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________________ १९३ Jain Education International अंक ई० सन् पृष्ठ ६-७ १९६१ १९६२ ७-१० ३६-३७ ७-१२ १९९१ ३५-४३ For Private & Personal Use Only श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख कमला जैन तत्त्वोपदेष्टा महावीर आचार्य श्री का पुण्य जीवन कमला पंत जैन सम्मत आत्मस्वरूप का अन्य भारतीय दर्शनों से तुलनात्मक विवेचन कमला जोशी अन्य प्रमुख भारतीय दर्शनों एवं जैन दर्शन में कर्मबन्ध का तुलनात्मक स्वरूप जैन दर्शन में आवश्यक साधना जैन दर्शन में परीषह जय का स्वरूप एवं महत्त्व शिशु की निद्रा कमलेश कुमार जैन जैन आलंकारिकों की रस विषयक मान्यताएँ कवि-स्वरूप : जैन आलंकारिकों की दृष्टि में प्राकृत जैनागम परम्परा में गृहस्थाचार तथा उसकी पारिभाषिक शब्दावली बारहभावना : एक अनुशीलन रस-विवेचन : अनुयोगद्वारसूत्र में १९९१ १९८९ »ar १९८९ ३३-४३ २७-३४ ४१-४५ ३२-३४ १९५४ १९७८ - १९७६ १९९२ १९९४ १९७६ १४-२४ ८-१२ ४७-६८ ५६-६१ २३-२९ www.jainelibrary.org
SR No.525034
Book TitleSramana 1998 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year1998
Total Pages370
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size10 MB
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