२ १९८१ महावीर की वाणी श्री कपूरचन्द जैन १९८१ महावीर का संयम और उनका साधनामय जीवन कु. सविता जैन ३२ .१९८१ चक्रवर्तियों के चक्रवर्ती श्रमण महावीर श्री वेदप्रकाश सी० त्रिपाठी १९८१ मनुष्य प्रकृति से शाकाहारी डॉ० महेन्द्रसागर प्रचण्डिया ३२ १९८१ स्वाध्याय : एक आत्मचिन्तन श्री राजकुमार छाजेड़ 'राजन' ३२ १९८१ भगवान् महावीर और उनके द्वारा प्रतिपादित धर्म श्री ऋषभचन्द फौजदार ३२ ७ १९८१ दयामूर्ति : धर्मरुचि अनगार उपाध्याय श्री अमर मुनि १९८१ तीर्थंकर डॉ० बी० सी० जैन ३२ ७ १९८१ चमत्कार को नमस्कार डॉ० रतन कुमार जैन ___३२७ १९८१ १२३ पृष्ठ ४६-५१ ५२-६१ ६२-६९ ७०-७७ ७८-८६ २-९ ११-१६ १७-२२ २३-२६ २७-३० ३१ ३२-३४ ३५-३६ २-४ ५-७ ८-१० ११-१४ ३२ uw www www 9 9 9 9 ३२ ३२ Page #128 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२४ लेख जैन आचार में इन्द्रियदमन की मनोवैज्ञानिकता सम्राट और साम्राज्य सोमदेवसूरि की अर्थनीति- एक समाजवादी दृष्टिकोण उपरीयाली का विख्यात जैन तीर्थ जैन दर्शन में प्रमाण (विशेष शोध-निबन्ध). बौद्ध एवं जैन अहिंसा का तुलनात्मक अध्ययन बलिदान की अमरगाथा लोद्रवा - जैसलमेर तीर्थ पर श्री घण्टाकर्ण महावीर मन्दिर जैन दर्शन में अनेकान्तवाद का स्वरूप जैन कवि विक्रम और उनका नेमिदूतकाव्य जैन दर्शन और मार्क्सवाद सफल हुआ सम्यक्त्व पराक्रम पर्युषण: आत्म-संक्रान्ति का अद्वितीय अध्याय मानव धर्म का सार सांस्कृतिक पर्व की सामाजिक उपयोगिता जीवन का सत्य पर्युषण : आत्मा की उपासना का पर्व श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक रतनचन्द जैन डॉ० आदित्य प्रचण्डिया 'दीति' श्री कृष्णमुरारी पांडेय श्री भूरचन्द जैन डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा डॉ० भागचन्द जैन उपाध्याय श्री अमरमुनि जी श्री भूरचन्द जैन श्री भिखारीराम यादव श्री रविशंकर मिश्र श्री हरिओम् सिंह राजमल पवैया डॉ० नरेन्द्र भानावत श्री जगदीश सहाय साध्वीश्री अर्णिमा श्री जी जैन डॉ० रतनकुमार मुनि श्री रामकृष्ण वर्ष ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ ३२ अंक ८ ८ ८ ८ ८ ९ ९ १० १० १० ११ ११ ११ ११ ११ ११ ई० सन् १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ पृष्ठ १-१६ १७-२३ २४-२५ २६-२८ १-३४ १-१६ १७- २३ २४-२६ १-८ ९-१४ १६-२० १ २-५ ६-१५ १६-२० २१-२५ २६-३० Page #129 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२५ अंक ११ ३२ पृष्ठ ३१-३२ ई० सन् १९८१ १९८१ १९८१ ३२ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक साध्वीश्री कानकुमारी जी महात्मा भगवानदीन जी डॉ० सागरमल जैन डॉ० कामता प्रसाद मिश्र डॉ० नंदलाल जैन श्री शिवप्रसाद डॉ० कृपाशंकर व्यास जगदीश सहाय राजमल पवैया श्रीरंजन सूरिदेव श्री सौभाग्यमल जैन श्री सौभाग्यमल जैन मुनि रामकृष्ण डॉ० रतन कुमार जैन श्री रामदेव राम यादव श्री प्रकाश मेहता श्री अमरमुनि जी श्री भूरचन्द जैन लेख सच्ची क्षमा अपने को पहचानिये है श्वेताम्बर साहित्य में राम कथा विमलसूरि के पउमचरिउ का भौगोलिक अध्ययन अललित जैन साहित्य का अनुवाद : कुछ समस्याएँ न फलवर्द्धिका पार्श्वनाथ तीर्थ-एक ऐतिहासिक दृष्टि नय और निक्षेप-एक विश्लेषण नैतिकता का आधार ज्ञानदीप की शिखा महावीर-कालीन वैशाली नर्क का प्रश्न अपनी परमात्म शक्ति को पहचानें ज्ञान भी सम्पदा है कानों सुनी सो झूठ सब जैनधर्म में अहिंसा सिर्फ फैशन की खातिर स्नेह के धागे लोद्रवा का कलात्मक कल्पवृक्ष MMMMMM ~ ~ ~ ~ rrrrr mm १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८१ १९८२ १९८२ ७-११ १२-२० २१-२६ २७-३१ ३५-४८ १-१८ १९ २०-२५ २६-२९ २-६ ७-११ १२-१५ १६-२२ २३-२४ २-७ १०-१३ ३३२ Page #130 -------------------------------------------------------------------------- ________________ m m x १२६ लेख जैन दर्शन में प्रत्यक्ष का स्वरूप (विशेष शोध-निबन्ध) श्रोत्र इन्द्रिय की प्राप्यकारिता : एक समीक्षा स्याद्वादः एक भाषायी पद्धति जैन धर्म में आत्मतत्त्व निरूपण जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि जैन भिक्षुणी-संघ और उसमें नारियों के प्रवेश के कारण भगवान् श्री अजितनाथ भिगमंगों-मन नैतिक आचरण विधि : सोरेन की गार्ड और जैन दर्शन सत्ता का दर्प अहिंसा परमोधर्मः दशरूपक की एक अव्याख्यात्मक गाथा श्रमण भगवान् महावीर के चारित्रिक अलंकरण महावीर के सिद्धान्त-युगीन सन्दर्भ में क्रान्तदर्शी महावीर दुर्दान्त दस्यु दया का देवता बना भगवान् महावीर और युवा-अध्यात्म WWW W ww w w x x x x 5 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक अंक डॉ० बशिष्ठ नारायण सिन्हा ३ श्री नंदलाल जैन ३३ ३ श्री भिखारीराम यादव ३३ ३ प्रो० रामदेव राम यादव ३३ ४ डॉ० आदित्य प्रचण्डिया दीति ३३ श्री अरुण कुमार सिंह श्री भूरचन्द जैन ३३४ डॉ० रतनकुमार जैन ३३ .४ पाण्डेय रामदास गम्भीर उपाध्याय अमरमुनि जी रविशंकर मिश्र पं० विश्वनाथ पाठक ३३ ५ रविशंकर मिश्र ___ ३३ ६ डॉ० सागरमल जैन ३३ ६ उपाध्याय अमरमुनि जी ३३६ श्री वीरेन्द्रकुमार जैन ३३ ६ श्री जमनालाल जैन ३३६ ई० सन् १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ पृष्ठ १-२४ २५-३२ ३३-३८ १-९ । १०-११ १२-१६ १७-२० २१-२८ ३-१२ १३-१६ १७-१९ २०-२१ १-२ ३-२७ २८-३८ ३९-५० ५१-५५ 55 5 w w w w w Page #131 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अकबर और जैनधर्म ४५ आगम और मूलसूत्र की मान्यता पर विचार संस्कृत दूतकाव्यों के निर्माण में जैन कवियों का योगदान विदेशों में जैन साहित्य : अध्ययन और अनुसंधान ज्ञान- प्रमाण्य और जैन दर्शन आचार्य मानतुंगसूरिविरचित भक्तामर काव्य धर्म परिवर्तन - श्रमण धर्मों की भूमिका और निदान बिना विचारे जो करै साधु मर्यादा क्या ? कितनी ? महावीर का संयम और उनका साधनामय जीवन दशरूपक का एक अपभ्रंश दोहा : कुछ तथ्य 'प्राणप्रिय काव्य' का रचनाकाल, श्लोक संख्या और सम्प्रदाय जैनधर्म एक सम्प्रदायातीत धर्म जीवन-दृष्टि संस्कृत - व्याकरण शास्त्र में जैनचार्यों का योगदान प्रतिक्रिया है दुःख जैन धर्म में मोक्ष का स्वरूप ढंढण ऋषि की तितिक्षा श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० ओमप्रकाश सिंह श्री अगरचन्द नाहटा रविशंकर मिश्र डॉ० भागचन्द भास्कर भिखारीराम यादव राजमल पवैया महेन्द्रकुमार फुसकेले उपाध्याय अमरमुनि सौभाग्यमल जैन कु० सविता जैन डॉ० देवेन्द्रकुमार जैन श्री अगरचंद नाहटा डॉ० निजामुद्दीन उपाध्याय अमरमुनि जी श्रीराम यादव युवाचार्य महाप्रज्ञ विनोदकुमार तिवारी उपाध्याय अमरमुनि वर्ष ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ mr m ३३ अंक ww ६ ६ ६ ७ ७ ७ ८ ८ ८ ई० सन् १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १२७ पृष्ठ ५६-६० ६१-६३ १-१५ १०-२८ २९-३६ १-४ ५-११ १२-१४ १५-१८ १९-२३ २४-२६ २७-२९ ३-७ ८-१० ११-२० २-६ ७-१० ११-१४ Page #132 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२८ लेख जैन मुनि क्या कुछ कर सकता है ? मध्य प्रदेश के गुना जिले का जैन पर्युषण पर्व : क्या, कब, क्यों और कैसे पुरातत्त्व असली दुकान/नकली दुकान सुख का सागर अमृत जीता, विष हारा सिरोही जिले में जैन धर्म आत्मसुख दशरूपकावलोक में उद्धृत अपभ्रंश उदाहरण सभी सुखों का राजा संवत्सरी महापर्व : स्वरूप और अपेक्षाएँ सनत्कुमार का सौन्दर्य जैन हरिवंश पुराण-एक सांस्कृतिक अध्ययन महावीर की विहार भूमि - मगध और उसकी संस्कृति चिन्तन : सम्यक् जीवन दृष्टि श्रमण संस्कृति की पृष्ठभूमि धर्म और युवा पीढ़ी बलभद्र और हरिण श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मन्नूलाल जैन डॉ० शिवप्रसाद डॉ० सागरमल जैन डॉ० सागरमल जैन डॉ० आदित्य प्रचण्डिया 'दीति' उपाध्याय अमरमुनि डॉ० सोहनलाल पटनी हरिवल्लभ भयाणी आचार्य आनन्द ऋषि जी मुनि नगराज जी उपाध्याय अमरमुनि जी लल्लू पाठक गणेशप्रसाद जैन डॉ॰ हुकुमचन्द संगवे श्रीमती उर्मिला जैन श्रीमती बीना निर्मल उपाध्याय अमरमुनि जी वर्ष ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ ३३ अंक 8 १० १० १० १० १० ११ ११ ११ ११ ११ ११ १२ १२ १२ ई० सन् १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ पृष्ठ १५-१८ १९-२३ १-१९ २०-२१ २२-२४ २५-२९ ३२-३७ ३८ ३-५ ६-९ १०- १४ १५-२२ २३-२७ २८-३१ ३-५ ७-८ ९-११ Page #133 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२९ लेख अंक १२ ३३ २ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक जैन दर्शन के अन्तर्गत जीव तत्त्व का स्वरूप विनोदकुमार तिवारी संयुक्त निकाय में जैन सन्दर्भ विजयकुमार जैन भगवान् महावीर उपाध्याय अमरमुनि जी तीर्थंकर महावीर का निर्वाण पर्व 'दीपावली' एक समीक्षा गणेशप्रसाद जैन उपाध्याय श्री अमरमुनि जी : एक ज्योर्तिमय व्यक्तित्व मुनि समदर्शी आज का युवक धर्म से विमुख क्यों? माणकचन्द पींचा "भारती" कवि देपाल की अन्य रचनायें श्री अगरचन्द नाहटा व्यक्ति और समाज डॉ० सागरमल जैन प्रातिभ ज्ञानात्मक चिन्तनः सापेक्ष चिन्तन पाण्डेय रामदास गंभीर मन की शक्ति बनाम सामायिक युवाचार्य श्री महाप्रज्ञ जैन एकता का प्रश्न डॉ० सागरमल जैन जैन एकता संभव कैसे? मनि रूपचन्द जैन धर्म और युवावर्ग प्यारेलाल श्रीमाल ‘सरस पंडित' ब्रह्मदत्त मुनि श्री महेन्द्रकुमार जी 'प्रथम' हुबली का श्री शांतिनाथ मंदिर श्री भूरचन्द जैन धर्म क्या है ? डॉ० सागरमल जैन जैनधर्म में अरिहन्त और तीर्थंकर की अवधारणा श्री रमेशचन्द्र गुप्त ई० सन् १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ १९८२ <Page #134 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३० पृष्ठ ३४ ३४ ४ ४ » » ३४ ३४ T ३४ ३४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक आचार्य आनन्द ऋषि मुनि महेन्द्रकुमार 'प्रथम' डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव डॉ० प्रतिभा जैन आचार्य आनन्द ऋषि कस्तूरीनाथ गोस्वामी डॉ० रतनचन्द्र जैन मुनि महेन्द्रकुमार जी 'प्रथम' गणेशप्रसाद जैन श्री हर्षचन्द्र डॉ० प्रेमसुमन जैन मुनि महेन्द्रकुमार डॉ० विनोद कुमार तिवारी श्री के० रिषभचन्द्र श्री राजदेव दुबे युवाचार्य महाप्रज्ञ मुनि ललितप्रभ सागर गणेशप्रसाद जैन १२-१६ १७-२१ २-९ ११-१२ १३-१६ २-८ १०-१३ १४-२४ लेख आत्मबोध का क्षण नन्दीसेन जैन दृष्टि में चारित्र अनेकान्तवाद सदाचार का महत्त्व वर्तमान अशान्ति का एक मात्र समाधान अहिंसा बन्ध के कार्य में मिथ्यात्व और कषाय की भूमिकाएँ अभी तो सबेरा ही है ? वैराग्यमूलक एक ऐतिहासिक प्रेमकाव्य : तरंगवती जैनत्व का गौरव और हम जैन भौगोलिक स्थानों की पहचान आनन्द जैन दर्शन में अजीव तत्त्व का स्थान जैन विद्या के अध्ययन एवं संशोधन केन्द्रों की स्थापना चरित्र निर्माण में आचार-पद्धति का योगदान. अहिंसा की समस्याएँ जैनधर्म में भक्ति का स्वरूप समाधिमरण ३४ or ई० सन् १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ ३४ ३४ 9 ३४ 9 ३४ 9 ३४ 9 ३४ 9 ६-११ १२-१७ १८-२१ २२-२५ २६-३२ २-४ ५-७ ९-१३ ३४ 9 ३४ ३४ or or ३४ Page #135 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख राज्य का त्यागः त्यागी से भय स्वप्न और विचार बंगलौर का आदिनाथ जैन मंदिर जैन अध्यात्मवाद : आधुनिक संदर्भ में धर्म और धार्मिक जैन स्तोत्रों में नवधा भक्ति क्षमा-वाणी दशलक्षण / दशलक्षण धर्म के शांति का अमोध अस्त्र - क्षमा क्षमा की शक्ति जैन एकता का स्वरूप व उसके उपाय जैन एकता : सूत्र व सुझाव भगवान् महावीर का निर्वाण-कल्याणक क्या हम अपराधी नहीं हैं ? भगवान् महावीर और विश्वशांति भाग्यवान् अन्धा पुरुष जैनदर्शन में मोक्ष का स्वरूप : भारतीय दर्शनों के परिप्रेक्ष्य में श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक गणेश ललवाणी मुनि सुखलाल भूरचन्द जैन डॉ० सागरमल जैन डॉ० आदित्य प्रचण्डिया श्री धर्मचन्द जैन मुनिश्री चन्द्रप्रभ सागर डॉ० सागरमल जैन मुनि ललितप्रभ सागर मुनि महेन्द्र कुमार जी 'प्रथम' स्व० श्री अगरचन्द नाहटा श्री जसकरण डागा उपाध्याय अमर मुनि श्री जिनेन्द्र कुमार डॉ० निजामुद्दीन मुनि महेन्द्र कुमार डॉ० सुदर्शनलाल जैन वर्ष ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३४ ३५ ३५ ہے ہے ہے ہے ३५ ३५ ३५ अक ތ އ १० १० १० ११ ११ ११ ११ १२ १२ ई० सन् १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १९८३ १३१ पृष्ठ १४- १९ २०-२१ २२-२३ १-१७ २०-२१ २५-२९ १-११ १३-२८ २९-३१ ३३-३८ १-२१ २२-४१ २-६ ७-८ १०-१३ १४-१६ १८-२४ Page #136 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३२ वर्ष ३५ ३५ अंक १ २ पृष्ठ २५-२८ २-५ ८-१२ १३-२० ३५ ३५ ३५ ५-७ लेख वीरवर्धमानचरित में शान्तरस विमर्श तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ अहिंसा की सार्थकता जैन आचार-पद्धति में अहिंसा कर्म का स्वरूप भगवान् बाहुबली के प्रति जैन धर्म दर्शन में अराधना का महत्त्व यशस्तिलकचम्पू और जैनधर्म सामायिक और ध्यान वसुराजा सद्विचार हेतु मौलिक प्रक्रिया जैन संस्कृति में सत्य की अवधारणा ३५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्रीमती उर्मिला जैन श्री गणेशप्रसाद जैन श्री सौभाग्यमल जैन डॉ० राजदेव दुबे श्री रवीन्द्रनाथ मिश्र दिलीप सुराणा गुलाबचन्द जैन डॉ० (कु०) सत्यभामा डॉ० आदित्य प्रचण्डिया मुनि महेन्द्र कुमार सौभाग्य मुनि 'कुमुद डॉ० राजदेव दुबे एवं प्रमोद कुमार सिंह श्री मिश्रीलाल जैन श्री मिश्रीलाल जैन श्री मिश्रीलाल जैन श्री रविशंकर मिश्र <<< Page #137 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३३ अंक ३५६ ३५ ३५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक उपाध्याय अमरमुनि स्व० जिनेन्द्रवर्णी मुनिश्री नगराज जी दर्शनाचार्य मुनि योगेशकुमार डॉ० आदित्य प्रचण्डिया श्यामवृक्ष मौर्य मुनि योगेश कुमार श्री सौभाग्य मुनिजी 'कुमुद' ur ur ur ur ur ur ३५ ई० सन् ई. सन १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ पृष्ठ ३-१४ १५-१९ २०-२२ २४-२६ २७-२८ २९-३१ १-१० ११-१४ ३५ ३५६ ३५ ७ ३५ लेख महावीर का जीवन-दर्शन महावीर जयन्ती भगवान् महावीर के आदर्शों और यथार्थ की पृष्ठभूमि नारी उत्क्रान्ति के मसीहा भगवान् महावीर वर्तमान सन्दर्भ और भगवान् महावीर की अहिंसा भगवान् महावीर की व्यापक दृष्टि आचारांग में सोऽहम् की अवधारणा का अर्थ ध्यान साधना का दिशाबोध । जैनदर्शन और अरविन्द दर्शन में एकत्व और अनेकत्व सम्बन्धी विचार हिन्दी जैन कवि छत्रपति : व्यक्तित्व तथा कृतित्व जैन आगमों में विद्वत् गोष्ठी अपना और पराया सूत्रकृतांग में प्रस्तुत तज्जीव तच्छरीवाद जैन एवं बौद्ध धर्म में भिक्षुणी संघ की स्थापना धर्म का भान तपश्चर्या-उपवास पूज्य आचार्य श्री कांशीराम जी महाराज स्मृति विशेषांक u r 9 १६-२० ३५ ३५ कु० ममता गुप्ता डॉ० आदित्य प्रचण्डिया 'दीति' श्री सौभाग्यमल जैन मुनिश्री महेन्द्र कुमार प्रथम श्रीमती मंजू सिंह अरुण प्रताप सिंह डॉ० आदित्य प्रचण्डिया चिमनलाल चकुभाई शाह ३५ ३५ 9 9 9 or or ora १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ ६-९ १०-१४ १५-२३ १-१६ १७-१८ २०-२२ १-४१ ३५ ३५ Page #138 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३४ लेख अंक ई० सन् १९८४ १९८४ १९८४ ३५ ३५ ३५ १९८४ शुद्धि, चिकित्सा और सिद्धि का महान् पर्व-संवत्सरी प्रेम की सरिता प्रवाहित करने वाला पर्व अध्यात्म-आवास/पर्युषण सिद्धि का पथ : आर्जवधर्म तप का उपादेय : कर्मों की निर्जरा भगवान् महावीर की साधना मानव जाति के अभ्युदय का पर्व 'दीपावली' भारतीय संस्कृति के विकास में श्रमण धारा का महत्त्व आत्म परिमाण (विस्तार क्षेत्र) जैन दर्शन के सन्दर्भ में तत्त्वार्थ राजवार्तिक में वर्णित बौद्धादिमत ३५ ३५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक युवाचार्य महाप्रज्ञ मुनि मणिप्रभ सागर दर्शनाचार्य मुनि योगेशकुमार श्रीमती अलका प्रचण्डिया 'दीति' डॉ० आदित्य प्रचण्डिया 'दीति' उपाध्याय अमरमुनि दर्शनाचार्य योगेशकुमार डॉ० कोमलचन्द्र जैन दर्शनाचार्य मुनि योगेशकुमार डॉ० उदयचन्द जैन मुनिश्री महेन्द्रकुमार जी 'प्रथम' डॉ० मंगल प्रकाश मेहता भंडारी सरदारचंद जैन . मुनिश्री महेन्द्रकुमारजी 'प्रथम' श्री सौभाग्य मुनि जी 'कुमुद' जिनेन्द्र कुमार मुनिश्री महेन्द्रकुमारजी 'प्रथम' 244444442 r r r r mmm पृष्ठ २-३ ४-६ ७-१६ १७-१८ १९-२० १-१० ११-१४ १५-२४ २८-३६ ३७-४८ २-७ १-३ ५-७ ८-१० २-४ ६-१० ११-१३ ३५ ३५ ३६ ३६ ३६ नागदत्त १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८४ १९८५ १९८५ १९८५ ३६ शान्तरस : जैनकाव्यों का प्रमुख रस धर्म का स्वरूप बन्दर का रोना आडम्बरप्रिय नहीं धर्मप्रिय बनो राष्ट्रीय विकास-यात्रा में जैनधर्म एवं जैन पत्रकारों का योगदान पाप का घट ३६ ३६३ Page #139 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख भगवान् महावीर निर्वाण स्थली दुर्बल को सताना क्षत्रियधर्म नहीं धर्म को समाज सेवा से जोड़ा जाय सुबुद्धि और दुर्बुद्धि संवेदनहीनता से सुलगती सभ्यता परम तत्त्व : आचार्य विनोबा भावे की दृष्टि में अन्त: प्रज्ञा-शक्ति जैन दर्शन में कथन की सत्यता सच्ची सनाथता जैन संतकाव्य में संयम : आधुनिकपरिस्थितियों का समाधान राष्ट्रीय एकता और साहित्य हुबली अचलगच्छ जैन देरासर मुलाकात महावीर से महामानव महावीर का जीवन प्रदेय सुमन रख भरोसा महावीर का भगवान् महावीर : जीवन सम्बन्धी प्रमुख घटनाएँ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक अनन्त प्रसाद जैन आचार्य आनन्द ऋषि जी जिनेन्द्र कुमार मुनिश्री महेन्द्रकुमारजी 'प्रथम' मुनि राजेन्द्रकुमार 'रत्नेश' डॉ० नरेन्द्र बहादुर दर्शनाचार्य मुनि योगेशकुमार सुश्री अर्चना पाण्डेय डॉ० रविशंकर मिश्र डॉ० बहादुर सिंह डॉ० नगेन्द्र श्री भूरचंद जैन श्री शरद कुमार साधक डॉ. आदित्य प्रचण्डिया उत्सवलाल तिवारी 'सुमन' डॉ० मंगलप्रकाश मेहता वर्ष ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ w w ३६ ww ३६ ३६ ३६ www ३६ ३६ ३६ ३६ अंक ३ ४ ४ ४ ४ ४ S 55 کی سو کی کی کی ई० सन् १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १३५ पृष्ठ १४-१६ २-४ ६-८ ९-१३ १४-१९ २२-२५ २-४ ६-९ १०-१२ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ २-६ १९८५ ७-९ १९८५ १९८५ १३-१९ २०-२५ २६-२८ १०-११ १२-१५ Page #140 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १३६ अंक ३ ३ ६ ६ पृष्ठ १८-१९ २२-२३ २-११ १२-१८ १९-२६ ३६ ७ w २-४ w श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री महेन्द्र सागर प्रचण्यिा पूनमचन्द मुणोत जैन गणेश प्रसाद जैन युवाचार्य महाप्रज्ञ जसवन्तलाल मेहता श्री सौभाग्यमुनि जी ‘कुमुद' श्री कृष्ण 'जुगनू' महेन्द्र कुमार फुसकुले मुनिश्री महेन्द्रकुमार जी 'प्रथम' राजेन्द्रकुमार श्रीमाल डॉ. सागरमल जैन कु. अर्चना पाण्डेय मुनिश्री महेन्द्रकुमार 'प्रथम' श्री रवीन्द्रनाथ मिश्र डॉ० उदयचन्द जैन डॉ. विनोदकुमार तिवारी मुनि राजेन्द्रकुमार 'रत्नेश लेख दर्शन और ज्ञान जब चारित्र में आया भगवान् महावीर का आदर्श जीवन है तीर्थंकर महावीर की जन्मभूमि : विदेह का कुण्डपुर स्वभाव-परिवर्तन जैनधर्म एवं गुरु-मन्दिर आभूषण भार स्वरूप है। अपराध की औषधि : क्षमा एक महान् विरासत की सहमति में उठा हाथ दृढ़प्रतिज्ञ केशव एकता? एकता? एकता? भाग्य बनाम पुरुषार्थ शब्द का वाच्यार्थ जाति या व्यक्ति श्रावक गंगदत्त जैन कर्म-सिद्धान्त का क्रमिक-विकास जैनदर्शन में आत्म स्वरूप तीर्थंकर महावीर की शिक्षाओं का सामाजिक महत्त्व धर्म एवं दर्शन-एक गवेषणात्मक विवेचन 5 Guru W ई० सन् १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ १९८५ ३ ६ ७-९ ११-१४ १५-२१ २२-२६ २-६ ९-१३ १४-१५ १६-२१ १-११ १२-१४ १६-१८ ३ ३६ ३६ १० ३ १० my १० Page #141 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष ३६ ३६ अंक १० १० ३६ ๕ ๕ * * श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक जैन कर्म-सिद्धान्त का उद्भव एवं विकास श्री रवीन्द्रनाथ मिश्र तीर्थंकर, बुद्ध और अवतार की अवधारणा का तुलनात्मक अध्ययन रमेशचन्द्र गुप्त । पर्युषण और हमारा कर्तव्य स्व० श्री अगरचन्द नाहटा महापर्व पर्युषण का पावन सन्देश:अपने आप को परखें आचार्य आनन्दऋषि जी महाराज संवत्सरी की सर्वमान्य तारीख दिलीप सुराणा भारतीय दर्शनों में अहिंसा रत्नलाल जैन श्वेताम्बर साहित्य में रामकथा का स्वरूप डॉ० सागरमल जैन वसुदेवहिण्डी में रामकथा गणेशप्रसाद जैन पर्वाराधन की एकरूपता का प्रश्न श्री सौभाग्य मुनि 'कुमुद' प्राचीन जैन साहित्य में शिक्षा का स्वरूप डॉ० राजदेव दुबे जैन संस्कृति का दिव्य सन्देश-अनेकान्त मुनि ज्योतिर्धर जैन पर्व दीपावली : उत्पत्ति एवं महत्त्व डॉ. विनोदकुमार तिवारी जैन दिवाकर मुनिश्री चौथमल जी महाराज विपिन जारोली सिद्धक्षेत्र बावनगजा जी नेमिचन्द जैन आचार्य सोमदेव का व्यक्तित्व तथा कर्तृव्य कु० मीनाक्षी शर्मा संस्कृत काव्यशास्त्र के विकास में प्राकृत की भूमिका धनीराम अवस्थी जैन दर्शन के सन्दर्भ में भाषा की उत्पत्ति कु० अर्चना पाण्डेय * * * * १३७ ई० सन् पृष्ठ । १९८५ . १९-२६ १९८५ २७-३७ १९८५ ६-१२ १९८५ १४-१५ १९८५ १६-२२ १९८५ २३-३१ १९८५ २-६ १९८५ ७-१३ १९८५ १४-१५ १९८५ १६-२४ १९८५ २-७ १९८५ १९८५ ६-९ १९८६ २-४ १९८६ १९८६ २-९ १९८६ ११-१८ * * * * २-५ * * ३-८ ३७५ ३७ ५ Page #142 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ३७६ ३७६ ३७ ३७ ७ 3७ १३८ लेख वीरावतार महावीर का जीवन दर्शन जैनदर्शन में बंधन-मोक्ष जैन नीति दर्शन एवं उसका व्यावहारिक पक्ष जैन दर्शन की पृष्ठभूमि में ईश्वर का अस्तित्व महावीर और बुद्ध धम्मपद और उत्तराध्ययन का एक तुलनात्मक अध्ययन प्राचीन जैन साहित्य में वर्णित आर्थिक जीवन-एक अध्ययन जैन विद्या के निष्काम सेवक : लाला हरजसराय जी जैन चरित्र की दृढ़ता जैनागमों में वर्णित नागपूजा सर्वधर्म समभाव और स्याद्वाद जैन साधना पद्धति में ध्यानयोग क्षमा में विश्व बन्धुत्व इन्द्रियनिग्रह से मोक्ष-प्राप्ति जैन दर्शन में जीव का स्वरूप महत्तरा श्री जी का महाप्रयाण श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक समन्तभद्र डॉ० सागरमल जैन विजय कुमार डॉ० डी० आर० भण्डारी डॉ० विनोद कुमार तिवारी सुभाष मुनि 'सुमन' महेन्द्रनाथ सिंह श्रीमती कमलप्रभा जैन डॉ० सागरमल जैन केवल मुनि जी रामहंस चतुर्वेदी सुभाष मुनि 'सुमन' साध्वी प्रियदर्शनाजी सौभाग्यमल जैन 'वकील' श्री कृष्ण 'जुगनू' विजय कुमार राजकुमार जैन ई० सन् १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ पृष्ठ १-६ ७-९ ।। १०-१९ १-८ ९-११ १२-१६ १-९ १०-१९ २१-२४ २६-३३ १-७ १०-१५ १८-२७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ १० १० ११ २-४ ५-७ ९-१५ १६-२६ Page #143 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख वर्ष ३७ ३८ ३८ १३९ पृष्ठ । १-२० २-४ ५-११ १२-१३ १४-१८ १९-२१ ३८ 30 ३८ ३८ २-७ धर्म और दर्शन के क्षेत्र में हरिभद्र का अवदान तीर्थंकर महावीर की तलस्पर्शी अहिंसा दृष्टि तीर्थंकर महावीर की निर्वाण भूमि ‘पावा' धर्म और आधुनिकता महावीर विहार मीमांसा डॉ० वाल्टेर शुबिंग की जैन विद्या की सेवा तीर्थंकर पार्श्वनाथ : प्रामाणिकता और ऐतिहासिकता उपासकदशांगसूत्र का आलोचनात्मक अध्ययन भोले नही भले बनिये युवा-दृष्टिकोण शुद्ध-अशुद्ध भावधारा आज के सन्दर्भ में जैन पंचव्रतों की उपयोगिता (क्रमश:) समाधिमरण की अवधारणा : उत्तराध्ययन-सूत्र के परिप्रेक्ष्य में पुरातत्त्वविद् स्व० अगरचन्द नाहटा जैन साहित्य में चैतन्य केन्द्रों का निरूपण भारतीय संस्कृति की अन्तरात्मा मध्यप्रदेश एवं जैन धर्म श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० सागरमल जैन मुनिश्री नगराज जी गणेशप्रसाद जैन श्रीमती वीणानिर्मल जैन आचार्य विजयेन्द्र सूरि डॉ० सौभाग्यमल जैन 'वकील डॉ० विनोद कुमार तिवारी डॉ० सुभाष कोठारी डॉ० आदित्य प्रचण्डिया 'दीति' । सौभाग्यमल जैन युवाचार्य महाप्रज्ञ डॉ० विनोद कुमार तिवारी श्री रज्जन कुमार श्री भूरचन्द जैन युवाचार्य महाप्रज्ञ देवेन्द्रमुनि शास्त्री (लेखक का नाम उद्धत नहीं है) <<< ww www mmmmmmm. ई० सन् १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८६ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ ३८ ३८ ३८ २८ ३८ ३८३ ३८ ३८ ८-१३ १४-१६ १७-२० २-५ ८-१२ १३-१८ २०-२३ २-५ ६-८ १०-२५ ४ २१ Page #144 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४० लेख गतिशील स्वच्छ मन वरदान है ? प्राणातिपात विरमण: अहिंसा की उपादेयता प्राकृत भाषा और जैन आगम प्लेटो और जैन दर्शन आज के सन्दर्भ में जैन पंचव्रतों की उपयोगिता श्वेताम्बर पण्डित परम्परा ज्ञानीजनों युवाचित्त का मरण : भक्त प्रत्याख्यान मरण धर्म से विमुख क्यों ? जैन साहित्य के महान् सेवक हीरालाल कापड़िया वैदिक वाङ्मय और पुरातत्त्व में तीर्थंकर ऋषभदेव पुरुदेवचम्पू का आलोचनात्मक अध्ययन श्रमण संस्था और समाज आहार दर्शन जैन दर्शन में जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया संस्कृत साहित्य में कर्मवाद प्रबन्धकोश में उपलब्ध आर्थिक विवरण भगवान् पार्श्वनाथ का निर्वाण पर्व श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० उम्मेदमल मुनोत डॉ० ब्रजनारायण शर्मा डॉ० रमेशचन्द जैन मुनि राजेन्द्रकुमार 'रत्नेश' डॉ० विनोदकुमार तिवारी श्री अगरचन्द नाहटा श्री रज्जन कुमार दर्शनाचार्य मुनि योगेश श्री अगरचन्द नाहटा डॉ० राजदेव दुबे डॉ० कपूरचन्द जैन सौभाग्यमल जैन डॉ० कस्तूरीमल गोस्वामी अम्बिकादत्त शर्मा रत्नलाल जैन अशोककुमार सिंह रमेशकुमार जैन वर्ष ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३८ ३८ ३८ ३८ ३८ 20 20 2 ३८ ३८ अंक 5 5 5 5 99 ८ ८ ८ ८ ९ ९ १० ई० सन् १९८७ १९८७ १९८७ १९८६ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ पृष्ठ २-५ ६-१५ १६-२२ २४-२७ २-५ १०-१३ १४- १९ २०-२२ २३-२६ २-६ ७-१३ १४- १९ २१-२२ २-९ १०-१६ १७-२५ २-५ Page #145 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४१ वर्ष ३८ ३८ अंक १० ११ ३८ ११ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक जैन एवं बौद्ध दर्शन . सुभाषमुनि 'सुमन' हिंसक और अहिंसक युद्ध अशोककुमार सिंह जैन धर्म में निर्जरा तप डॉ० मुकुलराज मेहता आत्म-अनात्म द्वन्द्वात्मिकी संन्यासी राम आचारांग में समाज और संस्कृति स्व० डॉ० परमेष्ठीदास जैन आचारांग का दार्शनिक पक्ष स्व० डॉ० परमेष्ठीदास जैन उत्तर भारत की सामाजिक संरचना - जैन आगम साहित्य के सन्दर्भ में उमेशचन्द्र सिंह मरण के विविध प्रकार रज्जन कुमार महावीर का अपरिग्रह सिद्धान्त : सामाजिक न्याय का अमोघमन्त्र डॉ० कमलचन्द सोगाणी जैन तत्त्व विद्या में पुद्गल की अवधारणा अम्बिकादत्त शर्मा 9 महावीर और गाँधी की जीवन दृष्टि : सत्य की शोध दरियाव सिंह मेहता 'जिज्ञासु' आचारांग सूत्र : एक विश्लेषण डॉ० सागरमल जैन गुजरात में जैनधर्म स्व० मुनिश्री जिनविजय जी तत्त्व सूत्र संन्यासी राम हरिभद्र के धर्म-दर्शन में क्रान्तिकारी तत्त्व : सम्बोध प्रकरण के सन्दर्भ में डॉ० सागरमल जैन हरिभद्र की क्रान्तदर्शी दृष्टि, धूर्ताख्यान के सन्दर्भ में डॉ० सागरमल जैन पृष्ठ ६-१७ १-३ ४-८ ९-१९ २०-३२ १-११ १२-२४ २५-३१ ३८ ३८ ३८ १२ १२ १२ ई० सन् १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८७ १९८८ १९८८ १ ३९ ३९ ३९ ३९ ३९ u al. ° ° ६-१५ १७-२४ १-१९ १-३९ १-८ ३ ३९ ३९ ४ ४ १९८८ १९८८ ९-२० २१-२५ Page #146 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४२ अंक ४ ३९ ३९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक हरिभद्र के धूर्ताख्यान का मूल स्रोत : एक चिन्तन डॉ० सागरमल जैन प्रलय से एकलय की ओर मुनि राजेन्द्र कुमार रत्नेश जगत सत्य या मिथ्या कन्हैया लाल सरावगी समाधिमरण का स्वरूप रज्जन कुमार जैन एवं बौद्ध धर्मों के वैदिक स्वरूप डॉ० राजेन्द्र प्रसाद कश्यप राजस्थानी एवं हिन्दी जैन साहित्य श्री भंवरलाल नाहटा जैनधर्म में समाधिमरण की अवधारणा रज्जन कुमार प्राचीन भारतीय सैन्य विज्ञान एवं युद्धनीति इन्द्रेशचन्द्र सिंह हिन्दू तथा जैन राजनैतिक आदर्शों का समीक्षात्मक अध्ययन कु० प्रतिभा जैन पश्चाताप भँवरलाल नाहटा जैनधर्म का एक विलुप्त सम्प्रदाय : यापनीय (क्रमश:) प्रो० सागरमल जैन आचार्य अमितगति : व्यक्तिव एवं कृतित्व डॉ० कुसुम जैन जैन तर्कशास्त्र के सप्तभंगी नय की आगमिक व्याख्या ____डॉ० भिखारीराम यादव जैन साहित्य में कृष्ण कथा श्रीमती रीता सिंह जैन धर्म का एक विलुप्त सम्प्रदाय : यापनीय प्रो० सागरमल जैन पश्चाताप : एक विवेचन श्री भंवरलाल नाहटा भावात्मक एकता : प्रकृति और जीवन का सत्य डॉ० नरेन्द्र भानावत 1 x sooow wouvaror or or are a ई० सन् १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ पृष्ठ २६-२८ २-४ ५-११ १२-१७ १८-२३ २-४ ३-८ ९-१७ १८-२२ २३-२४ १-१६ १७-२३ १-२६ २७-३२ १-१८ २२-२३ २५-२८ ३९ Page #147 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्री हजारीमल बांठिया वर्ष अंक ई० सन् १९८८ पृष्ठ १-७ ३९ ov ३९ & g g • ४० लेख पुरातत्त्वाचार्य पद्मश्री स्व० मुनि जिनविजय जी आचारांग के शस्त्रपरिज्ञा अध्ययन में प्रतिपादितषड्जीवनिकाय सम्बन्धी अहिंसा काशी के कतिपय ऐतिहासिक तथ्य अन्तर-यात्रा पाण्डवचरित्र का तुलनात्मक अध्ययन धम्मपद और उत्तराध्ययन का निरोधवादी दृष्टिकोण हरिभद्रसूरि का समय-निर्णय (क्रमश:) हरिभद्रसूरि का समय-निर्णय अष्टलक्षी : संसार का एक अद्भुत ग्रंथ अनेकान्तदर्शन जैन दर्शन और आधुनिक विज्ञान भावडारगच्छ का संक्षिप्त इतिहास जैन धर्म मानवतावादी दृष्टिकोण : एक मूल्यांकन आनन्दघन जी खरतरगच्छ में दीक्षित थे पुरानी हिन्दी (मरुगूर्जर) के प्राचीनतम कवि धनपाल जैन लेखों का सांस्कृतिक अध्ययन ४०. डॉ० फूलचन्द जैन - श्री अमृतलाल शास्त्री मुनि राजेन्द्र कुमार 'रत्नेश कल्याणी देवी जायसवाल डॉ० महेन्द्रनाथ सिंह स्व० मुनिश्री जिनविजयजी स्व० मुनिश्री जिनविजयजी महोपाध्याय चन्द्रप्रभ सागर मुनिश्री नगराज जी डॉ० मुकुलराज मेहता डॉ० शिव प्रसाद डॉ. ललितकिशोरलाल श्रीवास्तव श्री भंवरलाल नाहटा डॉ० शितिकण्ठ मिश्र श्री नारायण दुबे ४० १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८८ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ ८-१५ १६-१८ १९-२१ २२-२७ २८-२९ १-३२ १-३० २-८ ९-१० ११-१४ १५-३३ ३४-४५ २-१२ १३-१७ १८-२६ ४० or o० WWW WWW०० ४० ३ ४० ४० ४० ४० ४ ४ Page #148 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४४ . अंक ४ ४ ४० ४० ४० ४० ४० ई० सन् १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ पृष्ठ २७-३४ ३५-४१ ३-९ १०-१४ १५-४३ १-८ ९-१९ ४० ४० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक जैन दर्शनों में आवश्यक साधना कु० कमला जोशी कर्म की विचित्रता-मनोविज्ञान की भाषा में डॉ० रत्नलाल जैन पार्श्वकालीन जैनधर्म डॉ. विनोद कुमार तिवारी महाकवि माघ ओसवाल थे? श्री माँगीलाल भूतोड़िया कोरंट गच्छ डॉ० शिवप्रसाद भगवान् महावीर की मंगल विरासत पं० सुखलाल संघवी अध्यात्म और विज्ञान प्रो० सागरमल जैन कल्पप्रदीप में उल्लिखित भगवान् महावीर के कतिपय तीर्थक्षेत्र डॉ० शिव प्रसाद भगवान् महावीर की प्रमुख आर्यिकाएँ डॉ० अशोक कुमार सिंह नाणकीय गच्छ डॉ० शिव प्रसाद उत्तराध्ययन में मोक्ष की अवधारणा डॉ० महेन्द्र नाथ सिंह भारतीय संस्कृति और श्रमण परम्परा श्री सौभाग्यमल जैन वेदान्त दर्शन और जैन दर्शन डॉ० सुदर्शनलाल जैन जैन एवं मीमांसा दर्शन में कर्म की अवधारणा डॉ० कृष्णा जैनः सांख्य दर्शन और जैन दर्शन : एक तुलनात्मक अध्ययन डॉ० सुदर्शनलाल जैन आहार-विहार में उत्सर्ग - अपवाद मार्ग का समन्वय डॉ० सुदर्शनलाल जैन जैनागमवर्णित तीर्थंकरों की भिक्षुणियाँ डॉ० अशोक कुमार सिंह ४० 555 w w w w o ouuuaaa ४०६ ४० २०-२९ ३०-३३ २-३४ ३५-३८ २-९ ४० ४० ८ ४०८ ४० ८ ४० ९ ४० ९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १०-१६ १७-२१ २-१० ११-१५ १७-३० xo Page #149 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ४० ४० ४० अंक १० १० १४५ पृष्ठ १-७ ८-१३ १४-१९ २०-२९ ४० ई० सन् १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ । ४० ४० ४० ४० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक चौबीसवें तीर्थंकर भगवान् महावीर का जन्म स्थान डॉ० सीताराम राय ओसवाल और पार्थापत्य सम्बन्धों पर टिप्पणी श्री भंवरलाल नाहटा जैन परम्परा में महाभारत कथा डॉ० कल्याणी देवी जायसवाल संगीत समयसार का आलोचनात्मक अध्ययन लक्ष्मीबाला अग्रवाल संवत्सरी डॉ० गोकुलचन्द जैन पर्युषण पर्व का मतलब भाई बंशीधर पर्युषण और सामाजिक शुद्धि मुनि नेमिचन्द्र प्राचीन जैन साहित्य के प्रारम्भिक निष्ठासूत्र पं० दलसुख भाई मालवणिया । जैन एवं बौद्ध दर्शनों में कर्म की विचित्रता रत्नलाल जैन कल्पप्रदीप में उल्लिखित 'खेड़ा गुजरात का नहीं राजस्थान का है श्री भंवरलाल नाहटा धर्म और दर्शन के क्षेत्र में हरिभद्र का अवदान श्रीमती संगीता झा जैनदर्शन में परीषह जय का स्वरूप एवं महत्त्व कु० कमला जोशी आचार्य हेमचन्द्र एक युग पुरुष । डॉ० सागरमल जैन संलेखना के विभिन्न पर्यायवाची शब्द डॉ० रज्जन कुमार विश्वचेतना के मनस्वी सन्त विजयवल्लभ सूरि पंन्यास नित्यानन्द विजय युद्ध और युद्धनीति इन्द्रेशचन्द्र सिंह स्याद्वाद और सप्तभंगी : एक चिन्तन प्रो० सागरमल जैन धर्मघोषगच्छ का संक्षिप्त इतिहास डॉ० शिव प्रसाद ४० ४० १९८९ ४० ४० ६-१० ११-२० ११-२० २५-२८ ३०-४० ४१-४५ ३-१५ १६-२० २१-२५ २६-३६ ३-४४ ४५-१०४ ४० १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९९० १९९० ४० ४० ४० ४१ ४१ Page #150 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४६ लेख वर्ष अंक ई० सन् १९९० पृष्ठ १०५-११२ ४-६ ४१ १९९० १९९० ४-६ १९९० ४-६ ४१ ४-६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक जैनधर्म में मानव डॉ० रज्जन कुमार एवं डॉ० सुनीता कुमारी जैनधर्म में तीर्थ की अवधारणा प्रो० सागरमल जैन जैन संस्कृति और श्रमण परम्परा प्रो० शान्ताराम भालचन्द्र देव मानव व्यक्तित्व का वर्गीकरण डॉ० त्रिवेणी प्रसाद सिंह सूत्रकृतांग में वर्णित दार्शनिक विचार डॉ० श्रीप्रकाश पाण्डेय पार्श्वनाथ जन्मभूमि मंदिर, वाराणसी का पुरातत्त्वीय वैभव प्रो० सागरमल जैन प्रबन्धकोश का ऐतिहासिक अध्ययन प्रवेश भारद्वाज जैन परम्परा का ऐतिहासिक विश्लेषण प्रो० सागरमल जैन सत् का स्वरूप : अनेकान्तवाद और व्यवहारवाद की दृष्टि में डॉ० राजेन्द्र कुमार सिंह भारतीय राजनीति में जैन संस्कृति का योगदान इन्द्रेशचन्द्र सिंह आचार्य हरिभद्र का योगदान श्री धनंजय मिश्र पश्चिमी भारत के जैन तीर्थ डॉ० शिव प्रसाद सिया and असिया Two Prakrit forms and Pischel on them Dinanath Sharma भट्ट अकलंककृत लघीयस्त्रय : एक दार्शनिक अध्ययन हेमन्त कुमार जैन जैनधर्म में नारी की भूमिका प्रो० सागरमल जैन १-२८ २९-४० ४१-५० ५१-७६ ७७-८८ ८९-१०० १-१६ १९९० १९९० १९९० १९९० ४-६ ७-२ ७-९ ७-९ १९९० ७-९ १९९० १९९० १९९० ७९ १९९० ७-९ १९९० १०-१२ १९९० १७-२५ २७-३४ ३५-४४ ४५-७८ ७९-८२ ८३-९० १-४८ Page #151 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ; १४७ वर्ष अंक १०-१२ ई० सन् १९९० पृष्ठ ४९-५६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक क्षेत्रज्ञ शब्द के विविध रूपों की कथा और उसका अर्धमागधी रूपान्तर डॉ० के० आर० चन्द्र हरिभद्र की श्रावकप्रज्ञप्ति में वर्णित अहिंसा : आधुनिक सन्दर्भ में डॉ० अरुण प्रताप सिंह - ईश्वरत्व : जैन और योग-एक तुलनात्मक अध्ययन डॉ० ललित किशोर लाल श्रीवास्तव जैन आगम साहित्य में वर्णित दास-प्रथा डॉ० इन्द्रेशचन्द्र सिंह जैनाचार्य राजशेखरसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्त्व डॉ० अशोक कुमार सिंह शाजापुर का पुरातात्त्विक महत्त्व प्रो० कृष्णदत्त बाजपेयी जैनधर्म के धार्मिक अनुष्ठान एवं कलातत्त्व डॉ० सागरमल जैन जैन श्रमण साधना : एक परिचय डॉ० सुभाष कोठारी तीर्थंकर महावीर जन्मना ब्राह्मण या क्षत्रिय श्री सौभाग्यमल जैन समयसार के अनुसार आत्मा का कर्तृत्व-अकर्तृत्व एवं भोक्तृत्व-अभोक्तृत्व डॉ० श्रीप्रकाश जी पाण्डेय भरतमुनि द्वारा प्राकृत को संस्कृत के साथ प्रदत्त सम्मान और गौरवपूर्ण स्थान डॉ० के० आर० चन्द्र पाण्डवपुराण में राजनैतिक स्थिति रीता बिश्नोई इषुकारीय अध्ययन (उत्तराध्ययन) एवं शांतिपर्व (महाभारत) का पिता-पुत्र संवाद डॉ० अरुण प्रताप सिंह १०-१२ १९९० १०-१२ १९९० १०-१२ १९९० १०-१२ १९९० १०-१२ १९९० १-३ १९९१ १-३ १९९१ ५७-७० ७१-८४ ८५-९२ ९३-११० १११-११४ १-२९ ३३-५० ५१-५५ १९९१ ४२ १-३ १९९१ ५७-७० १-३ ७१-७४ ७५-८६ १९९१ १-३ १९९१ ८७-९२ Page #152 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक श्रीमती अर्चनारानी पाण्डेय दीनानाथ शर्मा प्रो० कल्याणमल लोढ़ा अंक १-३ १-३ ४२ ई० सन् १९९१ १९९१ १९९१ पृष्ठ ९३-९६ १७-१०० १-१० ४-६ के० आर० चन्द्र डॉ० यदुनाथ प्रसाद दुबे १९९१ १९९१ ११-१९ २१-३२ ४-६ ४-६ लेख जैन भाषा दर्शन की समस्याएं उपदेशमाला (धर्मदास गणि) एक समीक्षा अर्ह परमात्मने नमः प्राकृत व्याकरण : वररुचि बनाम हेमचन्द्रअन्धानुकरण या विशिष्ट प्रदान । बसन्तविलासकार बालचन्द्रसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्त्व अन्य प्रमुख भारतीय दर्शनों एवं जैन दर्शन में कर्मबन्ध का तुलनात्मक स्वरूप ऋग्वेद में अहिंसा के सन्दर्भ जैन आगमों में वर्णित जातिगत समता आचारांग में अनाशक्ति जैन अभिलेखों की भाषाओं का स्वरूप एवं विविधताएं महावीर निर्वाण भूमि पावा-एक विमर्श समाधिमरण की अवधारणा की आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समीक्षा पंचपरमेष्ठि मन्त्र का कर्तृत्व और दशवैकालिक मूल अर्धमागधी के स्वरूप की पुनर्रचना कु० कमला जोशी डॉ० प्रतिभा त्रिपाठी डॉ० इन्द्रेश चन्द्र सिंह डॉ० श्रीप्रकाश पाण्डेय डॉ० एस० एन० दुबे श्री भगवतीप्रसाद खेतान । १९९१ १९९१ १९९१ १९९१ ४-६ ३३-४३ ४५-६२ ६३-७२ ७३-८८ ८९-९२ ९३-९८ ४-६ ४-६ ४-६ १९९१ ४२ डॉ० सागरमल जैन साध्वी (डॉ०) सुरेखा श्री डॉ० के० आर० चन्द्र ४-६ ७-१२ ७-१२ १९९१ १९९१ १९९१ ९९-१०१ १-१० ११-१५ Page #153 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक ____वर्ष डॉ० सागरमल जैन अंक ७-१२ ई० सन् १९९१ १४९ पृष्ठ । १७-२४ श्री भंवरलाल नाहटा ७-१२ १९९१ २५-३४ .४२ ४२ ४२ लेख उच्चैर्नागर शाखा के उत्पत्ति स्थान एवं उमास्वाति के जन्मस्थल की पहचान सूडा-सहेली की प्रेमकथा जैन सम्मत आत्मस्वरूप का अन्य भारतीय दर्शनों से तुलनात्मक विवेचन अपभ्रंश के जैन पुराण और पुराणकार कोटिशिला तीर्थ का भौगोलिक अभिज्ञान उपकेशगच्छ का संक्षिप्त इतिहास मूल्य और मूल्य बोध की सापेक्षता का सिद्धांत गुणस्थान सिद्धांत का उद्भव एवं विकास चन्द्रवेध्यक(प्रकीर्णक) एक आलोचनात्मक परिचय श्रमण एवं ब्राह्मण परम्परा में परमेष्ठी पद ऋषिभाषित का सामाजिक दर्शन पर्यावरण एवं अहिंसा स्याद्वाद की समन्वयात्मक दृष्टि युगपुरुष आचार्य सम्राट आनन्द ऋषि जी म० गुणस्थान सिद्धांत का उद्भव एवं विकास ७-१२ ७-१२ ७-१२ ७-१२ १-३ ४२ डॉ० (श्रीमती) कमला पंत रीता बिश्नोई डॉ० कस्तूरचन्द जैन डॉ० शिव प्रसाद डॉ० सागरमल जैन डॉ० सागरमल जैन श्री सुरेश सिसोदिया साध्वी (डॉ०) सुरेखा श्री साध्वी (डॉ०) प्रमोद कुमारी डॉ० डी०आर० भण्डारी डॉ० (कु०) रत्ना श्रीवास्तव उपाचार्य देवेन्द्र मुनि डॉ० सागरमल जैन ४३ १९९१ १९९१ १९९१ १९९१ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १-३ १-३ १-३ १-३ ३५-४३ ४५-५६ ५७-६० ६१-१८२ १-२२ २३-४३ ४५-५३ ५५-६७ ६९-७९ ८१-९० ९१-१०२ १०३-१०५ १-२६ oK or ३ ४३ ४३ १-३ ४-६ Page #154 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १५० ४३ ४३ ७-९ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक जैनदर्शन में शब्दार्थ सम्बन्ध डॉ० सुदर्शनलाल जैन जालिहरगच्छ का संक्षिप्त इतिहास डॉ० शिवप्रसाद प्राकृत जैनागम परम्परा में गृहस्थाचार तथा उसकी पारिभाषिक शब्दावली डॉ० कमलेश जैन त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में प्रतिपादित सांस्कृतिक जीवन डॉ० उमेशचन्द्र श्रीवास्तव जैनधर्म और दर्शन की प्रासंगिकता-वर्तमान परिप्रेक्ष्य में डॉ० इन्दु वैदिक साहित्य में जैन-परम्परा प्रो० दयानन्द भागर्व श्वेताम्बर मूलसंघ एवं माथुर संघ-एक विमर्श डॉ० सागरमल जैन जैन दृष्टि में नारी की अवधारणा डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव पूर्णिमागच्छ का संक्षिप्त इतिहास डॉ० शिवप्रसाद कवि छल्ह कृत अरडकमल्ल का चार भाषाओं में वर्णन श्री भंवरलाल नाहटा द्वादशार नयचक्र का दार्शनिक अध्ययन जितेन्द्र बी०शाह जैन कर्म-सिद्धान्त और मनोविज्ञानं डॉ० रत्नलाल जैन जैनधर्म और आधुनिक विज्ञान । डॉ० सागरमल जैन प्रागैतिहासिक भारत में सामाजिक मूल्य और परम्पराएं डॉ. जगदीशचन्द्र जैन जैन एवं बौद्ध दर्शन में प्रमाण-विवेचन डॉ० धर्मचन्द जैन क्षेत्रज्ञ शब्द का स्वीकार्य प्राचीनतम अर्धमागधी रूप डॉ० के० आर० चन्द्र अष्टपाहुड की प्राचीन टीकाएं डॉ० महेन्द्रकुमार जैन 'मनुज' ई० सन् ४-६ १९९२ ४-६ १९९२ ४-६ १९९२ १९९२ ७-९ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ १९९२ ७-९ १९९२ ७-९ १९९२ ७-९ १९९२ १०-१२ १९९२ १०-१२ १९९२ १०-१२ १९९२ १०-१२ १९९२ १०-१२ १९९२ पृष्ठ २७-३९ ४१-४६ ४७-६८ ६९-८४ १-८ ९-१३ १५-२३ २५-२८ २९-५१ ५३-५८ ५९-६३ ६५-७० १-१२ १३-१९ २१-४० ४१-४४ ४५-४८ ७-९ ४३ ४३ ४३ ४३ Page #155 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक पूर्णिमागच्छ-प्रधान शाखा अपरनाम ढंढेरिया शाखा का संक्षिप्त इतिहास डॉ० शिवप्रसाद जैन दार्शनिक साहित्य में ईश्वरवाद की समालोचना आत्मोपलब्धि की कला-ध्यान आचार्य हरिभद्र और उनका योग डॉ० ईश्वरदयाल जैन कृत "जैन निर्वाण परम्परा और परिवृत" लेख में 'आत्मा की माप जोख' शीर्षक के अन्तर्गत उठाये गये प्रश्नों के उत्तर पल्लवनरेश महेन्द्रवर्मन "प्रथम" कृत मत्तविलास प्रहसन में वर्णित धर्म और समाज सार्धपूर्णिमागच्छ का इतिहास आचार्य हरिभद्र और उनका साहित्य षड्जीवनिकाय में त्रस एवं स्थावर के वर्गीकरण की समस्या पूर्णिमापक्ष भीमपल्लीयाशाखा का इतिहास वसन्तविलास महाकाव्य का काव्य-सौन्दर्य महायान सम्प्रदाय की समन्वयात्मक दृष्टि : भागवद्गीता और जैनधर्म के परिप्रेक्ष्य में श्रीमती मंजुला भट्टाचार्या महोपाध्याय मुनि चन्द्रप्रभसागर डॉ० कमल जैन श्री पुखराज भण्डरी दिनेशचन्द्र चौबीसा डॉ० शिवप्रसाद डॉ० कमल जैन डॉ० सागरमल जैन डॉ० शिवप्रसाद डॉ० केशवप्रसाद गुप्त डॉ० सागरमल जैन वर्ष ४३ ४३ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ ४४ अंक १०-१२ १०-१२ १-३ १-३ १-३ १-३ १-३ ४-६ ४-६ ४-६ ४-६ ७-९ ई० सन् १९९२ १९९२ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १९९३ १५१ पृष्ठ ४९-६६ ६७-६९ १-७ ८-२७ २८-३४ ३५-४१ ४२-५९ १-१२ १३-२१ २२-३५ ३६-५८ १-१० Page #156 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १५२ ON पृष्ठ ११-१६ ४४ ४४ १-७ ४४ ४४ ४४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक वृत्ति : बोध और विरोध महोपाध्याय चन्द्रप्रभ सागर जैन परम्परा के विकास में स्त्रियों का योगदान डॉ० अरुण प्रताप सिंह अशोक के अभिलेखों में अनेकांतवादी चिन्तन:एक समीक्षा डॉ० अरुण प्रताप सिंह हिन्दू एवं जैन परम्परा में समाधिमरण : एक समीक्षा डॉ० अरुण प्रताप सिंह प्राचीन जैन ग्रन्थों में कर्म सिद्धान्त का विकास क्रम डॉ० अशोक सिंह हिन्दी जैन साहित्य के विस्मृत बुन्देली कवि : देवीदास डॉ० (श्रीमती) विद्यावती जैन मूक सेविका : विजयाबहन . शरद कुमार साधक बृहत्कल्पसूत्रभाष्य का सांस्कृतिक अध्ययन डॉ० महेन्द्र प्रताप सिंह त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित्र: एक कलापरक अध्ययन डॉ० शुभा पाठक काशी के घाट : कलात्मक एवं सांस्कृतिक अध्ययन डॉ० हरिशंकर जैन धर्म-दर्शन का सारतत्व डॉ० सागरमल जैन भगवान् महावीर का जीवन और दर्शन डॉ० सागरमल जैन जैनधर्म में भक्ति की अवधारणा जैनधर्म में स्वाध्याय का अर्थ एवं स्थान जैन साधना में ध्यान अर्धमागधी आगम साहित्य में समाधिमरण की अवधारणा जैन कर्म सिद्धान्त : एक विश्लेषण ४४ अंक ई० सन् १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १०-१२ १९९३ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ ४४ ८-१३ १४-१८ १९-२८ २९-३९ ४०-४१ ४२-४५ ४६-४८ ४९-५१ १-१३ १४-१७ १८-३६ ३७-४३ ४४-७९ ४४ है ४५ ४५ ४५ ८०-९३ ९४-१२७ Page #157 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १५३ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक लेख अंक ४५ ४-६ ४५ ४-६ ई० सन् पृष्ठ १९९४ १२९-१३४ १९९४ १३५-१४३ १९९४ १४४-१६१ १९९४ १६२-१७२ ४-६ ४-६ ४५ ४-६ १९९४ १७३-१७८ 9 भारतीय संस्कृति का समन्वित स्वरूप पर्यावरण के प्रदूषण की समस्या और जैनधर्म जैनधर्म और सामाजिक समता जैन आगमों में मूल्यात्मक शिक्षा और वर्तमान सन्दर्भ खजुराहो की कला और जैनाचार्यों की - १ समन्वयात्मक एवं सहिष्णु दृष्टि 1 महापण्डित राहुल सांकृत्यायन के जैनधर्म सम्बन्धी * मन्तव्यों की समालोचना ॐ ऋग्वेद में अर्हत् और ऋषभवाची ऋचायें:एक अध्ययन निर्युक्त साहित्य : एक पुनर्चिन्तन जैन एवं बौद्ध पारिभाषिक शब्दों के अर्थ-निर्धारण और अनुवाद की समस्या जैन आगमों में हुआ भाषिक स्वरूप परिवर्तन : एक विमर्श भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि पर पुनर्विचार कर्म की नैतिकता का आधार-तत्त्वार्थसूत्र के प्रसङ्ग में रामचन्द्रसूरि और उनका साहित्य प्राकृत की बृहत्कथा “वसुदेवहिण्डी” में वर्णित कृष्ण १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ १७९-१८४ १८५-२०२ २०३-२३३ २३४-२३८ ४५ " ४५ ७-९ डॉ. रत्ना श्रीवास्तव डॉ० कृष्णपाल त्रिपाठी डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव ४५ ४५ ७-९ ७-९ ७-९ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ १९९४ २३९-२५३ २५४-२६८ १-९ । १०-२२ २३-३० ४५ Page #158 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १५४ लेख अंक ७-९ ई० सन् पृष्ठ १९९४ ३१-५१ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक मडाडागच्छ का इतिहास : एक अध्ययन डॉ० शिवप्रसाद सन्दर्भ एवं भाषायी दृष्टि से आचारांग के उपोद्धात में प्रयुक्त प्रथम वाक्य के पाठ की प्राचीनता पर कुछ विचार डॉ० के० आर० चन्द्र बारहभावना : एक अनुशीलन डॉ० कमलेश कुमार जैन भारतीय दर्शन में मोक्ष की अवधारणा डॉ० राजीव प्रचण्डिया कर्म और कर्मबन्ध डॉ० नन्दलाल जैन महावीर निर्वाणभूमि पावा : एक समीक्षा डॉ० जगदीशचन्द्र जैन आचार्य सम्राट पूज्य श्री आत्माराम जी महाराज एक अशुमाली श्री हीरालाल जैन जैन महापुराण : एक कलापरक अध्ययन डॉ० कुमुद गिरि अर्धमागधी आगम साहित्य डॉ० सागरमल जैन प्राचीन जैन आगमों में चार्वाक दर्शन का प्रस्तुतीकरण डॉ० सागरमल जैन महावीर के समकालीन विभिन्न आत्मवाद एवं उसमें जैन आत्मवाद का वैशिष्ट्य डॉ० सागरमल जैन सकरात्मक अहिंसा की भूमिका तीर्थंकर और ईश्वर के सम्प्रत्ययों का तुलनात्मक विवेचन मन-शक्ति, स्वरूप और साधना : एक विश्लेषण जैन दर्शन में नैतिकता की सापेक्षता ७-९ १९९४ ५२-५९ ७-९ १९९४ ५५-६१ १०-१२ १९९४ १-९ १०-१२ १९९४ १०-२२ १०-१२ १९९४ २३-२५ १०-१२ १९९४ २६-३२ १०-१२ १९९४ ३३-३६ १-३ १९९५ १-४५ १-३ १९९५ ४६-५८ १-३ १-३ १९९५ ५९-६८ १९९५ ६९-८६ १९९५ ८७-९२ १९९५ ९७-१२२ १९९५ १२३-१३३ Page #159 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अलक १५५ ई० सन् पृष्ठ १९९५ १३४-१४९ १९९५ १५०-१६५ ४-६ ४-६ ७-९ १९९५ १६६-१६९ १९९५ १-६ १९९५ ७-९ १९९५ २०-६५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक सदाचार के शाश्वत मानदण्ड जैन धर्म का लेश्या-सिद्धान्त : एक विमर्श ॐ प्रज्ञापुरुष पं० जगन्नाथ जी उपाध्याय की दृष्टि में बुद्ध व्यक्ति नहीं प्रक्रिया युगीन परिवेश में महावीर स्वामी के सिद्धान्त भक्तामरस्तोत्र : एक अध्ययन डॉ० हरिशंकर पाण्डेय नागेन्द्रगच्छ का इतिहास डॉ० शिवप्रसाद अर्धमागधी भाषा में सम्बोधन का एकविस्मृत शब्द-प्रयोग ‘आउसन्ते' । डॉ० के० आर० चन्द्र चातुर्मास : स्वरूप और परम्पराएँ श्री कलानाथ शास्त्री £ वाचक श्रीवल्लभरचित 'विदग्धमुखमंडन' की दर्पण टीका की पूरी प्रति अन्वेषणीय है स्व० अगरचन्द नाहटा द्रौपदी कथानक का जैन और हिन्दू स्रोतों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन श्रीमती शीला सिंह गांधी जी के मित्र और मार्गदर्शक : श्रीमद्राजचन्द्र डॉ० सुरेन्द्र वर्मा भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि : एक पुनर्विचार डॉ० अरुण प्रताप सिंह तरंगलोला और उसके रचयिता से सम्बन्धित-भ्रान्तियों का निवारण पं० विश्वनाथ पाठक १९९५ १९९५ ६६-६९ ७०-७३ ७-९ ७-९ १९९५ ७४-७५ ४६ ७-९ १९९५ १०-१२ १९९५ १०-१२ १९९५ १०-१२ १९९५ ७६-८२ १-४ । ५-१४ १५-२३ Page #160 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १५६ लेख श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव डॉ० शिवप्रसाद डॉ० प्रतिभा जैन डॉ० धूपनाथ प्रसाद अंक ई० सन् १०-१२ १९९५ १०-१२ १९९५ १०-१२ १९९५ १०-१२ १९९५ पृष्ठ २४-२७ २८-३३ ३४-४१ ४२-४३ असीम कुमार मिश्र १०-१२ १९९५ ४४-५१ 'संदेशरासक' में पर्यावरण के तत्त्व . हारीजगच्छ समकालीन जैन समाज में नारी कालचक्र ऐतिहासिक अध्ययन के जैन स्रोत और उनकी प्रामाणिकता : एक अध्ययन प्राचीन जैन कथा साहित्य का उद्भव,विकास और वसुदेवहिंडी Meaning and Typology of Violence Panis and Jainas Sadhna of Mahāvīra as Depicted in Upadhānaśruta Select Vyāntara Devatās in Early Indian Art and Literature Srī Hanumāna in Padmapurāņa जैनधर्म और हिन्दूधर्म (सनातन धर्म) का पारस्परिक सम्बन्ध डॉ० (श्रीमती) कमल जैन Dr. Surendra Verma Dr. S. P. Naranga १०-१२ १९९५ ५२-६३ 10-12 1995 81-86 10-12 1995 87-89 46 Dr. A. K. Singh 10-12 1995 90-98 10-12 Dr. Nandini Mehta Surendra Kumar Garga 46 46 1995 1995 99-103 104-117 10-12 डॉ० सागरमल जैन ___४७ १-३ १९९६ ३-१० । Page #161 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख प्राचीन जैन आगमों में राजस्व व्यवस्था जैनदर्शन में पुरुषार्थ चतुष्टय वैदिक एवं श्रमण परम्परा में ध्यान धूमावली-प्रकरणम् Yapaniya Sect: An Introduction श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० अनिल कुमार सिंह प्रो० सुरेन्द्र वर्मा डॉ० रज्जन कुमार साध्वी अतुलप्रभा Prof. S. M. Jain & Philosophical Aspect of Non-violence जैन आगम और गुणस्थान सिद्धान्त जैन धर्म और प्रयाग जीरापल्लीगच्छ का इतिहास आधुनिक विज्ञान, ध्यान एवं सामायिक Trans Dr. A. K. Singh Prof. K. D. Bajpai Jain Archaeology and Epigraphy डॉ० कमल जैन पाणिनीय व्याकरण का सरलीकरण और आचार्य हेमचन्द्र श्यामधर शुक्ल वसुदेवहिंडी का समीक्षात्मक अध्ययन हर्षपुरीयगच्छ अपरनाम मलधारीगच्छ का संक्षिप्त इतिहास The Story of the Origin of Yapaniya Sect डॉ० शिवप्रसाद Prof. S. M. Jain Trans. Dr. A. K. Singh Dr. Bashishtha Narayan Sinha डॉ० श्रीप्रकाश पाण्डेय डॉ० कृष्णलाल त्रिपाठी डॉ० शिवप्रसाद डॉ० पारसमल अग्रवाल वर्ष ढे ढे ढे ढे के ४७ ४७ ४७ ४७ 47 47 ४७ ४७ ४७ 47 47 ढे ढेढे ढे ४७ ४७ अंक १-३ १-३ १-३ १-३ 1-3 1-3 ४-६ ४-६ ४-६ 4-6 4-6 ७-९ ७-९ ७-९ ७-९ ई० सन् १९९६ १९९६ १९९६ १९९६ 1996 1996 १९९६ १९९६ १९९६ 1996 1996 १९९६ १९९६ १९९६ १९९६ १५७ पृष्ठ ११-१९ २१-४६ ४७-५९ ६०-६४ 99-114 115-119 ३-१० ११-३५ ३६-६७ 71-83 84-111 ३-१४ १५-२२ २३-३३ ३४-४३ Page #162 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ७-९ ई० सन् १९९६ पृष्ठ ४४-४८ ४७ ४७ ७-९ १९९६ ५५-५८ 47 47 ४७ १५८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक त्रिरत्न, सर्वोदय और सम्पूर्ण क्रान्ति डॉ० धूपनाथ प्रसाद महात्मा गांधी का मानवतावादी राजनैतिक चिन्तन और जैनदर्शन : एक समीक्षात्मक अध्ययन डॉ० ऊषा सिंह Metrical Studies of Dašāšrutaskandha Niryukti in the light of its parallels Dr. Ashok Kumar Singh Sadhaka, Sadhana & Sadhya Priya Jain द्वन्द्व और द्वन्द्व निवारण (जैन दर्शन के विशेष प्रसङ्ग में) डॉ० सुरेन्द्र वर्मा अनेकान्तवाद और उसकी व्यावहारिकता डॉ० विजय कुमार स्थानाङ्ग एवं समवायाङ्ग में पुनरावृत्ति की समस्या डॉ० अशोककुमार सिंह तित्थोगाली (तिर्थोद्गालिक) प्रकीर्णक की गाथा संख्या का निर्धारण अतुलकुमार प्रसाद सिंह पिप्पलगच्छ का इतिहास डॉ० शिवप्रसाद Spiritual Practices of Lord Mahāvīra Yuacharya Dr.Shiv Muni Relevance of Non-Violence in Modern life Dulichand Jain तनाव : कारण एवं निवारण डॉ० सुधा जैन योगनिधान डॉ० कुन्दनलाल जैन दशाश्रुतस्कन्ध नियुक्ति में इंङ्गित दृष्टांत डॉ० अशोककुमार सिंह अणगार वन्दना बत्तीसी डॉ० (श्रीमती) मुन्नी जैन 7-9 1996 7-9 1996 १०-१२ १९९६ १०-१२ १९९६ १०-१२ १९९६ 59-76 77-84 १-१३ १३-३५ ३६-५२ ४७ ४७ ४७ ४७ 47 47 १०-१२ १९९६ १०-१२ १९९६ 10-12 1996 10-12 1996 १-३ १९९७ १-३ १९९७ १९९७ १९९७ ५३-६४ ६५-८२ 83-100 101-109 १-२० २१-३२ ४७-५९ ६०-७० ४८ ४८ ४८ ४८ Page #163 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १५९ लेखक डॉ० रामप्रवेश कुमार Prof. S. C. Pande डॉ० शिव प्रसाद डॉ० सागरमल जैन ४८ ४८ ४८८ १-३ ४८ ४८ ई० सन् १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ पृष्ठ ७१-७५ ७६-८२ ८३-११७ १-१९ २०-२९ ३०-५९ ६०-७० ७१-७६ ७७-११२ ११३-१३२ १३३-१४० ४८ ४-६ ४८ ४-६ ४८ लेख जैन चम्पूकाव्य एक परिचय Ācārya Hemacandra and Ardhamāgadhi पिप्पलगच्छ का इतिहास - जैनधर्म में सामाजिक चिन्तन अध्यात्म और विज्ञान जैन, बौद्ध और हिन्दूधर्म का पारस्परिक प्रभाव आचार्य हेमचन्द्र : एक युगपुरुष सम्राट अकबर और जैनधर्म जैनधर्म में अचेलकत्व और सचेलकत्व का प्रश्न स्त्रीमुक्ति, अन्यतैर्थिकमुक्ति एवं सवस्रमुक्ति का प्रश्न प्रमाण-लक्षण-निरूपण में प्रमाण-मीमांसा का अवदान पं० महेन्द्रकुमार 'न्यायाचार्य' द्वारा सम्पादित एवं अनूदित षड्दर्शनसमुच्चय की समीक्षा आगम साहित्य में प्रकीर्णकों का स्थान, महत्त्व, रचनाकाल एवं रचयिता जैनधर्म में आध्यात्मिक विकास The Heritage of Last Arhat Mahavira Mahāvīra ४-६ ४८ ४८ ४-६ ४-६ ४८ ४८ ४-६ १९९७ १४१-१४६ ४८ ४८ ४८ ४८ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ ४-६ ४-६ ४-६ Charlotte Krause १४७१५६ १५७-१६० 1-27 1-17 Amarchand Page #164 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६० लेख स्याद्वाद की अवधारणा : उद्भव एवं विकास ब्रह्माणगच्छ का इतिहास पंचेन्द्रिय संवाद : एक आध्यात्मिक रूपक काव्य प्रद्युम्नचरित में प्रयुक्त छन्द- एक अध्ययन जैनों में साध्वी प्रतिमा की प्रतिष्ठा-पूजा व वन्दन Nirgrantha Doctrine of Karma: A Historical Perspective Guṇavrata and Upāsakadaśānga जैन आगमों की मूलभाषा : अर्धमागधी या शौरसेनी दशाश्रुतस्कंधनियुक्ति : अन्तरावलोकन षट्प्राभृत के रचनाकार और उसका रचनाकाल जैन आगमों में धर्म-अधर्म (द्रव्य) : एक ऐतिहासिक विवेचन पंचकारण समवाय अड्डालिजीय गच्छ जर्मन जैन श्राविका डॉ० शार्लोटे क्राउझे Aştakaprakaraṇa: An Introduction Navatattvaprakaraṇa श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक डॉ० सीताराम दुबे डॉ० शिवप्रसाद सं० डॉ० मुन्नी जैन कु० भारती महेन्द्र कुमार जैन 'मस्त' Dr. A. K. Singh Dr. Rajjan Kumar डॉ० सागरमल जैन डॉ० अशोक कुमार सिंह डॉ० के० आर० चन्द्र डॉ० विजय कुमार डॉ० रतनचन्द्र जैन डॉ० शिवप्रसाद श्री हजारीमल बांठिया Dr. Ashok Kumar Singh Dr. Shriprakash Pandey वर्ष ४८ ४८ ४८ ४८ ४८ 48 48 ४८ ४८ ४८ ४८ ४८ ४८ ४८ 48 48 अंक ७-९ ७-९ ७-९ ७-९ ७-९ 7-9 7-9 ई० सन् १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ १९९७ 1997 1997 १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ १०-१२ १९९७ 10-12 1997 10-12 1997 पृष्ठ १-१३ १४-५० ५१-६७ ६८-८० ८२-८५ 89-103 104-108 १-२८ ३१-४४ ४५-५२ ५३-७२ ७३-८० ८१-८२ ८३-९२ 107-118 1-28 Page #165 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण लेखकानुसार लेख सूची - Page #166 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Page #167 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १६१ लेख & अंक ई० सन् पृष्ठ १९६७ 22 १९५७ १९७४ m » १९६१ १९६२ अगरचंद नाहटा अष्टलक्षी में उल्लेखित अप्राप्य रचनायें है अष्टलक्षी में उल्लेखित जयसुन्दरसूरि की शतार्थी की खोज आवश्यक अस्वाद व्रत भी तप है आगम मर्यादा और संतों के वर्षावास तु आचार्य भद्रबाहु और हरिभद्र की अज्ञात रचनाएं आचार्य हेमचन्द्र के पट्टधर आचार्य रामचन्द्र के अनुपलब्ध नाटकों की खोज अत्यावश्यक आचार्य श्री आत्माराम जी की आगम सेवा आत्म शोधन का महान् पर्व : पर्युषण आशुतोष म्युजियम में नागौर का एक सचित्र विज्ञप्तिपत्र ओसवंश-स्थापना के समय संबन्धी महत्त्वपूर्ण उल्लेख उपा० भक्तिलाभरचित न्यायसार अवचूर्णि एक अप्रकाशित प्राचीन प्राकृत सूत्र या अध्ययन एक अज्ञात ग्रन्थ की उपलब्धि । एक अज्ञात जैनमुनि का संस्कृत दूत काव्य है कतिपय जैनेतर ग्रन्थों की अज्ञात जैन टीकाएं कुंभारिया तीर्थ का कलापूर्ण महावीर मंदिर कर्मशास्त्रविद् रामदेवगणि और उनकी रचनाएँ १९५१ : : : 3 * * * * * 2 * * * » ९-११ २७-२८ २५-३१ २६-३३ २५-३१ २१-२५ ४० ७-१३ १५-१९ २७-३३ १९-२१ २३-२५ २९-३० १७-२० २६-३१ २८-३१ ११-१९ १९७३ १९५२ १९७० १९७१ १९६१ १९६१ १९७८ १९७४ १९७८ » 1 2 r w ar Page #168 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६२ लेख कल्याणसागरसूरि को प्रेषित सचित्र विज्ञप्ति लेख कवि देपाल की अन्य रचनाऐं श्रमण : अतीत के झरोखे में क्या कृष्णगच्छ की स्थापना सम्वत् १३९९ ई० में हुई थी ? क्या 'रूपकमाला' नामक रचनाएँ अलंकार शास्त्र सम्बन्धी हैं ? काव्यकल्पलतावृत्ति गर्भापहरण सम्बंधी कुछ बातें गीता के राजस्थानी अनुवादक जैन कवि थिरपाल गीतासंज्ञक जैन रचनाएं ग्यारह गणधर सम्बंधी ज्ञातव्य बातें चतुर्विंशतिस्तव का पाठ भेद और एक अतिरिक्त गाथा चन्द्रवेध्यक आदि-सूत्र अनुपलब्ध नहीं हैं। २४ तीर्थंकरों के नामों में नाथ शब्द का प्रयोग कब से जयप्रभसूरि रचित कुमारसंभव टीका जयसिंहसूरि रचित अप्रसिद्ध ऋषभदेव और वीरचरित्र युगल काव्य ज्योतिर्धर दो जैन विद्वान्-हरिभद्र और यशोविजय जिनचन्द्रसूरिरचित श्रावक सामाचारी की पूरी प्रति की खोज जिनचन्द्रसूरिकृत क्षपक शिक्षा का विषय वर्ष w x x x am w १६ ३४ २९ ९ २३ २६ २ X N G A D o a n २४ २२ ५ २२ २१ ३० १९ २२ अंक १० १२ ४ ई० सन् पृष्ठ १९६५ २९-३० १९८२ २९-३३ १९७२ २८-२९ १९७८ १२-१७ १९५८ १२-१५ १९७२ २७-२८ १९७२ १९-२३ १९५१ २५-२७ १९७३ २२-२६ १९७१ १३-१७ १९५४ १६-१७ १९६७ १८- २२ १९७० ३१-३३ १९७९ १९-२३ १९५६ १६-१९ १९६८ ३२-३५ १९७१ ३४-३५ Page #169 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जिनदत्तसूरि का शकुनशास्त्र एवं हरिभद्रसूरि का व्यवहारकल्प जिनधर्म का तमाशा जिनराजसूरिकृत नैषधमहाकाव्यवृत्ति श्री जिनवल्लभसूरि की प्राकृत साहित्य सेवा जीवन चरित्र ग्रन्थ जैन आगमों का महत्त्व और अपना कर्त्तव्य जैन एकता का स्वरूप व उसके उपाय जैन कला प्रदर्शनी जैन ग्रन्थों और पुराणों के भौगोलिक वर्णन का तुलनात्मक अध्ययन जैन रास साहित्य जैन शिल्प का एक विशिष्ट प्रकार : सहस्रकूट जैन साहित्य का बृहद इतिहास भाग ५ के कतिपय संशोधन जैन ज्ञान भण्डारों के प्रकाशित सूची ग्रन्थ जौनपुर की बड़ी मस्जिद क्या जैन मंदिर है ? जैनागमों में महावीर के जीवनवृत्त की सामग्री गोविन्द त्रिगुणायक का 'जैन दर्शन व संत कवि' सम्बन्धी वक्तव्य तेरापंथ सम्प्रदाय के हस्तलिखित ग्रन्थ-संग्रहालय Fory v» rrr39 » More » 9 -3 ई० सन् १९७९ १९५४ १९६९ १९६३ १९५९ १९५० १९८३ १९५७ १९७२ १९५६ १९७४ १९७० १९५३ १९७९ १९५६ १९६४ १९६० १६३ पृष्ठ ३१-३३ ९-११ १५-१८ ३२-३४ ३५-३८ ९-१४ १-२१ ३६-३८ १५-२० १५-१६ १६-२१ २०-२३ ७३-७९ ३३-३५ ३४-३८ २८-३६ २३-२५ ७ Page #170 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् १९५९ १९७८ १९७७ १९७९ १९७३ १९५५ १६४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख तेलगूभाषा के अवधानी विद्वानों की परम्परा दशाश्रुतस्कन्ध की बृहद् टीका और टीकाकार मतिकीर्ति दशाश्रुतस्कन्ध के विविध संस्करण एवं टीकाएँ देवचन्द्रकृत यंत्र प्रकृति का वस्त्र टिप्पणक दानशील, तप, भाव के रचयिता और दानकुलक का पाठ दान सम्बन्धी मान्यता पर विचार दिगम्बर आर्या जिनमती की मूर्ति दिल मां दिवडो थाय द्वीपसागरप्रज्ञप्ति नन्दीसूत्र की एक जैनेतर टीका 1 मुनि विनयचन्द्रकृत ग्रहदीपिका पं० रामचंद्र गणिरचित सुमुखनृपतिकाव्य पं० सुखलाल जी के तीन व्याख्यानमालाओं के पठनीय ग्रंथ पद्ममंदिररचित बालावबोध प्रवचनसार का नहीं प्रवचनसारोद्वार का है पर्युषण और हमारा कर्तव्य १९५९ Isr Trar MMMM 9m vs Tra १९६० १९६५ १९६५ १९७० १९६८ १९८१ १९७० १९५७ १९८५ पृष्ठ २४-२७ ३-९ २१-२४ २८-२९ १८-२४ ३-१० ३१-३२ ८-९ १८-१९ १३-१४ १५-१७ ३०-३१ ५७ ३०-३१ ९-१४ ६-१२ २५-२६ पर्युषण पर्व का पावन संदेश Page #171 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १६५ लेख अंक । पर्युषण पर्व पर दो महत्तपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान पल्लीवालगच्छीय शांतिसूरि का समय एवं प्रतिष्ठा प्रज्ञाचक्षु राजकवि श्रीपाल की एक अज्ञात रचना-शतार्थी प्राकृत भाषा के चार कर्मग्रन्थ । प्राकृत भद्रबाहुसंहिता का अर्धकाण्ड प्राकृत-हिन्दी कोश के महान् प्रणेता : पं० हरगोविन्ददास प्राकृत और उसका साहित्य प्राकृत साहित्य के इतिहास के प्रकाशन की आवश्यकता प्राचीन जैन राजस्थानी गद्य साहित्य प्राणप्रिय काव्य का रचनाकाल, श्लोक संख्या और सम्प्रदाय प्राणप्रिय काव्य के रचयिता व रचनाकाल ४५ आगम और मूलसूत्र की मान्यता पर विचार पैंतालीस और बत्तीस सूत्रों की मान्यता पर विचार १२वीं शताब्दी की एक तीर्थमाला बीकानेरी चित्र-शैली का सर्वाधिक चित्रों वाला कल्पसूत्र बीसवीं सदी का जैन इतिहास भक्तामर की एक और सचित्रप्रति Pam M2M 29 MMM ~ 2013 45 °F 3m x 2 9 orr 42 m ) ई० सन् १९५६ १९५२ १९६७ १९६२ १९७६ १९७७ १९५९ १९५३ १९५६ १९८२ १९७२ १९८२ १९५० १९७६ १९७७ १९५४ १९७३ पृष्ठ ३७-३९ ३१-३३ ६-८ २४-२५ १०-१४ १९-२२ १३-१९ २१-२७ ११-१८ २७-२९ १७-२० ६१-६३ २४-२९ १९-२३ २०-२४ २०-२४ २१-२४ Page #172 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख भक्तामरस्तोत्र की सचित्रप्रतियाँ ह.भक्तामरस्तोत्र के बाद पूर्तिरूप स्तवकाव्य भक्तामरस्तोत्र के श्लोकों की संख्या ४४ या ४८ भगवान् नेमिनाथ का समय-एक विचारणीय समस्या भगवान् नेमिनाथ के समय सम्बन्धी संशोधन भागवद्गीता और जैनधर्म महत्त्वपूर्ण जैन कला के प्रति जैन समाज की उपेक्षा वृत्ति मानतुंगसूरिरचित पंचपरमेष्ठिस्तोत्र महावीरचर्या ग्रन्थ सम्बंधी महापंडित राहुल जी के दो पत्र महावीर-सम्बन्धी एक अज्ञात संस्कृत चरित्र महावीर स्तुति महो० समयसुंदर का एक संग्रहग्रन्थ-'गाथासहस्री' मुनि मेघकुमार-रचित किरातमहाकाव्य की अवचूरि मेघदूत की एक अज्ञात् बालबोधिका पंजिका मेवाड़ में चित्रित कल्पसूत्र की एक विशिष्ट प्रति मौलिक चिन्तन की आवश्यकता रघुवंश की अज्ञात जैन टीका เS * * * * * * , * * * * * * ) ง ई० सन् १९७१ १९७० १९७० १९७२ १९६९ १९६४ १९८० १९७५ १९६६ १९७४ १९५८ १९७२ १९६८ १९६४ १९७७ १९६३ १९६२ पृष्ठ १३-१९ २५-२९ २७-३१ १५-१९ १२-१३ ११-१२ १३-१४ १४-१७ ९-१० ५२-५६ १३-१५ २३-२८ १५-१७ ६३-६४ २४-२६ २०-२३ ३१-३२ Page #173 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख राजस्थान में महावीर के दो उपसर्ग स्थल राजस्थान में महावीर मंदिर राजस्थानी जैन साहित्य 600 m maa राजस्थानी लोक-कथाओं सम्बन्धी साहित्य-निर्माण में जैनों का योगदान रामसनेही सम्प्रदाय के रेणशाखा के दो सरावगी आचार्य लंदन में कतिपय अप्राप्य जैन ग्रन्थ लिखाई का सस्तापन लोंकागच्छीय विद्वानों के तीन संस्कृत ग्रन्थ लोक साहित्य के आदिसर्जक-जैन विद्वान् " वडगच्छ के युगप्रधान दादा-मुनिशेखरसूरि वसुमतीमहाकाव्य वाचक श्रीवल्लभ रचित 'विदग्धमुखमण्डन' की दर्पण टीका की पूरी प्रति अन्वेषणीय है । विक्रमलीलावतीचौपाईविषयक विशेष ज्ञातव्य विद्वद्वर विनयसागर आद्यपक्षीय नहीं, पिप्पलक शाखा के थे विनयप्रभकृत जैन व्याकरण ग्रंथ शब्ददीपिका विलासकीर्तिरचित प्रक्रियासारकौमुदी go w w svog omorra vorm or a ई० सन् १९७५ १९७६ १९५५ १९५५ १९५९ १९७८ १९५१ १९५८ १९६० १९५५ १९७३ १९६१ १९९६ १९७५ १९५६ १९७८ १९७८ १६७ पृष्ठ . १७-२० २६-२८ १५-२२ ४-६ २९-३१ १२-१६ २७-२९ ३-५ २४-२८ ९-१२ ३६-३९ १७-२० ७४-७५ २२-२३ १७-१८ १७-२१ २४-२८ * Page #174 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख वैराग्यशतक शब्दरत्नमहोदधि नामक संस्कृत गुजराती जैन-कोश श्वेताम्बर पण्डित परम्परा शासनप्रभावक जिनप्रभसूरि षट्दर्शनसमुच्चय के लघुटीकाकार-सोमतिलकसरि संडेरगच्छीय ईश्वरसूरि की प्राप्त एवं अप्राप्त रचनाएं संवेगरंगशाला क्या देवभद्रसूरि रचित और अनुपलब्ध है? संवेगरंगशाला नामक दो ग्रन्थ नहीं एक ही है । संस्कृत साहित्य के इतिहास के जैन सम्बन्धित संशोधन सबके कल्याण में अपना कल्याण है स्वर्गीय हीरालाल कापडिया सात लाख श्लोक परिमित संस्कृत साहित्य के निर्माता जैनाचार्य विजयलावण्यसूरि साधुवन्दना के रचयिता सिंहदेवरचित एक विलक्षण महावीरस्तोत्र हमारी भक्ति निष्ठा कैसी हो? । हरिकलशरचित दिल्ली-मेवात देश चैत्यपरिपाटी हरियाणा के सुकवि मालदेव की नवोपलब्ध रचनाएँ ११ १ ५ ई० सन् १९६० १९७७ १९८७ १९७६ १९७२ १९७४ १९६९ १९६९ १९६६ १९६३ १९८७ १९७२ १९७० १९७९ १९५५ १९७६ १९७७ पृष्ठ ३२-३३ २२-२४ १०-१३ १३-२० २०-२३ २९-३२ २३-२६ ३४ २२-२६ २१-२८ २३-२६ १९-२३ २९-३२ २०-२५ ८-९ । १८-२१ २१-२४ ५ १० ८ ३ Page #175 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १६९ अंक १२ ५ ६ ई० सन् १९७९ १९६९ . १९६० १९६५ १९७५ पृष्ठ ३५-३८ २०-२२ ५९-६२ ३३-३७ २६-२८ wror ५ १९८१ ५० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख हर्षकीर्तिसूरिरचित धातुतंरगिणी हर्षकुलचरित कमलपंचशतिका ज्ञानार्णव (ग्रन्थ परिचय) श्रीमद्देवचन्द्ररचित कर्म साहित्य श्रीमालपुराण में भगवान् महावीर और गणधर गौतम का विकृत वर्णन अचल सिंह सरस्वती पुत्र अच्छेलाल यादव जैन साहित्य में जनपद प्राचीन जैन ग्रंथों में कृषि श्री अजातशत्रु धर्म का बहिष्कार या परिष्कार श्री अजित मुनि पुष्कर के सम्बन्ध में शोध विश्व व्यवस्था और सिद्धान्तत्रयी स्था० जैन साध्वीसंघ का पारम्परिक इतिहास अजित शुकदेव शर्मा - १९७५ १९७३ १५-२४ २४-२७ १९६० १९-२२ ७ १९६६ १९६६ १९७३ १७ २५-३१ ३१-३२ Page #176 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १७० १० ई० सन् १९७२ १९७२ १९७३ पृष्ठ २३-२६ १०-१६ १२-१७ ११ १९८१ १६-२० १-३ १९९६ ६०-६४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अनासक्ति वेदोत्तरकालीन आत्मविद्या और जैनधर्म जैनधर्म में भावना साध्वी श्री अणिमा श्री जी सांस्कृतिक पर्व की सामाजिक उपयोगिता साध्वी अतुलप्रभा धूमावली-प्रकरणम् अतुल कुमार प्रसाद सिंह तित्थोगाली (तिर्थोद्गालिक) प्रकीर्णक की गाथा संख्या का निर्धारण अनन्त प्रसाद जैन भगवान् महावीर की निर्वाण-स्थली जैन सिद्धान्त में योग और आस्रव अन्नराज जैन चातुर्मास व्यवस्था में सुधार कीजिये अनिल कुमार गुप्त जैन दर्शन में बन्ध का स्वरूप: वैज्ञानिक अवधारणाओं के सन्दर्भ में अनिल कुमार सिंह प्राचीन जैन आगमों में राजस्व व्यवस्था १०-१२ १९९६ ५३-६४ mm १९८५ १९७४ १४-१६ ११-१९ r १९६३ २१-२३ ५ १९७५ १-३ १९९६ ११-१९ Page #177 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अनिल सेन गुप्ता सर्वोदय प्रदर्शनी अभय कुमार जैन आचार्य हेमचन्द्र : एक महान् काव्यकार "" आचार्य हेमचन्द्र : जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व कविवर देवीदास : जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व गुणस्थान : मनोदशाओं का आध्यात्मिक विश्लेषण (क्रमश:) "" परमानन्दविलास : एक परिचय जैन दर्शन में समता जैन दर्शन का स्याद्वाद सिद्धान्त अभय मुनि जी महाराज पथ-भ्रष्ट मन-निग्रह श्री अमरचन्द्र उज्जयिनी श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १० Nowy NN 2 2 २८ २७ २६ २८ २८ २८ २८ २९ २७ 2) wr ६ ३ अंक ५ १० १० or or ११ १२ १० ई० सन् पृष्ठ १९५९ १९७७ १९७७ १९७५ १९७७ १९७६ १९७५ १९७७ १९७७ ३-१४ १९७७ ९-१८ १३-१७ २३-३३ ३-१४ १९५५ १९५५ १७१ १९५२ ४०-४२ ३-१३ ८-१३ १३-१८ १२-१९ ३३-३६ ३६-३७ २७-३३ Page #178 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ६-७ . ९ ई० सन् १९६१ १९५६ पृष्ठ ५४-५३ ३-६ । - w १९५९ १६-२२ १४-१८ १७२ लेख ब्रह्मनिष्ठ महावीर जैन साहित्य में कलिङ्ग अमरचंद मित्तल गुप्तकाल में जैनधर्म उपाध्याय श्री अमरमुनि अधूरी जोड़ी अमरवाणी अमृत जीता, विष हारा आचार्य : एक मधुर शास्ता उदयन का पर्युषण श्रधेय वाचस्पति जी : एक पुण्य स्मृति क्रान्तिदर्शी महावीर जीवन की कला जीवन दर्शन जीवन-दृष्टि ढंढ़ण ऋषि की तितिक्षा त्याग का मूल्य ८ १९७९ १९५४ १० १९८२ १२ १९५७ ११ १९८० ११-१२ १९६३ ६ १९८२ १९५६ ६ १९८० १९८२ १९८२ १९८० २५-२९ १२-१६ ७-११ ३३-३८ २८-३८ ३-६ ७-९ । ८-१० ov ९-११ Page #179 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २ लेख दयामूर्ति : धर्मरुचि अनगार दार्शनिक क्षितिज का दीप्तिमान नक्षत्र धार्मिक जीवन की प्रेरणा 23 नाथ कौन ? पर्व की आराधना बलभद्र और हरिण बलिदान की अमर गाथा बाहुबलि : चक्रवर्ती का विजेता बिना विचारे जो करै भगवान् महावीर भगवान् महावीर का अध्यात्म दर्शन भगवान् महावीर का निर्वाण-कल्याणक भगवान् महावीर की साधना भारतीय दर्शनों की आत्मा भारतीय संस्कृति का प्रहरी मन की लड़ाई पहावीर का अखण्ड व्यक्तित्व १७३ ई० सन् पृष्ठ १९८१ ५-७ १९८१ . ११-१३ १९६० ९-१२ १९८० १२-१६ १९५९ १७-१९ १९८२ ९-११ १९८१ १७-२३ १९८१ २१-२७ १९८१ १२-१४ १९८२ ५-१४ १९६३ १-५ १९८३ २-६ १९८४ १-१० १९६१ ९-११ १९५५ २६-२८ १९८० १३-१६ १९८१ ११-१६ १४ ६-७ ३५ १२ ९ १ ur mmmm १० ६ Page #180 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १७४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक महावीर का जीवन दर्शन माँस का मूल्य राजा मेघरथ का बलिदान - सब धर्मों की मंजिल एक है सत्ता का दर्प र सनत् कुमार का सौन्दर्य सर्वधर्म समानत्व की कुंजी स्नेह के धागे सामायिक और तपस्या का रहस्य सामायिक का मूल्य सेवाव्रती नंदीषेण सोने की चमक होली का व्यापक आधार पं० अमृतलाल शास्त्री अतिशय क्षेत्र पपौरा हैं उपकारी पशुओं की यह दुर्दशा काशी के कतिपय ऐतिहासिक तथ्य पर्वराज पर्युषण wr or sxx m4s ur orld ई० सन् १९८४ १९८० १९८१ १९६० १९८२ १९८२ १९६० १९८२ १९५९ १९८० १९८० १९८० १९६१ पृष्ठ ३-१४ २२-२५ १३-१५ १६-१७ १३-१६ १०-१४ १८ २-७ ११-१२ ६-८ १४-१७ ७-८ १९६१ १९८८ १९५९ २६-२९ १६-१८ १५-१६ Page #181 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ई० सन् १९५७ १९६० १९५६ १९५६ १९७० १९६९ १७५ पृष्ठ ३३-३४ ।। १२ १८-२० ४-७ २०-२८ १८-२५ 16 w w or arra xox लेख भगवान् महावीर की दिव्य देशना भगवान् महावीर की देन भोजन और उसका समय वाग्भट्टालंकार वाग्भट्टालंकार वीरनन्दी और उनका चन्द्रप्रभचरित पं० अम्बालाल प्रेमचन्द शाह लब्धिफल लब्धियाँ जैनरत्नशास्त्र अम्बाशंकर नागर श्री किशनदासकृत 'उपदेशबावनी' अमिताभ पार्श्वनाथ के दो पट्टधर अम्बिकादत्त शर्मा जैन तत्त्वविद्या में 'पुद्गल' की अवधारणा जैन दर्शन में जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया 9 22222 १९६६ १९६५ १९७० २९-३९ ७३-८४ २९-३२ ११ १९६० २८-३२ २ १९६० २०-२१ ara १९८७ १९८७ ६-१५ २-९ Page #182 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १७६ लेख अरविंद क्रोध आदि वृत्तियों पर विजय कैसे ? अरुण प्रताप सिंह अशोक के अभिलेखों में अनेकांतवादी चिन्तन : एक समीक्षा श्रमण : अतीत के झरोखे में इषुकारीय अध्ययन (उत्तराध्ययन) एवं शांतिपर्व - (महाभारत) का पिता-पुत्र संवाद जैन एवं बौद्ध धर्म में भिक्षुणी संघ की स्थापना जैन परम्परा के विकास में स्त्रियों का योगदान जैन भिक्षुणी - संघ और उसमें नारियों के प्रवेश के कारण भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि : एक पुनर्विचार संघ की उत्पत्ति एवं विकास भिक्षुणी हरिभद्र की श्रावक प्रज्ञप्ति में वर्णित अहिंसा : आधुनिक संदर्भ में हिन्दू एवं जैन परम्परा में समाधिमरण : एक समीक्षा अर्चना पाण्डेय जैन दर्शन के संदर्भ में भाषा की उत्पत्ति जैन दर्शन में कथन की सत्यता जैन भाषा दर्शन की समस्याएँ शब्द का वाच्यार्थ जाति या व्यक्ति वर्ष ४ x x x x m w ४४ ४२ ३५ ४४ ३३ ४६ ३१ ४१ ४४ ३७ ३६ ४२ ३६ अंक ४ ९ ई० सन् १०-१२ १९९३ १-३ १९९१ ९ १९८४ १०-१२ १९९३ ४ १९८२ १०-१२ १९९५ १९८० १०-१२ १९९० १०-१२ १९९३ १-३ १९५३ १९८६ १९८५ १९९१ १९८५ पृष्ठ ८-१० ८-१३ ८७-९२ १-१६ १-७ १२-१६ १-४ १७-२० ५७-७० १४- १८ ११-१८ ६-९ ९३-९६ ९-१३ Page #183 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख अर्हदास बंडोबा दिगे दसधर्म योग साधना है अलका प्रचण्डिया 'दीति' सिद्धि का पथ : आर्जवधर्म अवधकिशोर नारायण जैन मूर्ति कला अत्रिदेव गुप्त उपवास से लाभ गाय का दूध भारतीय शाक विचार अशोक चढड्डा युवकों के सामने एक प्रश्न चिन्ह अशोककुमार मिश्र कीर्तिवर्द्धनकृत सदयवत्स सावलिंगा चउप चन्दन मलयागिरि छीहल की एक दुर्लभ प्रबन्ध कृति चिकित्सा शास्त्र श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १९ ३५ १ ५ ९ ४ २ ११ २८ २७ अंक १० ११ १० ≈ m m år १२ ३ १ २ ५ ई० सन् पृष्ठ १९६८ १९८४ १९५० १९५४ १९५८ १९५३ १९५१ १९५९ १९७६ १९७६ १९७६ १७७ ३१-३६ १७-१८ १९-२१ २७-३० १६-१८ २९-३४ ३६-३१ २१-२२ २२-२६ २०-२५ २२-२८ Page #184 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ई० सन् १९७५ १९७५ पृष्ठ । २०-२३ २१-२६ १२ १ १९७९ २०-२४ ३८ ४३ १७८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जैन कवि जटमलकृत प्रेमविलास कथा हीराणंदसूरि का विद्याविलास और उस पर आधरित रचनाएँ अशोक पराशर गृहस्थ के अष्टमूल गुण-तुलनात्मक अध्ययन अशोक कुमार सिंह प्रबन्धकोश में उपलब्ध आर्थिक विवरण प्राचीन जैन ग्रंथों में कर्मसिद्धांत का विकासक्रम जैनागमवर्णित तीर्थंकरों की भिक्षुणियाँ जैनाचार्य राजशेखरसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्व दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति में इंङ्गित दृष्टांत __ दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति : अन्तरावलोकन भगवान् महावीर की प्रमुख आर्यिकाएं स्थानाङ्ग एवं समवायाङ्ग में पुनरावृत्ति की समस्या हिंसक और अहिंसक युद्ध असीम कुमार मिश्र ऐतिहासिक अध्ययन के जैन स्रोत और उनकी प्रामाणिकता : एक अध्ययन मुनि आईदान जी ४० ४१ ४८ ९ १९८७ १०-१२ १९९३ ९ १९८९ १०-१२ १९९० १-३ १९९७ १०-१२ १९९७ ६ १९८९ १०-१२ १९९६ ११ १९८७ १७-२६ १९-२८ १७-३० ९३-११० ४७-५९ ३१-४४ ३०-३३ ३६-५२ १-३ । ४८ xo ३८ १०-१२ १९९५ ४४-५१ Page #185 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जीवन के दो रूप-धन और धर्म मनुष्य की प्रगति के प्रति भयंकर विद्रोह मुनियों का आदर्श त्याग नारी का महत्त्व नि:शस्त्रीकरण साध्वी समाज से श्रमण जीवन का बदलता हुआ इतिहास (क्रमश:) अंक २ ६ ७-८ ३ ६-७ ई० सन् १९५६ १९५४ - १९५२ १९५४ १९५८ १९५३ १७९ पृष्ठ १६-१८ १८-१९ ७-८ । ३०-३६ १७-२२ २१-२२ ३०-३५ २९-३४ ३५-३७ १९५६ 03 .०GG K SWA १९५६ १९५८ १९६२ ४१ श्री विनयचन्द दुर्लभ जी आचार्य आत्मारामजी शास्त्रोद्धार की आवश्यकता आदित्य प्रचण्डिया कर्मों का फल जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि तप का उपादेय : कर्मों की निर्जरा धर्म और धार्मिक धर्म का मान १९८० १९८२ १९८४ १९८३ १९८४ २०-२१ १०-११ १९-२० २०-२१ १७-१८ Page #186 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १८० श्रमण : अतीत के झरोखे में पृष्ठ १४-१६ ७-९ ई० सन् १९८६ १९८५ १९८४ १९८१ १९८४ १९८२ १९८४ .18 .gw uxoro o २७-२८ १७-२३ ४-८ २२-२४ लेख भोले नहीं भले बनिये महामानव महावीर का जीवन प्रदेय वर्तमान सन्दर्भ और भगवान् महावीर की अहिंसा सम्राट और साम्राज्य सामायिक और ध्यान सुख का सागर हिन्दी जैन कवि छत्रपति : व्यक्तित्व तथा कृतित्व भदन्त आनन्द कौसल्यायन भगवान् बुद्ध आचार्य आनन्द ऋषि आत्म बोध का क्षण आत्म सुख सभी सुखों का राजा कीर्ति के शत्रु, क्रोध और कुशील दुःख का जनक लोभ दुर्बल को सताना क्षत्रिय धर्म नहीं महापर्व पर्युषण का पावन सन्देश : अपने आप को परखें सदाचार का महत्त्व ८ १९५६ १३-२० १०-११ arxas १९८३ १९८१ १९८१ १९८० १९८५ १९८५ १९८३ १-९ ५-१२ २-४ १४-१५ ११-१२ Page #187 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १८१ ई० सन् पृष्ठ १९८० . १२-१८ ११ ३-४ १९५७ २३-२८ ७-८ ८ १९५७ १९८७ ९-११ २३-२५ १-८ लेख साधना में श्रद्धा का स्थान आरती पात्रा व्यावहारिक क्रियाएँ इन्द्रचन्द्र जैन स्थूलभद्र श्री शान्तिभाई वनमाली सेठ का अमृतोत्सव इन्द्रचन्द्र शास्त्री अभय का अराधक आचार्य हेमचंद्र और जैन संस्कृति आचारांग की दार्शनिक मान्यतायें आप सम्यग् दृष्टि हैं या मिथ्यादृष्टि आर्यरक्षित आस्तिक और नास्तिक किसकी जय केवलज्ञान सम्बन्धी कुछ बातें गुरु नानक चरित्र के मापदण्ड m sun saka » 2 r 93 » 9 x १९५४ १९६८ १९५३ १९५१ १९५६ १९५६ १९५२ १९५२ १९५४ १९५० ३२-३६ १९-२२ २७-३० ३३-३७ १९-२२ १२-२५ २१-२२ Page #188 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १८२ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् लेख जनतंत्र के महान् उपासक भगवान् महावीर जैन आगमों का मन्थन १९५७ पृष्ठ ३-७ ३५-३७ २९-३० १९५३ जैन परम्परा जैन परम्परा का आदिकाल ९-१७ ९-१७ १२-१८ १४ ६-७ ८-१४ जैन साहित्य का विहंगावलोकन जैन साहित्य के विषय में अजैन विद्वानों की दृष्टियाँ जैन साहित्य के संकेत चिन्ह जैन साहित्य सेवा नरसिंह मेहता पितृहीन त्यागपूर्वक उपभोग करो महात्मा हुसेन बसराई महावीर का दर्शन कराइए महावीर की जय xx ara ar & 555 o 55 o 5 or 5 . w ar mx 5 w rorror umor own १९५३ १९५९ १९६३ १९६३ १९६३ १९५३ १९५३ १९५३ १९५८ १९५४ १९५४ १९५५ १९५४ १९६२ १९५४ २५-२८ ३०-३८ १३-१५ १७-२० २५-२९ २८-३१ २१-२८ २९-३२ ३१-३३ Page #189 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख G महावीर से पहले का जैन इतिहास मेरी बम्बई यात्रा वज्रस्वामी वैशाली के गणतंत्र की एक झाँकी संघर्ष और आलिंगन संसार के धर्मों का उदय सत्य के आवरण या मूर्छाएं सन्त एकनाथ के जीवन प्रसंग सफलता के तीन तत्त्व सम्यक्दृष्टि और मिथ्या दृष्टि » » 07 233rdx s . . . KK andual m mai K १८३ ई० सन् पृष्ठ १९५३ . ३०-३४ १९५३ ११-१५ १९५६ ८-११ १९५४ २८-३० १९६६ २५-३२ १९५४ २०-२५ १९६४ १२-१९ १९५४ ११-१९ १९६१ २८-३० १९५४ ३-१० १९५४ ४-११ १९५१ ११-१४ १९६३ २८-३१ १९५३ २५-३१ १९५३ २९-३५ १९५४ ११-२० १९५० १७-२३ सम्यग् ज्ञान और मिथ्या ज्ञान स्वामी श्री धनीराम जी महाराज सिद्धसेन दिवाकर सूत्रकृतांग में वर्णित मत-मतांतर सेवक Page #190 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १८४ लेख श्रमण और ब्राह्मण श्रमण संघ के दस वर्ष श्री जैनेन्द्र गुरुकुल, पंचकूला हम किधर बह रहे हैं ? हमारी प्रवृत्तियाँ और उनका मूल्यांकन इन्द्रेश चन्द्र सिंह जैन आगम साहित्य में वर्णित दास प्रथा श्रमण : अतीत के झरोखे में जैन आगमों में वर्णित जातिगत समता प्राचीन भारतीय सैन्य विज्ञान एवं युद्धनीति : जैन स्रोतों के आधार पर राजनीति में जैन संस्कृति का योगदान भारतीय युद्ध और युद्ध नीति इन्दु जैनधर्म और दर्शन की प्रासंगिकता - वर्तमान परिपेक्ष्य में इन्दुला आध्यात्मिक साधना और उसकी परम्पराएँ इला खासनवीस बच्चों की मूलभूत आवश्यकताएँ वर्ष m २ ४ १६ ४१ ४२ ३९ ४१ ४० ४३ १० ८ अंक ४ १० w w ७-९ ई० सन् पृष्ठ १० १९५० १९६२ १९५१ १०-१२ १९९० ४-८ १९९१ ८ १९८८ ७-९ १९९० १२ १९८९ १९५३ १९६५ १९९२ १९५९ १९५७ २९-३२ १७-१९ १५-२० ५- १३ ३२-३६ ८५-९२ ६३-७२ ९-१७ २७-३४ २६-३६ १-८ ९-१६ १५-२० Page #191 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १८५ वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ १९५४ । २३-२९ १९५० २६ १९४५ १०-११ लेख इलाचन्द जोशी कालकाचार्य है (महासती) उज्जवल कुमारी सामायिक की सार्थकता उत्सवलाल तिवारी ा सुमन रख भरोसा महावीर का पं० उदयचन्द जैन आचार्य हेमचन्द्र और कुमारपालचरित आध्यात्मवादियों से अहिंसा का विराट रूप जैन दर्शन में आत्मस्वरूप है जैन साहित्य में शिशु तत्त्वार्थराजवार्तिक में वर्णित बौद्धादिमत पर्युषण और बौद्ध धर्म निक्षेप में नय योजना महामना की महानता मूलाराधना में समाधिमरण वादिराजसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्व 24 DAmrera » ry १९७१ १९७१ १९७० १९८५ १९७१ १९८४ १९६१ १९७२ १९६२ ३-१० १८-२४ २८-३१ १-११ २२-२० ३७-४८ २७-३० १३-१७ २६-२८ २१-३० ३-८ १९७२ १९७७ Page #192 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १८६ लेख वासुपूज्यचरितम् : एक अध्ययन "" हमारे समाज की भावी पीढ़ी श्री हेमविजयगणि और विजयप्रशस्तिमहाकाव्य क्षत्रचूड़ामणि में उल्लिखित कतिपय नीतिवाक्य उदय मुनि जैनदर्शन उमाशंकर त्रिपाठी बुनियादी सुधार भाई साहब शिक्षा का जहर शिक्षा के दो रूप शिक्षा के साधन उर्मिला जैन वीरवर्धमानचरित में शान्तरस विमर्श श्रमण संस्कृति की पृष्ठभूमि श्रमण : अतीत के झरोखे में f n m m x X वर्ष २३ २३ ३ २२ २४ २९ १ १४ aw 66 ७ ३ ३५ ३३ अंक 3 w 5 m 20 warm or १० o १२ ई० सन् पृष्ठ ९१७२ १९७२ १९५२ १९७१ १९७३ १९७७ १९५० १९६३ १९५६ १९५५ १९५१ १९८३ १९८२ ३-१० १०- १७ १६-१८ २२-२९ १२-२१ १४-१७ १७-२० १५-१८ ३० २७ १३-१७ २५-२८ ३-५ Page #193 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १८७ अंक ई० सन् पृष्ठ १२ १९८७ १२-२४ ४-६ १९९२ ६९-८४ ५ १९८७ २-५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख वर्ष उमेशचन्द्र सिंह उत्तरभारत की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना : जैन आगम साहित्य के सन्दर्भ में उमेशचन्द्र श्रीवास्तव त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में प्रतिपादित-सांस्कृतिक जीवन ना उम्मेदमल मुनोत . गतिशील स्वच्छ मन वरदान है उमेश मुनि असमता मिटाने का उपाय उषा सिंह महात्मा गाँधी का मानवतावादी राजनीतिक चिन्तन और जैनदर्शन-एक समीक्षात्मक अध्ययन ४७ उषा मेहरा मॉन्तेसरी शिक्षा-पद्धति ए० एम० योस्तन अहिंसा और शिशु मॉन्तेसरी आन्दोलन मॉन्तेसरी शिक्षा के ५० वर्ष ११ १९६० २२-२३ १९९६ ५५-५९ १९५७ ३८-४८ ३-४ ३-४ १९५७ १९५७ १९५७ ३-९ ६७-७९ ६१-६६ Page #194 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ १० १९५५ ३०-३२ १९५५ १९-३५ ३-४ ७-८ १९५७ १९५७ १०-१४ ४-७ एस० आर० कृष्णन लेखक और विश्वशान्ति एस०कान्त सच्चा वैभव एस० आर० स्वामी शिशु और संस्कृति शिक्षा और उसका उद्देश्य एस० सी० उपाध्याय कुषाणकालीन मथुरा की जैन सभ्यता एस० एन० दुबे जैन अभिलेखों की भाषाओं का स्वरूप एवं विविधताएं एस० एस० गुप्त एक दुनियाँ और एक धर्म ऋषभचन्द्र जैन धर्म और आज की दुनियाँ लवण एवं अंकुश की देव विजय का भौगोलिक परिचय अनेकान्त एक दृष्टि १९५५ १७-१८ ४-६ १९९१ ८९-९२ ९ १९५७ ४-७ ३ १९६४ १९६५ १९८० ३५-३६ ३-१५ १०-१२ Page #195 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १८९ अंक . ९ ई. सन् १९८१ पृष्ठ २-४ ११ १९५९ १९५१ १९५७ १९५८ २२-२४ २८-३२ १५-१८ ६९-७२ ९ ६-७ २ १९६३ ३५-३६ लेख भगवान् महावीर और उनके द्वारा प्रतिपादित धर्म ऋषभदास रांका एकता की ओर एक कदम मंदिरों के झगड़े और जैन समाज संस्कृति की दुहाई समता के प्रतीक महावीर ओमप्रकाश अग्रवाल श्री अतरचन्द जैन ओमप्रकाश सिंह अकबर और जैनधर्म आज का युग महावीर का युग है साध्वी श्री कनकप्रभा आचारांग के कुछ महत्त्वपूर्ण शब्द मुनि कनकविजय नेपाल के शाहवंश और उनके पूर्वज मुनिश्री कन्हैयालाल 'कमल' आगमों के आनुयोगिक-वर्गीकरण १९८२ १९५८ ५६-६० ३०-३४ ४ १-२ १९६६ ६१-६४ ४ १९५१ ३४-३८ १० १९६२ ९-१२ Page #196 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९० श्रमण : अतीत के झरोखे में ई० सन् १९६६ १९५७ १९६० १९६३ लेख आचारांग का परिचय कषाय विजय का महापर्व नए अपवाद पद्मलेश्या के रस का उपमेय मद्य क्यों ? पर्युषण और पश्चात्ताप पर्युषण मीमांसा भगवान् महावीर का व्यक्तित्व मनुष्य जन्म या मानवता राम की क्षमायाचना श्रमण संघ के सामने एक सवाल ! हमारे कवल (ग्रास) को मुर्गी के अण्डे की उपमा क्यों ? कन्हैयालाल भुरडिया भारतीय संस्कृति को भगवान् महावीर की देन कन्हैयालाल सरावगी आत्मा : बौद्ध एवं जैन दृष्टि ग्यारह प्रतिमा (व्रत) और एकादशी जगतः सत्य या मिथ्या पृष्ठ २७-३५ ३-५ २२-२ ९-११ २८ १७-२१ १७-२३ ४१-४४ ३३-३४ २६-२९ ३०-३२ १९५५ १९५७ १९६० १९५९ १९६० १९६४ ९ १२ १९६० २७-२९ १२ १९७३ १९७८ १८-२३ १९८८५-११ Page #197 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष लेख जैनधर्म आस्तिक या नास्तिक २६ uro mov sm » 2013 » or Mr r २५ २४ २७ जैनधर्म में कर्मयोग का स्वरूप जैनधर्म भौगोलिक सीमा में आबद्ध क्यों ? नयवाद : एक दृष्टि तु पावा : कसौटी पर प्राचीन भारतवर्ष में गणतंत्र का आदर्श भाषा और साहित्य महावीर की निर्वाण-भूमि पावा की वर्तमान स्थिति मानव संस्कृति का विकास वर्ण और जातिवाद : जैन दृष्टि है वर्तमान युग के सन्दर्भ में भगवान् महावीर के उपदेश वैशाली का सन्त राजकुमार व्यक्ति पहले या समाज शीलपरायण महावीर श्रमण जीवन में अधिकरण का उपशमन सामायिक : सौ सयाने एकमत सुख-दुःख १९१ ई० सन् पृष्ठ १९८० १९-२५ १९७५ . २१-२५ १९७९ १५-२० १९७२ ८४-३८ १९७८ १४-१८ ९९७४ १६-२३ १९७३ ९-१२ १९७६ ३-१४ १९७१ ३०-३१ १९७६ ३-१५ १९७८ १७-२० १९७४ २८-३४ १९७६ ३-७ १९७४ २८-३१ १९६१ ५२-५३ १९५६ २३-२७ १९७८ १०-१७ १९७९ ९-१३ २५ r M २७ ७ ५ Page #198 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९२ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ लेख पं० कपिलदेव गिरि तदेवा गार पर प्राकृत व्याकरण और भोजपुरी का 'केर' प्रत्यय U WWW १९७१ १९७१ १९७१ १९७४ २९-३८ २४-३८ १८-२९ २७-३३ १९८७ १९८१ ७-१३ २३-२६ १९८७ १-४ बंगला आदि भाषाओं के सम्बन्धवाची प्रत्यय महावीर की निर्वाण भूमि पावा की स्थिति कपूरचन्द जैन पुरुदेवचम्पू का आलोचनात्मक परिशीलन महावीर की वाणी कमलचन्द सौगानी महावीर का अपरिग्रह सिद्धान्त : सामाजिक न्याय का अमोघ मन्त्र कमल जैन आचार्य हरिभद्र एवं उनका योग आचार्य हरिभद्र और उनका साहित्य प्राचीन जैन कथा साहित्य का उद्भव, विकास और वसुदेवहिंडी प्राचीन जैन साहित्य में वर्णित आर्थिक जीवन : एक अध्ययन वसुदेवहिंडी का समीक्षात्मक अध्ययन कमला माताजी अन्धेरा दीप तले ४४ ४४ ४६ १-३ १९९३ ४-६ १९९३ १०-१२ १९९५ ८-९ १९८६ ४-६ १९९६ ८-२७ १-१२ ५२-६३ १०-१९ ११-३५ ३७ ४७ १ १९८७ २६-२७ Page #199 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९३ अंक ई० सन् पृष्ठ ६-७ १९६१ १९६२ ७-१० ३६-३७ ७-१२ १९९१ ३५-४३ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख कमला जैन तत्त्वोपदेष्टा महावीर आचार्य श्री का पुण्य जीवन कमला पंत जैन सम्मत आत्मस्वरूप का अन्य भारतीय दर्शनों से तुलनात्मक विवेचन कमला जोशी अन्य प्रमुख भारतीय दर्शनों एवं जैन दर्शन में कर्मबन्ध का तुलनात्मक स्वरूप जैन दर्शन में आवश्यक साधना जैन दर्शन में परीषह जय का स्वरूप एवं महत्त्व शिशु की निद्रा कमलेश कुमार जैन जैन आलंकारिकों की रस विषयक मान्यताएँ कवि-स्वरूप : जैन आलंकारिकों की दृष्टि में प्राकृत जैनागम परम्परा में गृहस्थाचार तथा उसकी पारिभाषिक शब्दावली बारहभावना : एक अनुशीलन रस-विवेचन : अनुयोगद्वारसूत्र में १९९१ १९८९ »ar १९८९ ३३-४३ २७-३४ ४१-४५ ३२-३४ १९५४ १९७८ - १९७६ १९९२ १९९४ १९७६ १४-२४ ८-१२ ४७-६८ ५६-६१ २३-२९ Page #200 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९४ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ ७-८ १९५७ ४०-४३ ७-९ १९९५ ७०-७३ १-१० लेख कलादेवी जैन अक्षय तृतीया कलानाथ शास्त्री चातुर्मास : स्वरूप और परम्पराएँ ग कल्याणमल लोढ़ा अहँ परमात्मने नमः मुनि कल्याण विजय 'रायपसेणिय उपांग और उसका रचनाकाल' की समीक्षा कल्याणी देवी जायसवाल जैन परम्परा में महाभारत कथा पाण्डवचरित का तुलनात्मक अध्ययन कस्तूरचन्द जैन कोटिशिला तीर्थ का भौगोलिक अभिज्ञान जैन धर्म में मानवतावाद कस्तूरमल बांठिया अहिंसा निउणा दिट्ठा अधिमास और पर्युषण १९६५ ३८ १९८९ १९८८ १४-१९ २२-२७ १२ ७-१२ १९९१ १९६६ ५१-६० २५-३२ ६-७ १९६३ १९५५ ३४-४३ १७-२३ Page #201 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९५ अंक ६ ११-१२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अभव्यजीव नवग्रैवेयक तक कैसे जाता है? अहिंसक मधु आगम प्रकाशन में सहयोग कौन और कैसे करे? आगम वाचना का सवाल इस चर्चा को खत्म कीजिये "कुवलयमाला' मध्ययुग के आदिकाल की एक जैन कथा क्या जाति स्मरण भी नहीं रहा क्या थे? क्या हैं? क्या होना है? छद्मस्थानां च मतिभ्रमः जनमार्ग जैन इतिहास लेखकों को आह्वान जैन आगम और विज्ञान जैन तत्त्वों में शूबिंग के विचार जैनमुनि और माँसाहार परिहार जैन साहित्य के इतिहास की पूर्व पीठिका जैनों ने भी युग का आह्वान सुना जैनों में मूर्ति और उसकी पूजा पद्धतियों में विकास और विकार E : ; ; ; ; ; ; ; ; ; * * * * * 5 us w or w x n or on aina oo ई० सन् १९६८ १९५६ १९६७ १९५८ १९६० १९६७ १९६० १९६० १९५८ १९७० १९६१ १९६१ १९७० १९६७ १९६९ १९६३ १९६८ पृष्ठ ७-११ २४-२९ १६-२५ ६८-७० ४४-४७ २-१७ २९-३४ १७-२१ २६-३० ३-१५ ३१-३३ ३६-४० १६-२३ १४-२५ १८-२४ ३३-३७ ६-१७ oro Page #202 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख तीर्थंकर महावीर तीर्थंकरवाद दिगम्बर परम्परा में श्रावक के गुण और भेद पहले महावीर निर्वाण या बुद्ध निर्वाण प्रसिद्धिप्राप्त श्वेताम्बर जैनों की कुछ कृत्रिम कृतियाँ प्रत्यालोचना-महावीर का अन्तस्थल बुद्ध और महावीर का परिनिर्वाण & : 0 : ะ แ भगवान् महावीर का निर्वाणाब्द २५०० आ रहा है भारतीय विद्याविद् डॉ० जॉन जार्ज बुहलर महावीर के जीवन पर नया प्रकाश भगवान् महावीर के जीवन-चरित्र ई० सन् १९६१ १९५६ १९६५ १९५९ १९६८ १९५५ १९६२ १९६२ १९५९ १९६६ १९६१ १९६४ १९६९ १९५६ १९५६ १९६४ १९६४ : : » Tr, Aryamari पृष्ठ १२-१४ ९-१६ ५६-६२ १०-२१ ९-३० ३३-३६ ८-१३ २५-२६ २८-३२ १३-२० ३१-३३ ४९-६३ ५-२२ २२-२९ ४-१५ ९-१६ २-८ महावीर भूले? : 9 ง ๕ ๕ रायपसेणइ उपांग और उसका रचनाकाल-क्रमश: Page #203 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख " "" " विगत हजार वर्ष के जैन इतिहास का सिंहावलोकन क्रमशः "" "" श्रमण और श्रमणोपासक श्रावक किसे कहा जाय श्रावक के गुण एवं भेद-क्रमशः "" 11 श्री जयभिक्खु के ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद श्री लालाभाई वीरचन्द देसाई 'जयभिक्खु ' शास्त्र वाचना की आज फिर आवश्यकता है। श्वेताम्बर जैनों के पूजाविधियों का इतिहास (क्रमशः ) "" श्वेताम्बर - परम्परा में श्रावक के गुण और भेद श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १५ १६ १६ १६ १६ १६ १८ १८ १७ १७ १७ १९ १९ 2No 222 ८ अंक १२ १ २ १० ११ १२ ३ १२ ९ ५ १० ११ ४ ई० सन् १९६४ १९६४ १९६४ १९६५ १९६५ १९६५ १९६७ १९६७ १९६६ १९६६ १९६६ १९६८ १९६८ १९५७ १९६६ १९६६ १९६६ १९७ पृष्ठ ३-१० ३-११ ३-११ ३-११ ३-१४ ३-१९ २५-२९ १०-२३ ३-११ ३-११ ३-१० २५-३४ २८-३७ ४-७ ४-५ २-१४ ३-१४ Page #204 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १९८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख Eะ : g ई० सन् १९६८ १९५८ १९६० पृष्ठ ६-१८ १७-२० ७-१२ * * १९८७ १९८३ २१-२२ १३-१६ समराइच्चकहा का अविकल गुर्जरानुवाद हम अनेकान्तवादी हैं या एकान्तवादी ? , हम दूसरों को दूसरों के ही दृष्टिकोण से समझें कस्तूरीनाथ गोस्वामी आहार दर्शन वर्तमान अशान्ति का एकमात्र समाधान अहिंसा कस्तूरीलाल जैन संयम और त्याग की मूर्ति काका कालेलकर अद्वेष दर्शन हैं अहिंसा की परिणति-समन्वय और सत्याग्रह अहिंसा की साधना अहिंसा के तीन क्षेत्र-क्रमशः * ११-१२ १९६३ ६७-७१ १९६४ : : : : : rag oor xoru १२-१४ १८-२१ ११-१३ १६-१९ १६-१७ ३४-३८ ३१-३२ १९५० १९६४ १९६४ १९६० १९४९ १९५१ अहिंसा-शोधपीठ तर्क और भावना धर्म के स्थान पर संस्कृति : Page #205 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १९९ अंक ई० सन् पृष्ठ १९८१ ३१-३२ १९६४ ه १९६३ १९६२ १९६४ ४८-५७ १९-२८ ९-१३ २३-२७ ک लेख साध्वी श्री कानकुमारी जी सच्ची क्षमा कानजी भाई पटेल उत्तराध्ययनसूत्र : धार्मिक काव्य धर्म क्षेत्रे-हिम क्षेत्रे श्रमण संस्कृति में क्षमा श्रमण परम्परा में धर्म और उसका महत्त्व कांता जैन स्त्रिी शिक्षा कू भगवान् महावीर का आदर्श और हम ६ मुनिश्री कांति सागर जी कवि रत्न श्री अमरमुनि जी मगध में दीपमालिका कामता प्रसाद मिश्र इ विमलसूरि के पउमचरिउ का भौगोलिक अध्ययन किशोरी लाल जैन कुछ संस्मरण और श्रद्धा के फूल ده १९५० १९५१ २३-२६ ३३-३६ یی ५ १९५७ १९४९ ८-१० ३७-४० ه १२ १९८१ १२-२० ११-१२ १९६३ ५०-५३ Page #206 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २०० श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ . १९५१ १९५१ १९५१ १९६० ४-८ १४-१८ १८-२३ २७-२८ १९८१ ३५-४८ लेख किशोरी लाल मशरूवाला नारी की प्रतिष्ठा शुद्ध व्यवहार का आन्दोलन सोमनाथ स्वच्छता : जीवन का अंग कृपाशंकर व्यास नय और निक्षेप-एक विश्लेषण कृष्णचन्द्राचार्य आगरा में श्री रत्नमुनि शताब्दी समारोह जैनत्व की कसौटी धर्मबन्धु हर्बर्ट वारन पूज्य श्री मंगल ऋषि जी वीतराग महावीर श्रमण संस्कृति का भावी विकास सबसे पहला पाठ साधु समाज की प्रतिष्ठा rrrrrrrrrr me ७-८ १९६४ १९५० १९५४ १९६४ १९६१ १९५८ १९५० १९५२ १२-१६ ३१-३२ १६-२२ ३८-४० ७-८ ७३-७४ २८-३० ६१-६३ ११-१२ ७-८ Page #207 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २०१ ई० सन् पृष्ठ ८ लेख श्री कृष्ण 'जुगनू' अपराध की औषधि : क्षमा इन्द्रियनिग्रह से मोक्ष-प्राप्ति कृष्णदत्त बाजपेयी शाजापुर का पुरातात्त्विक महत्त्व १९८५७-९ १९८६ ५-७ १०-१२ १९९० १११- ११४ १९८१ २४-२५ ७-९ १९९६ १९९४ १५-२२ १०-२२ कृष्णमुरारी पाण्डेय सोमदेवसूरि की अर्थनीति-एक समाजवादी दृष्टिकोण कृष्णलाल त्रिपाठी जैन धर्म और प्रयाग रामचन्द्रसूरि और उनका साहित्य कृष्णलाल शर्मा जैनधर्म और व्यावसायिक पूँजीवाद : वेबर की अनुदृष्टि जैन उपाश्रय व्यवस्था और कर्मचारी तंत्र कृष्णा मेहरोत्रा आदर्श गृहस्थी कुमार प्रियदर्शी जीवन के दो पक्ष १-२ १९६७ १९६६ ६५-७२ २७-३३ १९६० २९-३१ १९५९ २५-२६ Page #208 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २०२ अंक ११-१२ ई० सन् १९५८ पृष्ठ ४२-५६ १-३ १९९७ २१-३२ १०-१२ १९९४ ३३-३६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख नई समाज व्यवस्था कुन्दनलाल जैन योग निधान कुमुद गिरि जैन महापुराण : एक कलापरक अध्ययन कुसुम जैन आचार्य अमितगति : व्यक्तित्व और कृतित्त्व स्याद्वाद केवलकृष्ण मित्तल भौतिकवाद एवं समयसार की सप्तभंगी व्याख्या के०एच० त्रिवेदी जैनधर्म-एक अवलोकन केवल मुनि चारित्र की दृढ़ता के० आर० चन्द्र अर्धमागधी भाषा में सम्बोधन का एक विस्मृत शब्द-प्रयोग 'आउसन्ते' कुवलयमाला की मुख्य कथा और अवान्तर कथाएँ (क्रमशः) १९८८ १९७९ १७-२३ २१-३३ ११ १९७८ १४-२० १९७२ २४-२८ १९८६ २६-३३ १९९५ १९७५ १९७५ ६६-६९ ३-८ ३-८ Page #209 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक • w o vaaa ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९६७ १९९२ १९९० १९८३ १९६५ १०-१२ न क्या रावण के दस मुख थे? क्षेत्रज्ञ शब्द का स्वीकार्य प्राचीनतम अर्धमागधी रूप क्षेत्रज्ञ शब्द के विविध रूपों की कथा और उसका अर्धमागधी रूपान्तर जैन विद्या के अध्ययन एवं संशोधन केन्द्रों की स्थापना पउमचरियं के कुछ भौगोलिक स्थल पउमचरियं की अवान्तर कथाओं में भौगोलिक सामाग्री पउमचरियं : संक्षिप्त कथावस्तु (क्रमश:) २०३ पृष्ठ १०-११ १९-२१ १९-२२ २१-२५ २२-२४ ४१-४४ ४९-५६ २२-२५ १७-२१ ३-१७ ८-११ २२-२७ २६-३० ३-८ २-५ ३-८ ३-८ १९६७ " १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६७ १९६६ १९६५ पउमचरियं में अनार्य जातियाँ पउमसिरीचरिउ के मूल स्त्रोत पउमचरियं में वर्णित राम की वनयात्रा -क्रमश: Page #210 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में प्राकृत व्याकरण: वररुचि बनाम हेमचन्द्र : अंधानुकरण या विशिष्ट प्रदान प्राचीन प्राकृत ग्रंथों में उपलब्ध भगवान् महावीर का जीवन-चरित्र भरतमुनि द्वारा प्राकृत को संस्कृत के साथ प्रदत्त-सम्मान और गौरवपूर्ण स्थान महाकथा कुवलयमाला के रचनाकार का उद्देश्य और पात्रों का आयोजन मूल अर्धमागधी के स्वरूप की पुनर्रचना राक्षस : एक मानव वंश रामकथा-विषयक कतिपय भ्रान्त-धारणायें विद्याधर : एक मानव जाति विश्वेश्वरकृत श्रृंगारमंजरी सट्टक का अनुवाद क्रमश: ७-१२ ई० सन् १९६५ १९९१ १९७७ १९९१ १९७३ १९९१ १९६७ १९६५ १९६७ १९७२ १९७२ १९७२ १९७२ १९७३ १९७३ १९७३ १९७३ पृष्ठ १३-१८ ११-१९ ३-१० ७१-७४ १०-१३ ११-१५ ८-१२ ३२-३४ १८-२० ३४-३८ २०-२३ २८-३२ ३०-३४ ३३-३५ ३२-३७ ३६-३८ २२-२६ Page #211 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २०५ लेख ई० सन् १९७३ १९७३ १९७३ १९६७ १९९७ १९७३ पृष्ठ २५-३० २९-३६ १६-१९ ९-१२ ४५-५२ १६-२१ २२२२२२ ५ राम कथा के वानर : एक मानव जाति षट्प्राभृत के रचनाकार और उसका रचनाकाल सर्वांगसुन्दरी-कथानक सन्दर्भ एवं भाषायी दृष्टि से आचारांग के उपोद्धात में प्रयुक्त प्रथम वाक्य के पाठ की प्राचीनता पर कुछ विचार के० भुजबली शास्त्री कन्नड़ में जैन साहित्य गोम्मट आइडोल्स ऑफ कर्णाटक जैन कन्नड़ वाङ्गमय पंडितरल विद्वान् सुखलाल जी एक सुखद संस्मरण महाकवि रत्नाकर के कतिपय अध्यात्म-गीत वैदिक धर्म तथा जैन धर्म सिद्धि योग का महत्त्व १९९४ อง:: 0 : : : ५२-५९ १३-२० ३६-३८ ४७-५१ १९७३ १९७३ १९५३ १९८१ १९६९ १९७८ १९७८ २३-२५ ९-१३ २८-२९ * Page #212 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २०६ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ 8 १९९३ ३६-५८ १९५३ Pig लेख केशवप्रसाद गुप्त वसन्तविलासमहाकाव्य का काव्य-सौन्दर्य के० एस० धरणेन्द्रैया कन्नड़ संस्कृति को जैनों की देन कैलाशचंद्र जैन एक पत्र कैलाशचन्द्र शास्त्री अहिंसक महावीर एक समस्या कश्मीर की सैर - क्रमशः १९६९ २५ ) - T १९५६ १९५० १९५४ १९५४ १९५४ १९६२ १९७४ १९६३ १९७७ १९५८ ४८-५० २१-२५ ३३-३६ २९-३० २५-२७ ९-१३ ३-८ ३१-३२ ३-१० ३०-३२ दर्शन और धर्म निश्चय और व्यवहार प्रत्येक आत्मा परमात्मा है भगवान् महावीर का अचेलधर्म भगवान् महावीर के जीवन की एक झलक AM Page #213 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २०७ लेख ई० सन् १९४९ १९६१ पृष्ठ ९-११ १६-१८ युद्ध और श्रमण सन्त श्री गणेश प्रसाद वर्णी कोमलचन्द जैन आगमिक साहित्य में महावीर चरित्र क्षमा पहला धर्म है 5 जैन आगमों में जननी एवं दीक्षा जैन और बौद्ध आगमों में गणिका जैन और बौद्ध आगमों में विवाह पद्धति जैनधर्म एवं बौद्धधर्म-परस्पर पूरक पालि क्या बोलचाल की भाषा थी? । ३ बुन्देलखण्डी भाषा में प्राकृत के देशी शब्द बौद्ध और जैन आगमों में नारी जीवन : एक और स्पष्टीकरण बौद्ध और जैन आगमों में जननी बौद्ध और जैन आगमों में जननी : एक स्पष्टीकरण बौद्ध और जैन आगमों में पुत्रवधू भारतीय संस्कृति के विकास में श्रमण धारा का महत्त्व विग्रहगति एवं अन्तराभव form our yr : AM १९७५ १९५९ १९७६ १९६५ १९६३ १९७६ १९६९ १९७० १९६८ १९६७ १९६७ १९६७ १९८४ १९६९ २८-३३ ३२-३४ १९-२२ ७३-८४ १८-२२ ८-११ १७-२१ २०-२३ २३-२४ २६-३३ १५-१९ २४-३३ १५-२४ २२-२५ Page #214 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३० सन् १९७२ पृष्ठ ६-१० २०८ लेख श्रमण संस्कृति और नारी कोमलचन्द्र शास्त्री है क्या लोकप्रियता योग्यता की निशानी है वनस्पति की गतिशीलता कोमल जैन प्रभावशाली व्यक्तित्त्व (मनोवैज्ञानिक लेख) कौशल किशोर जैन * सस्ता और सुलभ भोजन खलील जिब्रान 9mm 3 १९६१ १९६१ १६-१८ १६-१८ १९५७ १२-१४ १९६४ ३५-३९ शैतान ४ १९५१ १९५१ २३-३३ १९५९ १८-२३ गंगाधर जालान बुनियादी समस्या और उसका समाधान गंगासागर राय काव्य का प्रयोजन : एक विमर्श काव्य में लोक मंगल भारतीय आचार्यों की दृष्टि में काव्य के हेतु गजेन्द्र मुनि जैन संस्कृति और प्रचार : एक चिन्तन 4se १९६१ १९६१ १९६२ २५-२६ ४२-४४ २४-२७ १९६६ ३०-३६ Page #215 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २०९ लेख अंक ई० सन् पृष्ठ ३० गणेश प्रसाद जैन 0 असुर ऋषभ पुत्र भरत और भारत कवि पुष्पदन्त की रामकथा जैन तीर्थंकरों का जन्म क्षत्रियकुल में ही क्यों ?-क्रमश: १९७० १९६९ १९६९ १९७७ १९८० १९६८ १९६८ १९८१ १९८२ जैन पुराणों में राम कथा जैन महाकवि पं० बनारसीदास का रहस्यवाद तीर्थंकर महावीर का निर्वाण-दिवस 'दीपावली' क तीर्थंकर महावीर का निर्वाण पर्व 'दीपावली' : एक समीक्षा ई तीर्थंकर महावीर की जन्म भूमि : विदेह का कुण्डपुर तीर्थंकर महावीर की निर्वाण भूमि ‘पावा' तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ दक्षिण भारत में जैनधर्म और संस्कृति दक्षिण भारत में जैनधर्म, साहित्य और तीर्थ क्षेत्र दास, दस्यु और पणि २४-३२ २४-२७ २१-२५ १५-१८ २३-२५ १८-२२ २०-२३ १५-२० २-११ ५-११ २-५ १५-२५ १४-२८ २६-३० २०-२४ १९८४ १९८६ १९८३ १९६९ १९७२ १९७० १९७० द्राविण Page #216 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् १९८० २१० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख पर्वराज-दस लक्षणी पर्युषण पर्व भारतवर्ष के मूल निवासी श्रमण मगध साम्राज्य का प्रथम सम्राट-श्रेणिक महाकवि पुष्पदन्त : एक परिचय " महाकवि बनारसीदास का रस दर्शन महावीर की विहारभूमि-मगध और उसकी संस्कृति राजगृह वसुदेवहिण्डी में रामकथा वहित और अहित वैराग्यमूलक एक ऐतिहासिक प्रेमकाव्य : तरंगवती समाधिमरण श्रवणबेलगोला के शिलालेख, दक्षिण भारत में जैनधर्म और गोम्मटेश्वर श्रावस्ती का जैन राजा सुहलदेव गणेश मुनि शास्त्री है अहिंसा के इतिहास में निरामिषता जैन आगम साहित्य में प्रमाणवाद दर्शन और विज्ञान : एक चिन्तन 62 r rrrrrrrrrror १९६९ १९६७ १९६९ १९७१ १९८१ १९७२ १९८४ १९७० १९८२ १९८२ १९६७ १९७६ १९-२५ ३२-३७ २५-३४ १५-१९ ३१-४१ २३-२७ १६-२७ ७-१३ २०-२३ १४-२४ ९-१३ १३-२१ १४-१८ १९६७ १९७८ १९६४ ९-१४ २९-३४ ८-१२ Page #217 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २११ A hos अंक ई० सन् पृष्ठ ९ १९८२ १९८२ १४-१९ . १९७५ ११-२१ . लेख गणेश ललवानी राज्य का त्याग : त्यागी से भय - गुरुचरण सिंह मोंगिया जैन साहित्य और सांस्कृतिक संवेदना गुलाबचन्द्र चौधरी अखिल भारतीय प्राच्यविद्या महासम्मेलन 6 अपरिग्रह के तीन उपदेष्टा आचार्य विद्यानन्द आचार्य हेमचन्द्र आर्यों से पहले की संस्कृति इतिहास की पुनरावृत्ति : एक भ्रामक धारणा नारी के अतीत की झांकी-सतीप्रथा भगवान् महावीर का जन्म और निर्वाण भूमि भगवान् महावीर और उनका उपदेश है भगवान् महावीर का व्यक्तित्व संस्कृति-एक विश्लेषण श्रमण संस्कृति का केन्द्र-विपुलाचल और उसका पड़ोस . . mor or rr or on raw orn १९५१ १९५८ १९४९ १९५० १९४९ १९५० १९५० १९५० १९६२ १९५४ १९४९ १९५० ३८-४४ २२-२५ २४-२७ १६-२४ १३-१९ ३१-३२ ११-१८ ९-१२ १५-१७ ४१-४६ १३-१६ १५-२३ . १ . Page #218 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २१२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् पृष्ठ १६-२३ ३७-३८ २४-३१ ११-१४ १४-१५ ३-५ गुलाबचन्द्र जैन आर्यारत्न श्री विचक्षण श्री जी म०सा० उद्भट विद्वान् पं० बेचरदास दोशी जैनधर्म और भक्ति तु जैनधर्म दर्शन में आराधना का महत्त्व पर्युषण : दस लक्षण पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान के मार्गदर्शक पं० सुखलाल जी प्रज्ञाचक्षु पं० सुखलाल जी : एक परिचय बौद्ध ग्रन्थों में जैन धर्म मुनिश्री चौथमल जी की जन्म शताब्दी स्व० डॉ० भगवानदास गोपीचन्द धारीवाल अपरिग्रह अथवा अकर्मण्यता अहिंसा अहिंसा : एक विश्लेषण अहिंसा की साधना आत्म विज्ञान १९८० १९६३ १९७८ १९८३ १९६० १९७७ १९८० १९५६ १९७८ १९६१ ५५ rem Mur L M - 9 hr १८-२८ २४-२७ ३८-४० १९६० १९६४ १९६६ १९६६ १९६४ २३-२५ २०-२८ १८-१९ ४३-६० ३१-३८ Page #219 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २१३ लेख » or ई० सन् १९६५ १९६४ १९६३ १९७१ १९६८ १९६४ १९६५ 3 पृष्ठ १९-२५ २२-२५ २१-२४ २६-३१ १८-१९ २२-२९ १४-१९ १०-१७ २३-२५ २७-३१ २६-३१ १८-२२ आस्रव व बंध क्या जैनधर्म जीवित रह सकता है ? चीनी आक्रमण : अहिंसा को चुनौती भगवान् महावीर के निर्वाण का २५००वां वर्ष -भोग तृष्णा भौतिकवाद व अध्यात्मवाद है मोक्ष संवर और निर्जरा संसार का अन्तरंग प्रदेश सम्यग्दर्शन श्री सिद्धर्षिगणिकृत उपमितिभवप्रपंचाकथा श्री सिद्धर्षिगणिकृत उपमितिभवप्रपंचाकथा से संकलित “धर्म की महिमा" गोकुल चन्द जैन आचार्य सोमदेवसूरि केशी ने पूछा जैन संस्कृति और विवाह जैन साहित्य और अनुसंधान की दिशा 3 p १९६७ १९६७ १९६६ -9 4 ३१-३३ - r » १९६० १९६० ८-२१ ३३-३५ . १९५९ Page #220 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २१४ श्रमण : अतीत के झरोखे में 1.18 www w ra ar ar ई० सन् १९५९ १९६० १९६७ १९६० १९६० १९८८ १९६४ १९६१ पृष्ठ ३२-३४ २१-२२ २४-२८ ६५-६९ २३-२४ २-७ लेख जैन साहित्य की प्रतिष्ठा बदलते सामाजिक मूल्य और हमारा चिन्तन के भारतीय विश्वविद्यालयों में जैन शोध-कार्य महावीर के समकालीन आचार्य वर्णी जी के स्मारक का प्रश्न ? संवत्सरी सोमदेवकृत यशस्तिलक सोमदेवसूरि और जैनाभिमत वर्ण-व्यवस्था चन्दनमल चांद युवक के प्रति महोपाध्याय चन्द्रप्रभसागर अष्टलक्षी : संसार का एक अद्भुत ग्रन्थ आत्मोपलब्धि की कला : ध्यान वृत्ति : बोध और विरोध क्षमा-वाणी चन्द्रलेखा पंत जैन दर्शन में नारी मुक्ति ९-१४ १९६९ १३-१४ २-८ १-७ an may or m १९८८ १९९३ १९९३ १९८२ ११-१६ १-११ १९७४ १४-१८ Page #221 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २१५ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ १९५२ ३-८ १९४९ ३३-३४ १९४९ १९४९ २५-२८ २६-३१ लेख चन्द्रशंकर शुक्ल स्याद्वाद की सर्वप्रियता चन्द्रशेखर शास्त्री प्राचीन भारत में संस्कृतियों का संघर्ष चन्द्रिका सिंह उपासक सारनाथ-काशी की तपोभूमि सारनाथ के भग्नावशेष चम्पालाल सिंघई ग्वालियर के तोमरकालीन दानवीर गुप्त सम्राटों का धर्म समभाव जैनों में सती प्रथा दानवीरता का कीर्तिमान-वस्तुपाल चांदमल कर्णावट हम क्रान्ति का आह्वान करें चित्र भानु है जीवन सौरभ चिमनलाल चकुभाई शाह तपश्चर्या-उपवास १९७१ १९७१ १०-१३ १८-२० २०-२१ १७-२० १९७१ १९७२ २ १९६३ २४-२७ १९५९ २०-२२ ० १९८३ २०-२२ Page #222 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ५ ई० सन् १९८० पृष्ठ ५२ २ १९८१ १९ । १९६२ १-२ १९६२ २६-२८ लेख समदर्शी दार्शनिक महात्मा चेतनदास जी अनमोल वाणी-संकलन चैनसुखदास जैन धर्म का सर्वोदय स्वरूप छगनलाल शास्त्री भेद में अभेद का सर्जक स्याद्वाद छोटालाल हरजीवन सुशील वैराग्य क्या है जमनालाल जैन अपरिग्रह की नई दशा अपरिग्रही महावीर अहिंसा, संयम और तप गंगा का जल लेय अरघ गंगा को दीना जो विदा हो रहे हैं भगवान् महावीर और युवा अध्यात्म महात्मा भगवानदीन जी १९६३ २२-२९ is uru 3rw १९५८ १९६१ १९५९ १९५६ १९५९ १९८१ १९६२ ४७-५० ४-७ ३५-३८ २३-२८ ५१-५५ २३-२५ Page #223 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २१७ लेख ई० सन् १९७३ १९७४ १९६० १९७७ १९७७ १९५६ पृष्ठ । २१-२४ ५७-६२ ४५-४७ ९-१४ १३-२२ १३-१७ * * महावीर और उनकी देशना महावीरोपदिष्ट परिग्रह परिमाण व्रत ॐ मातृ-वत्सल महावीर विपाकसूत्र के आख्यान : एक विहंगावलोकन श्रमरस का स्रोत : श्रावक हमें सामाजिक मूल्यों को बदलना है भिक्षु जगदीश काश्यप भिक्षुसंघ और समाज सेवा g लोक कल्याण के लिए श्रमण संस्कृति कू जगदीशचन्द्र जैन अनेकान्त : अहिंसा अनेकांत : अहिंसा का व्यापक रूप प्रागैतिहासिक भारत में सामाजिक मूल्य एवं परम्पराएँ महावीर निर्वाण भूमि पावा : एक समीक्षा इपिण्ड नियुक्ति जगदीश सहाय नैतिकता का आधार १९४९ १९४९ १३-१६ १९-२१ * * ७-८ १०-१२ १०-१२ ९ १९६२ १९६१ १९९२ १९९४ १९६५ ७-८ ५१-५२ १३-१९ २३-२५ २८-३१ १ १९८१ १-१८ Page #224 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २१८ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ११ ई० सन् १९८० पृष्ठ ६-१५ १९५९ १३-१७ ३-९ लेख मानव धर्म का सार जगन्नाथ पाठक संस्कृत कवियों के उपनाम जयकुमार जैन पार्श्वनाथचरित में प्रतिपादित समाज पार्श्वनाथचरित में राजनीति और शासन-व्यवस्था प्राचीन भारतीय वाङ्मय में पार्श्वचरित शान्त रस : मान्यता और स्थान संस्कृत साहित्य में अभ्युदय नामान्त जैन काव्य जयचन्द्र बाफणा चंदनबाला और मृगावती जयन्त मुनि पर्युषण का सामाजिक महत्त्व मुनिश्री जयन्ती लाल जी ज्ञान की खोज में जयभगवान जी एडवोकेट आत्मा की महिमा १९७६ १९७७ १९८० १९७७ १९७७ २५-२९ २९-४५ ८-१२ ३-८ १९५५ ३१-३२ ११ १९५५ १०-१५ १९५१ १७-२१ ७-८ १९५१ ३० Page #225 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २१९ पृष्ठ । अंक ई० सन् १९५५ १९५१ १९५२ १९५२ १९५३ १९६२ लेख जयभगवान जैन पर्व और धर्म चर्या जय भिक्खु परिनिर्वाण मैं स्वयं अहमदाबाद के भामाशाह सांपू सरोवर धन्य यशोदा, तुम्हें जसकरण डागा जैन एकता : सूत्र व सुझाव जसवन्तलाल मेहता जैनधर्म एवं गुरु मन्दिर मुनि ज्योतिर्धर जैन संस्कृति का दिव्य सन्देश-अनेकान्त ज्योतिप्रसाद जैन जैनकला विषयक साहित्य धर्म और सहिष्णुता १७-२१ १३-२१ २१-२४ ३४-३९ २५-३१ १९८२ २२-४१ १९८९ १९-२६ १९८५ २-७ ५-६ १९७७ १९६३ १८-२१ ३३-३४ Page #226 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २२० श्रमण : अतीत के झरोखे में पृष्ठ ८ लेख भगवान् महावीर और दीवाली भगवान् महावीर के जीवन का एक भ्रान्त दृश्य महान् साहित्यकार आचार्य हरिभद्रसूरि महावीर का अन्तस्तल जितेन्द्र बी० शाह द्वादशारनयचक्र का दार्शनिक अध्ययन जिनवर प्रसाद जैन » 223 ई० सन् १९६२ १९६३ १९६५ १९५३ ३३-४६ ५३-५५ ३१-३४ १९९२ ५९-६३ पावापुर १९७१ ११-१९ ३५-१ ७-८ ३६-४ १९८३ १९८४ १९८४ ६-८ ६-१० ३६-३ जिनेन्द्र कुमार क्या हम अपराधी नहीं धर्म को समाज सेवा से जोड़ा जाय राष्ट्रीय विकास यात्रा में जैन धर्म एवं जैन पत्रकारों का योगदान जिनेन्द्र कुमार स्मृति नन्दन जिनेन्द्रवर्णी महावीर जयन्ती मुनिश्री जिनविजय जी गुजरात का जैनधर्म ३२-५ १९८० ३९-४० ३५-६ १९८३ १५-१९ ३ १९८७ १-३९ Page #227 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जैन कथा साहित्य का सार्वजनीन महत्त्व हरिभद्रसूरि का समय-निर्णय - क्रमश: Errr २२१ ई० सन् पृष्ठ १९५३ २९-३८ १९८८१-३२ १९८८ १-३० १९५९ १९६३ २०-२२ ६९-७० १९७० ___३०-३२ पूज्य जिनविजयसेन सूरि जैन विद्वान् साहित्यिक परम्परा को अक्षुण रखें वर्धमान से महावीर कैसे बने ? जी०आर०जैन कर्मों का फल देनेवाला कम्प्यूटर जुगलकिशोर मुख्तार आचार्य हेमचन्द्र के योगशास्त्र पर एक प्राचीन टीका ६ न्यायोचित विचारों का अभिनन्दन सुधार का मूलमंत्र श्रीरंजन सूरिदेव की कुछ मोटी भूलें जे०सी० कुमारप्पा युद्ध के लिए जिम्मेदार कौन जे०एन० भारती अपने व्यक्तित्व की परख कीजिये २-१७ १९६६ १९६५ १९६१ १९६६ १०-२१ ९-१६ ३० . . १९५९ १३-१५ १९५४ ३५-३६ Page #228 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २२२ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक लेख ई० सन् पृष्ठ १९७१ १९७२ १९७३ १९७२ २९-३३ ६-१२ ३५-४२ २४-२७ . १९५१ २२-२६ झिनकू यादव प्राचीन जैन साहित्य में उत्सव-महोत्सव प्राचीन भारतीय श्रमण एवं श्रमण चर्या ममराइच्चकहा की संक्षिप्त कथावस्तु और उसका सांस्कृतिक महत्त्व समराइच्चकहा में चार्वाक दर्शन टालस्टाय धर्म का तत्त्व डी० पी० महाजन तमिलक्षेत्रीय जैन योगदान लंका में जैनधर्म डी० आर० भण्डारी जैन नीति-दर्शन एवं उसका व्यावहारिक पक्ष पर्यावरण एवं अहिंसा डोंगरे महाराज जीवन और विवेक ताराचन्द्र मेहता हिंसा का बोलबाला १९६८ १९६७ ५-१० ५-११ १-३ १९८५ १९९२ ८१-९० . १९८० १ १९६२ ६-७ . Page #229 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २२३ पृष्ठ । अंक ई० सन् ११-१२ १९५१ ५७-५९ १९७१ १९७० ३-१२ ८-१२ ७-९ १९९२ १९७७ ९-१३ ३-११ लेख ताजमल बोथरा के मूल में भूल तेज सिंह गौड़ . उज्जयिनी और जैनधर्म - मांडव : एक प्राचीन तीर्थ दयानन्द भार्गव वैदिक साहित्य में जैनपरम्परा समयसार : आचार-मीमांसा दरबारीलाल कोठिया स्याद्वाद और अनेकान्तवाद है जीवन तो संयम ही है दरियावसिंह मेहता 'जिज्ञासु' महावीर और गांधी की जीवन दृष्टि : सत्य की शोध दलसुख मालवणिया १ असंयत जीव का जीना चाहना राग है आगम झूठे हैं क्या ? आचारांगसूत्र ; क्रमशः १९६३ १९६१ १७-२० २१-२४ १९८७ १७-२४ १९५२ १९५६ १९५६ ३-६ ५६-५९ ४-७ Page #230 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में पृष्ठ ७-९ Borroro १० २३-२५ • ~ rm » 32 m2 r orvor Turm or or or ur ई० सन् १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५७ १९५० १९५३ १९५४ १९५१ १९४९ १९५० १९४९ १९५४ आत्महित बनाम परहित उपशमन का आध्यात्मिक पर्व एकान्तपाप और एकान्तपुण्य क्या मैं जैन हूँ ? चातुर्मास जंगम आगम संशोधन मंदिर जैन और हिन्दू जैन साहित्य का इतिहास और इसकी प्रगति ३-६ ३४-३७ ९-१५ २६-२९ २५-२७ ९-११ ३-५ ११-१६ २-१२ २८-३० २८-३२ १६-१७ ३०-३९ Page #231 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २२५ लेख जैन साहित्य का सिंहावलोकन दक्षिण हिन्दुस्तान और जैनधर्म 'धर्म का पुनरुद्धार और संस्कृति का नवनिर्माण निश्चय और व्यवहार : पुण्य और पाप न्याय सम्पन्न विभव पार्श्वनाथ विद्याश्रम-एक सांस्कृतिक अनुष्ठान प्राचीन जैन साहित्य के प्रारम्भिक निष्ठासूत्र बनारस से जैनों का सम्बन्ध * बौद्धधर्म ॐ भक्तिमार्ग का सिंहावलोकन भगवान् महावीर का उपदेश और आधुनिक समाज भगवान् महावीर का मार्ग भगवान् महावीर के गणधर भगवान् महावीर : समता-धर्म के प्ररूपक भगवान् बुद्ध और भगवान् महावीर भौतिकता और अध्यात्म का समन्वय मलधारी अभयदेव और हेमचन्द्राचार्य For r rar rer r rm wwwx » ई० सन् १९५७ १९४९ १९४९ १९७४ १९५० १९४९ १९८८ १९५० १९४९ xxm ~~299 ruri पृष्ठ । ३०-४० १७-१९ ९-१३ ३-१० ९-१२ . ३३-३४ ११-२० १५-१८ १९-२२ ९-१५ १७-२२ २०-२२ १-१० १८-२७ ९-२१ ३-४ १-१० १९५० १९८० १९५४ १९५३ १९७४ १९६४ १९५२ १९५२ re Page #232 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ६-७ ई० सन् १९५१ १९५५ १९५८ १९६१ १९५२ पृष्ठ १५-१८ ५१-५४ ३२-३३ ३५-३९ ७-११ ७-८ १९५९ १७-२३ लेख विद्यामूर्ति पं० सुखलाल जी महावीर भूले __ शॉ का सन्देश मुझे भूल जाओ संथारा आत्महत्या नहीं संन्यासमार्ग और महावीर दिनकर जैनधर्म दिनेशचन्द्र चौबीसा पल्लवनरेश महेन्द्रवर्मन "प्रथम" कृत मत्तविलासप्रहसन में वर्णित-धर्म और समाज ४४ दिलीप सुराणा भगवान् बाहुबलि के प्रति संवत्सरी की सर्वमान्य तारीख दीनानाथ शर्मा उपदेशमाला (धर्मदासगणिकृत) एक समीक्षा दुर्गाशंकर द्विवेदी रोगों का इलाज १-३ १९९३ ३५-४१ १९८३ १९८४ ८-१० १६-२२ १९९१ ९७-१०० ३ १९६२ २९-३२ Page #233 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् २२७ पृष्ठ ५ १९६४ १९६४ १९६४ 3 २२ १८ ११-१५ १९५८ ३०-३४ 3 १९६० २१-२४ लेख मुनि दुलहराज उपदेश विधि के विस्मृत परम्पराएँ सचेल-अचेल दुलीचन्द्र जैन गुरुत्वाकर्षण से परमाणु शक्ति तक देवराज भारतीय दर्शनों की समन्वय परम्परा देवसहाय त्रिवेद बुद्ध और महावीर देवी प्रसाद मिश्र जैन पुराणों में समता देवेन्द्रकुमार जैन अपभ्रंश और देशीतत्त्व अपभ्रंश की पूर्वस्वयंभूयुगीन कविता अपभ्रंश की शोध कहानी अपभ्रंश चरितकाव्य तथा कथाकाव्य १९७९ ३०-३४ - १९७७ १२-१७ ११ १-२ १९७४ १९६६ १९६६ १९७१ ३-८ ५-९ ३-७ ३-१० Page #234 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २२८ लेख अपभ्रंश साहित्य : उपलब्धियाँ और प्रभाव अपने को जानिये आचार्य हेमचन्द्र और उनकी साहित्यिक मान्यताएँ इतिहास की पुनरावृत्ति- यथार्थ दर्शन एक प्रतिक्रिया कवि वीर और उनका जंबूसामिचरिउ क्रांतिदर्शी महावीर 'जी' की आत्मकथा जैन तीर्थंकर और भिल्ल प्रजाति जैन तीर्थंकर और दुःखवाद तीर्थंकर महावीर दशरूपक का एक अपभ्रंश दोहा : कुछ तथ्य पउमचरिउ और रामचरितमानस: एक तुलनात्मक अध्ययन पउमचरिउ में नारी पउमचरिउ परम्परा, संदर्भ और शिल्प पर्युषण : आत्म चिन्तन से सामाजिक चिन्तन की ओर दर्शन और भक्ति : एक थीसिस श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १२ 2 x ma o w ५ १२ ३ १९ २० १६ ८ २३ १६ x ♡ m x 2 m a २४ ३० ३३ २४ २५ २३ १२ अंक १ ३ २ ४ ६ १ ४ ८ १० ७ ४ ६ १२ ११ ई० सन् १९६० १९५३ १९६० १९५१ १९६७ १९६८ १९६४ १९५६ १९७१ १९६४ १९७२ १९७८ १९८१ १९७२ १९७३ १९७१ १९६१ पृष्ठ २१-२५ ३१-३३ २२-२६ ३४-३६ ३५ ८ ९-११ १५-१७ २५-२७ ३-८ २६-२८ १४-१६ २४-२६ ११-१४ २४-२७ ३-७ १५-१७ Page #235 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख देवेन्द्रकुमार शास्त्री पुनीत स्मरण पुष्पदन्त क्या पुष्पभाट थे ? पुष्पदन्त और सूर का कृष्ण लीला-चित्रण पुष्पदन्त का कृष्ण काव्य पुष्पदन्त की रामकथा प्रसाद और तीर्थंकर प्राकृत प्राचीन पांडुलिपियों का संपादन : कुछ प्रश्न और हल ब्राह्मी लिपि और ऋषभनाथ भाषा के कुछ ध्वनि - परिवर्तनों की ध्वनि वैज्ञानिक व्याख्या श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष भगवान् महावीर की जीवन साधना भविसयत्तकहा तथा अपभ्रंश कथाकाव्य कुछ प्रतिस्थापनायें भारतीय आर्यभाषा और अपभ्रंश भारतीय समाज का आध्यात्मिक दर्शन महाकवि पुष्पदन्त और गोम्मटेश्वर बाहुबलि महाकवि पुष्पदन्त की भक्ति चेतना महाकवि स्वयंभू का प्रकृति दर्शन ७ २२ ≈ α 2 m u 2 2 0 3 2 १९ १७ २३ २८ २९ २७ २३ २७ १ ३२-४ २७ २४ अंक १० ११ १-२ १-२ ७ ११ १ ६-७ २ ११ १२ १२ ई० सन् १९५६ १९५६ १९७१ १९६७ १९६५ १९७२ १९७७ १९७८ १९७५ १९५५ १९७१ १९७६ १९५० १९८२ १९७६ १९७३ पृष्ठ २२९ ७-९ ३-५ ३-११ ३-१३ १४-१८ २१-२४ ३-७ १९-२३ २५-२८ ६२-६४ ६-११ ९-१२ २७-२९ १३-१६ ९-१४ ३-५ Page #236 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख महाकवि स्वयंभू और नारी महाकवि स्वयंभू के काव्य विचार मानवमूल्यों की काव्यकथा-भविसयत्तकहा मानव संस्कृति और महावीर # # : 0 : : : : แร मुंनिराम सिंह का उग्रअध्यात्मवाद मूल्यों का संकट और आध्यात्मिकता मैं महावीर को याद क्यों करता हूँ शुभ कामना संस्कृत शब्द और प्राकृत अपभ्रंश समन्वय या सफाई समाज का धर्म साधु समाज और निवृत्ति सिद्धि विनिश्चय और अकलंक स्वयंभू और उनका पउमचरिउ स्वयंभू का कृष्णकाव्य और सूरकाव्य के अध्ययन की समस्याएँ स्वयंभू की गणधर परम्परा My 2 ye vvv x vrrrr - 9 ई० सन् १९७५ १९७३ १९६८ १९५६ १९६० १९६८ १९६५ १९६३ १९५४ १९७७ १९५२ १९६० १९५१ १९५३ १९७३ १९७९ १९७३ पृष्ठ ३-७ २५-२७ ५-९ २२-२५ २१-२३ १२-२२ २०-२३ ३१-३३ ३१-३३ १८-२० ७-१० २१-२३ ९-१२ ३१-३२ ३-१३ ३३-३५ ३७ * * * , * * * Page #237 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख श्रद्धा का क्षेत्र श्रमण संस्कृति की मूल संवेदना श्री तारण स्वामी श्रीपालचरित की कथा सिरिपालचरिउ : एक मूल्यांकन सिरिपालचरिउ : संदर्भ और शिल्प हम सौ वर्ष जी सकते हैं ? हेमचन्द्र और भारतीय काव्यालोचना अध्यात्मवाद : एक अध्ययन अपभ्रंश जैन साहित्य • 6 o or an ovor o amourn or dar ई० सन् १९५२ १९७२ १९५० १९७१ १९७१ १९६९ १९५५ १९६६ १९६७ १९७१ १९७१ १९६७ १९६८ १९७८ १९७२ १९६५ १९७१ २३१ पृष्ठ ९-१२ १६-१७ २९-३२ ३-७ ३-७ ५-१४ ३१-३३ २-७ ५४-६४ १२-१७ १८-१२ ७-१२ ५-१४ ३-११ ३-९ २६-३२ १०-१६ अक्षय तृतीया : एक चिन्तन आचार्य सिद्धसेन दिवाकर की साहित्य साधना उत्तराध्ययन : नामकरण व कर्तृत्व कर्मयोगी कृष्ण के आगामी भव ज्योतिर्धर महावीर जैन कृष्ण साहित्य Page #238 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में • สี : ตะ : जैन, बौद्ध और वैदिक साहित्य-एक तुलनात्मक अध्ययन जैन संस्कृति और राजनीति जैन संस्कृति का विस्तार ' दर्शन और धर्म पुनर्जन्म सिद्धान्त की व्यापकता प्रमाणवाद : एक पर्यवेक्षण पृष्ठ १४-१९ १-२८ २४-३१ ३१-३७ ३-७ ३-१० ३-१३ a soxa x w g * * * * * * * * ई० सन् १९७१ १९८१ १९६८ १९६७ १९६५ १९७३ १९७४ १९७४ १९७४ १९७१ १९७१ १९७२ १९७१ १९७४ १९७६ १९७६ १९७६ ७-१८ o प्राकृत जैन कथा साहित्य १३-२२ ३-१० १६-२१ भगवान् अरिष्टनेमि और कर्मयोगी कृष्ण भगवान् अरिष्टनेमि की ऐतिहासिकता भगवान् महावीर के युग का जैन सम्राट महाराजा चेटक भारतीय चिन्तन में मोक्ष और मोक्षमार्ग * * * w ar gara or or १३-१८ २०-२४ ३-१० ३-७ * * * ३-८ Page #239 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख भारतीय संस्कृति की अन्तरात्मा भारतीय संस्कृति में दान का महत्त्व "" भारतीय साहित्य और आयुर्वेद महावीर और उनके सिद्धान्त युगपुरुष आचार्य सम्राट आनन्द ऋषि जी म० सेवा स्याद्वाद संस्कृति का स्वरूप पं० सुखलाल जी - एक संस्मरण : एक विश्लेषण एक परिशीलन " "A श्रमण संस्कृति का सार श्रमण संस्कृति की प्राचीनता धनंजय मिश्र आचार्य हरिभद्र का योगदर्शन श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ३८ २० २० १८ २४ ४३ १५ ३२ 2 2 2 १८ २० २० २० २० २१ ४१ अंक xw s ६ ७ १० १-३ १२ ५ १-२ १० no f no no no ११ १२ १२ ७-९ ई० सन् १९८७ १९६९ १९६९ १९६७ १९७३ १९९२ १९६४ १९८२ १९६६ १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९७० १९९० २३३ पृष्ठ ६-८ ८-१६ १०-२० २०-२३ ३-८ १०३-१०५ ३३-३४ २८-३२ २६-४२ १५-२० ८-१५ १३-२१ ८-१७ ३-१२ ३५-४४ Page #240 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २३४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् पृष्ठ os १९५४ १९५३ २१-२६ १३-१६ धनदेव कुमार 'सुमन' ऐसा क्यों? के जैन शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा धनपति डंकलिया प्रज्ञाचक्षु पं० सुखलाल संघवी धनीराम अवस्थी संस्कृत काव्यशास्त्र के विकास में प्राकृत की भूमिका धन्यकुमार राजेश क्या रामकथा का वर्तमान रुप कल्पित है a १९५६ ३७-३९ s ३७५ १९८५ २-९ जैन आचारशास्त्र की गतिशीलता का समाजशास्त्रीय अध्ययन जैन और वैदिक साहित्य में पराविद्या जैन परम्परा में ध्यान योग जैन पुराणों में पुनर्जन्म की कथायें avar 5 w 5 w x our १९६९ १९७० १९७० १९७० १९७० १९७३ १९७१ १९७१ १९७० १९७१ १०-१९ १८-२७ ३-१२ ५-१५ ९-१६ २३-३१ १०-१५ ५-१७ ३-१३ १४-२१ जैन पौराणिक साहित्य में युद्ध पौराणिक साहित्य में राजनीति महावीर निर्वाण सम्वत् में शताब्दियों की भूल Page #241 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख मोक्ष मीमांसा में जैन दर्शन का योगदान श्रमण और वैदिक साहित्य में स्वर्ग और नरक ॐ श्रीकृष्ण : एक समीक्षात्मक अध्ययन ई० सन् १९६९ १९७२ १९६९ १९६९ १९७० २३५ पृष्ठ ३-९ ३-९ २७-३४ २६-३१ ३-१३ ९ १९५४ १२-१८ १०-१२ १० १९९२ १९८३ २१-४० २५-२९ हरिवंशपुराणकालीन समाज और संस्कृति भिक्षु धर्मरक्षित बौद्ध धर्म का छठां संगायन धर्मचन्द्र जैन जैन एवं बौद्ध दर्शन में प्रमाण-विवेचन ( जैन स्रोतों में नवधा भक्ति धर्मचन्द 'मुखर' भगवान् महावीर-जीवन और सिद्धांत दादा धर्माधिकारी जीवन का सही दृष्टिकोण सर्वोदयः गाँधी का मार्ग धर्मेन्द्रकुमार कांकरिया भावनाओं का जीवन पर प्रभाव १९५५ ___३६-४० ی ک १९६० १९५९ ९-११ १७-१९ ک ९ مو १९५७ २५-२६ Page #242 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ ७ १९५० ३४-३६ ८ १९५१ ९-१२ ७-९ १०-१२ १९९६ १९९५ ४४-४८ ४२-४३ लेख धीरजलाल टोकरशी शाह • ईर्यापथ-प्रतिक्रमण धीरेन्द्र वर्मा खोज सम्बन्धी कुछ अनुभव और समस्यायें धूपनाथ प्रसाद ॐ त्रिरत्न, सर्वोदय और सम्पूर्ण क्रान्ति कालचक्र नगराज जी अनेकान्त दर्शन भगवान् महावीर की तलस्पर्शिनी अहिंसा-दृष्टि भगवान् महावीर के आदर्श और यथार्थ की पृष्ठ भूमि महावीर और बुद्ध : कैवल्य और बोधि विद्यावारिधि एवं प्रज्ञापुत्र संवत्सरी महापर्व : स्वरूप और अपेक्षाएँ नगेन्द्र राष्ट्रीय एकता और साहित्य ____mor ur 93 4 ९-१४ २-४ २०-२२ १९८९ १९८६ . १९८४ १९६७ १९८२ १९८२ १६ १९८५ २०-२५ 5 Page #243 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २३७ लेख अंक ई० सन् पृष्ठ ७-८ १९६९ १९६७ १९६२ १९६१ १९६१ १९६० - २६-३३ २०-२३ २१-२३ २८-३० १५-१९ २९-३१ ६-७ ४ मुनिश्री नथमल जी कृतिकर्म के बारह प्रकार जैन धर्म में सामाजिक प्रवृत्ति की प्रेरणा जैन शासन तेजस्वी कैसे बने ? ध्यान योगी महावीर शब्दों की शवपूजा न हो संघटन या विघटन नंदलाल जैन अललित जैन साहित्य का अनुवाद : कुछ समस्याएँ कर्म और कर्म बन्ध ॐ श्रोतेन्द्रिय की प्राप्यकारिता : एक समीक्षा नंदलाल मारू अद्धमागहाए भाषाए भासंति अरिहा अहिंसा : एक : विश्लेषण अहिंसा का जैन दृष्टि से विश्लेषण है क्या लोंकाशाह विद्वान् नहीं थे ? क्या स्त्रियाँ तीर्थंकर के सामने बैठती नहीं ? नई पीढ़ी और धर्म १०-१२ १९८१ १९९४ १९८२ २१-२६ १०-२२ २५-३२ १९७३ १९६७ १९६७ १९६६ १९७३ १९६८ १३-१५ ३३-३७ ११-१४ ७८-८० २७-३० ३५-३८ Page #244 -------------------------------------------------------------------------- ________________ . ई० सन् १९७४ १९६७ १९६८ पृष्ठ ३२-३५ ३२-३६ ३२-३४ २३८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख पच्चीसवीं निर्वाण-शताब्दी के आयोजनों में आगम-वाचना भी हो भगवान् महावीर की २५वीं निर्वाणशती कैसे मनायें ? समवायांगसूत्र में विसंगति मुनिश्री नन्दीषेण विजय जैनधर्म का दृष्टिकोण नृपराज शादीलाल जैन भारत जैन महामण्डल के ४५वें अधिवेशन पर अध्यक्षीय भाषण नरेन्द्रकुमार जैन जैन तथा अन्य भारतीय दर्शनों में सर्वज्ञता विचार १९६३ १९-२१ . १९८६ २१-२८ . भगवान महावीर की अहिंसा विश्वशांति का आचार गाँधीवाद समन्तभद्र द्वारा क्षणिकवाद की समीक्षा १९७९ १९७९ १९६४ १९५४ १९७८ १९७८ ३-१३ ३-१० २४-२६ ३७-४० ११-२२ १७-२५ . . १९५२ . ११-१२ नरेन्द्र गुप्त गांधी जी की दृष्टि में अहिंसा का अर्थ नरेशचंद्र जैन भगवान् महावीर और वर्तमान युग १९५३ ३५-३६ Page #245 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २३९ अंक ई० सन् १९६८ १९६८ पृष्ठ ३-१५ १-४ . . १९८५ २२-२६ . १९८१ १९८८ २-५ २५-२९ लेख भगवान् महावीर का जन्म स्थान वर्धमान : चिन्तन खण्ड ॐ नरेन्द्र बहादुर परम तत्त्व : आचार्य विनोबा भावे की दृष्टि में नरेन्द्र भानावत र पर्युषण : आत्म संक्रान्ति का अद्वितीय अध्याय 'भावात्मक एकता, प्रकृति और जीवन का सत्य नवरत्न कपूर नौ का अंक ॐ प्राच्यभारती का अधिवेशन भीगी अंखियाँ सन् १९६१ मुनिश्री न्याय विजयजी समस्त जैन संघ को नम्र विज्ञप्ति नामवर सिंह है संस्कृति क्या है? नारायण हेमनदास सम्तानी २६वाँ प्राच्यविद्या विश्व-सम्मेलन १९६१ १९६३ १९६० १९६१ ९-१६ २६-३० २७-३० ६-७ . . . १९६६ ३४-३९ १२ १९६१ ३४-३९ . १९६४ ३-८ Page #246 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४० श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ १९५९ १३-१८ १९८२ १९८१ १९८३ ३-७ १९-२५ १०-१३ १९८९ २१-२५ लेख निकिता खुश्चेव युद्ध और उसके साधनों को खत्म करो निजामुद्दीन जैनधर्म-एक सम्प्रदायातीत धर्म जैनधर्म की प्रासंगिकता भगवान् महावीर और विश्व शांति पंन्यास नित्यानन्द विजय विश्व चेतना के मनस्वी सन्त विजयवल्लभ मुनिश्री निर्मल कुमार आहार शुद्धि के लिए क्या करें ? निर्मल कुमार जैन संघर्ष करना होगा निर्मला प्रीतिप्रेम ईसाइयों का महापर्व - क्रिसमस वर्मा में होली का त्यौहार नेमिचंद्र जैन पर्युषण : संभावनाओं की खोज १९६० १९-२० १९५४ १९-२३ १९५५ १९५५ १२-१६ ३०-३२ १९७९ ३-७ Page #247 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख नेमिचंद्र जैन समयसार सप्तदशांगी टीका : एक साहित्यिक मूल्यांकन सिद्धक्षेत्र बावनगजा जी नेमिचंद्र शास्त्री व्रत का मूल्य मुनि नेमिचंद्र जैन सिद्धान्तों का समाजव्यापी प्रयोग धर्म : मेरी दृष्टि में धार्मिक एकता धर्ममय पर्युषण और सामाजिक शुद्धि समाज रचना की आधारशिला : क्षमापना " भगवान् महावीर और धर्मक्रांति भगवान् महावीर और समता का आचरण भगवान् महावीर सामाजिक और आर्थिक क्रांति के जनक लोक शिक्षण के गुण व योग्यताएँ विकास के नये पहाड़े सीखिए शुद्धि प्रयोग की झांकी श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २९ ३७ १३ १८ १८ १५ १३ १२ ४० १४ १५ १० १२ ८ १४ अंक १० m १२ ४ ४ ५-६ ११ ११ ११ १० or or or ava १ १० ११ १० ई० सन् १९७८ १९८६ १९६२ १९६७ १९६७ १९६४ १९६२ १९६१ १९८९ १९६३ १९६४ १९५८ १९६१ १९५७ १९६३ पृष्ठ ३-८ २-४ २४१ २९-३४ २६-३० २४-२८ ६५-६८ ३२-३६ १९-२२ ६-१० २१-२५ ३०-३४ ९-१२ २४-२५ २०-२३ ५-८ Page #248 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४२ लेख >> साधु संस्था और लोकशिक्षण श्रमणों का युगधर्म हर क्षेत्र में अनेकान्तवाद का प्रयोग हो क्षमापना नेमिशरण मित्तल ग्रामदान से ग्राम-स्वराज्य मानवसाध्य है या साधन श्राप क्या ? वरदान क्या ? प्रकाशचन्द जैन आदीश जिन प्रकाश मुनि जी जीवन विकास की प्रेरणा : सहयोग संयममूर्ति गुरुदेव प्रकाश मेहता सिर्फ फैशन की खातिर श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १५ १२ १२ १० १३ १० ११ १२ २८ १२ १४ ३३ अंक ४ om w ov ९ ३ ६ ११ ५ ९ ५ ४ ११-१२ २ ई० सन् १९६४ १९६१ १९६१ १९५९ १९६२ १९५९ १९६० १९६१ १९७७ १९६१ १९६३ १९८१ पृष्ठ ९-१३ ३५-४० ८-९ २४-२८ ३२-३६ २०-२४ ९-११ १३-१४ ३-८ ३६-३८ ४८-४९ २३-२४ Page #249 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २४३ अंक ई० सन् पृष्ठ १०-१२ १९८३ १९९५ १९८८ २-९ ३४-४१ १८-२० ४-६ १९९१ ४४-६२ १९६३ २२-२३ लेख प्रतिभा जैन अनेकांतवाद के समकालीन जैन समाज में नारी हिन्दू तथा जैन राजनैतिक आदर्शों का समीक्षात्मक अध्ययन प्रतिभा त्रिपाठी ऋग्वेद में अहिंसा के सन्दर्भ प्रीतेशचन्द्र जैन क्या आप स्वीकार करेंगे प्रद्युम्नकुमार जैन क्या जैनधर्म रहस्यवादी है ? प्रभाकर गुप्त धर्म निरपेक्ष या ईश्वर निरपेक्ष प्रभुदास बालूभाई पटवारी बाल संन्यास दीक्षा प्रतिबन्धक बिल उचित है प्रमिला पाण्डेय जैनदर्शन में कर्मवाद की अवधारणा जैन धर्म में भक्ति का स्थान १९७७ ११-१७ १९५७ ४-८ १९५६ १८-२३ १९७२ १९७२ २२-२७ २८-३३ Page #250 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४४ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक . ई० सन् पृष्ठ १९७४ १९७५ ३-९ १४-२० १९९२ ६९-७९ लेख प्रमोद कुमार जैन कर्म-सिद्धान्त जैन दर्शन में मोक्ष का स्वरूप साध्वी (डॉ०) प्रमोद कुमारी ऋषिभाषित का सामाजिक दर्शन प्रमोदमोहन पाण्डेय आगमों में राजा एवं राजनीति पर स्त्रियों का प्रभाव प्राचीन भारत में अपराध और दंड प्रवासी धर्म करते पाप तो होता ही है वे आपको कितना चाहते हैं ? प्रवीण ऋषि जी शान्ति की खोज में प्रवेश भारद्वाज प्रबन्धकोश का ऐतिहासिक वैभव साध्वी प्रियदर्शना जी जैन साधना पद्धति में ध्यान योग १९७३ १९७३ ३-८ १७-२१ १९५२ १९५९ ३५-३७ १५-१७ १९८१ १७-१९ १९९० ८९-१०० १९८६ १८-२७ Page #251 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४५ अंक ई० सन् पृष्ठ १९५५ १७ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख प्रिंस क्रोपाटकिन जिन्दगी किसे कहते हैं ? प्रेमकुमार अग्रवाल जैन एवं न्याय दर्शन में कर्म सिद्धान्त न जैन दर्शन में अहिंसा जैन दर्शन में योग का प्रत्यय जैन धर्म में उपासना जैन धर्म में शक्तिपूजा का स्वरूप जैन मूर्तियों का क्रमिक विकास जैनेतर दर्शनों में अहिंसा है श्रमण संस्कृति में मोक्ष की अवधारणा प्रेमकुमारी दिवाकर नारी जागरण विवाह और कन्या का अधिकार प्रेमचंद जैन है अपभ्रंश कथाकाव्यों का हिन्दी प्रेमाख्यानों के शिल्प पर प्रभाव नों के शिल्प पर प्रभाव १९ जैन रासरासक - परिभाषा, विकास और काव्यरूप १९७२ १९७१ १९७३ १९७१ १९७१ १९७२ १९७१ १२-१९ १३-२२ ८-१२ १२-१७ ९-१२ १८-२१ २०-२८ १९७२ ३-९ १९५१ १९५१ २६-३१ २५-३० १ २ १९६० १९७० ४३-५३ ३-९ Page #252 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् पृष्ठ ११-१२ १० प्रेमचन्द्र जी महाराज चरणारविन्द में पुराण बनाम कथा साहित्य : एक प्रश्न चिन्ह भारतीय प्रतीक परम्परा में जैन साहित्य का योगदान मुनिराम सिंह कृत 'पाहुडदोहा' एक-अध्ययन मूलाचार रहस्यवादी जैन अपभ्रंशकाव्य का हिन्दी साहित्य पर प्रभाव 3ur m १९६३ १९७० १९७० १९६७ १९७० १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९७९ ९१-९३ १३-१९ ३२-३७ २-९ १८-२४ २६-३१ १२-१७ १२-१७ १५-१९ ८-१९ " 9 9 समाज में महिलाओं की उपेक्षा एक विचारणीय विषय प्रेमचन्द रांवका कालिदास के काव्यों में अहिंसा और जैनत्व हिन्दी काव्यों में महावीर प्रेमजी संसार की चार उपमाएँ १९७६ १९७५ २३-२६ १४-२० 3 १९५६ १३-१४ Page #253 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख प्रेमलता गुप्त घृणा, प्रेम और स्वास्थ्य प्रेमलता जैन पुष्पदन्त का कृष्ण काव्य : एक अनुशीलन "" पुष्पदन्त की रामकथा की विशेषताएँ प्रेमसुमन जैन आचार्य हरिभद्रसूरि : प्राकृत के एक सशक्त रचनाकार कुवलयमालाकहा का कथा-स्थापत्य-संयोजन कुवलयमालाकहा में उल्लिखित कडंग, चन्द्र और तारद्वीप जैन भौगोलिक स्थानों की पहचान जैन संस्कृति और परिवार व्यवस्था पश्चिम भारत का जैन संस्कृत साहित्य को योगदान महाकवि स्वयंभू और तुलसीदास पृथ्वीराज जैन आचार्य कालक और 'हंसमयूर' तलाक नारी और त्याग मार्ग श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष 222 २७ २७ २८ १८ 2 2 m x 2 & L १८ २३ ३४ १७ २४ १८ WWW २ २ अंक ४ ४ ५. १ १२ १० ८ ७ १-२ ९ १ 22 m ३ ई० सन् १९५८ १९७६ १९७६ १९७६ १९६७ १९६७ १९७२ १९८३ १९६५ १९७३ १९६७ १९५० १९५० १९५१ पृष्ठ २ २४७ ३-९ ३-९ ५-१२ १९-२६ ३-८ १३-१८ ६-११ ३८-५१ ३-१६ ३-१४ ३९-४० २९-३४ १४-२० Page #254 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २४८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख पृष्ठ २७-३० २६-३० नैतिक उत्थान और शिक्षण संस्थायें भगवान् महावीर की धर्म-क्रांति भगवान् महावीर और जातिभेद मानव जीवन का आधार युगपुरुष भगवान् महावीर श्रमण संस्कृति और नया संविधान श्री आत्मारामजी और हिन्दी भाषा साम्प्रदायिक कदाग्रह साम्यवाद और श्रमण विचारधारा हजरत मुहम्मद और इस्लाम प्यारेलाल श्रीमाल ख्याल का भविष्य जैनगीतों की परम्परा जैनधर्म और युवावर्ग जैन पदों में रागों का प्रयोग जैन वांगमय का संगीत पक्ष समाज का कोढ़-जिम्मनवार 15 or w w w w 5 or rou tomu or on or or o or as ar ई० सन् १९५२ १९५७ १९५० १९५० १९५१ १९५० १९५४ १९४९ १९४९ १९५० २५-२७ २४-२७ ९-१५ ११-१५ २७-३० २२-२७ २५-३१ ry mo or a & ann an or १९६२ १९५९ १९८३ १९७२ १९७९ १९५९ • २९-३३ ९-११ ३५-३९ ११-१४ २५-२७ १९-२२ Page #255 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख मुनिश्री पद्मचन्द्र जी शास्त्री कृपालु गुरुदेव जीवन की सच्ची क्रान्ति पद्मनाभ जैनी स्वामी समन्तभद्र जी पन्नालाल धर्मालंकार जैन समाज और वैशाली जैन परमेष्ठीदास आचारांग का दार्शनिक पक्ष आचारांग में समाज और संस्कृति पारसमल 'प्रसून' आत्म निरीक्षण आधुनिक विज्ञान, ध्यान एवं सामायिक क्षमा शांति के ये सुशीतल स्रोत पीटर फ्रीमैन कौन भूखे मरेंगे पी० एल० ० वैद्य असाम्प्रदायिक जैन साहित्य श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष x १४ १३ m ३ ३८ ३८ १८ ४७ १५ ६ ४ अंक ११-१२ १९६३ १९६२ ४ ३ ७-८ १२ sy ov ११ ५ ७-९ ११ २ ई० सन् ७-८ १९५२ १९५२ १९८७ १९८७ १९६७ १९९६ १९६४ १९५४ १९५३ पृष्ठ २४९ ३०-३२ २५-२७ १७-२३ ३६-३८ १-११ २०-३२ ९-१० ३४-४३ २७-२८ १४-१७ ७-२४ Page #256 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ई० सन् पृष्ठ १९५० ३३-३५ - १९९३ २८-३४ २५० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख पी० एस० कुमारस्वामी राजा जैनधर्म की देन पुखराज भण्डारी डॉ० ईश्वरदयाल कृत “जैन निर्वाण : परम्परा और परिवृत्त' लेख में आत्मा की ' माप-जोख शीर्षक के अन्तर्गत उठाये गये प्रश्नों के उत्तर मुनिश्री पुण्यविजय जी * उत्सर्ग और अपवाद जैन ज्ञान भण्डारों पर एक दृष्टिपात जैसलमेर भण्डार का उद्धार निर्ग्रन्थ-निर्ग्रन्थी संघ पूनमचन्द मुणोत जैन भगवान् महावीर का आदर्श जीवन पुष्पमित्र जैन जैन संस्कृति के प्रतीक-मौर्यकालीन अभिलेख पुष्पा अपरिग्रह ही क्यों? १९६६ १९५३ १९५३ १९६६ ३०-३३ १-७ ६३-७० ३२-३७ - १९८५ २२-२३ - १९७३ १७-२५ - - १९५९ १९५५ १०-११ २४-३६ मानव Page #257 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष ____ अंक ई० सन् २५१ पृष्ठ । श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख फूलचन्द जैन 'प्रेमी' आचारांग के शस्त्र परिज्ञा अध्ययन में प्रतिपादित षट् जीवनिकाय सम्बन्धी अहिंसा ३९ के कुरल काव्य मूलाचार में मुनि की आहार-चर्या फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री क्या धन-सम्पत्ति आदि कर्म के फल हैं जैनधर्म और वर्ण व्यवस्था rar १९८८ १९७१ १९७५ ८-१५ २४-२९ ३-१३ rr 9, " १९५१ १९५१ १९५१ १९६२ १९५३ १९५० am w room or w w w og ३८-३९ १५-२३ २०-२६ ६-८ ३५-३८ ३३-३४ जैनधर्म में एकान्त नियतिवाद और सम्यक् नियति का भेद जैन पुराण साहित्य संस्कृति का अर्थ फूलचंदजी 'श्रमण' धर्म पुरुष और कर्म पुरुष पर्युषण पर्व की आराधना भद्रबाहु का कालमान शास्त्रीय पैमाने श्रमण भगवान् महावीर की शिष्य संपदा 2 १९५५ १९५५ १९५४ १९५४ १९५५ २१-२२ १४-१६ ६-८ २५-२८ ~ ___३० ~ Page #258 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ | १० १९५९ ३२-३५ १९५१ ३१-३४ १९७९ १८-२२ २५२ लेख बद्रीप्रसाद स्वामी नया विहान-नया समाज • बरट्रेन्ड रसल अतीत धर्म और साधु संस्था गा बृजकिशोर पाण्डेय आधुनिक सन्दर्भ में जैन दर्शन बृजनन्दन मिश्र तपोधन महावीर पंचयाम धर्म : एक पर्यवेक्षण ब्रजनारायण शर्मा प्राणातिपात विरमण : अहिंसा की उपादेयता बृजेश कुमारी घरों में बच्चे बलवन्तसिंह मेहता परम्परागत पावा ही भगवान् महावीर की निर्वाण भूमि बंशीधर पर्युषण पर्व का मतलब ६-७ १९६१ ५६-५७ २०-२३ १९६४ १९८७ ६-१५ १९५७ ५४-६० १९७२ २१-३० १९६१ १३-१४ Page #259 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में। २५३ पृष्ठ ई० सन् १९८९ १९६२ १९६० ४-५ १९-२० १७-२० महावीर जयन्ती का अर्थ सभ्यता का संघर्ष बशिष्ठनारायण सिन्हा अन्तरालगति अहिंसा : एक विश्लेषण आचार्य कुन्दकुन्द और उनका साहित्य जीवन धर्म जैनधर्म की प्राचीनता -क्रमशः far - Tworm w 9 1 9m org १९७७ १९६६ १९६७ १९६८ १९६० १९६९ १९६९ १९६९ १९६९ १९६८ १९८२ १९८१ १९६० १९६६ ८-१३ ७३-७७ १०-१५ १५-२१ २३-२६ २२-२९ २७-३२ १९-२७ २३-२७ १८-२२ १-२४ १-३४ २१-२४ ३२-३६ जैन धर्मानुसार जीव,प्राण और हिंसा जैन दर्शन में प्रत्यक्ष का स्वरूप (विशेष शोध निबन्ध) जैन दर्शन में प्रमाण (विशेष शोधनिबन्ध) जैन व्याख्या और विचार जैन समाज व्यवस्था Page #260 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २५४ लेख भगवान् महावीर का ईश्वरवाद भगवान् महावीर का समन्वयवाद भारतीय दर्शनों में आत्मा महाभारत का आचार दर्शन मल्लिषेण और उनकी स्याद्वादमञ्जरी विवाह - भारतीयेतर परम्परायें - क्रमशः "" सर्वोदय और हृदयपरिवर्तन बसन्तकुमार चट्टोपाध्याय श्रमण संस्कृति के मौलिक उपादान मुनि बसन्तविजय भगवान् महावीर की देन बालचन्द सिद्धान्तशास्त्री सावयपण्णति: एक तुलनात्मक अध्ययन - क्रमशः " "" "" "" श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २६ १० १० १४ २६ १६ १६ १० ९ १५ or or or or o २१ २१ २१ २१ २१ अंक १० ७-८ ४ १ ६ ८ ९ ४ १० १ or x Mm x 5 २ ३ ४ ५ ई० सन् १९७५ १९५९ १९५९ १९६२ १९७५ १९६५ १९६५ १९५९ १९५८ १९६४ १९६९ १९६९ १९७० १९७० १९७० पृष्ठ ९-१२ ४६-५० १९-२६ २७-३६ ३-६ २४-३२ १९-२८ ३२-३४ ९-२१ ३७-४० ५-१२ ५-११ ५-१३ २२-२८ २४-२९ Page #261 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में M ई० सन् १९७० १९६५ २५५ पृष्ठ । २०-२७ ३-७ १९८२ Fry - 22 ७-८ MM है १९८१ ८-१० १९७४ १४-१८ श्रावकप्रज्ञप्ति के रचयिता कौन ? के बीना निर्मल धर्म और युवा पीढ़ी ना बी० सी०जैन तीर्थंकर बुद्धमल्ल जी मुनि पुद्गल : एक विवेचन बूलचन्द जैन विश्व अहिंसा संघ और प्रवृत्तियां है बेचरदास दोशी अंग ग्रंथों का बाह्य रूप अनन्य साथी का वियोग अब कहाँ तक अस्पृश्यता और जैन धर्म आगमों के सम्पादन में कुछ विचार योग्य प्रश्न आचारांग में उल्लेखित ‘परमत' १९६३ ६-८ १९६४ १५-२२ 3 My ur » 2 १९८१ १९५५ १९५५ १९५३ १९६६ ८-१४ ३४-३८ २५-२९ २१-२४ " Page #262 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २५६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख आध्यात्मिक खोज आर्षप्राकृत का व्याकरण पृष्ठ १३-१५ १९-३६ १२-१४ २९-३१ " क्रांतिकारी महावीर जीव और जगत् जीवन दृष्टि जैन त्यागी वर्ग के सामने एक विकट समस्या जैन धर्म विषयक भ्रातियां जैन संस्कृति और मिथ्यात्व डॉ० नेमिचन्द्र जी शास्त्री और 'अरिहा' शब्द तप क्या है ? नालन्दा या नागलन्दा पुलिस भारतीय वाङ्गमय में प्राकृत भाषा का महत्त्व महाराष्ट्री प्राकृत “: : : : : : : : : ง 3 6 : ई० सन् १९६० १९६६ १९६६ १९६७ १९६७ १९६१ १९६० १९६० १९५९ १९५७ १९५४ १९६९ १९६७ १९७४ १९६७ १९६८ १९६८ ४१-४४ १३-१५ १८-२० ४०-४५ १९-२७ ४० ३२-३६ १४-१९ ११-१३ ७-८ ६-१६ ५.८ : : Page #263 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख रूढ़िच्छेदक महावीर रोटी शब्द की चर्चा वनस्पति विज्ञान विश्व विज्ञान वैदिक परम्परा का प्रभाव स्थानांग और समवायांग "" श्रमण भगवान् महावीर "" मदनलाल जी महाराज बैजनाथ शर्मा मानव और शांति भगतराम जैन हरिजन मंदिर प्रवेश भग्न हृदय दान की आत्मकथा भगवानदास केसरी भगवान् महावीर की जन्मभूमि श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ३ १८ १२ १२ १२ १५ १५ २३ २६ १४ ५ ७ ९ ४ अंक ६ ९ ♡ m ३ २ ४ ९ १० ११ १-२ ११-१२ ११ ६-७ ११-१२ २ ई० सन् १९५२ १९६७ १९६१ १९६० १९६१ १९६४ १९६४ १९७२ १९७४ १९६३ १९५४ १९५६ १९५८ १९५२ २५७ पृष्ठ ३२-३७ १५-१९ १०-११ १६-१९ ९-१४ २-६ २-८ ३-९ १०- १७ ६५-६६ ३१-३२ ५८-६१ ३३-३६ २८-३५ Page #264 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २५८ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ लेख भगवानदीन जी अपने को पहचानिये १-६ २६-२९ २२-२४ जवाहर और विनोबा : दो धाराएँ पंडित कौन ? ममता समाजोन्नति सोपान के ग्यारह डंडे (क्रमश:) १-४ 22 - NATrt १९८१ १९६३ १९५८ १९८१ १९८१ १९५७ १९५७ १९६३ ३-४ १०-१५ ३५-४० १८-१९ १९५४ ३१-३४ होली भगवानलाल मांकड़ जीवन रहस्य भरतसिंह उपाध्याय निगण्ठनातपुत्त मानवता के दो अखंड प्रहरी भ्रमर कुमार पक्ष से ऊपर उठकर सोचें महामानव महावीर २१-२३ १४-२० १९६० ३ १९५९ १९६१ २७-३० ५०-५१ Page #265 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ई० सन् २५९ पृष्ठ ३३-३५ ३५-३७ १९५९ १९५५ १९५८ ९-१२ १९८९ भ्रमर जी सोनी उपजीवी समाज भंवरमल सिंघी जैन एकता मैं मुक्ति चाहता हूँ सार्वजनिक जीवन की शव परीक्षा भंवरलाल नाहटा आनन्दघन जी खरतरगच्छ में दीक्षित थे ओसवाल और पार्थापत्य सम्बन्धों पर टिप्पणी कल्पप्रदीप में उल्लिखित 'खेड़ा' गुजरात का नहीं राजस्थान का है कवि छल्ल कृत अरडकमल का चार भाषाओं में वर्णन चण्डकौशिक उपसर्ग स्थान योगीपहाड़ी थुल्लवंश की एक अपूर्ण प्रशस्ति पश्चाताप पश्चाताप : एक विवेचन मंगल कलश कथा महोपाध्याय समयसुन्दररचित कथा-कोश राजस्थानी एवं हिन्दी जैन साहित्य & ะ ะ : 5ะะะะะะะ १९८९ १९८९ १९९२ १९७१ २-१२ ८-१३ २५-२८ ५३-५८ ५-८ २१-१५ २३-२४ २२-२४ २६-३४ २४-२७ २-४ १९८८ १९८८ १९६८ १९७६ १९८८ Page #266 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६० लेख संप्रतिकालीन आहाड़ के मंदिर का जीर्णोद्वार - स्तवन सूडा सहेली की प्रेमकथा भाई लाल जैन अलबर्ट स्वीट्जर भागचन्द जैन जीवन संग्राम बौद्ध एवं जैन अहिंसा का तुलनात्मक अध्ययन भगवान् महावीर के समसामयिक आचार्य महाकवि हस्तिमल्ल विदेशों में जैन साहित्य : अध्ययन और अनुसंधान श्रमण संस्कृति में अहिंसा के प्राचीन संदर्भ " श्रमण-साहित्य में वर्णित विविध सम्प्रदाय भारती कुमारी प्रद्युम्नचरित में प्रयुक्त छन्द- एक अध्ययन भिखारीराम यादव जैन तर्क शास्त्र के सप्तभंगी नय की आगमिक व्याख्या जैन दर्शन में अनेकान्तवाद का स्वरूप श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २९ ४२ ८ ९ ३२ १४ ११ ३३ २१ २१ २६ ४८ ३९ ३२ अंक ४ ७-१२ ९ m ९ ७-८ ६ ७ 970 ८ ८ ७-९ १० १० a ई० सन् १९७८ १९९१ १९५७ १९५८ १९८१ १९६३ १९६३ १९८२ १९७० १९७० १९७५ १९९७ १९८८ १९८१ पृष्ठ २३-३० २५-३४ ८-११ २६-२७ १-१६ ९-१६ ४७-४९ १६-२८ ३-९ १०-१७ ३-१३ ६८-८० १-२६ १-९ Page #267 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में imur ई० सन् १९८२ १९८२ २६१ पृष्ठ । ३३-३८ - ३४-३६ - १९७९ ३५ १९५३ ३०-३४ १९७८ ३-११ लेख स्याद्वादः एक भाषायी पद्धति ज्ञान-प्रमाण्य और जैन दर्शन भुजबलि शास्त्री भारत का सर्व प्राचीन संवत् भूपराज जैन महावीर और क्षमा भूपसिंह राजपूत ज्योतिशास्त्र और सन्मति वर्धमान महावीर भूरचन्द जैन उपरीयाली का विख्यात् जैनतीर्थ ऐतिहासिक जैन तीर्थ नांदिया कुम्भारिया जैनतीर्थ चित्तौड़ का जैन कीर्तिस्तम्भ जैन तीर्थ राता महावीर जी जैनतीर्थ शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन रक्षापर्वः वात्सल्य पूर्णिमा धार्मिक एवं पर्यटन स्थल : गिरनार पालनपुर का प्राचीन प्रहलविया जैन मन्दिर » or m vrs १९८१ १९७७ १९७७ १९७७ १९७६ १९७८ १९७८ १९७९ १९७८ २६-२८ २७-२९ २५-२८ ३४-३५ २६-२८ २५-२९ १९-२२ २६-२९ २४-२७ Page #268 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६२ लेख प्राचीन ऐतिहासिक नगरी : जूना (बाड़मेर) प्राचीन जैन तीर्थ ओसियाँ प्राचीन जैन तीर्थ : करेड़ा पार्श्वनाथ "" प्राचीन जैनतीर्थ श्री गांगाणी पुरातत्त्वविद् स्व० श्री अगरचन्द जी नाहटा बैंगलोर का आदिनाथ जैन मन्दिर भगवान् श्री अजितनाथ भगवान् महावीर की साधना एवं देशना भांडवा जैन तीर्थ मरुधरा का ऐतिहासिक जैनतीर्थ : नाकोड़ा मालपुरा की विख्यात जैन दादावाड़ी मेड़ता - फलौदी पार्श्वनाथ तीर्थ मांडाली का गुरुमन्दिर के जैन मन्दिर राणकपुर लोद्रवा का कलात्मक कल्पवृक्ष लोद्रवा - जैसलमेर तीर्थ पर श्री घण्टाकर्ण महावीर मन्दिर वर्धमान जैन आगम - मन्दिर श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २५ २९ २८ ३० २८ ३८ ३४ ३३ २९ २८ २६ २९ २६ ३० २७ ३३ ३२ २८ अंक ११ १० ३ ४ ७ ५ ९ २ ई० सन् १९७४ १९७७ १९७७ १९७९ १९७७ १९८७ १९८३ १९८२ १९७८ १९७७ १९७५ १९७८ १९७५ १९७८ १९७६ १९८२ १९८१ १९७६ पृष्ठ १७-२१ ३०-३२ २६-२९ ३०-३४ २१-२३ २०-२३ २२-२३ १७-२० २१-२७ २९-३२ १०-१५ २२-२३ २९-३३ ३२-३६ १३-१५ १०-१३ २०-२६ २१-२३ Page #269 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६३ ई० सन् १९७६ १९७५ १९७५ १९७६ १९८५ १९८३ पृष्ठ . २३-२६ २४-२७ ९-१२ २४-२८ २६-२८ ४३-४५ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख विख्यात जैन तीर्थ : प्रभासपाटन शिल्पकला एवं प्राकृतिक वैभव का प्रतीक : जैसलमेर का अमरसागर सिरोही के प्राचीन जैन मन्दिर सौराष्ट्र का प्राचीन जैनतीर्थ तालध्वज गिरि हुबली का अचलगच्छ जैन देरासर हुबली का श्री शान्तिनाथ मंदिर मदनलाल जैन अहिंसा भगवान् महावीर मुनि मणिप्रभ सागर प्रेम की सरिता प्रवाहित करने वाला पर्व मधुकर मुनि पर्युषण वंदन हो अगणित मधुप कुमार 23 mi १९५५ १९५६ ५५-५६ ५५-५६ १९८४ ४-६ ११ ११-१२ १९८१ १९६३ ७७-७९ दुविधा १० १९६० ३०-३१ मनुभाई पंचोली कला का कौल १९५४ १-३ Page #270 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६४ श्रमण : अतीत के झरोखे में E अंक ई० सन् पृष्ठ * * * १९७४ १९७३ ११-१४ २८-३१ * * १९५९ ३०-३३ * * १९८२ १५-१८ लेख मनोहरलाल दलाल पुराणों में ऋषभदेव भारत का प्राचीन जैन केन्द्र : कसरावद मनोहर प्रभाकर बोलने की कला सीखिए मन्नूलाल जैन . जैन मुनि क्या कुछ कर सकता है ? मनोहर मुनि जी अन्तर्दृष्टा महावीर ऋषिभाषित का अन्तस्थल ऋषिभाषित का परीक्षण जमाली का मतभेद जीवन में अनेकान्त जैन दर्शन का शब्द विज्ञान पंच सूत्री कार्यक्रम विज्ञान राजनीति के चंगुल में श्रमण संस्कृति की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि ३८-४० ७-८ * * * * * * * g ง १९६१ १९६० १९६४ १९५८ १९५९ १९६१ २६-३० ६६-६८ २६-२८ २८-३१ ७-८ २१-२२ ३५-३८ * १९६० १९६१ १९५७ Page #271 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वर्ष अंक २६५ पृष्ठ । ई० सन् १९८४ १६-२० १९५४ १-२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ममता गुप्ता • जैन दर्शन और अरविन्द दर्शन में एकत्व और अनेकत्व सम्बन्धी विचार • मशरूवाला आत्मा का बल युवाचार्य महाप्रज्ञ ए अंहिसा की समस्याएँ जैन साहित्य में चैतन्य केन्द्रों का निरूपण प्रतिक्रिया है दु:ख मन की शक्ति बनाम सामायिक शुद्ध-अशुद्ध भावधारा शुद्धि चिकित्सा और सिद्धि का महान् पर्व संवत्सरी है स्वभाव-परिवर्तन महावीर चंद धारीवाल सर्वोदय और जैनदृष्टिकोण महावीरप्रसाद गैरोला है मनुष्य की परिभाषा महावीरप्रसाद 'प्रेमी' वैशाली और भगवान् महावीर का दिव्य सदेश 'ल 9m or army १९८३ १९८७ १९८२ १९८२ १९८४ १९८४ १९८५ २-४ २-५ २-६ १८-२२ २-६ २-३ १२-१८ १९६४ ३३-३६ A १९८१ १४-१६ - १९५४ १४-२३ Page #272 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६६ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ६-७ ई० सन् १९५५ पृष्ठ ५१-५३ w n १९८२ १४-१५ o xr १९५५ ३३-३७ ११-१३ लेख सन्मति महावीर और 'सर्वोदय' महेन्द्रकुमार जी चक्षुष्मान् पं० सुखलाल जी महेन्द्रकुमार जैन विश्व कैलेण्डर श्रमण : एक व्याख्या महेन्द्रकुमार 'न्यायाचार्य' जैन अनुसंधान का दृष्टिकोण जैन इतिहास की एक झलक जैन मन्दिर और हरिजन है जैन संस्कृति दीपावली की जैन परम्परा महावीर के उपदेश मंगलमय महावीर शास्त्र की मर्यादा सफेद धोती संस्कृति का आधार व्यक्ति-स्वातंत्र्य हिन्दू-बनाम-जैन war xor 5 w or n mor or w x rr ora w ma or x -१२ १९५३ १९५६ १९५१ १९५४ १९५४ १९५८ १९५२ १९५२ १९५१ १९५० १९५५ १५-१६ ३-८ २५-३० ३-१३ ९-११ २५-२७ २३-२४ २५-२९ २१-२४ ३३-३६ ३८-४० Page #273 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २६७ लेख अंक ई० सन् पृष्ठ __ ८ १९८५ १९८२ ११-१४ ५-११ १०-१२ १९९२ ४५-४८ महेन्द्रकुमार फुसकुले एक महान् विरासत की सहमति में उठा हाथ धर्म परिवर्तन-श्रमण धर्मों की भूमिका और निदान महेन्द्रकुमार जैन 'मनुज' अष्टपाहुड़ की प्राचीन टीकाएँ महेन्द्रकुमार जैन 'मस्त' जैनों में साध्वी प्रतिमा की प्रतिष्ठा-पूजा व वन्दन महेन्द्रकुमार शास्त्री तीर्थंकर और उनकी शिक्षायें भगवान् महावीर का निर्वाण मुनि महेन्द्रकुमार ७-९ १९९७ ८२-८५ १६ १९६४ १९६२ ७-१० ९-१३ नागदत्त पाप का घट Gmm १९८४ १९८५ १९८३ १९८२ ११-१३ १४-१६ १२-१७ भाग्यवान अन्धा पुरुष आनन्द मुनिश्री महेन्द्रकुमार 'प्रथम' श्रावक गंगदत्त दृढ़ प्रतिज्ञ केशव १९८५ १९८५ १४-१५ १५-२१ Page #274 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २६८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ई० सन् १९८५ . १९७० । सुबुद्धि और दुर्बुद्धि पावा कहाँ ? गंगा के उत्तर या दक्षिण में है अपना और पराया क्षमा की शक्ति बन्दर का रोना वसुराजा समताशील भगवान् महावीर ब्रह्मदत्त 3 x a var o mo w पृष्ठ ९-१३ २३-२४ १०-१४ ३३-३८ ८-१० १९८४ १९८३ १९८४ १९८३ १९७४ १९८९ १९८३ १९८३ नन्दीसेन २७-३० ४०-४२ १२-१६ १०-३० अभी तो सबेरा ही है ? मुनिश्री महेन्द्रकुमार जी 'द्वितीय' डॉ० जैकोबी और वासी चन्दन कल्प-क्रमशः १९६६ १९६६ १९६६ १९६६ १९६७ swova a २७-३४ २३-२८ १४-२० १३-१८ ५-१७ वास्तविकतावाद और जैन दर्शन महेशदान सिंह चौहान दिवाभोजन ही क्यों? १९५५ ३३-३४ Page #275 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २६९ ई० सन् पृष्ठ 8 १९८९ १९८६ १९८८ ३५-३८ १-९ २८-२९ . लेख महेन्द्रनाथ सिंह उत्तराध्ययन में मोक्ष की अवधारणा धम्मपद और उत्तराध्ययन का एक तुलनात्मक अध्ययन धम्मपद और उत्तराध्ययनसूत्र का निरोधवादी दृष्टिकोण महेशशरण सक्सेना महात्मा कन्फ्यूशियस महेन्द्र राजा अध्ययन : एक सुझाव अपने व्यक्तित्व की परख कीजिये आधुनिक पुस्तकालय आधुनिक पुस्तकालयों में पुस्तकसूची १९५५ १४-१७ १९५६ १९५४ १९५५ १९५५ १९५६ १९५६ १९५३ १९५५ १९६२ १९५७ १९५७ rur 9 9 9 - ww vv १२-१४ २७-२९ ३७-४० ३७-३८ २७-२९ २५-२६ १३-२८ ३८-४० ४७-५३ १८-२१ ४९-५३ जैन लोककथा साहित्य : एक अध्ययन पुस्तक की व्यवस्था भगवान् महावीर मारिआ मॉन्तेसरि बालक की व्यवस्था प्रियता Page #276 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २७० श्रमण : अतीत के झरोखे में # ง ๒ ७-८ ई० सन् १९५७ १९५२ पृष्ठ ३१-३४ २२-२४ - ๓ * १९८१ १९८१ १९८५ १६-१८ ३२-३४ १८-१९ लेख वहाबी विद्रोह संसार का इतिहास-तीन शब्दों में ॐ महेन्द्रसागर प्रचंडिया प्राणी मात्र के विकास का आधार जैन धर्म मनुष्य प्रकृति से शाकाहारी दर्शन और ज्ञान जब चारित्र में आया माँ (अरविन्दाश्रम) विचार शक्ति पैसों का मूल्य त्याग का मनोविज्ञान है माईदयाल जैन आत्म शुद्धि और साधना का पर्व जैन साधु और हरिजन जैन साधुओं का संस्थारूपी परिग्रह नई राहें प्रकाश पुंज महावीर पंजाबी में जैन साहित्य की आवश्यकता मूक साहित्य-सेवी श्री पन्नालाल जी 2 : १९६१ १९६० १९६५ १२-१४ १०-११ २९-३३ 2 * * * * m4 v ur uTor १९५९ १९५२ १९६१ १९६२ १९५९ १९६१ १९५३ २०-२१ १४-१६ ९-१० ४३-४५ ९-१० २२-२३ ७-११ * Page #277 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक my w x ई० सन् १९६० १९६३ २७१ पृष्ठ ४९-५६ ३५-३६ १९८९ १९८९ २४-२५ १०-१४ १९६१ vo orar १३-१४ राष्ट्र निर्माण और जैन समाज सेवी स्व० नन्हेमल जी जैन मांगीलाल भूतोड़िया ओसवाल और पार्थापत्य सम्बन्ध _महाकवि माघ ओसवाल थे? मानक चन्द सुख की मूर्ति : दुःख की परछाई मानकचंद पींचा "भारती" आज का युवक धर्म से विमुख क्यों ? मायारानी आर्य आष्टा की परमारकालीन अप्रकाशित जैन प्रतिमाएँ मारुतिनंदन तिवारी उत्तर भारतीय शिल्प में महावीर उड़ीसा में जैन कला एवं प्रतिमा-विज्ञान की राजनैतिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि जालौर में महावीर मन्दिर की शिल्प सामग्री का मूर्ति वैज्ञानिक अध्ययन जैन यक्ष गोमुख का प्रतिमा निरूपण जैन साहित्य और शिल्प में रामकथा जैन साहित्य और शिल्प में वाग्देवी सरस्वती १९८२ २६-२८ २३-२४ १९७८ १९७० १९७३ १९७५ १९७६ १९७७ १९७६ १८-२३ १४-२१ ९-१७ २९-३६ १९-२१ ३०-३४ Page #278 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २७२ लेख दक्षिण भारतीय शिल्प में महावीर मूर्त अंकनों में तीर्थंकर महावीर के जीवन-दृश्य शिल्प में गोम्मटेश्वर बाहुबलि मिश्रीलाल जैन उत्तराध्ययनसूत्र समणसुतं समयसार मीना भारती अपभ्रंश का विकास कार्य तथा जैन साहित्यकारों की देन मीनाक्षी शर्मा आचार्य सोमदेव का व्यक्तित्व तथा कर्तृत्व मुन्नी जैन अणगार वन्दना बत्तीसी पंचेन्द्रिय संवाद : एक आध्यात्मिक रूपक काव्य मृगावती श्रीजी एवं साध्वी श्री सुब्रता श्री जी सदा जाग्रत नरवीर मृगेन्द्रमुनिजी 'वैनतेय" अपरिग्रहवाद का यह उपहास क्यों ? श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २२ २७ ३२ ३५ ३५ ३५ २३ ३७ ४८ ४८ ३२ १० अंक our m ६ 5 5 5 ५ ८ ४ १-३ ७-९ ५ १२ ई० सन् १९७० १९७६ १९८२ १९८४ १९८४ १९८४ १९७२ १९८६ १९९७ १९९७ १९८२ १९५९ पृष्ठ १२-१७ २१-२५ १०-२० २-२६ २७-४१ ४२-५९ २९-३४ ३-८ ६०-७० ५१-६७ ३६ ८-१० Page #279 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २७३ ई० सन् पृष्ठ ३-५ १९५३ १९५२ १२ १४ - १९८६ १६-१७ १९७३ २०-२४ लेख मोहिनी शर्मा 1 बंधन से अलंकार भारतीय त्यौहार मोतीलाल सुराना रिश्ता भावना का मोहनलाल दलाल दर्शाण में जैनधर्म मोहनलाल मेहता अकलंकदेव की दार्शनिक कृतियाँ अन्तरायकर्म का कार्य आकाश आगम साहित्य में कर्मवाद आगमिक प्रकरण आगमिक व्याख्याएँ उच्चगोत्र और नीचगोत्र उपासक प्रतिमायें कर्म का स्वरूप कर्म की मर्यादा १९७७ 9 r १९७२ १९६९ १९७१ १९७७ १९७९ १९७१ ३१-३४ ३-५ ५-७ ४-१२ ३-१३ ३-१७ ३-४ ८९-९२ ६५ am or १९७१ १९७१ ३-५ Page #280 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २७४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख कर्मप्राभृत अथवा षटखण्डागम : एक परिचय " पृष्ठ २०-२७ २९-३२ २३-२८ ३२-३७ १९-२२ २३-२९ ११-२० १६-२१ २२-२६ १५-२२ [अन्यवाद - - r m Prur 72 43 9 ur rrr Tr ई० सन् १९६४ १९६४ १९६५ १९६५ १९६५ १९६५ १९७१ १९६५ १९६५ १९६७ १९६९ १९६० १९७० १९५८ कषायप्राभृत की व्याख्यायें काल ७-९ क्या महावीर सामाजिक पुरुष थे ? क्या व्याख्याप्रज्ञप्ति का १५वां शतक प्रक्षिप्त है ? गणधरवाद गुणव्रत चूर्णियां और चूर्णिकार जैन आगमों में नियुक्तियाँ जैनकला एवं स्थापत्य १५-१६ १२-१९ ३-६ २२-२७ १०-१४ ९-१२ १९५५ १९५६ १९७९ Page #281 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख जैनागम पदानुक्रम " "" "" 11 "" "" "" "" 11 "" "" = = = = = = "" "" "" श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष २६ २६ २६ २६ २६ २६ २७ २७ २७ २७ 22222222 २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ २७ अंक ३ m Xx ४ ६ ७ ६ ९ १० ११ १२ ई० सन् १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ १९७६ २७५ पृष्ठ २६-३३ २६-३० २८-३१ २१-२५ २२-२६ ३०-३२ २९-३१ २४-२७ २७-३० ३१-३३ ३१-३४ २९-३१ २७-३० २९-३० ३७-३८ २९-३१ ३०-३२ ३३-३४ Page #282 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २७६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जैनागमों में ज्ञानवाद जैन दृष्टि से चारित्र विकास जैनधर्म की प्राचीनता तथा इतिहास जैनधर्म दर्शन का स्रोत-साहित्य जैन परम्परा जैन श्रावकाचार # แs 3 : - * * * * * * * * 3 9 8 Mrrrrrr 9 0 9 » Trm 42 ई० सन् १९५४ १९६४ १९६४ १९७८ १९७९ १९५२ १९७९ १९७९ १९७९ १९७८ १९५१ १९५२ १९६९ १९५४ १९५६ १९६९ १९७१ पृष्ठ ५-९ १७-२३ १३-१८ ३-१६ ३-१४ १३-१७ १६-२२ १६-२३ २१-३२ ३-१३ २७-२९ ९-१४ ५-७ जैन सिद्धान्त दो प्रेमियों की यह दीक्षा धर्म की उत्पत्ति और उसका अर्थ धर्म और अधर्म नियुक्तियाँ और नियुक्तिकार निह्नववाद परमाणु पुण्य और पाप ९-१५ ५-१२ ५-७ ३-७ १ Page #283 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में สี frry ई० सन् १९६९ १९६० : แ : * लेख पुद्गल भारतीय विचार प्रवाह की दो धाराएँ क भाष्य और भाष्यकार महावीर का तप : कर्म महावीर क्षत्रिय पुत्र थे या ब्राह्मणपुत्र ? मृत्युञ्जय माणिक्यनन्दीविरचित परीक्षामुख रूपी और अरूपी शतावधानी रत्नचन्द्र पुस्तकालय शास्त्रों की प्रामाणिकता शिवशर्मसूरिकृत कर्म प्रकृति श्रमण धर्म श्रमण संघ संन्यास का आधार अन्तर्मुखी प्रवृत्ति समता और समन्वय की भावना सम्यकत्त्व की कसौटी सर्वज्ञता : एक चिन्तन स्वप्न : एक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण * * * * * Tyri ram or m ar १९५५ १९६४ १९७४ १९५० १९७७ १९६९ १९५१ १९७० १९६४ १९७४ १९७७ १९५१ १९५९ १९५० १९७० १९५२ २७७ पृष्ठ २०-२२ १३-१९ ४-१२ ३७-४१ ३४-३८ १४-१८ २३-२४ ५-७ ३१-३६ ३८-४० ७-१५ ३३-३८ १८-२९ २३-२६ ३९-४४ २८-२९ ३४-३८ ११-१५ * * * * * * Page #284 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अंक ई० सन् १९५० १९८१ १९७७ पृष्ठ २५-२८ १२-१४ २७-३१ x o १९७७ १९७८ १५-२६ २४-२६ २७८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख सौन्दर्य का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण हिंसा-अहिंसा का जैनदर्शन हेमचन्द्राचार्य की साहित्य साधना मोहन रत्नेश तर्क प्रधान संस्कृत वाङ्मय के आदि प्रेरक : सिद्धसेन दिवाकर महाकवि जिनहर्ष और उनकी कविता मुकुलराज मेहता जैनधर्म : निर्जरा एवं तप मुनिलाल जैन महातपस्वी श्री निहालचन्द जी बैलून में - मैक्स एडालोर एम०के० भारिल्ल यह अगस्त का महीना मंगलदेव शास्त्री जैन दर्शन की देन भगवान् महावीर : एक श्रद्धांजलि भगवान् महावीर की महामानवता भारतीय संस्कृति ११ ४-८ १९८७ १९६१ १९५५ ३३-३८ २१-२८ ano a ax ax w wn १९५६ ७-९ १९५६ १९५६ १९६३ १९५५ १३-१४ ३-८ ९-११ १८-३१ Page #285 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २७९ अंक ई० सन् १९५५ पृष्ठ १९८५ १९८४ १२-१५ १-३ ___ ३० ७ १९७९ ३-१५ १०-१२ १९९२ ६७-६९ लेख भारतीय संस्कृति का दृष्टिकोण मंगल प्रकाश मेहता भगवान् महावीर : जीवन सम्बन्धी प्रमुख घटनाएँ शान्तरस : जैन काव्यों का प्रमुख रस मंगला सांड पातंजल तथा जैन योग : स्वरूप एवं प्रकार मंजुला भट्टाचार्या जैन दार्शनिक साहित्य में ईश्वरवाद की समालोचना मंजुला मेहता जैनधर्म की प्राचीनता और विशेषता धर्म एक आधार : स्वस्थ समाज रचना क्या भगवान् महावीर के विचारों से विश्वशांति संभव है ? भगवान् महावीर का तत्त्वज्ञान महावीर सम्बन्धी साहित्य त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में गणधरवाद त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में महावीर चरित त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित में रसोद्भावना १९७३ १९६६ १९८१ 22 » or 9 m ८-१५ २८-३० १७-२२ ६३-६७ २७-३२ ११-१६ १६-२२ १५-२० १९७४ १९७४ १९७७ १९७६ १९७७ Page #286 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २८० लेख मंजूसिंह सूत्रकृतांग में प्रस्तुत तज्जीव तच्छरीरवाद यदुनाथप्रसाद दुबे बसन्तविलासकार बालचन्द्रसूरि : व्यक्तित्व एवं कृतित्त्व यमुनादेवी पाठक पारिवारिक जीवन सुखी कैसे हो ? यशपाल जैन गुणों के आगार यशोविजय उपाध्याय सच्चा जैन यू० ए० आसरानी जैन मिस्टीसिज्म >). योगेश कुमार मुनि अध्यात्म आवास-पर्युषण अन्त: प्रज्ञा-शक्ति आचारांग में सोऽहम की अवधारणा का अर्थ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ३५ ४२ १ ३२ ७ २४ २४ ३५ ३६ ३५ अंक ४-६ ७ २ ६ w 9 ७ ११ ७ ई० सन् १९८४ १९९१ १९५० १९८१ १९५५ १९७३ १९७३ १९८४ १९८५ १९८४ पृष्ठ १५-२३ २१-३२ २९-३३ ४१-४३ २५-२६ २७-३८ ३२-४१ ७-१६ २-४ १-१० Page #287 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २८१ लेख ई० सन् १९८४ १९८४ १९८४ १९८७ २८-३६ . २४-२६ ११-१४ २०-२२ १९५० आत्म परिमाण (विस्तार क्षेत्र) जैन दर्शन के सन्दर्भ में नारी उत्क्रान्ति के मसीहा भगवान् महावीर मानव जाति के अभ्युदय का पर्व 'दीपावली' युवाचित धर्म से विमुख क्यों? मुनिश्री रंगविजय जी सदाचार ही जीवन है रंजन सूरिदेव आचार्य दिवाकर का प्रमाण : एक अनुशीलन आचार्य वादिराजसूरि ईश्वर और आत्मा : जैन दृष्टि उत्तराध्ययन का अनेकान्तिक पक्ष कवि रत्नाकर और रत्नाकरशतक जनजागरण और जैन महिलायें जिनसेन का पार्श्वभ्युदय : मेघदूत का मखौल जैन दृष्टि में चारित्र जैन दृष्टि में नारी की अवधारणा जैनधर्म और विहार जैनधर्म : एक निर्वचन १९६५ १९६८ १९८१ १९७७ १९६८ १९६१ १९६७ १९८३ १९९२ १९६९ १९५५ ३५-३७ ३-६ १२-२५ १०-१४ ३-१० १७-२४ २७-३१ २८-३२ १७-२१ २५-२८ ५-१९ ३१-३३ Page #288 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २८२ 1.1 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जैनधर्म : वैदिक धर्म के संदर्भ में जैन वाङ्मय में आयुर्वेद जैन शिक्षा-उद्देश्य एवं पद्धतियाँ णायकुमारचरिउ की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि दीपावली : एक साधना पर्व पारसनाथ पार्श्वभ्युदयकाव्य : विचार-वितर्क प्रमेय : एक अनुचिन्तन प्राकृत और उसका विकास स्रोत प्राकृत की बृहत्कथा “वसुदेवहिण्डी' में वर्णित कृष्ण प्राकृत के प्रबन्ध काव्य : संस्कृत-प्रबन्ध काव्यों के सन्दर्भ में प्राकृत के विकास में बिहार की देन पृष्ठ ८-१२ १४-२२ १९-२३ १४-१८ ३३-३५ ३-५ ३९-४२ & # 6 : ง ห : e * * or o or on sam wymaroowoon ई० सन् १९७२ १९६८ १९६८ १९७१ १९५६ १९५५ १९६७ १९७२ १९७१ १९९४ १९७४ १९७० १९७० १९७० १९६२ १९७३ १९७१ १९६९ प्राकृत 'पउमचरिय' : रामचरित भगवान् महावीर जन्मकालीन परिस्थितियाँ भारतीय साहित्य : की रमणीय काव्य रचना : गउडवहो महावैयाकरण आचार्य हेमचन्द्र महावीर और गाँधी का अहिंसा दर्शन-जनजीवन के संदर्भ में * * * * * * ३-९ २३-३० ३-१० ४-११ २०-३६ १४-१९ २२-२६ ३-७ ८-१३ ५-१२ * Page #289 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख महावीरकालीन वैशाली मुनि वारिषेण का सम्यक्त्व योग का जनतन्त्रीकरण विपाकसूत्र की कथाएँ "" " विपाकसूत्र की कहानियाँ वीर हनुमान: स्वयभुं कवि की दृष्टि में विश्व का निर्माणतत्त्व : द्रव्य वीरसंघ और गणधर सन्देशरासक में उल्लिखित (वनस्पतियों के नाम) पर्यावरण के तत्त्व " संस्कृत और : प्राकृत का समानान्तर अध्ययन हिन्दी जैन कवियों का आत्म-स्वातंत्र्य त्रिरत्न : मोक्ष के सोपान रघुवीरशरण दिवाकर अपरिग्रहवाद - क्रमश: श्रमण : अतीत के झरोखे मे वर्ष ३३ १५ २९ "" १० 2022 2 0 2 2 X १० १० २५ १८ ८ २८ ४६ २७ १४ २४ mm ३ अंक ५-६ ४ ४ १२ १०-१२ २ 25 m ३ २ ४ ई० सन् १९८१ १९६४ १९७८ १९५८ १९५८ १९५९ १९५८ १९७४ १९६७ १९५७ १९७६ १९९५ १९७५ १९६३ १९७३ १९५१ १९५२ २८३ पृष्ठ २०-२५ ४२-४७ ३-७ २९-३४ १७-२० २०-२६ १८-२० ९-१५ ३२-३६ ३५-३८ २७-२९ २४-२७ ३-८ २७-३० २२-२६ १८-२० ३४-३६ Page #290 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में B... . . ई० सन् १९५२ १९५२ १९५३ १९५३ १९५१ १९५१ १९५१ १९५५ १९५१ १९५१ 6 dao m al and Ka Kala पृष्ठ २५-२९ ३-८ ८-१२ १०-१५ ९-१४ १२-२४ ९-१४ २४-३४ २८-३० १२-१३ परिग्रह मीमांसा महावीर का संदेश यह धर्म प्राण देश है शीलव्रत ग्रहण o आचार्य रजनीश धर्म और विज्ञान रज्जन कुमार /सुनीता कुमारी जैनधर्म में मानव . . . . १९६६ १८-२१ १९९० १० रज्जन कुमार जैनधर्म में समाधिमरण की अवधारणा ज्ञानीजनों का मरण : भक्तप्रत्याख्यानमरण १९८८ १९८७ ३-८ १४-१९ Page #291 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में १-३ ई० सन् १९८७ १९९६ १९८८ १९८७ १९८९ ife , ..... २८५ पृष्ठ २५-३१ ४७-५९ १२-१७ १३-१८ १६-२० ८ १०-१२ लेख मरण के विविध प्रकार वैदिक एवं श्रमण परम्परा में ध्यान के समाधिमरण का स्वरूप समाधिमरण की अवधारणा : उत्तराध्ययनसूत्र के परिप्रेक्ष्य में सल्लेखना के विभिन्न पर्यायवाची शब्द रतनचन्द जैन जैन आचार में इन्द्रियदमन की मनोवैज्ञानिकता पंचकारण समवाय बन्ध के कार्य में मिथ्यात्व और कषाय की भूमिकाएँ रत्लचन्द जैन शास्त्री क्रांतिकारी महावीर रत्ना श्रीवास्तव कर्म की नैतिकता का आधार-तत्त्वार्थ सूत्र के प्रसंग में स्याद्वाद एवं शून्यवाद की समन्वयात्मक दृष्टि रतनकुमार जैन कानों सुनी सो झूठ सब चमत्कार को नमस्कार १९८१ १९९७ १९८३ ७३-८० २-८ १९६४ १३-१६ ७-९ १९९४ १९९२ १-९ ९१-१०२ .., १९८१ १९८१ १२-१५ ११-१४ Page #292 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २८६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् १९८१ Xx पृष्ठ २१-२५ २१-२८ १९५० २७-३० १९५९ x v १९६१ १९५० ३६-३९ २०-२२ २०-२४ जीवन का सत्य भिगमंगा-मन रतनसागर जैन हमारा आज का जीवन रतन पहाड़ी एक दु:खद अवसान ठोकर व्यक्ति और समाज रत्नलाल जैन कर्म की विचित्रता-मनोविज्ञान की भाषा में " जैन कर्म सिद्धान्त और मनोविज्ञान जैन-बौद्ध दर्शनों में कर्म की विचित्रता भारतीय दर्शनों में अहिंसा संस्कार साहित्य में कर्मवाद रत्नेश कुसुमाकर एलाचार्य मुनिश्री विद्यानन्द जी का सामाजिक दर्शन रमाकान्त झा श्रीमद्भागवत में ऋषभदेव १९८९ १९९२ . १९८९ १९८५ १९८७ ३५-४१ ६५-७० २१-२४ २३-३१ १०-१६ aar १९७९ २३-२७ ६-७ १९६१ १७ Page #293 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख रमेश कुमार जैन भगवान् पार्श्वनाथ का निर्वाण पर्व रमेशचन्द्र गुप्त श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष जैन धर्म में अरिहन्त और तीर्थंकर की अवधारणा तीर्थंकर, बुद्ध और अवतार की अवधारणा का तुलनात्मक अध्ययन सर्वोदय रमेशचन्द्र जैन आदिपुराण में राजनीति जैन दर्शन में पुद्गल द्रव्य जैनधर्म और बौद्धधर्म जैन न्याय दर्शन : समन्वय का मार्ग जैन राजनीति में दूतों और गुप्तचरों का स्वरूप द्विसन्धान महाकाव्य में राज्य और राजा का स्वरूप प्राकृत भाषा और जैन आगम प्राकृत साहित्य में श्रीदेवी की लोकपरम्परा पद्मचरित और पउमचरिउ पं० जोधराज कासलीवाल और उनका सुखविलास पद्मचरित और हरिवंशपुराण ३८ ३४ ३६ ९ २७ २५ २८ २६ २७ २५ ३८ २८ २४ २५ २३ अंक १० ४ १० ६-७ ८ ४ १० ४ ई० सन् १९८७ १९८३ १९८५ १९५८ १९७६ १९७४ १९७७ १९७५ १९७६: १९७४ १९८७ १९७७ १९७३ १९७४ १९७२ पृष्ठ २-५ २८७ ५-९ २७-३७ १२-१६ ३-१३ ८-१५ ३-११ २३-२७ १६-२४ ३-१२ १६-२२ २१-२५ ३-७ १४-१७ ३-७ Page #294 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २८८ श्रमण : अतीत के झरोखे में पृष्ठ ३-६ लेख पद्मचरित : एक महाकाव्य पद्मचरित की भाषा और शैली पद्मचरित में वस्त्र और आभूषण पद्मचरित में शकुन विद्या पार्वाभ्युदय में प्रकृति-चित्रण पार्श्वभ्युदय में श्रृंगाररस भट्टारक सकलकीर्ति और उनकी सद्भाषितावली भारतीय कथा साहित्य में पद्मचरित का स्थान राजस्थानी के विकास में अपभ्रंश का योगदान वर्ण विचार वराङ्गचरित में अठारह श्रेणियों के प्रधान : एक विश्लेषण वराङ्गचरित में राजनीति श्रावक में षट्कर्म सांख्य और जैन दर्शन रमेशमुनि शास्त्री आगम साहित्य में क्षेत्र प्रमाण प्रणाली आचार्य : स्वरूप और दर्शन आचेलक्य कल्प-एक चिन्तन # Arorm om ~ Aar ई० सन् १९७४ १९७२ १९७४ १९७३ १९७७ १९७७ १९७३ १९७३ १९६९ १९७२ १९७५ १९७४ १९७५ १९७७ १०-१८ ३-१० २५-२९ २५-३० ९-१५ २९-३४ ३-११ २३-३१ ७-११ ३-८ ८-१६ ७-१३ १४-१९ १९७८ १९७७ १९७७ १८-२१ ११-१६ १८-२० Page #295 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक लेख कुन्दकुन्दाचार्य की साहित्यिक उद्भावनाएँ जैन आगम साहित्य में जनपद जैन दर्शन में प्रमाण का स्वरूप २८९ पृष्ठ ३०-३२ २०-२२ ९-१३ rm » Fr 9 ९-१३ ई० सन् १९७६ १९७८ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७५ १९७७ १९७८ १९७९ १९७५ १९७५ १९७४ जैन दर्शन में पुद्गल स्कन्ध जैन दृष्टि से ज्ञान-निरूपण जैन दार्शनिक साहित्य में अभाव प्रमाण-एक मीमांसा जैन साधना पद्धति में सम्यग्दर्शन १६-२२ ७-९ १५-१८ २३-२९ १०-१२ २९-३५ २३-३५ ९-१२ 2 ३-६ १०-१५ निक्षेपवाद : एक परिदृष्टि प्रज्ञामूर्ति मन और संज्ञा लेश्या : एक विश्लेषण व्युत्सर्ग आवश्यक war १९७७ १९७६ १९७७ २५-२८ १४-१७ १७-२० Page #296 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २९० लेख 5 5 5 5 ๓ ई० सन् १९७७ १९७६ १९७८ १९७६ १९७३ १९७६ १९७३ शब्दों की अर्थ मीमांसा श्रमण-आचार : एक परिचय श्रमण परम्परा : एक विवेचन श्रमण-धर्म : एक विश्लेषण षड्द्रव्य : एक परिचय सेवा : स्वरूप और दर्शन स्याद्वाद एक पर्यवेक्षण मुनिश्री रामकृष्ण जी पर्युषणपर्व पर एक ऐतिहासिक दृष्टिपात भारत की अहिंसक संस्कृति २२-२६ ३-७ ३-१० १५-१८ १३-१५ ३-४ २२-२८ ๖ง : १९५६ १९५६ १९५६ १७-२१ २१-२५ २०-२३ 5 १९५२ १९-२२ रसिक त्रिवेदी महाभिनिष्क्रमण रविशंकर मिश्र अहिंसा परमोधर्मः जैन कवि विक्रम और उनका नेमिदूतकाव्य मेरुतुंग के जैन मेघदूत का एक समीक्षात्मक अध्ययन 3 4 5 १९८२ १९८१ १९८१ १७-१९ ९-१४ ७०-७७ Page #297 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख श्रमण भगवान् महावीर के चारित्रिक अलंकरण "" सच्ची सनाथता संस्कृत दूत काव्यों के निर्माण में जैन कवियों का योगदान रवीन्द्रनाथ मिश्र कर्म का स्वरूप जैन कर्म सिद्धान्त का उद्भव एवं विकास जैन कर्म सिद्धान्त का क्रमिक विकास राकेश यह मनमानी कब तक राजकमल चौधरी बढ़ते कदम राजकुमार छाजेड़ स्वाध्याय : एक आत्म चिन्तन राजकुमार जैन जैन विद्वानों के कुछ हिन्दी वैद्यक ग्रन्थ जैनाचार्यों द्वारा आयुर्वेद साहित्य में योगदान श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ३५ ३३ ३६ ३३ ३५ ३६ ३६ ३ ११ ३२ 2223 २७ ३२ अंक ६ w ५ ६ ३ १० or o ९ ७-८ ४ ६ ११ ५ ई० सन् १९८४ १९८२ १९८५ १९८२ १९८४ १९८५ १९८५ १९५२ १९६० १९८१ १९७६ १९८१ पृष्ठ १-२ १-२ २९१ १०-१२ १-१५ ५-७ १९-२६ १६-२१ ३१-३३ ७-८ ३५-३६ १५-२४ ७८-८६ Page #298 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ई० सन् १९८६ १९७४ पृष्ठ १६-२० १६-२० ३१ १९७९ ३६-३७ १९५६ २४-२९ १९६२ २९-३१ महत्तरा श्री जी का महाप्रयाण महावीर का धर्म : सर्वोदय तीर्थ रामकुमार वर्मा भगवान् महावीर का विचार तथा कृतित्त्व समस्त विश्व के लिये अनुपम धरोहर राजकुमार जैन 'भारिल्ल' अहिंसा राजदेव त्रिपाठी अद्भुत भिखारी एवं महान् दाता राजदेव दुबे चारित्र निर्माण में आचार-पद्धति का योगदान जैन आचार-पद्धति में अंहिसा प्राचीन जैन साहित्य में शिक्षा का स्वरुप वैदिक वाङ्मय और पुरातत्त्व में तीर्थंकर ऋषभदेव राजदेव दुबे एवं प्रमोद कुमार सिंह जैन संस्कृति में सत्य की अवधारणा राजबली पाण्डेय महामानव की मानसिक भूमिका १९८३ १९८३ १९८५ १९८७ २६-३२ १३-२० १६-२४ २-६ १९८४ १२-१५ १९५३ ३-६ Page #299 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९३ ई० सन् पृष्ठ ७ १ ११ १९८२ १९८१ १९८१ १९ ।। १ १९५८ . ५१-५५ श्रमण : अतात के झरोखे में लेख राजमल पवैया आचार्य मानतुंगसूरि विरचित भक्तामरकाव्य ज्ञानद्वीप की शिखा सफल हुआ सम्यक्त्व पराक्रम राजलक्ष्मी अहिंसक भारत हिंसा की ओर राजीव प्रचण्डिया भारतीय दर्शन में मोक्ष की अवधारणा राजेन्द्रकुमार श्रीमाल एकता ? एकता ? एकता ? राजेन्द्रकुमार सिंह सत् का स्वरूप: अनेकान्तवाद और व्यवहारवाद की दृष्टि में राजेन्द्र प्रसाद सेवाग्राम कुटीर का संदेश राधेश्याम श्रीवास्तव जैनदर्शन में कर्म का स्वरूप रामकृष्ण जैन अस्पृश्यता का पाप १०-१२ १९९४ १-९ ८ १९८५ २२-२६ १९९० १७-२५ ३६-३८ १९७३ ३१-३५ १९५७ ५४-५५ Page #300 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९४ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ ३२-५ ___- १९८१ १९७९ ५२-६१ १३-२२ 3 १९५९ २५-२८ लेख रामकृष्ण पुरोहित आचार्य शाकटायन (पाल्यकीर्ति) और पाणिनी जैन व्याकरण शास्त्र में शोध की संभावनाएं रामकृष्ण शर्मा ये मूल्य बदलें राजाराम जैन क्या यही शिक्षा है ? ग्वालियर के तोमरवंशीधराजा राजाडूंगर सिंह तोमर सच्ची साधना का प्रभाव राजेन्द्रप्रसाद कश्यप जैन एवं बौद्ध धर्मों के वैदिक सन्दर्भ मुनि राजेन्द्रकुमार 'रत्नेश' अतयात्रा धर्म एवं दर्शन-एक गवेषणात्मक विवेचन प्रलय से एकलय की ओर प्लेटो तथा जैनदर्शन - 27 ज १९५२ १९६८ १९६९ १९५३ ३०-३२ ६-१३ ३०-३६ २८-२९ १९८८ १८-२४ .* १९८८ १९८५ १९८८ १९८७ १९-२१ १६-१८ २-४ २४-२७ Page #301 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् १९८५ २९५ पृष्ठ । १४-१९ २१-२२ १६-१९ ७-११ १९५६ १९५७ १९८१ १९८२ १९८१ १९५१ ३४ ११ २६-३० ९-१४ संवेदनहीनता से सुलगती सभ्यता मुनि रामकृष्ण अपरिग्रहवाद धर्म कल्याण का मार्ग ज्ञान भी सम्पदा है दार्शनिक पुरुष पर्युषण : आत्मा की उपासना का पर्व सबसे बड़ा प्रश्न-मैं कौन हूँ ? रामचन्द्र महेन्द्र गाँधी सिद्धान्त रामदेव राम यादव जैनधर्म में आत्मतत्त्व निरूपण जैनधर्म में अहिंसा मुनिश्री रामप्रसाद जी गुरुदेव की जीवन-रेखाएं रामप्रवेश कुमार “जैन चम्पूकाव्य'- एक परिचय ११-१२ १९५८ २८-२९ १९८२ १९८१ १-९ १६-२२ २ ११-१२ १९६३ १७-२८ १-३ १९९७ ७१-७५ Page #302 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ई० सन् पृष्ठ १९६१ १९६१ १९६० ९-१३ १९-२१ २४-२७ रामप्रवेश शास्त्री गांधी जी और अहिंसा सत्य और बापू स्वार्थी तो हम भी हैं। रामजी सिंह जैनधर्म में तप का स्वरूप और महत्त्व जैनधर्म में नीतिधर्म और साधना जैन दर्शन में ज्ञान का स्वरूप जैन दर्शन में मोक्षोपाय जैन दर्शन में स्याद्वाद और उसका महत्त्व भारतीय मनीषा के उज्ज्वलतम् प्रतीक पं० सुखलाल जी रामदास पाण्डेय गंभीर' जैन दर्शन में मुक्ति की अवधारणा नैतिक आचरण विधि : सोरेन क्रिकेगार्ड और जैनदर्शन प्रातिभज्ञानात्मक चिन्तन : सापेक्ष चिन्तन सर्वपल्ली राधाकृष्णन् कर्त्तव्यबोध # orm TM १९७४ १९७४ १९७३ १९७३ २२-२७ २५-३० २७-३२ ३२-३६ १८-२२ ४४-४६ १९७२ १९८१ १९८१ १९८२ १९८२ २-१२ ३-१२ ५-१७ १९६० ७-८ Page #303 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २९७ # ई० सन् १९५७ पृष्ठ ३४ 1 १९५५ १९६२ १९६७ ७-१३ १३-१८ ३४-३८ लेख जीवित धर्म रतिलाल दीपचंद देसाई दो क्रान्तिकारी जैन विद्वान् श्रीमद्राजचन्द्र का परिचय ज्ञान तपस्वी मुनिश्री पुण्य विजयजी रतिलाल म० शाह गर्भापहरण-एक समस्या गर्भापहरण-सम्बंधी स्पष्टीकरण जैनधर्म में तांत्रिक साधना का प्रवेश तीर्थंकरों की निश्चित संख्या क्यों? दिगम्बर रहना क्या महावीर का आचार था ? धर्म को छानने की आवश्यकता भगवान् महावीर की निर्वाण-भूमि : कौन सी पावा महावीर विवाहित थे या अविवाहित राष्ट्रभाषा के आद्यजनक भगवान् महावीर रामदयाल जैन जैन और वैष्णव काव्य परम्परा में राम 2 3 Nw x १९७२ १९७२ १९७३ १९७७ १९७६ १९७७ १९७५ १९७५ १९७३ २१-२५ २४-२७ २५-३० २१-२६ २६-३० २९-३५ १४-१८ १२-१६ २८-३१ १९७२ १९-२२ Page #304 -------------------------------------------------------------------------- ________________ २९८ श्रमण : अतीत के झरोखे में ई० सन् १९७५ १९७३ पृष्ठ १२-१६ २८-३१ १९७२ १९-२२ १९७० २३-३६ लेख महावीर विवाहित थे या अविवाहित राष्ट्रभाषा के आद्यजनक भगवान महावीर रामदयाल जैन जैन और वैष्णव काव्य परम्परा में राम रामप्रसाद त्रिपाठी जैन-बौद्ध सम्मत कर्म सिद्धान्त रामस्वरूप जैन पंजाब में स्त्री शिक्षा रामहंस चतुर्वेदी है जैनागमों में वर्णित नागपूजा रिखबचंद लहरी जैनधर्म की आचार संहिता रीता विश्नोई अपभ्रंश के जैनपुराण और पुराणकार पाण्डवपुराण में राजनैतिक स्थिति १९५० ३८-४० १९८६ १-७ २ १९६४ १९६४ २६-२८ ७-१२ १९९१ १९९१ ४५-५६ ७५-८६ Page #305 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में २९९ अंक ई० सन् पृष्ठ १९८८ . २७-३२ १९८३ २८-३२ २०-२२ १० १९५६ १९-२० लेख रीता सिंह जैन साहित्य में कृष्ण-कथा मुनिरुपचंद जैन एकता संभव कैसे? जैन समाज द्वारा काव्य सेवा रूपलेखा वर्मा जब आप घर से अकेली निकलें रेणुका चक्रवर्ती क्या आप असुंदर हैं ? लल्लू पाठक जैन हरिवंशपुराण-एक सांस्कृतिक अध्ययन ललितकिशोर लाल श्रीवास्तव ईश्वरत्त्व : जैन और योग-एक तुलनात्मक अध्ययन जैन दर्शन में सर्वज्ञता का स्वरूप जैन धर्म-मानवतावादी दृष्टिकोण : एक मूल्यांकन मिथ्यात्व इन जैनिज्म एण्ड शंकर ए- कम्परेटिव स्टडी १९५४ ३४-३८ ११ १९८२ १५-२२ १०-१२ १९९० १९७४ १९८९ १९७२ ७१-८४ २३-२८ ३४-४५ ३५-४१ Page #306 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३०० लेख महासती श्री ललितकुमारी जी और सेवा के प्रतीक : आचार्य श्री श्रुत ललितप्रभ सागर जैनधर्म में भक्ति का स्वरूप शांति का अमोघ अस्त्र - क्षमा ललिता जैन शांतिदूत महावीर मुनिश्री लक्ष्मीचन्द्र जी आचार्य चण्डरुद्र लक्ष्मीचंद जैन अज्ञात प्राचीन जैनतीर्थ : कसरावद : महर्षि अरविन्द जैन दर्शन की दृष्टि में समयसार सप्तदशांगी टीका में गणितीय न्याय एवं दर्शन लक्ष्मीनारायण 'भारतीय' अहिंसा की कसौटी का क्षण जैनधर्म और उनका सामाजिक दृष्टिकोण जैनधर्म और नारी श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष १३ ३४ ३४ १२ ११ २९ १७ २९ 2 2 १-५ अंक ९ ११ ६-७ m ६ १० ९ ovm १ ई० सन् १९६२ १९८३ १९८३ १९६१ १९६० १९७८ १९६६ १९७८ १९५९ १९६३ १९६७ पृष्ठ २७-२९ ५-७ २९-३१ ५८ १८-१९ २५-२७ २८-३१ ६-१० ७८÷४४-४६ ९-१८ ३-९ Page #307 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख जैनधर्म भगवान् महावीर की कसौटी पर है भगवान् महावीर के उपदेश युगानुकूल हैं लेकिन ? भगवान् महावीर के निर्वाण दिन का क्या संदेश हो सकता है ? - भगवान् या सामाजिक क्रांतिकारी गा पर्युषण : एक चिन्तन पर्युषण और नई प्रतिमाएँ प्रेरणादायी महावीर समता के संदेशदाता : भगवान् महावीर .. समाज शास्त्र की पृष्ठभूमि में जैनों के सम्प्रदाय श्रमण संस्कृति का हरि क्षमापना दिन लक्ष्मीबाला अग्रवाल संगीत समयसार का आलोचनात्मक अध्ययन लालचन्द्र जैन क्या जैन दर्शन नास्तिक दर्शन है ? जैन तर्क शास्त्र में बौद्ध प्रत्यक्ष प्रमाणवाद ई० सन् १९६३ १९५८ १९६० १९६० १९५९ १९६१ १९६१ १९६४ १९६६ १९६५ १९६२ पृष्ठ ६-८ ५८-६२ १३-१७ २५-२७ ९-१० २४-२५ २१-२५ २५-२८ ११-१९ २-११ १-४ १९८९ २०-२९ ३-१५ १९७९ १९७६ १९७६ ३-८ १०-१५ Page #308 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३ श्रमण : अतीत के झरोखे में " जैन तर्क शास्त्र में 'सन्निकर्स प्रमाणवाद जैनदर्शन में ब्रह्माद्वैतवाद पंचास्तिकाय के टीकाकार और टीकाएँ ब्रह्माद्वैतवाद का समालोचनात्मक परिशीलन #wrr » 2M 22 MARRM - w ई० सन् १९७६ १९७६ १९७२ १९७९ १९७९ १९७९ १९७९ पृष्ठ १५-१९ १२-२० ८-१५ ११-२६ ३-१२ ३-१३ ९-२२ " २ २ १० १९४९ १९५० ३१-३५ लालजी राम शुक्ल अहिंसा का व्यापक अर्थ विचारों पर नियन्त्रण के उपाय लुइस वैस एक महत्त्वपूर्ण भेंट वाल्टर शुकिंग जैन साहित्य का नवीन संस्करण वासुदेवशरण अग्रवाल अहिंसा का महान् नियम अहिंसा की युग वाणी ११-१२ १९६३ ९४-९६ ७-८ १९५३ १३-१४ ww ९ ६-७ १९५३ १९५५ १-२ ३-४ Page #309 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Jain Education In लेख ईमानदारी के वातावरण एक दिव्य विभूति मालवीय जी जैन साहित्य का नवीन अनुशीलन जैन साहित्य के इतिहास - निर्माण के सूत्र जैन साहित्य निर्माण की नवीन योजना तप के प्रतीक महावीर प्राचीन मथुरा में जैन धर्म का वैभव बत्तीस प्रकार की नाट्यविधि मातृभाषा और उसका गौरव वैशाली और दीर्घप्रज्ञमहावीर CD विश्व मानव महामना मालवीय 'सत्यं स्वर्गस्य सोपानम्' सरस्वती का मंदिर साध्वी रत्न श्री विचक्षण श्री जी श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष प्रज्ञा पुरुष विजय कुमार अनेकान्तवाद और उसकी व्यवहारिकता जैन आगमों में धर्म-अधर्म (द्रव्य) : एक ऐतिहासिक विवेचन * f x www sK6 १३ ४ ५ ३ ३ ४ १३ ७ १३ ६ ११ ३२ ४७ ४८ अंक १२ २ ७-८ ∞ ७-८ ६ १० १० ७-८ १० ३ १ १ ५ १०-१२ १०-१२ ई० सन् १९५६ १९६१ १९५३ १९५३ १९५२ १९५२ १९५३ १९५४ १९६२ १९५६ १९६२ १९५४ १९५९ १९८२ १९९६ १९९७ ३०३ पृष्ठ ३१-३५ ९-१० ११-१२ ११-१६ ९-१२ ८ ७-११ ३-९ ९-१३ २६-३५ ९-१३ ३-४ ५-९ ३५ १३-३५ ५३-७२ Page #310 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३०४ श्रमण : अतीत के झरोखे में १ ई० सन् १९८६ १९८६ पृष्ठ ९-१५ १०-१९ 2 १९८२ १६-२३ x १९५३ w or लेख जैन दर्शन में जीव का स्वरूप जैन दर्शन में बन्धन-मोक्ष विजय कुमार जैन संयुक्त निकाय में जैन सन्दर्भ विजयमुनि शास्त्री आलोचक इन्द्रभूतिगौतम उपाध्याय कवि श्री अमर मुनि घर न लौटा के ज्योतिर्मय जीवन हैं जैन संस्कृति और महावीर जीवित साहित्य की वाणी निशीथचूर्णि पर एक दृष्टि मेघकुमार का आध्यात्मिक जागरण योग और भोग वाणी का जादूगर श्री कृष्ण की जीवन झाँकी श्री रत्न मुनि : जीवन परिचय w 2mm * ornwrror-4 5 w or w १९५७ १९६२ १९५८ १९६२ १९६२ १९५१ १९६० १९५७ ९५८ १६३ १९१८ १९६४ ६-७ ४३-४८ १५-२३ ६३-६५ १७-२१ ३३-४२ ३६-३७ ५४-५७ २५-२७ ७-८ ८३-८५ ६-९ १९-२८ ar ११-१२ in ७-८ ७-८ Page #311 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३०५ ई० सन् पृष्ठ १९५७ १५-१६ १९८२ . १७-२७ २३-२४ लेख क्षमापना का आदर्श भारतीय दर्शनों का समन्वयवादी स्थितप्रज्ञ पुरुष मुनि महाप्रभ विजय जी महाराज मानव कुछ तो विचार कर विजयेन्द्र 'दी मील का पत्थर आचार्य विजयेन्द्रसूरि महावीर विहार मीमांसा विजयराज सामुद्रिक विज्ञान १९६४ २४-२७ १९८६ १४-१६ १९५५ १९५५ २७-२९ ३८-४० २ १९६१ २४-२६ विजया जैन महावीर की साधना और सिद्धान्त विद्याभिक्षु अद्भुत दान अपूर्वरक्षा विद्यानन्द मुनि विद्वत् रत्नमाला का एक अमूल्य रत्न १९६५ १९६६ १५-१६ १२-१३ ५ १९८१ ५३ Page #312 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३०६ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् पृष्ठ । १९६५ ३०-३१ १०-१२ १९९२ २९-३९ विद्याभिक्षु 'आधुनिक' पुनरुत्थान विद्यावती जैन हिन्दी जैन साहित्य का विस्मृत बुन्देली कवि : देवीदास मुनि विद्याविजय जी सेवा का अर्थ • विधुशेखर भट्टाचार्य कलकत्ता विश्वविद्यालय में संस्कृत का उच्च शिक्षण ३ १९५० ३५-३८ १९५२ १९५२ २४-३२ २७-३१ Rai alamma १९६५ २७-३३ मुनि विनयचन्द जी हृदय का माधुर्य-करुणा विनयतोष भट्टाचार्य जैनमूर्तिकला महो० विनयसागर जी अविद पद शतार्थी विनोद कुमार तिवारी आज के सन्दर्भ में जैन पंचव्रतों की उपयोगिता १३-१९ १९५४ २६-३० ३ १९८७ १९८७ ८-१२ २-६ Page #313 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ३०७ ई० सन् पृष्ठ १९८६ ९-११ १९८२ . १२-१५ १९८३ १८-२१ १९८२ ७-१० १९८५ २-५ १९८६ २-७ १९८५ १२-१४ १९८९ ३-९ जैन दर्शन की पृष्ठभूमि में ईश्वर का अस्तित्त्व जैन दर्शन के अन्तर्गत जीव तत्त्व का स्वरूप जैन दर्शन में अजीव तत्त्व का स्थान जैनधर्म में मोक्ष का स्वरूप जैन पर्व दीपावली : उत्पत्ति एवं महत्त्व तीर्थंकर पार्श्वनाथ : प्रामाणिकता और ऐतिहासिकता तीर्थंकर महावीर की शिक्षाओं का सामाजिक महत्त्व पार्श्वकालीन जैनधर्म श्री विनोद राय चन्द्रावती की जैन प्रतिमाएँ : एक परिचयात्मक सर्वेक्षण है दुर्बलता का पाप आचार्य विनोबा भावे अध्यात्म साधना कैसी हो अहिंसा और शस्त्रबल जैन समाज और सर्वोदय प्रेम का अभ्यास संन्यास की मर्यादा 1.2 g roarras aux १९७८ १९५६ ३६-३८ ३०-३४ a romm १९४९ १९५९ १९५० १९५९ १०-१२ २४-२६ ३८-३९ २२-२३ १३-१४ Page #314 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३०८ 4 ई० सन् १९६४ १९५८ पृष्ठ १५-२७ ३७-४० १९८५ ५ १९८१ __४६-५१ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख साहित्य और साहित्यिक स्त्री जागृति और समन्वय की साधना विपिन जारोली जैन दिवाकर मुनि श्री चौथमल जी म० ३७ विमलचन्द शुक्ल शम्बूक आख्यान (जैन तथा जैनेतर सामाग्री का तुलनात्मक अध्ययन) विमल जैन भगवान् महावीर और नारी जाति विमल जैन 'अंशु' स्वामी श्री मदनलाल जी विमलदास कोंदिया जैनधर्म का वैशिष्ट्य महावीर महान् थे विमलदास जैन जैनत्व या जैन चेतना तर्क का क्षेत्र पर्युषण पर्व पार्श्वनाथ विद्याश्रम १९६४ ३५-३८ ११-१२ १९६३ ५६-५८ م 43 vrm orm १९५४ १९५७ ३-१० ५०-५२ م مه سه مه و १९५१ १९५२ १९५० १९५२ २१-२६ ३१-३६ ३१-४० १३-२३ Page #315 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् १९६० . १९५९ १९५० १९५२ 'ल9 our - ३०९ पृष्ठ ३२-३७ २९-३२ २३-२७ ५-११ १९८२ ३९-४० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख वकास की तीन सीढ़ियाँ श्रमण महावीर का युग संदेश संस्कृति का प्रश्न ज्ञान सापेक्ष है तु' वीरेन्द्र कुमार जैन दुर्दान्त दस्यु दया का देवता बना विश्व बन्यु जीवन दृष्टि विश्वनाथ पाठक तरंगलोला और उसके रचयिता से सम्बन्धित भ्रान्तियों का निवारण ध्वन्यालोक एवं दशरूपक की दो प्राकृत गाथाएं : एक चिन्तन दशरूपक की एक अण्याख्यात गाथा । वज्जालग्ग की कुछ गाथाओं के अर्थ पर पुनर्विचार वज्जालग्ग की कुछ गाथाओं पर पुनर्विचार श्रीविज्ञ जैन ज्योतिष तिथि-पत्रिका संवत्सरी और आचार्य श्री सोहनलाल जी म० १९६१ २५-२६ १०-१२ 979 १९९५ १९७९ १९८२ १९७९ १९८० १५-२३ ३२-३६ २०-२१ ३-८ ३-७ १९५६ १९५५ ११-१५ ३०-३३ Page #316 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३१० श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ १९८६ १२-१३ लेख वीणा निर्मल जैन धर्म और आधुनिकता के वी० वेंकटाचलम् विश्वकैलेण्डर क्यों नहीं अपनाया जाय ? बेचरदास दोशी हमारा क्रान्तिवारसा १९५५ १४-१८ १९५४ १९५४ १-८ ६-१५ १९८१ १९६३ २८-३० वेदप्रकाश सी० त्रिपाठी चक्रवर्तियों के चक्रवर्ती श्रमण महावीर शंकर मुनि पूज्य श्री जिनविजयेन्द्रसूरि जी शंकर राव देव महावीर का कार्य शकुन्तला मोहन महिलाओं की मर्यादा शरदकुमार 'साधक' अहिंसा से कोई विरोध नहीं उतार-चढ़ाव के बीच उभरती अहिंसा ७-८ १९६० १९-२१ १९६१ ३२-३३ १९६३ १९८१ ३६-३९ १५-१८ ४ Page #317 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३११ पृष्ठ अंक १२ ७ १०-१२ ई० सन् १९६२ १९८५ १९९२ . ४-५ २-६ ४०-४१ लेख जैन चेयर की आवश्यकता है मुलाकात महावीर से - मूक सेविका : विजयाबहन शरबती देवी जैन ग आत्म निरीक्षण काश : मैं अध्यापिका होती? भगवान् महावीर और अहिंसा पर्युषण : परिचय और व्याख्या के पर्युषण पर्व और आज की नारी शरदचन्द्र मुखर्जी है 'अगस्त' की ऐतिहासिकता शशिप्रभा जैन शांति के अग्रदूत-भगवान् महावीर शान्ताराम भालचन्द्र देव जैन संस्कृति और श्रमण परम्परा साहू शांतिप्रसाद जी जैन समाज के लिये नई दिशा 63 6 १९५५ १९५३ १९५६ १९६१ १९५६ २०-२३ २९-३२ ४०-४५ ९-११ ३४-३५ १९५४ ३०-३२ ४९-५२ 2 १९६३ १९९० २९-४० १९५६ ३-७ Page #318 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३१२ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ १९६२ ३०-३२ लेख मुनिश्री शान्तिप्रिय शास्त्री प्रथम और अन्तिम दर्शन शांति जैन निर्वाण : उपनिषद् से जैनदर्शन तक शांतिलाल मांडलिक जैनधर्म की प्राचीनता भगवान् महावीरकालीन वैशाली में जैनधर्म मांडव : एक प्राचीन जैन तीर्थ (क्रमश:) १९७६ २५-२९ १९६८ १९६८ १९७० १९७० १८-२४ . ६-८ ५-१४ २४-३० ११-१२ ११-१२ शादीलाल जैन अब साधु समाज संभले मेरी कुछ अनुभूतियाँ मोक्ष स्व० पंडित जी एक चलते फिरते विश्वकोश शिवकुमार नामदेव उत्तरप्रदेश में मध्ययुगीन जैन शिल्पकला का विकास कलचुरी-कला में जैन शासन देवियों की मूर्तियाँ १९५८ १९६३ १९५८ १९८१ २१-२२ ८८-९१ १-८ ५१ r १९७७ १९७४ १६-२० २४-२६ Page #319 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् १९७८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख कलचुरीकालीन जैन शिल्प-संपदा कलचुरीकालीन भगवान् शांतिनाथ की प्रतिमाएँ के कर्णाटक में जैन शिल्पकला का विकास कलचुरि नरेश और जैनधर्म कारीतलाई की जैन द्विमूर्तिका प्रतिमाएँ जैन कलातीर्थ : खजुराहो जैन वास्तुकला : संक्षिप्त विवेचन जैन सरस्वती हंसवाहना या मयूरवाहना के तीर्थंकर-प्रतिमाओं की विशेषताएँ धुबेला संग्रहालय की अद्वितीय जैन प्रतिमाएं भारत में प्राचीन जैन गुफाएँ भारतीय पुरातत्त्व तथा कला में भगवान् महावीर राजस्थान में मध्ययुगीन जैन प्रतिमाएँ विदिशा से प्राप्त जैन प्रतिमाएँ और रामगुप्त की ऐतिहासिकता शुंग-कुषाणकालीन जैन शिल्पकला शिवनाथ रवीन्द्रनाथ के शिक्षा सिद्धान्त और विश्वभारती # - 229 Mr. १९७२ १९७६ १९७४ १९७५ १९७४ १९७६ १९७५ १९७४ १९७४ १९७६ १९७५ १९७७ १९७४ ३१३ पृष्ठ २३-३२ १४-१५ १४-१८ १९-२२ १५-१९ २२-२७ १६-२१ १८-२० २४-२६ २४-२७ १५-२२ ३८-४६ २०-२४ १८-२३ २२-२५ Marur v2 . १९७६ १९५६ ३-७ Page #320 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३१४ अंक ई० सन् पृष्ठ २ १२ १९६४ १९६५ २३-२५ २०-२३ १०-१२ ७-१२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख शिवनारायण सक्सेना अण्डे खाना भी हिंसा ही है धर्म का मूल आधार-अहिंसा शिवप्रसाद अड्डालिजीयगच्छ उपकेशगच्छ का संक्षिप्त इतिहास कल्पप्रदीप में उल्लिखित भगवान् महावीर के कतिपय तीर्थक्षेत्र कोरंटगच्छ जालिहरगच्छ का संक्षिप्त इतिहास जीरापल्लीगच्छ का इतिहास धर्मघोषगच्छ का संक्षिप्त इतिहास नागेन्द्रगच्छ का इतिहास नाणकीयगच्छ पश्चिमी भारत के जैनतीर्थ पिप्पलगच्छ का इतिहास १९९७ १९९१ १९८९ १९८९ १९९२ १९९६ १९९० ८१-८२ ६१-१८२ २०-२९ १५-४३ ४१-४६ २३-३३ ४५-१०४ २०-६५ २-३४ . ४५-७८ ६५-८२ ८३-११७ २९-५१ ४९-६६ १९९५ ७-९ १०-१२ १-३ ७-९ १०-१२ १९८९ १९९० १९९६ १९९७ १९९२ १९९२ पूर्णिमागच्छ का संक्षिप्त इतिहास पूर्णिमागच्छ-प्रधान शाखा अपरनाम ढंढेरिया शाखा का संक्षिप्त इतिहास Page #321 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ४४ : 20: 5 ४० ४८ ई० सन् १९९३ १९८१ १९८९ १९९७ १९९४ १९८२ १९९३ १९९६ १९९५ ३१५ पृष्ठ । २२-३५ २७-३१ १५-३३ १४-५० ३१-५१ १९-२३ ४२-५९ ३६-६७ २८-३३ ४४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख - पूर्णिमागच्छ-भीमपल्लीयाशाखा का इतिहास फलवर्द्धिका पार्श्वनाथ तीर्थ : एक ऐतिहासिक दृष्टि के भावडारगच्छ का संक्षिप्त इतिहास ब्रह्माणगच्छ का इतिहास - मडाहडागच्छ का इतिहास : एक अध्ययन मध्य प्रदेश के गुना जिले का जैन पुरातत्त्व है सार्धपूर्णिमागच्छ का इतिहास हर्षपुरीयगच्छ अपरनाम मलधारीगच्छ का संक्षिप्त इतिहास ॐ हारीजगच्छ शितिकण्ठ मिश्र पुरानी हिन्दी (मरु-गुर्जर) के प्राचीनतम कवि धनपाल शीतलचन्द्र चटर्जी स्वामी विवेकानन्द शीतलचंद जैन अनेकान्तवाद की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता ___३१ शीला सिंह द्रौपदी कथानक का जैन और हिन्दू स्त्रोतों के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन ९ १-३ ४-६ १०-१२ ४७ ४० ४ १९८९ १३-१७ १९५५ ३४-३५ १२ १० १० १९८१ २३-२७ १९९५ ७६-८२ Page #322 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ १९९६ ३-१० १९८४ २९-३१ १९८९ १८-२६ ३१६ लेख श्यामधर शुक्ल पाणिनीय व्याकरण का सरलीकरण और आचार्य हेमचन्द्र श्यामवृक्ष मौर्य भगवान् महावीर की व्यापक दृष्टि श्रीनारायण दुबे जैन लेखों का सांस्कृतिक अध्ययन श्रीनारायण शास्त्री अंगविज्जा श्रीनारायण सक्सेना अहिंसा की महानता वीरों का श्रृंगार : अहिंसा हमारे पतन का मुख्य कारण : हिंसा श्रीप्रकाश दुबे अरविन्द का अनेकान्त दर्शन कर्म और अनीश्वरवाद गाँधी जी : व्यक्तित्व और नेतृत्व तुलनात्मक दर्शन पर दो दृष्टियाँ पुण्डरीक का दृष्टांत १९७० २८-३२ our vur vf १९६५ १९६५ १९६५ १२-१५ ३-८ १६-१९ १९६२ १९६३ १९६२ १९६४ १९६४ ६-८ ९-१२ १-३ १७-२१ १२-१४ Page #323 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३१७ ะ 3 : ई० सन् १९६३ पृष्ठ . १९-२० १९६४ १९६३ १४-२३ ७-८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख डॉ० भयांणी के व्याख्यान मेरी पंजाब यात्रा स्वामी विवेकानन्द श्रीप्रकाश पाण्डेय आचारांग में अनासक्ति जैन आगम और गुणस्थान सिद्धान्त समयसार के अनुसार आत्मा का कर्तृत्व-अकर्तृत्व एवं भोक्तृत्व-अभोक्तृत्व सूत्रकृतांग में वर्णित दार्शनिक विचार पं० श्रीमलजी म. सा० अहिंसा का व्यावहारिक रूप है अहिंसा की तीन धारायें आचरण या शोधपीठ पाप क्या है ? प्रेमयोगी महावीर श्रमण भगवान् महावीर का दीक्षा दर्शन संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि सम्यक् दृष्टिकोण सत्य पारखी दृष्टि १९९१ १९९६ १९९१ १९९० g * ७३-८८ ३-१४ ५७-७० ५७-७६ * * * १९६० १९५८ १९५८ १९६० १९६१ १९६३ १९६३ १९६० ६-७ २८-३१ ३४-३७ ४१-४६ १९-२१ १५-१६ ४४-४८ ४१-४५ २५-२९ * * * ६-७ ११-१२ ७-८ Page #324 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् १९६३ पृष्ठ ३०-३२ - १९८२ ११-२० - - १९७८ १९७७ १९७७ २६-३१ १७-२२ १७-२१ ३१८ लेख स्मृति पुरुष : श्री पूज्य गणेशलाल जी महाराज श्रीराम यादव संस्कृत व्याकरण शास्त्र में जैनाचार्यों का योगदान श्रेयांसकुमार जैन काव्यशास्त्रियों की दृष्टि में श्लेष मेघविजय के समस्यापूर्ति काव्य सप्तसन्धानमहाकाव्य में ज्योतिष श्रेयांसप्रसाद जैन पुरुषार्थ के प्रतीक पं० सुखलाल जी संगीता झा धर्म और दर्शन के क्षेत्र में हरिभद्र का अवदान मुनि श्रीसंतलाल जी आत्मबली साधक और दैवीतत्त्व दुर्भाग्य में से सौभाग्य प्राप्त करें प्रतिज्ञा समन्वयकार : आचार्य श्री संन्यासी राम तत्त्वसूत्र ४८-४९ - १९८९ ३०-४० ६-७ १९६४ १९६३ १९५८ १९६२ ९-१२ ९-१४ ७३-७४ २३-२५ __ ४ १९८८ १-८ । - Page #325 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में __ ई० सन् १९८७ पृष्ठ ९-१९ १९६१ ३१-३२ ७-८ ७-८ २ ५९-६१ १२-१४ २०-२५ ११-१२ * Mar verm ६४-६५ लेख आत्म-अनात्म द्वन्द्वात्मिकी सच्चिदानन्द सात शत्रु सात मित्र सतीश कुमार अधूरा समाजवाद अन्न और संकट अहिंसक शक्तियों का ऐक्य * जैन साधु की भिक्षा विधि दया दान की मान्यता प्रणयी महावीर संसार की हिंसामय परिस्थिति और हम समन्वय आश्रम सर्वोदय और राजनीति साहित्य भवन के निर्माण का शुभारंभ (कु०)सत्य जैन श्रमण (कु०) सत्यभामा यशस्तिलकचम्पू और जैन धर्म १९५९ १९५८ १९५८ १९५८ १९५६ १९६१ १९६३ १९५८ १९५९ १९५९ ६-७ ४ ११-१२ ३३-३६ १७-२० २६-२९ १७-२० २९-३१ २४-२७ १९५२ २३ १९८४ १५-२८ Page #326 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३२० श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ ११ १९५५ ३-१२ १९५९ १९५५ ११-१६ ३१-३३ लेख स्वामी सत्यभक्तजी प्रतिक्रमण सत्यदेव विद्यालंकार इतिहास बोलता है जीवन की अंतिम साधना (कु०)सत्यवती जैन विजय नारी का स्थान घर है या बाहर? सत्य सुमन शांति की बुनियाद ६ स्वामी सत्यस्वरूप जी स्वामी केशवानन्द सनत्कुमार रंगाटिया अज्ञात कविकृत शीलसंधि अभयकुमार श्रेणिकरास १९५० १९५४ ३५-३८ ३५ १९५९ ५७-५८ १९५१ २६-३१ १९६९ १९६८ १९६८ १९६८ १९८१ २१-२६ २५-३० २२-२८ १६-२० ६२-६९ पेथड़रास के कर्ता कौन ? मुनि श्री देशपाल : जीवन और कृतित्व Page #327 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३२१ ई० सन् १९६८ पृष्ठ १२-२५ २३-२८ १९६८ लेख विद्याविलासरास सप्तक्षेत्रिरासु सनत् कुमार जैन अनेककान्तवाद की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता पुराण प्रतिपादित शीलव्रत शीलव्रत : एक विवेचन श्रावक के मूलगुण सोमदेवकृत उपासकाध्ययन में शीलव्रत १८-१९ १५-१९ १९८१ १९७९ १९७९ १९७८ १९७१ १९७९ १ १०-१८ ३-१८ V २ ३४-३८ २३-२८ १२ १९५२ ३१-३४ सन्तोषकुमार 'चन्द्र' नारी जीवन का आदर्श मुनिश्री समदर्शी अपरिग्रह और आज का जैन समाज उपाध्याय श्री अमरमुनि जी : एक ज्योर्तिमय व्यक्तित्व मुनि समदर्शी आईदान एक निवेदन क्या अणुव्रत आन्दोलन असाम्प्रदायिक है ? क्षमा का पर्व १९६० १९८२ १ ४१-४३ २१-२५ ११-१२ १९५८ १९५९ १९५९ १४-१६ २३-२४ ३८-३९ Page #328 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३२२ श्रमण : अतीत के झरोखे में १२ ई० सन् १९६० १९६३ पृष्ठ ३१-३३ ४१-४७ २०-२५ १९८६ १-६ लेख भगवान् महावीर का निर्वाणोत्सव साधना की अमर ज्योति सेठ रत्नलाल जी समन्तभद्र वीरावतार समीर मुनि क्रोध और क्षमा श्री व्याख्यान वाचस्पति जी महाराज समीर मुनि 'सुधाकर' जल में लागी लाय जैन समाज का धर्म प्रचार भगवान् महावीर और हरिकेशी भगवान् महावीर के बाद विचारणीय प्रश्न संवत्सरी सम्पूर्णानन्द निरामिष भोजन : एक समस्या १० ११-१२ १९६४ १९६३ १८-२१ ५४-५५ १९६५ १९६३ १९६४ १९६१ १९६१ ९-१० १२-१४ २९-३१ ७२-७५ १९-२१ ३१-३५ १९५८ २८-३३ Page #329 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३२३ पृष्ठ अंक ई० सन् २ १९८४ ५-७ लेख सरदारचंद जैन धर्म का स्वरूप ॐ सरदारमल जैन आज का फैशन-धूम्रपान आत्म शुद्धि का पर्व -पर्युषण रक्षाबंधन महासती श्रीसरलादेवी जी महाराज सच्चरित्रता क्या है ? हमारा उत्थान कैसे? (कु०) सविता जैन महावीर का संयम और उनका साधनामय जीवन १९६२ १९६५ १९६३ २२-२५ ३४-३५ ११-१४ १९५५ -2229 १९५७ २५-२६ २१-२३ १९८१ १९८२ २७-३० १९-२३ ११-१२ १९५८ ३०-३२ आचार्य सर्वे यह नई परम्परा करवट ले रही है सागरमल जैन अध्यात्मवाद और भौतिकवाद अध्यात्म और विज्ञान ६ ६ १९८१ १९८९ १-६ ९-१९ Page #330 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लख पृष्ठ २०-२९ १-४५ अर्धमागधी आगम साहित्य अर्धमागधी आगम साहित्य में समाधिमरण की अवधारणा असली दूकान/नकली दुकान अहिंसा का अर्थ विस्तार, संभावना और सीमा क्षेत्र आगम साहित्य में प्रकीर्णकों का स्थान, महत्त्व, रचना काल एवं रचयिता आचारांगसूत्र : एक विश्लेषण आचार्य हेमचन्द्र : एक युगपुरुष ई० सन् १९९७ १९९५ १९९४ १९८२ १९८० १९९७ १९८७ १९८९ १९९७ १९८१ १९९१ १९९४ १९९४ १९९२ १९९२ १९८३ १९९७ ८०-९३ २०-२१ ३-२१ १४७१५६ १-१९ ३-१५ ६०-७० आत्मा और परमात्मा उच्चैर्नागर शाखा उत्पत्ति स्थान एवं उमास्वाति के जन्मस्थल की पहचान ऋग्वेद में अर्हत् और ऋषभवाची ऋचायें : एक अध्ययन खजुराहो की कला और जैनाचार्यों की समन्वयात्मक एवं सहिष्णु दृष्टि गुणस्थान सिद्धान्त का उद्भव एवं विकास ७-१२ ४-६ ४-६ १-३ ४-६ १० १०-१२ १७-२४ १८५-२०२ १७३-१४ २३-४३ १-२६ जैन अध्यात्मवाद : आधुनिक संदर्भ में जैन आगमों की मूलभाषा : अर्धमागधी या शौरसेनी १-१७ १-२८ Page #331 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ई० सन् १९९४ १९९४ १९८३ १९८१ जैन आगमों में मूल्यात्मक शिक्षा और वर्तमान सन्दर्भ जैन आगमों में हुआ भाषिक स्वरूप परिवर्तन : एक विमर्श जैन एकता का प्रश्न जैन एवं बौद्ध धर्म में स्वहित एवं लोकहित का प्रश्न जैन एवं बौद्ध धर्म में स्वहित एवं लोकहित का प्रश्न जैन एवं बौद्ध पारिभाषिक शब्दों के अर्थ निर्धारण और अनुवाद की समस्यायें जैन कर्म सिद्धान्त : एक विश्लेषण जैन दर्शन में नैतिकता की सापेक्षता जैनधर्म और आधुनिक विज्ञान जैनधर्म और सामाजिक समता जैनधर्म और हिन्दूधर्म (सनातन धर्म) का पारस्परिक सम्बन्ध जैनधर्म का एक विलुप्त सम्प्रदाय-यापनीय १-३ ४-६ १०-१२ १९८१ १९९४ १९९४ १९९५ १९९२ १९९४ ३२५ पृष्ठ १६२-१७२ २३९-२५३ १-२७ २-१० ५-१३ २३४-२३८ ९४-१२७ १२३-१३३ १-१२ १४४-१६१ ३-१० १-१६ १-१८ १५०-१६५ १-३९ १-१३ ७७-११२ १५७१६० ४-६ १-३ जैनधर्म का लेश्या-सिद्धान्त : एक विमर्श जैनधर्म के धार्मिक अनुष्ठान एवं कलातत्त्व जैनधर्म-दर्शन का सारतत्त्व जैनधर्म में अचेलकत्व और सचेलकत्व का प्रश्न जैनधर्म में आध्यात्मिक विकास १९८८ १९८८ १९९५ १९९१ १९९४ १९९७ ११९७ १-३ ४-६ ४-६ Page #332 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३२६ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ४-६ १०-१२ ई० सन् १९९० १९९० १९८१ १-३ ४-६ पान १-३ लेख जैनधर्म में तीर्थ की अवधारणा जैनधर्म में नारी की भूमिका जैनधर्म में भक्ति का स्थान जैनधर्म में भक्ति की अवधारणा जैनधर्म में सामाजिक चिन्तन जैनधर्म में स्वाध्याय का अर्थ एवं स्थान जैन परम्परा का ऐतिहासिक विश्लेषण जैन, बौद्ध और हिन्दू धर्म का पारस्परिक प्रभाव जैन विद्या के निष्काम सेवक-लाला हरजसराय जैन जैन साधना के मनोवैज्ञानिक आधार जैन साधना में ध्यान साहित्य में गोम्मटेश्वर बाहुबलि डॉ० इन्द्रचन्द्र शास्त्री सम्मानित तीर्थंकर और ईश्वर के सम्प्रत्ययों का तुलनात्मक विवेचन दशलक्षण/ दशलक्षण धर्म के धर्म और दर्शन के क्षेत्र में हरिभद्र का अवदान धर्म क्या है ? * * * * * * * * * * १९९७ १९९४ १९९० १९९७ १९८६ १९७९ १९९४ १९८२ १९८६ १९९५ १९८३ १९८६ १९८१ पृष्ठ १-२८ १-४८ १४-१७ १८-३६ १-१९ ३७-४३ १-१६ ३०-५९ २१-२४ ८-१४ ४४-७९ १-९ . २२-२४ ८७-९२ १३-२८ १-२० १-८ Page #333 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख "" "" "" नई पीढ़ी और धर्म श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ३१ ३१ ३४ १३ ४५ ४८ निर्युक्ति साहित्य : एक पुनर्चिन्तन पं० महेन्द्रकुमार 'न्यायाचार्य' द्वारा सम्पादित एवं अनूदित षड्दर्शन समुच्चय की समीक्षा पर्युषण पर्व क्या, कब और कैसे ? पर्यावरण की प्रदूषण की समस्या और जैनधर्म पार्श्वनाथ जन्मभूमि मंदिर, वाराणसी की पुरातत्त्वीय वैभव प्रमाण - लक्षण निरूपण में प्रमाण-मीमांसा का अवदान ३३ बालकों के संस्कार निर्माण में अभिभावक, शिक्षक एवं समाज की भूमिका भगवान् महावीर का जीवन और दर्शन भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि पर पुनर्विचार भाग्य बनाम पुरुषार्थ ४५ ४१ ४८ प्रज्ञापुरुष पं० जगन्नाथ जी उपाध्याय की दृष्टि में बुद्ध व्यक्ति नहीं प्रक्रिया ४६ प्रवर्तक एवं निवर्तक धर्मों का मनोवैज्ञानिक विकास एवं उनके दार्शनिक एवं सांस्कृतिक प्रदेय ३० प्राचीन जैन आगमों में चार्वाक दर्शन का प्रस्तुतीकरण ४६ ३१ ४५ ४५ ३६ अंक 9) ܡ १ ४-६ ४-६ १० ४-६ ४-६ ४-६ ४-६ ८ १-३ ३ १-३ ४-६ ९ ई० सन् १९८१ १९८१ १९८३ १९६१ १९९४ १९९७ १९८२ १९९४ १९९० १९९७ १९९५ १९७९ १९९५ १९८१ १९९४ १९९४ १९८४ पृष्ठ २-५ २-७ २-४ ३२७ ३१-३४ २०३-२३३ १४१-१४६ १-१९ १३५-१४३ ७७-८८ १३३-१४० १६६-१६९ १४-२० ४६-५८ २६-३८ १४-१७ २५४-२६८ २-६ Page #334 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३२८ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख भारतीय संस्कृति का समन्वितरूप भेद विज्ञान : मुक्ति का सिंहद्वार मन-शक्ति स्वरूप और साधना : एक विश्लेषण महापण्डित राहुल सांकृत्यायन के जैनधर्म सम्बन्धी मन्तव्यों की समालोचना महायान सम्प्रदाय की समन्वयात्मक दृष्टि : भगवद्गीता और जैनधर्म के परिप्रेक्ष्य में ४४ महावीर का दर्शन-सामाजिक परिप्रेक्ष्य में महावीर का जीवन दर्शन महावीर के समकालीन विभिन्न आत्मवाद एवं उसमें जैन आत्मवाद का वैशिष्ट्य ४६ महावीर के सिद्धान्त-युगीन संदर्भ में मूल्य और मूल्यबोध की सापेक्षता का सिद्धांत युगीनपरिवेश में महावीर स्वामी के सिद्धांत व्यक्ति और समाज श्वेताम्बर मूलसंघ एवं माथुर संघ-एक विमर्श श्वेताम्बर साहित्य में रामकथा श्वेताम्बर साहित्य में रामकथा का स्वरूप षट्जीवनिकाय में त्रस एवं स्थावर के वर्गीकरण की समस्या संयम : जीवन का सम्यक् दृष्टिकोण ई० सन् १९९४ १९८१ १९९५ १९९४ १९९३ १९८१ १९८६ १९९५ १९८२ १९९२ १९९५ १९८२ १९९२ १९८१ १९८५ १९९३ १९८१ पृष्ठ १२९-१३४ ३-११ ९७-१२२ १७९-१८४ १-१० २-९ ७-९ ५९-६८ ३-२७ १-२२ ३-४ १५-२३ ७-११ २-६ १३-२१ २-१३ . Page #335 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ई० सन् १९९५ १९९५ १९८२ १९९१ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख सकारात्मक अहिंसा की भूमिका सदाचार के शाश्वत मानदण्ड सदाचार के मानदण्ड और जैनधर्म समाधिमरण की अवधारणा की आधुनिक परिप्रेक्ष्य में समीक्षा सम्राट अकबर और जैनधर्म स्याद्वाद और सप्तभंगी : एक चिन्तन स्त्रीमुक्ति, अन्यतैर्थिकमुक्ति एवं सवस्त्रमुक्ति का प्रश्न हरिभद्र की क्रान्तदर्शी दृष्टि-धूर्ताख्यान के सन्दर्भ में हरिभद्र के धर्म दर्शन में क्रान्तिकारी तत्त्व 'सम्बोधप्रकरण' के सन्दर्भ में हरिभद्र के धूर्ताख्यान का मूल स्रोत : एक चिन्तन साधक युगदृष्टा महावीर साधुसंतों की सेवा में सिद्धराज ढढ्ढा है जीवनकला की शोध करें जैनधर्म हम सँभलें ३२९ पृष्ठ .६९-८६ १३४-१४९ २२-२७ ९९-१०१ ७१-७६ ३-४४ ११३-१३२ २१-२५ ९-२० २६-२८ १९९७ १९९० १९९७ १९८८ १९८८ १९८८ ६-७ ६-७ १९६१ १९५८ ३१-३७ २५-२७ ६-७ ११-१२ ९ १९५८ १९५८ १९५८ ५२-५५ ६०-६३ ३३-३६ Page #336 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ई० सन् पृष्ठ ७-९ १९९७ १-१३ लेख सीताराम दुबे स्याद्वाद की अवधारणा : उद्भव एवं विकास सीताराम राय चौबीसवें जैन तीर्थंकर भगवान् महावीर का जन्म स्थान सुखलाल जी संघवी अहिंसा का क्रमिक विकास एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति जैन व्याख्या पद्धति १९८९ १-७ जैन साधना धर्म और पुरुषार्थ धर्म और विद्या का विकास मार्ग धर्म का बीज और उसका विकास पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान की कार्य दिशा भगवान् महावीर के जीवन की विविध भूमिकायें भगवान् महावीर की मंगल विरासत . a xoooorman wa w w १९६० १९५३ १९५३ १९५० १९६० १९६३ १९५१ १९६५ १९५२ १९७४ १९८९ १९५३ ९-१५ ३-१० ७१-७३ ९-११ १४-१७ ९-१७ ९-१४ ३४-३६ ९-१६ ३-९ १-८ १-२ 8 damad मानवमात्र का तीर्थ Page #337 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख मुनिश्री पुण्यविजय जी के जैसलमेर भण्डार के उद्धार कार्य की रूपरेखा लखनऊ अभिभाषण © विकास का मुख्य साधन Emm ~ ~ rr mr ई० सन् १९५१ १९५१ १९५० १९५० १९४९ १९५३ १९५२ १९६१ - - - Or wrr ३३१ पृष्ठ २८-३८ ३-२८ ११-१३ १३-१८ १३-१५ २४ ५-१० ९-१२ शास्त्र और शस्त्र . शास्त्र रचना का उद्देश्य स्वरूप और पररूप शास्त्र और सामाजिक क्रान्ति सुखलाल मुनि स्वप्न और विचार सुदर्शन मुनि जी भावविभोर श्रद्धांजलि सुदर्शनलाल जैन आचार्य हरिभद्र और धर्मसंग्रहणी ९ १९८३ २०-२१ ११-१२ १९६३ ९९-१०६ 22 .28 आहार-विहार में उत्सर्ग अपवाद मार्ग का समन्वय जैन दर्शन में मोक्ष का स्वरूप : भारतीय दर्शनों के परिप्रेक्ष्य में जैन दर्शन में शब्दार्थ सम्बन्ध १९६९ १९६९ १९८९ १९८३ १९९२ २१-२९ १६-२२ ११-१५ १८-२४ २७-३९ ~ Page #338 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक प्रमाण स्वरूप विमर्श ad यज्ञ : एक अनुचिन्तन ई० सन् १९७२ १९७३ १९६६ १९६६ १९८९ १९८९ पृष्ठ ३-१५ ३-११ १५-२७ ३१-३८ १०-१६ १-१० * वेदान्त दर्शन और जैन दर्शन सांख्य दर्शन और जैनदर्शन : एक तुलनात्मक अध्ययन सुधा जैन जैनधर्म में सरस्वती जैन मंदिर व स्तूप जैन शिल्पकला और मथुरा जैन साहित्य और संस्कृति का जनजीवन पर प्रभाव प्राचीन भारत में जैन चित्रकला सुधा जैन तनाव : कारण एवं निवारण सुधा राखे जैन और बौद्ध आगमों में जननी-एक पहलू बौद्ध और जैन आगमों में जननी १९७५ १९७३ १९७२ १९७४ १९७४ १३-१४ १६-१९ १६-१९ १५-१८ ३१-३४ * १९९७ १-२० १९६७ १९६७ १४-१७ २०-२६ Page #339 -------------------------------------------------------------------------- ________________ लेख सुनीतकुमार चाटुर्ज्या प्राकृत का अध्ययन सुन्दरलाल जैन 'वैद्यरत्न ' आरोग्य किसके साथ क्या न खायें ग्रीष्म ऋतु का आहार-विहार " चलिए और खूब चलिए टमाटर महावीर का साम्यवाद वर्षा ऋतु का आहार-विहार ," बसन्त ऋतु का आहार-विहार "" शीतऋतु का आहार-विहार "" श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष 12222 १९ ४ ८ ५ १५ ६ ८ ५ 67 ६ १५ ६ १४ अंक ९ ४ १० ७-८ १० १० १० ४ ४ १ ई० सन् १९६८ १९५३ १९५७ १९५४ १९६४ १९५५ १९५६ १९५४ १९५४ १९५६ १९५५ १९८४ १९५४ १९६२ पृष्ठ ३३३ १०-१२ २३-२५ ३५-३६ ३४-३६ ५९-६२ २७-२९ २९-३१ २८-३१ १६-१९ २३-२५ १९-२० ३४-३५ १९-२० २४-२६ Page #340 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ई० सन् पृष्ठ सुपार्श्वकुमार जैन भरतेश वैभव में प्रतिपादित सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था ३-८ १९७५ १९७५ ३-८ सुबोधकुमार जैन ' उड़ीसी नृत्य और जैन सम्राट खारवेल गजेटियर ऑफ इंडिया में जैनी और जैनधर्म धर्म का मर्म प्रयाग-एक महान जैन क्षेत्र प्रवृत्तिमार्ग और निवृत्तिमार्ग हेल्मुथ फोन ग्लासनप और जैनधर्म पुरुष और नारी साधु शिक्षक बनें सुभाष कोठारी उपासकदशांगसूत्र का आलोचनात्मक अध्ययन जैन श्रमण साधना: एक परिचय सुभाषचन्द जैन जैनधर्म में शुभ और अशुभ की अवधारणा १९७१ १९७० १९५३ १९७१ १९७० १९७० १९६० १९६१ २१-२२ २८-३५ २४-२९ १७-१९ ३४-३६ १३-१७ ३०-३१ ७०-७२ १९८६ __ १९९१ ८-१३ ३३-५० १९७९ २३-३२ Page #341 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३३५ लेख ई० सन् पृष्ठ ८७ १९८६ १९८६ ६-१७ १२-१६ १०-१५ ११ ९ १९६० ३०-३३ सुभाषमुनि 'सुमन' जैन और बौद्धदर्शन : एक तुलनात्मक अध्ययन महावीर और बुद्ध सर्वधर्म समभाव और स्याद्वाद सुमन मुनि जैनाचार्य श्री कांशीराम जी सुरेखा जी (साध्वी) "पंचपरमेष्ठिमन्त्र का कर्तृत्व और दशवैकालिक श्रमण एवं ब्राह्मण परम्परा में परमेष्ठी पद सुरेन्द्रकुमार आर्य जैन रास की दुर्लभ हस्तलिखित प्रति : विक्रमलीलावतीचौपाई झारड़ा की जैन देवियों की अप्रकाशित प्रतिमाएँ सुरेन्द्र वर्मा जैन दर्शन में पुरुषार्थ चतुष्टय इद्वन्द्व और द्वन्द्व निवारण (जैन दर्शन के विशेष प्रसंग में) गाँधीजी के मित्र और मार्गदर्शक : श्रीमद्राजचन्द्र सुरेशचन्द्र गुप्त अपभ्रंश का काव्य सौन्दर्य १-१० ५५-६७ १९९२ १९७५ १९७६ १३-१४ १३-१४ १-३ १०-१२ १०-१२ १९९६ १९९६ १९९५ २१-४६ १-१३ १९५४ २३-३० Page #342 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३३६ लेख मुनिश्री सुरेशचन्द्र जी शास्त्री अपने को परखिए अहिंसा का अवतार एक नया पुरोहितवाद नया और पुराना प्रधानाचार्य या आचार्य मंजिल अभी दूर है महावीर के ये उत्तराधिकारी श्रमण संघ की शिक्षा-दीक्षा का प्रश्न श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों से हमारे जागरण का शीर्षासन सुरेश सिसोदिया चन्द्रवेध्यक (प्रकीर्णक) एक आलोचनात्मक परिचय मुनिजी सुशीलकुमार मिथिलापति नमिराज हरिकेशिबल धर्म और दर्शन श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ६ ११ ७ ७ ११ xw m ४ ६ १३ ३ ४३ ५ अंक ११ ६ ६-७ २ 8 ov ६-७ १२ ६ १-३ or or or ९ १२ १ ई० सन् १९५५ १९६० १९५६ १९५५ १९६० १९५२ १९५५ १९५६ १९६२ १९५२ १९९२ १९५५ १९५४ १९५६ पृष्ठ ३९-४१ १३ २७-३१ २०-२२ २३-२५ २४-२६ ५७-६० १६-१७ ४३-४५ १७-२२ ४५-५३ ३६-३७ १५-२४ २०-२३ Page #343 -------------------------------------------------------------------------- ________________ "" बुझती हुई चिनगारियाँ मानवतावादी समाज का आधार - अहिंसा सुशीला जैन विद्यालय से माता-पिता का सम्बन्ध आचार्य हरिभद्रसूरि का दार्शनिक दृष्टिकोण लेश्या - एक विश्लेषण 'सूरजचन्द्र 'सत्यप्रेमी' ध्यान - योग की जैन परम्परा नमस्कारमंत्र महावीर का अन्तस्तल वर्धमान और हनुमान सोहनलाल पाटनी सिरोही जिले में जैनधर्म सौभाग्यमल जैन लेख का मौलिक परम अर्थ अपनी परमात्म शक्ति को पहचानो अहिंसा की सार्थकता श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष ८ ३ ११ v m m २३ २३ १० १२ ३३ ३३ ३५ अंक 2 2 ११ २ ३-४ ov ५ 1 to 10 o ९ १२ १० ६-७ १० २ ई० सन् १९५६ १९५२ १९५९ १९५७ १९७१ १९७२ १९५९ १९५५ १९६१ १९५५ १९८२ १९८१ १९८३ ३३७ पृष्ठ २३-२८ ३५-३७ ७-११ २९-३२ १९-२३ २०-२४ १७-१८ १८- २० १७-१९ २३ ३२-३७ २-६ ८ - १२ Page #344 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३३८ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक लेख कल्पना का स्वर्ग या स्वर्ग की कल्पना मा से विश्व बन्धुत्व जैन आगमों में विद्वत् गोष्ठी तीर्थंकर महावीर जन्मना ब्राह्मण या क्षत्रिय नर्क का प्रश्न भारतीय संस्कृति और श्रमण परम्परा युवा-दृष्टिकोण वाल्टेर शुब्रिग की जैनविद्या सेवा श्रमण संस्था और समाज साधु मर्यादा क्या ? कितनी ? साधुओं का शिथिलाचार सौभाग्य मुनि 'कुमुद' आडम्बर प्रिय नहीं धर्म प्रिय बनो आभूषण भार स्वरूप है ध्यान साधना का दिशाबोध पर्वाधन की एक रूपता का प्रश्न सद्विचार हेतु मौलिक प्रक्रिया GmW27. श्री. ई० सन् १९८२ १९८६ १९८४ १९९१ १९८१ १९८९ १९८६ १९८६ १९८७ १९८२ १९६४ १७-२१ २-४ ६-९ ५१-५५ २६-२९ २-९ १७-२० १९-२१ १४-१९ १५-१८ ९-१३ २-४ १९८५ १९८५ १९८४ १९८५ १९८३ २-४ ११-१४ १४-१५ १०-११ G Page #345 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में अंक ३३९ पृष्ठ । ई० सन् __ur - १९५४ २९-३२ ११ १९५२ १०-१२ ८३-९२ लेख सूर्यदेव शर्मा एक आश्चर्यमय ग्रन्थ हजारीप्रसाद द्विवेदी अपभ्रंश के जैन साहित्य का महत्त्व हजारीमल बांठिया जर्मन जैन श्राविका डॉ० शार्लोटे क्राउझे पुरातत्त्वाचार्य पद्मश्री स्व० मुनि जिनविजय जी वैराग्य के पथ पर हरजसराय जैन एक मधुर स्मृति त्यागपत्र का स्पष्टीकरण दौरे के संस्मरण परमार्थनिष्ठ महावीर महावीर : आत्मविश्वास महावीर का व्यक्तित्त्व सुहृदय श्री मुनिलालजी पार्श्वनाथ विद्याश्रम १९९७ १९८८ १९५० १-७ १७-२५ ५ ११-१२ Mr My More ३३-३५ ८१-८२ २३-२६ १९६२ १९६३ १९५३ १९६१ १९५७ १९५१ १९६४ १९५६ ४१-४२ १३-१५ ६६-६८ ६३-८० Page #346 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४० श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक ६ ई० सन् १९५३ पृष्ठ २८-३३ १९८३ २-५ हमारी यात्रा के कुछ संस्मरण हर्षचन्द जैनत्व का गौरव और हम हरिशंकर पाण्डेय भक्तामरस्तोत्र : एक अध्ययन हरिशंकर वर्मा महावीर का मंगल उपदेश हरिहर सिंह कुंम्भारिया का महावीर मन्दिर कुंभारिया के जैन अभिलेखों का सांस्कृतिक अध्ययन ७-९ १९९५ ७-९ १९६२ ४९-५० १९७४ १९७७ १९७७ १९७० १९७८ १९७३ १९७१ १९७७ जैन साहित्य में स्तूपनिर्माण की प्रथा तारंगा का अजितनाथ-मंदिर तीर्थंकर प्रतिमाओं का उद्भव और विकास तीर्थक्षेत्र शत्रुजय सोलंकी-काल के जैन मन्दिरों में जैनेतर चित्रण हरिओम सिंह जैन दर्शन और मार्क्सवाद, सत् का स्वरूप ४७-५२ ३०-३६ २५-३८ १६-२२ ३-१३ ४३-५२ १९-२५ ३०-३२ aur १९८१ १६-२० Page #347 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख ई० सन् १९८१ १९७६ ३४१ पृष्ठ १८-२१ २५-३० १९८२ ३८ १९५९ १९६४ १९६५ ४३-४५ २५-२९ ७-१३ १-२ महावीर संदेश-दार्शनिक दृष्टि जैन दर्शन में बंध और मुक्ति हरिवल्लभ भयाणी दशरूपकावलोक में उद्धृत अपभ्रंश उदाहरण हस्तिमल जी 'साधक' । अहिंसा की प्रतिष्ठा का मार्ग जैन समाज में फोटो प्रचार ब्रह्मचर्य की गुप्ति हीरा कुमारी जैनदर्शन हीराचन्द्र सूरि 'विद्यालंकार' पर्युषण की सही आराधना हीरालाल जैन आचार्यसम्राट पूज्य श्री आत्माराम जी महाराज : एक अंशुमाली हीरालाल रसिकलाल कापडिया संवेगरंगशाला-एक स्पष्टीकरण हुकुमचन्द्र संगवे अजीवद्रव्य ३ १९५२ ९-१५ ११ १९५९ १०-१२ १९९४ १२ ९ १९६९ १९७१ २६-३२ ३२ . १७-२२ Page #348 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख पृष्ठ ई० सन् १९८२ १९७३ १९७१ चिन्तन : सम्यक् जीवन दृष्टि मृत्यु एवं संलेखना षड़ावश्यक में सामायिक हुकुमचंद सिंघई २८-३१ ३२-३९ १६ ' प्रतिज्ञा १९५१ २१-२५ ७-९ MAMmm , १९९० ८३-९० ३३-३५ १९९० हेमन्तकुमार जैन भट्टअकलंककृत लघीयस्त्रय : एक दार्शनिक अध्ययन त्रिलोचन पंत मेरे संस्मरण : मालवीय जी त्रिवेणीप्रसाद सिंह मानव व्यक्तित्व का वर्गीकरण ज्ञानचन्द जैन शास्त्रों में वर्णित १८ श्रेणियों के उल्लेख ज्ञानमुनि जी अभिमान बुरा है अहिंसा की लोकप्रियता आचार्य प्रवर : आत्माराम जी महाराज ४१-५० १९७५ १८-२१ १९६१ १९६४ १९५७ २२-२३ १९-२४ ३२-३४ Page #349 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४३ 8. 9 9 ई० सन् १९५८ १९५७ १९५७ १९५५ १९५५ १९६४ १९५८ Turm witwarror श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख आचार्यश्री मोतीराम जी आधुनिक विज्ञान और अहिंसा तृष्णा और उसका अंत दीपमाला : एक आध्यात्मिक पर्व भगवान् महावीर और उनका शांति संदेश भगवान् महावीर के आठ संदेश भगवान् राम से दीपमाला का क्या संबंध महापर्वसंवत्सरी वीतराग की उपासना वीतराग महावीर की दृष्टि स्थानकवासी समाज का दुर्भाग्य क्षमा का आदर्श Amarchand Mahāvīra Ashok Kumar Singh Sādhnā of Mahāvīra as Depicted in Upa'dhānaśruta Metrical studies of Daśāśrutaskandha Niryukti in the light of its parallels 47 पृष्ठ २०-२२ १०-१४ १९-२० २५-२८ ५-१७ २८-३२ २१-२४ २४-२८ २६-३० 2 १९५५ ६ ११-१२ १९६२ १९५९ १९६३ १९५९ ६२-६४ २९-३१ 232 र 4-6 1997 1-17 10-12 7-9 1995 1996 90-98 59-76 Page #350 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४४ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख अंक 7-9 10-12 ई० सन् 1997 1997 पृष्ठ 89-103 107-118 10 1978 27-32 1966 1996 1966 33-40 84-111 35-37 Nirgrantha Doctrine of Karma: A Historical Perspective § Aștakaprakarana : An Introduction A. Majumdar The Nature of object in Jaina philosophy Bashistha Narayan Sinha Concept of Ahimsā in the śāntiparva Philosophical Aspect of Non-Violence Rșabha deva: A study B.N. Tripathi Problem of suffering as conceived in Jainism Ibid Charlotte Krause The Heritage of Last Arhat Mahavira Dinanath Sharma 'सिया and असिया' Two Prakrit forms And Pischel on Them Dulichand Jain Relevance of Non-Violence in modern life 1975 1975 26-29 27-32 1997 1-27 7-9 1990 79-82 10-12 1996 101-109 Page #351 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में ३४५ लेख अंक ई० सन् पृष्ठ 1969 1969 1977 1978 1977 1976 1969 - 28-34 28-34 27-34 22-30 25-32 28-31 22-26 Dr. Harihar Singh Jainism in Gujarat Ibid Jaina Temple Sculptures of Gujarat Origin and Development of Tirthankara Images. Sixteen Vidyādevis as Depicted in Temple at Kumbhāriā. The Eight Dikpālas as Depicted in the Jaina Temple of Kumbhāriā Tīrthakşetras in Jainism Indra Bhushan Panday Jaina Influence on Shree Rāmānujācārya Jaina Concept of Liberation Nature and Role of Devotion in Jaina Sadhana J. P. Sharma Jaina and Buddhist Tradition Regarding the Origins of Ajātsattu's War with the Vajjins-A New Interpretation Ibid 80 Ao Nawo OOO 1971 · 1971 1972 26-30 30-35 22-28 1974 27-35 1974 27-36 Page #352 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४६ अंक ई० सन् पृष्ठ 1972 29-30 13 1996 996 115-119 1973 20-30 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख K. B. Shastri Jaina Temples in Karnataka K. D. Bajpai Jaina Archaeology and Epigraphy L. K. L. Shrivastava Jaina view of Kevalin L. K. Bharatiya Sociology in Jaina Literature Madhu Sen Jaina system of Education as Revealed from Niśīthacūrni 9. Ibid M. L. Mehta Some Important Prakrit works Compendia of Dịștivāda Prakrit Bhaşyas Contribution of Jainism to Indian Philosophy Kundakunda's view-points in the Samayasāra The Pūrva 1971 31-37 35-41 1969 1969 33-37 32-39 26-28 1968 1968 1973 1973 1978 1978 35-36 53-58 23-26 33-35 Page #353 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४७ अंक ई० सन् पृष्ठ । 3 4 10 1971 1971 1975 27-34 25-28 24-33 10-12 1995 99-103 श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख Maruti Nandan Prasad Tiwari Sarasvati In Jaina Sculptures Ibid The Iconography of the Jaina Yaksnī Cakresvari Nandini Mehta Select Vyāntara Devatās in Early Indian Art and Literature Nathamal Tatia Progress of Prakrit & Jaina Studies Priya Jain Sādhaka, Sādhanā & Sādhya Rajjan Kumar Gunavrata and Upāsakadaśānga Ramchandra Jain Ahiṁsā in the Ancient East S. C. Pande Ācārya Hemacandra and Ardhamāgadhi S. D. Sharma and S. S. Lishk Latitude of the Moon as Determined in Jaina Astronomy 1968 24-35 1996 77-84 1997 104-108 5 1965 23-28 1997 76-82 2 1975 28-35 Page #354 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ३४८ श्रमण : अतीत के झरोखे में वर्ष अंक ई० सन् पृष्ठ 10-12 1996 83-100 48 10-12 1997 1997 1-28 4-6 लेख Yuacharya Shiv Muni Spiritual Practices of Lord Mahāvīra Shriprakash Pandey Navatattvaprakarana S. M. Jain & A.K. Singh The story of the origin of Yāpaniya Sect Yāpanīya Sect: An Introduction S. P. Narang Panis and Jainas Surendra Kumar Garga Sri Hanumāna in Padmapurāna Dr. Surendra Varma Meaning and Typology of Violence 1996 1996 71-83 99-114 1-3 10-12 1995 87-89 10-12 1995 104-117 10-12 1995 81-86 Page #355 -------------------------------------------------------------------------- ________________ विद्यापीठ के प्रांगण में पार्श्वनाथ विद्यापीठ का हीरक जयन्ती समारोह सम्पन्न जैन विद्या के शोध, अध्ययन एवं प्रकाशन के क्षेत्र में पिछले छह दशकों से संलग्न पार्श्वनाथ विद्यापीठ की हीरक जयन्ती के अवसर पर विद्यापीठ के पूर्व निदेशक प्रो० सागरमल जैन एवं मंत्री श्री भूपेन्द्रनाथ जैन के अभिनन्दन, विद्यापीठ के नवीन प्रकाशनों का विमोचन, जैन अध्ययन : समीक्षा एवं सम्भावनायें विषय पर त्रिदिवसीय (५-७ अप्रैल १९९८) राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा विद्यापीठ के सभी शोध छात्रों के पुनर्मिलन आदि कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। समारोह के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविख्यात् कानूनविद् और ब्रिटेन में भारत के पूर्व उच्चायुक्त तथा वर्तमान सांसद डॉ० लक्ष्मीमल सिंघवी ने समारोह की गरिमा बढ़ाई । समारोह में प्रो० सागरमल जैन को जैन विद्या के अध्ययन एवं शोध के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिये पार्श्वनाथ विद्यापीठ की संचालक समिति के तत्त्वावधान में पार्श्वनाथ विद्यापीठ द्वारा एक अभिनन्दन ग्रन्थ, प्रशस्तिपत्र, शाल, चन्दन माला आदि भेंट किया गया। इस सुअवसर पर विद्यापीठ के प्राण श्री भूपेन्द्रनाथ जी जैन की अविस्मरणीय सेवाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनका भी अभिनन्दन करते हुए उन्हें भी एक अभिनन्दन ग्रन्थ भेंट किया गया । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० हरिगौतम इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे । उन्होंने विद्यापीठ द्वारा प्रकाशित नवीन ग्रन्थों का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व राजनयिक श्री एन०पी० जैन ने किया। इस अवसर पर विद्यापीठ की संचालक समिति के श्री नृपराज जी जैन, श्री नेमनाथ जी जैन, श्री इन्द्रभूति बरार, श्री अरिदमन जी जैन, श्री शौरीलाल जैन, श्री मुलक राज जैन तथा स्थानीय जैन समाज के प्रायः सभी गणमान्य जन उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ० रमनलाल सी० शाह, प्रो० रमाशंकर त्रिपाठी, प्रो० हेमनदास नारायण सामतानी, डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव, प्रो० जुगलकिशोर मिश्र, डॉ० धर्मचन्द्र जैन, डॉ० दीनानाथ शर्मा, श्री हजारीमल बांठिया, श्री कन्हैयालाल बांठिया, डॉ. विजयकुमार जैन, प्रो० रमेशचन्द्र शर्मा, डॉ० मारुति नन्दन तिवारी तथा अन्य स्थानीय विद्वान् बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ____ आगन्तुक अतिथियों ने विद्यापीठ में कलामर्मज्ञ श्री सुरेन्द्र मोहन जैन (अवकाश प्राप्त अभियन्ता) के सहयोग से स्थापित पुरातत्त्व संग्रहालय का भी अवलोकन किया और इसमें प्रदर्शित विभिन्न जैन ग्रन्थों की दुर्लभ पाण्डुलिपियों, प्राचीन मुद्राओं, जैनप्रतिमाओं Page #356 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में तथा विभिन्न कलावशेषों के बारे में जानकारी प्राप्त की । ज्ञातव्य है कि पाण्डुलिपियों को छोड़कर इस संग्रहालय में प्रदर्शित अधिकांश कलाकृतियां श्री सुरेन्द्र मोहन जैन ने स्वयं इकत्र की थी और उन्हें लम्बे काल तक अपने संरक्षण में रखने के पश्चात् प्रो० सागरमल जैन की प्रेरणा से अब पार्श्वनाथ विद्यापीठ को समर्पित कर दिया है। अभिनन्दन समारोह, नूतन ग्रन्थों के विमोचन आदि के पश्चात् जैन अध्ययन : समीक्षा एवं सम्भावनायें नामक राष्ट्रीय संगोष्ठी आरम्भ हुई । इसके प्रथम सत्र की अध्यक्षता बौद्ध दर्शन के विशिष्ट विद्वान प्रो० रमाशंकर त्रिपाठी ने की। इस सत्र में डॉ० श्रीरंजन सूरिदेव, डॉ० अजित शुकदेव शर्मा, श्री हजारीमल बांठिया, समणी सम्बोध प्रज्ञा जी आदि के शोधपत्रों का वाचन हुआ । संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में दि० ६-४-९८ को समणी कसमप्रज्ञा, समणी शुभप्रज्ञा, डॉ० कमला जैन, डॉ० सुदर्शन लाल जैन, डॉ० धर्मचन्द जैन, डॉ० मुकेश जैन आदि ने अपने-अपने शोध पत्रों का वाचन किया। संगोष्ठी के तृतीय सत्र में उसी दिन पाटण (गुजरात) से पधारे डॉ० दीनानाथ शर्मा, श्री विश्वनाथ पाठक, डॉ० विजय कुमार जैन, डॉ० अरुण प्रताप सिंह, डॉ० अशोक कुमार सिंह, डॉ० बी० एन० सिन्हा, श्री अतुल कुमार आदि ने अपने-अपने शोध पत्र पढ़े। दि० ७-४-९८ को प्राचीन शोध छात्रों के पुनर्मिलन का भव्य कार्यक्रम रहा । इसके अन्तर्गत माननीय श्री भूपेन्द्र नाथ जैन द्वारा प्रत्येक पूर्व शोध छात्र को शाल, संस्थान का प्रतीक चिन्ह एवं एक आकर्षक अटैची प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस समारोह में इन विद्वानों ने विद्यापीठ और स्वयं के सम्बन्धों पर प्रकाश डालते हुए अपने विकास में पार्श्वनाथ विद्यापीठ के बहुमूल्य योगदान का स्मरण किया। संगोष्ठी के अंतिम सत्र में डॉ० फूलचन्द जैन 'प्रेमी' डॉ० मुन्नी पुष्पा जैन आदि के शोधपत्र पढ़े गये । इस सत्र की अध्यक्षता सारनाथ संग्रहालय के निदेशक महोदय ने की। इस अवसर पर विमोचित होने वाले ग्रन्थों के नाम इस प्रकार हैं। प्रो० सागरमल जैन अभिनन्दन ग्रन्थ श्री भूपेन्द्रनाथ जैन अभिनन्दन ग्रन्थ जैन साधना में तंत्र डॉ० सागरमल जैन जैनधर्म का यापनीय सम्प्रदाय डॉ० सागरमल जैन हिन्दी जैन साहित्य का बृहद इतिहास भाग ३ डॉ० शीतिकंठ मिश्र Page #357 -------------------------------------------------------------------------- ________________ डॉ० दीनानाथ शर्मा डॉ० अशोक कुमार सिंह डॉ० श्री प्रकाश पाण्डेय श्रमण : अतीत के झरोखे में पंचाशक प्रकरण (हिन्दी अनुवाद) दशाश्रुतस्कन्धनियुक्ति नवतत्त्व प्रकरण (अंग्रेजी अनुवाद) सिद्धसेनदिवाकर : व्यक्तित्त्व एवं कृतित्त्व वसुदेवहिन्डी : एक समीक्षात्मक अध्ययन पंचाध्यायी में प्रतिपादित जैन दर्शन डॉ० श्री प्रकाश पाण्डेय डॉ० कमल जैन डॉ० मनोरमा जैन इसके अतिरिक्त इस अवसर पर एक भव्य स्मारिका का भी प्रकाशन किया गया, जिसमें विगत ६० वर्षों के विद्यापीठ के विकास के इतिहास का लेखा-जोखा, विद्वानों के अभिमत, विद्यापीठ द्वारा तैयार कराये गये शोध प्रबन्धों के सार आदि का विस्तृत विवरण है। सम्पूर्ण कार्यक्रम में नवयुवक मंडल, भेलूपुर और बुलानाला एवं जैन मिलन के कार्यकर्ताओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कार्यक्रमों को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान किया। विद्यापीठ के नवीन प्रकाशनों के प्रूफ संशोधन, सम्पादन आदि कार्यों में सभी अध्यापकों विशेषकर डॉ० अशोक कुमार सिंह, डॉ० श्री प्रकाश पाण्डेय, डॉ० सुधा जैन, डॉ० विजय कुमार जैन, डॉ० असीम कुमार मिश्र, श्री ओमप्रकाश सिंह आदि ने अथक परिश्रम किया जिससे अल्पकाल में ही उक्त ग्रन्थों का सुन्दर एवं त्रुटिरहित प्रकाशन सम्भव हो सका। Page #358 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 05-4-98 श्रमण : अतीत के झरोखे में पार्श्वनाथ विद्यापीठ हमारे विशिष्ट अतिथियों की दृष्टि में It was my privilege and honour it have participated in the Diamond Jubilee Celebration and national Seminar on April 5th. The quality of Research done at this institution is admirable. The contribution made by this academic institution in Jainism has landed credit to the Banaras Hindu University with whom it is academically affiliated. I pray God that this establishment provides even greater and laudable output. Dr. HariGautam Vice. - Chancellor Banaras Hindu University ०५-०४-९८ किन शब्दों में विद्यापीठ की प्रशस्ति कहूँ ? जैन परम्परा के अध्ययन अध्यापन-अनुसंधान का यह विद्यापीठ एक कीर्ति स्तम्भ है । यह विद्यापीठ अर्हत् पार्श्वनाथ भगवान के नाम के साथ जुड़ा हुआ है। वाराणसी चार तीर्थंकरों की जन्मस्थली के रूप में मान्य और समादृत है । स्वयं भगवान् महावीर एवं भगवान् बुद्ध के चरण इस धरती पर पड़े थे। पार्श्वनाथ विद्यापीठ की हीरक जयन्ती के मंगलमय अवसर पर मेरी विनम्र शुभकामनाएँ । डॉ० बी० एन० जैन, डॉ० सागरमल जैन एवं अन्य पदाधिकारियों तथा सहयोगियों की निष्ठा से समाज उपकृत एवं अभिभूत है । डॉ० लक्ष्मीमल सिंघवी, पूर्व उच्चायुक्त, इंग्लैण्ड Page #359 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में जैन-जगत प्रधानमंत्री द्वारा समवसरण रथ का प्रवर्तन नई दिल्ली ९ अप्रैल : महावीर जयन्ती पर परमपूज्या गणिनी प्रमुख श्रा ज्ञानमती माता जी से शुभ आशीर्वाद प्राप्त कर नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भगवान् ऋषभदेव समवसरण श्री बिहार रथ का भारत भ्रमण हेतु प्रवर्तन किया । इस पुनीत अवसर पर आर्यिका चन्दनमती माता जी, क्षुल्लक श्री मोतीसागर जी महाराज तथा जैन समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने अपने उद्गार व्यक्त किये । कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री धनन्जय कुमार जैन ने की। डॉ० फूलचन्द जैन 'प्रेमी' सपत्नीक सम्मानित लखनऊ १८ मई : पार्श्वनाथ विद्यापीठ के पूर्व शोध छात्र एवं वर्तमान में सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के श्रमण विद्या संकाय में जैन दर्शन विभाग के उपाचार्य एवं अध्यक्ष डॉ० फूलचन्द जैन 'प्रेमी' और उनकी विदुषी धर्मपत्नी डॉ० मुन्नी पुष्पा जैन को प्राकृत मूलाचार (संस्कृत आचार वृत्ति और भाषा वचनिका सहित प्रकाशित) नामक बृहद् ग्रन्थ के श्रेष्ठ सम्पादन कार्य पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित भव्य पुरस्कार वितरण समारोह में अनेक गणमान्य अतिथियों और विद्वानों के समक्ष राज्यपाल श्री सूरजभान ने ११ हजार रुपये की सम्मान राशि व प्रशस्ति पत्र द्वारा सम्मानित किया । पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार द्वारा डॉ० फूलचन्द जैन एवं डॉ० मुन्नी पुष्पा जैन को हार्दिक बधाई। अर्हत् वचन पुरस्कार (वर्ष ९-१९९७) की घोषणा इन्दौर १९ मई : कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर द्वारा वर्ष ९-१९९७ के अर्हत् वचन पुरस्कार की घोषणा की गयी है जो इस प्रकार है । प्रथम पुरस्कार : The Existence of Soul and Modern Science. 9 (2). April 97,9-24, Dr. Parasmal Agrawal, Prof. of Physics, Vikram University, B220, Vivekanand Colony, Ujjain द्वितीय पुरस्कार : Eco-Rationality and jain karma Theory. 9 (3), July 97, 53-68, Mr. Krivov Serguei, Fellow Dr. H. Skolimowski, International Centre for Eco-philosophy, A-15, Paryavaran Complex, South of Saket, New Delhi-110030 Page #360 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में तृतीय पुरस्कार : Kalpavrksas- The Benevolent trees (Scientific Interpretaion),9 (2), April 97,63-73, SriS.M.Jain,7-B, Talawandi, Kota-324005 पुरस्कृत लेखकों को क्रमश- ५००१/ ३००१/ एवं २००१/- रूपये की नकद राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा। प्राकृत भाषा और साहित्य सम्बन्धी ग्रीष्मकालीन अध्ययनशाला सम्पन्न नई दिल्ली १४ जून : भोगीलाल लहेरचन्द इन्स्टीट्यूट ऑफ इन्डोलाजी, दिल्ली द्वारा प्रतिवर्ष मई-जून माह में प्राकृत भाषा और साहित्य के अध्ययन के लिये एक कार्यशाला का आयोजन पिछले १० वर्ष से किया जा रहा है । इसमें समग्र भारत के विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों के ४० वरिष्ठ अध्यापकों एवं शोध छात्र-छात्राओं को पूर्णकालिक अध्येता के रूप में प्रवेश दिया जाता है । इस वर्ष इस अध्ययन शाला का उद्घाटन २४ मई को केन्द्रीय पर्यटन एवं संसदीय कार्यमंत्री श्री मदनलाल खुराना ने किया । अध्ययनशाला के समापन के अवसर पर दि० १४ जून को एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र की शैक्षणिक निदेशक डॉ० कपिला वात्स्यायन और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री एम० एन० वेंकटचलैया विशेष रूप से आमंत्रित किये गये थे । इस समारोह में अध्ययनशाला में तीन सर्वोच्च अध्येताओं को पुरस्कार तथा अन्य अध्येताओं को प्रमाण पत्रों का वितरण किया गया। इस अवसर पर प्राकृत भाषा और जैन विद्या के शीर्षस्थ विद्वान् प्रो० वामन महादेव कुलकर्णी को वर्ष १९९७ का हेमचन्द्रसूरि पुरस्कार डॉ० कपिला वात्स्यायन द्वारा प्रदान किया गया। आचार्य सम्राट श्री देवेन्द्र मुनि जी म. सा० का इन्दौर में भव्य नागरिक अभिनन्दन इन्दौर २८ जून : श्रमण संघीय आचार्य सम्राट श्री देवेन्द्र मुनि जी म० सा० का चातुर्मासार्थ इन्दौर पधारने पर स्थानीय वैष्णव विद्यालय के विशाल प्रांगण में आयोजित भव्यतम समारोह में विराट जनसमूह के समक्ष नागरिक अभिनन्दन किया गया । इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल माननीय भाई श्री महावीर जी तथा मध्यप्रदेश शासन के कई मंत्री भी आचार्य श्री के सम्मानार्थ उपस्थित थे । इस अवसर पर प्रसिद्ध उद्योगपति एवं सुश्रावक श्री नेमनाथ जी जैन ने चार सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की, जिसके अन्तर्गत व्यसन मुक्ति, रोग मुक्ति तथा समाज के कमजोर वर्गों के लोगों को पौष्टिक पोषण प्रदान करने एवं जैन दर्शन के मानवीय सिद्धान्तों के विशद् अध्ययन व प्रसारण हेतु पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की एक शाखा इन्दौर में इसी चातुर्मास से प्रारम्भ करने की घोषणा की। Page #361 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में जैन मुनि की निर्मम हत्या श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन धर्मसंघ के वरिष्ठ सन्त पूज्य श्री सम्पत मुनि जी महाराज की विगत ३० जून को औरंगाबाद (महाराष्ट्र) स्थित स्थानक में निर्मम हत्या कर दी गयी । एक त्यागी की हत्या समाज और शासन के लिये कलंक है। पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार मुनि श्री को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राज्य सरकार से यह मांग करता है कि वह हत्यारों को अतिशीघ्र पकड़ कर उन्हें कठोरतम दण्ड दे ताकि पुन: इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो । __ चेन्नई में द्विदिवसीय जैन विद्या संगोष्ठी सम्पन्न चेन्नई ३ अगस्त :श्रमण संघीय मुनि श्री सुमन कुमार जी के पावन सानिध्य में स्थानीय जैन भवन के सभागार में दि० १-२ अगस्त को द्विदिवसीय जैन विद्या संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस संगोष्ठी के ६ सत्रों में श्री इन्दरराज मेहता, श्रीमती कमला मेहता, श्रीमती शकुंतला सकलेचा, प्रीति नाहर, श्री कृष्ण चन्द्रजी चौरड़िया, श्री दुलीचन्द जी जैन आदि ने अपने-अपने विद्वत्तापूर्ण शोधपत्रों का वाचन किया। संगोष्ठी के आयोजकों का यह दायित्व है कि इसमें पढ़े गये शोधपत्रों का शीघ्र प्रकाशन करें ताकि अन्य लोग भी उससे लाभान्वित हो सकें। श्री ललित कुमार जी को हरिओम पुरस्कार लालभाई दलपत भाई संग्रहालय, अहमदाबाद के प्रभारी, कलामर्मज्ञ श्री ललित कुमार जी को उनके शोध आलेख "द हिस्ट्री ऑफ गुजराती पेन्टिग ऑफ द सिक्सटीन्थ एण्ड सेविन्टीन्थ सेंचुरी-ए रीप्राइजल" परं वल्लभविद्यानगर स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय द्वारा वर्ष १९९७-९८ वर्ष का हरिओम आश्रम पुरस्कार प्रदान किया गया है। पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार द्वारा श्री ललित कुमार की उक्त महान उपलब्धि पर उनका हार्दिक अभिनन्दन। श्री हर्षचन्द्रजी को इन्टरनेशनल मैन ऑफ द इयर १९९७-९८ सम्मान नई दिल्ली १३ अगस्त : कथालोक के यशस्वी सम्पादक श्री हर्षचन्द्र जी को इन्टरनेशलन बायोग्राफिक सेन्टर, कैम्ब्रिज (इग्लैंड) की ओर से १९९७-९८ का “इन्टरनेशनल मैन ऑफ द इयर' सम्मान हेतु चयन किया गया है । पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार की ओर से श्री हर्षचन्द्रजी को हार्दिक बधाई । Page #362 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में योगाभ्यास एवं एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन बड़ोदरा १५ अगस्त : अचलगच्छीय पूज्य मुनिश्री सर्वोदयसागरसूरि की निश्रा में बडोदरा में 'स्वयं स्वस्थ बनें' नामक एक दिवसीय चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित लोगों को योगाभ्यास, लौह चुम्बक चिकित्सा एवं एक्यूप्रेशर सम्बन्धी जानकारी प्रदान की गयी। जयपुर में आचार्य श्री शुभमुनि जी का अविस्मरणीय वर्षावास जयपुर १७ अगस्तः आचार्य कल्प श्री शुभमुनि जी म० सा० ठाणा ३ और महासती श्री चेतनाजी ठाणा ६ बिना किसी पूर्व सूचना के आडम्बर रहित रूप में स्थानीय लाल भवन में चातुर्मास हेतु पधारे । जयपुर श्रीसंघ ने भी इस चातुर्मास को अविस्मरणीय बनाने हेतु सभी प्रकार के तप को आडम्बरविहीन बनाने का संकल्प लिया है जो निश्चय ही प्रसंशनीय है। शोक समाचार श्रीमती चम्पादेवी जैन का निधन ___ पार्श्वनाथ विद्यापीठ के पूर्व अध्यक्ष लाला अरिदमन जी जैन की धर्मपत्नी श्रीमती चम्पादेवी जैन का विगत ११ जुलाई को निधन हो गया । सश्राविका चम्पादेवी का जन्म स्यालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था । आपके पिता श्री स्वतंत्रता सेनानी थे । आपका विवाह सन् १९३५ में श्री अरिदमन जी के साथ हुआ था । आप अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गयी हैं। उनकी स्मृति में उनके परिवारवालों की ओर से पार्श्वनाथ विद्यापीठ को ११००/- रूपये दान स्वरूप भेंट किये गए । पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार श्रीमती चम्पादेवी को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता है। साध्वी नानुकुंवर जी म० सा० का महाप्रयाण श्री हक्मगच्छीय साध्वीरत्ना श्री नानकुंवर जी का ६२ वर्ष की आयु में चित्तौड़गढ़ में दि० २४ जुलाई को अल्प अस्वस्थता के बाद अचानक संलेखना संथारा के साथ निधन हो गया। महासती नानुकुंवर जी ने अपने ५६ वर्षों के दीर्घ दीक्षा काल में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश आदि प्रदेशों के विभिन्न क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर जिन शासन की प्रभावना की है। पार्श्वनाथ विद्यापीठ की ओर से स्वर्गीय महासती जी को हार्दिक श्रद्धांजलि । Page #363 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में श्री रतनलाल जी मोदी दिवंगत जैन धर्मदिवाकर आचार्य सम्राट श्री देवेन्द्रमुनि जी महाराज के शिष्य श्री दिनेशमुनि जी महाराज के संसारपक्षीय पिता श्री रतनलाल जी मोदी का पिछले २९ अगस्त को ८६ वर्ष की आयु में निधन हो गया । आप अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं । पार्श्वनाथ विद्यापीठ परिवार की ओर से स्वर्गीय श्री मोदी जी को हार्दिक श्रद्धांजलि । साहित्य सत्कार श्रीवाग्भट विरचितं नेमिनिर्वाणम् : एक अध्ययन लेखक - डॉ० अनिरुद्ध कुमार शर्मा, प्रकाशक-सन्मति प्रकाशन, २६१/३, पटेलनगर, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, पृष्ठ १२+२२६+९, मूल्य- ३५०.००, प्रकाशन वर्ष १९९८ ई० स० । प्रस्तुत पुस्तक डॉ० अनिरुद्ध कुमार शर्मा के शोध प्रबन्ध श्रीमद्वाग्भट विरचितं नेमिनिर्वाणम् : एक अध्ययन का मुद्रित संस्करण है जिसे उन्होंने जैन साहित्य के युवा मनीषी, प्रसिद्ध विद्वान डॉ० जयकुमार जैन के निर्देशन में पूर्ण किया और उसपर उन्हें मेरठ विश्वविद्यालय द्वारा पीएच०डी की उपाधि प्राप्त हुई । यह ग्रन्थ ८ अध्यायों में विभक्त है । प्रथम अध्याय में ३ खंड हैं । पहले खंड में जैन चरित काव्य परम्परा के उद्भव और विकास का प्रारम्भ से लेकर २०वीं शती तक का सर्वेक्षण प्रस्तुत है । द्वितीय खंड में नेमिनाथ विषयक प्राकृत, संस्कृत, अपभ्रंश, गुजराती, मराठी, हिन्दी, कन्नड़ आदि विभिन्न भाषाओं में रचित साहित्य का संक्षिप्त विवरण है । तीसरे खण्ड में रचनाकार के कुल, सम्प्रदाय, तिथि आदि की चर्चा है । द्वितीय अध्याय भी तीन खण्डों में विभक्त है। इसमें नेमिनिर्वाण की कथावस्तु का वर्णन है। तृतीय अध्याय में ग्रन्थ में प्रयुक्त रस, महाकाव्यत्व, छन्दयोजना, अलंकार आदि का विवेचन है । चौथे और पांचवें अध्यायों में क्रमश: भाषा शैली और वर्णन वैचित्र्य का चित्रण है। छठे अध्याय में ग्रन्थ में प्राप्त दर्शन एवं संस्कृति का विवरण है। सातवें अध्याय में रचनाकार पर कालिदास, भर्तृहरि, भारवि, वाणभट्ट, माघ, हरिचन्द आदि के प्रभाव को दर्शाने के साथ-साथ परवर्ती रचनाकारों पर वाग्भट के प्रभाव को भी दर्शाया गया है । आठवां अध्याय उपसंहा के रूप में है। प्रत्येक विषयों का प्रभावशाली एवं प्रामाणिक रूप से प्रस्तुतीकरण इस पुस्तक की विशेषता है। इसका प्रत्येक पृष्ठ लेखक के श्रम का साक्षी है। ऐसे प्रामाणिक ग्रन्थ के प्रस्तुतीकरण के लिए लेखक और प्रकाशक दोनों बधाई के पात्र हैं । ग्रन्थ का मुद्रण निर्दोष तथा साजसज्जा चित्ताकर्षक है । यह ग्रन्थ जैन साहित्य का अध्ययन करने वाले प्रत्येक शोधार्थियों Page #364 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १० श्रमण : अतीत के झरोखे में के लिये निःसन्देह मार्गदर्शक सिद्ध होगा । विद्यासागर की लहरें : प्रकाशक- श्री दिगम्बर जैन युवक संघ, केन्द्रीय कार्यालय, मनोरमा ट्रेडर्स, वर्णी कालोनी, सागर ४७२००२, मध्यप्रदेश, पृष्ठ १९५ । __ प्रस्तुत पुस्तक में श्रमण परम्परा के आदर्श, सन्तशिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन की उपलब्धियों का अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से विवेचन प्रस्तुत किया गया है । इसमें आचार्यश्री की गुरु-परम्परा, जीवन परिचय, उनके द्वारा दीक्षित साधु, क्षुल्लक, आर्यिका आदि का परिचय, आचार्यश्री की साहित्य साधना, आचार्यश्री द्वारा सम्पन्न कराये गये विभिन्न धार्मिक, सामाजिक आदि कार्यों, आचार्यश्री द्वारा रचित साहित्य पर हो रहे शोधकार्यों आदि का बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुतीकरण किया गया है । इस पुस्तक के लेखक और मूल्य का इसमें संकेत नहीं दिया गया है इससे यही प्रतीत होता है कि वितरण हेतु ही इसका प्रकाशन हुआ है । पुस्तक की साज-सज्जा अत्यन्त आकर्षक और मुद्रण निर्दोष है । ऐसे सुन्दर और महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ न केवल प्रत्येक पुस्तकालयों बल्कि विद्वानों के लिये भी अनिवार्य रूप से संग्रहणीय है। जैन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज (अंग्रेजी), लेखक :श्री बारेलाल जैन, अंग्रेजी अनुवादक : श्री निरंजन जेतलपुरिया; प्रकाशकः के० एस० गारमेन्ट्स, २५, खजुरी बाजार, इन्दौर - मध्यप्रदेश, पृष्ठ - १४,प्रकाशन वर्ष १९९७-९८ ई० ।। प्रस्तुत पुस्तिका में दिगम्बर जैन समाज के गौरव, युगपुरुष, संतकवि आचार्य विद्यासागर जी का जीवनचरित्र सरल और सुबोध अंग्रेजी भाषा में दिया गया है । सर्वोत्तम आर्ट पेपर पर मुद्रित यह लघु पुस्तिका अपनी आकर्षक साज-सज्जा के कारण सहज ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर लेती है । पुस्तक सभी के लिये पठनीय और संग्रहणीय अन्ययोगव्यवच्छेदद्वात्रिंशिका संस्कृत टीका हिन्दी भावार्थ युक्त, रचनाकारआ० विजयसुशीलसूरि, सम्पादक, जिनोत्तमविजय गणि, प्रकाशक, श्री सुशील साहित्य प्रकाशन समिति, जोधपुर, पृष्ठ १२+२०८; प्रकाशनवर्ष वि० सं० २०५३ । कलिकालसर्वज्ञ आचार्य हेमचन्द्रसूरि द्वारा रचित अन्ययोगव्यवच्छेदद्वात्रिंशिका पर आचार्य विजयसुशीलसूरि ने स्याद्वादसुबोधिनी नामक टीका और उसका हिन्दी भावार्थ देकर जिज्ञासुओं का महान् उपकार किया है । पुस्तक के प्रारम्भ में दी गयी १२ पृष्ठों की प्रस्तावना भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । पुस्तक सभी जिज्ञासुओं के लिये पठनीय और संग्रहणीय है। Page #365 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में श्री जिनमन्दिरादि-लेखसंग्रह, लेखक, आचार्य विजयसुशीलसूरि जी म० सा०, सम्पादक - मुनि रविचन्द विजय जी म०, प्रकाशक- श्री सुशील साहित्य प्रकाशन समिति C/o श्री गुणदयाल चन्द जी भंडारी, राई का बाग, पुरानी पुलिस लाइन के पास, जोधपुर, पृष्ठ १२+१४८+५५, मूल्य ५.००, प्रकाशन वर्ष १९९७ ई० स० । इस लघु पुस्तक के लेखक आचार्य श्री विजयसुशीलसूरीश्वर जी महाराज इस युग के विशिष्ट विद्वानों में से हैं । उनके द्वारा १०८ पुस्तकें प्रणीत की गयी हैं । इस लघु पुस्तक में उनके द्वारा पूर्व में लिखे गये जिनमंदिर, जिनमुर्ति, जिनदर्शन, जिनपूजा, जिनभक्ति आदि लेखों का संग्रह है । उक्त लेखों को पुस्तकाकार रूप देने में मुनि रविचन्द विजय जी ने, जो इसके संपादक हैं, सफल प्रयास किया है । पुस्तक जैन उपासकों के लिये उपयोगी है। सौभाग्य देशना - प्रवचनकार-मालवकेशरी श्री सौभाग्यमल जी म० सा० अनुवादक: सम्पादक-मुनि प्रकाश चन्द्र 'निर्भय', प्रकाशक : श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल, ८०, नौलाईपुरा, रतलाम (मध्य प्रदेश) ४५६००१, पृष्ठ २०+११२, मूल्य : १०.००, प्रकाशक वर्ष १९९७ ई० स० । । प्रस्तुत पुस्तक मालव केशरी श्री सौभाग्यमल जी म० सा० के कछ विशिष्ट प्रवचनों का संग्रह है जो पूर्व में 'श्री सौभाग्यमल अमृत बिन्दु' के नाम से गुजराती भाषा में १९७६ ई० में प्रकाशित हुआ था। इसका हिन्दी अनुवाद स्वर्गीय मुनिश्री के अन्तेवासी श्री प्रकाशमुनि जी ने किया है । इस अनुवाद की विशेषता यह है कि इसमें प्रवचनकार के भावों की यथावत रखते हुए उनकी मौलिकता को अक्षुण रखा गया है । पुस्तक जन सामान्य के लिये अत्यन्त उपयोगी है । इसकी साज-सज्जा आकर्षक और मुद्रण निर्दोष है। श्री सौभाग्य की काव्य कथायें - रचियता- आचार्य श्री सौभाग्यमल जी महाराज, सम्पादक- मुनिश्री प्रकाशचन्द्र जी निर्भय; प्रकाशक- श्री धर्मदास जैन मित्र मण्डल, ८०, नौलाईपुरा, रतलाम, मध्यप्रदेश (४५६००१), प्रथम संस्करण १९९७ ई०, पृष्ठ २९+२१४, मूल्य : २५.०० । श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल, रतलाम द्वारा गुरु श्री सौभाग्यमल जन्म शताब्दी के अवसर पर उनके द्वारा रचित साहित्य के प्रकाशक की योजना को क्रियान्वित किया जा रहा है। प्रस्तुत पुस्तक उसी योजना की एक कड़ी के रूप में प्रकाशित हुआ है। इसमें विभिन्न पौराणिक और ऐतिहासिक चरित्रों के माध्यम से नैतिक, सामाजिक और धार्मिक चेतना को जनसामान्य में जागृत करने के लिये पद्य रूप से कथायें दी गयी हैं । पूज्य Page #366 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १२ श्रमण : अतीत के झरोखे में आचार्यश्री की लेखनी से प्रसूत ये कथायें अत्यन्त प्रभावकारी हैं । आचार्यश्री के सुयोग्य शिष्य श्री प्रकाशमुनि जी 'निर्भय' ने अत्यन्त श्रमपूर्वक इन्हें सम्पादित किया है । पुस्तक की साज-सज्जा अत्यन्त आकर्षण और मुद्रण त्रुटिरहित है । ऐसे सुन्दर प्रकाशन के लिये सम्पादक और प्रकाशक दोनों बधाई के पात्र हैं। महावीर की साधना के रहस्य : प्रवचनकार : मुनिश्री चन्द्रप्रभसागर, प्रकाशक: श्री जितयशा फाउंडेशन, ९ सी, एस्प्लानेट ईस्ट, रूम न० २८, कलकत्ता ७०००६८, पृष्ठ ६+९४; मूल्य १५.००, प्रकाशन वर्ष-अगस्त १९९७ । अब भारत को जगना होगा - प्रवचनकार : मुनिश्री चन्द्रप्रभसागर : प्रकाशक- पूर्वोक्त पृष्ठ, ४+१५५; मूल्य - २०.००; प्रकाशन वर्ष - अक्टूबर १९९७ । मुनि श्री चन्द्रप्रभसागर जैन समाज के प्रबुद्ध विचारक, अग्रगण्य लेखक और प्रखर वक्ता हैं । उनके द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिये गये प्रवचनों के अनेक संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं । प्रस्तुत दोनों पुस्तकों में उनके द्वारा जोधपुर में चातुर्मास के अवसर पर दिये गये प्रवचनों का संग्रह है। इनमें विद्वान् वक्ता ने ऐसे समसामयिक प्रश्नों का उत्तर प्रस्तुत किया है जिसकी तलाश प्रायः हर व्यक्ति को दैनिक जीवन में घर और बाहर पड़ती रहती है। पुस्तकें पठनीय और मननीय हैं । ऐसे सुन्दर प्रकाशन के लिये लेखक और प्रकाशक दोनों ही साधुवाद के पात्र हैं । अतीत (उपन्यास) लेखक - ब्रह्मचारी विवेक, सम्पादक- डॉ० यशपाल जैन, प्रकाशक - आचार्य श्री विद्यासागर शोध संस्थान समिति, जबलपुर १९९७ ई०, पृष्ठ १४+१५०; मूल्य - ३०.०० । ब्रह्मचारी विवेक द्वारा प्रणीत इस लघु उपन्यास में असार संसार का अत्यन्त सरल और सुबोध भाषा में चित्रण है । इसमें जीवन के वैराग्य की सीमा को चरम रूप में प्रदर्शित करते हुए वैराग्य की ओर जाने की प्रेरणा दी गयी है । पुस्तक एक बार हाथ में लेने के पश्चात् उसे खत्म किये बगैर छोड़ने की इच्छा नहीं होती । ऐसी सशक्त कृति के प्रणयन के लिए ब्रह्मचारी जी बधाई के पात्र हैं । पक्की बाइंडिग और प्लास्टिक कवर युक्त पुस्तक का मूल्य लागत से भी कम रखना प्रकाशक की सौहार्दता का परिचायक है । पुस्तक सभी के लिये पठनीय और संग्रहणीय है । स्वराज्य और जैन महिलाएँ - लेखिका- डॉ० श्रीमती ज्योति जैन; प्रकाशक- श्री कैलाशचन्द्र जैन स्मृति न्यास, स्टाफ क्वाटर नं० ६, कुन्दकुन्द जैन महाविद्यालय, खतौली २५१२०१ (मुजफ्फरनगर) उत्तरप्रदेश, प्रथम संस्करण १९९७ ई०, पृष्ठ ८+४८; मूल्य-.०० । Page #367 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रमण : अतीत के झरोखे में राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में पुरुषों और महिलाओं का समान रूप से योगदान रहा है। जहां पुरुषों ने आन्दोलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर कर्बानियां दीं, वहीं उनके घरों की महिलाओं ने न केवल उन्हें प्रेरणा दी बल्कि उन्हें सभी प्रकार की पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त भी रखा । अनेक शिक्षित महिलाओं ने तो घर की चारदीवारी से निकल कर पुरुषों के समान ही राष्ट्रीय आन्दोलन में अपनी पूर्णाहुति दी । श्रीमती जैन ने प्रस्तुत लघु पुस्तक में अत्यन्त श्रमपूर्वक ऐसी ही जैनधर्मानुयायी महिलाओं की शौर्यगाथा को प्रस्तुत किया है जिनके बारे में आज समाज को अत्यल्प ही जानकारी है । ऐसे गौरवपूर्ण प्रकाशक के लिये लेखिका और प्रकाशक दोनों ही अभिनन्दनीय हैं । जैनधर्म एवं आत्मसाधना - लेखक, श्रीअमरचन्द छाजेड़, प्रकाशक, अमरचन्द अशोक कुमार छाजेड़, छाजेड़ चेम्बर्स, १९३ मिन्ट स्ट्रीट, पार्क टाउन, मद्रास ६००००३; पृष्ठ १४४, मूल्य-सदुपयोग, प्रकाशन वर्ष १९९७ ई० स० ।। प्रस्तुत पुस्तक में जैनधर्म का संक्षिप्त परिचय, मंगलमय प्रार्थनायें, प्रेरणादायक गीत, मेरी भावना, लघु साधु वन्दना, भक्तामर स्तोत्र, आत्मसिद्धि शास्त्र, अर्थसहित सामायिकसूत्र आदि का अनूठा संकलन है जो नित्य स्वाध्याय के लिये उपयोगी है । हमें विश्वास है कि सरल भाषा में लिखी गयी इस लघु पुस्तिका का सर्वत्र आदर होगा । पुस्तक की साज-सज्जा आकर्षक एवं मुद्रण त्रुटिरहित है। आत्मवैभव - लेखिका श्रीमती रतन चौरड़िया, प्रका०-कल्याणमल चंचलमल चौरड़िया ट्रस्ट, C/o चौरड़िया इलेक्ट्रिकल्स, चौरड़िया भवन, जालौरी गेट के बाहर, जोधपुर ३४२००३, पृष्ठ १६+११२, प्रकाशन वर्ष १९९८ ई० स० । प्रस्तुत पुस्तिका में विदुषी लेखिका ने आत्मा के गुणों एवं क्षमताओं का दिग्दर्शन कराते हुए पंचपरमेष्ठी अरिहन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधु-साध्वी की विशिष्टताओं का विवेचन करते हुए उनकी शरण में जाने की प्रेरणा देते हए बतलाया है कि आत्मा की अनन्त शक्ति को अज्ञानी मनुष्य पहचान नहीं पाता किन्तु यदि वह अनित्य, अशरण, संसार, एकत्व आदि बारह भावनाओं का चिन्तन करे तो निश्चय ही उसकी दृष्टि बदल सकती है । पुस्तक की भाषा अत्यन्त सरल और सुबोध है तथा यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए पठनीय है। सर्वोदयी जैन तंत्र - लेखक, डॉ० नन्दलाल जैन, प्रकाशक, श्री कपूरचन्द जैन पोतदार, अध्यक्ष, पोतदार धार्मिक एवं पारमार्थिक न्यास, पोतदार निवास, टीकमगढ़, मध्यप्रदेश;पृष्ठ १८+८२; मूल्य २५.००, प्रकाशन वर्ष १९९७ ई०स० प्रस्तुत कृति जैन विद्या के विशिष्ट विद्वान्, प्रबुद्ध चिन्तक और सुप्रसिद्ध लेखक Page #368 -------------------------------------------------------------------------- ________________ १४ श्रमण : अतीत के झरोखे में डॉ० नन्दलाल जैन द्वारा पूर्व में अंग्रेजी भाषा में लिखित जैन सिस्टम इन नटशैल क हिन्दी रूपान्तर है । इस ग्रन्थ में विद्वान् लेखक ने जैन तंत्र को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ जैनधर्म से सम्बन्धित प्रत्येक विषयों का प्रभावी रूप में वर्णन किय है । यह पुस्तक शोधार्थियों और जिज्ञासुओं दोनों के लिये समान रूप से उपयोगी है। ऐसे सुन्दर प्रकाशन के लिये लेखक और प्रकाशक दोनों बधाई के पात्र हैं । जिनोत्तम दोहावली रचनाकार- उपाध्याय जिनोत्तमविजय गणि, प्रकाशक- श्री सुशील साहित्य प्रकाशन समिति, जोधपुर, राजस्थान, पृष्ठ १२+९६, मूल्य ११.००, प्रकाशन वर्ष - वि० सं० २०५३ । जैन साहित्य के समुन्नायक, तत्त्वदर्शीपूज्य उपाध्याय श्री जिनोत्तमविजय जी द्वारा सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, नैतिकता, मातृभक्ति, पितृभक्ति, धर्म महिमा, समता, दया, मैत्री, विद्या, निर्ग्रन्थ वचन आदि विभिन्न विषयों पर रचित प्रस्तुत कृति को उन्हें आचार्य पद प्राप्त होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित किया गया है । इस उत्तम कृति के अध्ययन-मनन से प्राणी निश्चय ही शांति की अनुभूति कर सकता है। ऐसे सुन्दर प्रकाशन के लिये प्रकाशक गण बधाई के पात्र हैं । पुस्तक की साज-सज्ज आकर्षक और मुद्रण त्रुटिरहित है। - साभार स्वीकार १. दृष्टांत रत्नाकर लेखक - श्री लक्ष्मीचंद सी० संघवी, प्रकाशकफारवर्ड इण्टरप्राइजेज, २. धूतपापेश्वर बिल्डिंग, मंगलवाडी, २४०, शंकर सेठ रोड, मुम्बई ४००००४, प्रथम संस्करण १९९८, पृष्ठ ४८, मूल्य - १२.०० । ww २. श्री सुदर्शनमेरुविधान - लेखक- श्री राजमल जी पवैया, संपा०, डॉ० देवेन्द्रकुमार शास्त्री; प्रकाशक - श्री भरत पवैया, ४४, इब्राहिमपुरा, भोपाल १९९८ ई०, पृष्ठ ४+६०; मूल्य - ६.०० । ३. श्रीतीनलोकविधान - लेखक, संपादक एवं प्रकाशक, पूर्वोक्त, पृष्ठ ४+७६; मूल्य ८.०० । ४. जिनखोजा तिनपाइयां - लेखिका, डॉ० साध्वी प्रियदर्शना श्री एवं डॉ० साध्वी सुदर्शना श्री ; प्रकाशक ----> ; प्रकाशनवर्ष वि० सं० २०५३; पृष्ठ १०+१५० ; मूल्य- सदुप्रयोग । ५. यह है मार्ग ध्यान का लेखक - श्री चन्द्रप्रभसागर; प्रकाशक प्रयागचन्द रजनीश सिंघवी एवं जितयशा फाउंडेशन, ९ सी, एस्प्लनेड ईस्ट, ७०००६९; प्रकाशन वर्ष १९९७ ई०, पृष्ठ ५४, मूल्य - ३.०० । श्री कलकत्ता - Page #369 -------------------------------------------------------------------------- ________________ Statement About the Ownership & Other Particulars of the Journal ŚRAMANA 1. Place of Publication 2. Periodicity of Publication 3. Printer's Name, Nationality and Address 4. Publisher's Name Nationality and Address 5. Editor's Name, Nationality and Address 6. Name and Address of Individuals who won the Journal and Partners or share-holders holding more than one percent of the total capital. Dated: 1.4.98 : Parsvanatha Vidyapitha I.T.I. Road, Karaundi, Varanasi-5 : Quarterly. : Vardhaman Mudranalaya Bhelupur, Varanasi-10. Indian. I, Dr. Sagarmal jain hereby declare that the particulars given above are true to the best of my Knowledge and belief. : : Parsvanatha Vidyapitha I.T.I. Road, Karaundi, Varanasi-5 : Dr. Sagarmal jain Dr. Shivprasad As above. : Parsvanatha Vidyapitha Guru Bazar, Amritsar. (Registered under Act XXI as 1860) Computer Composing Rajesh Computers, PH. 220599 Signature of the Publishers S/d Dr. Sagarmal Jain Page #370 -------------------------------------------------------------------------- ________________ NO PLY, NO BOARD, NO WOOD. 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