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________________ १४४ Jain Education International . अंक ४ ४ ४० ४० ४० ४० ४० ई० सन् १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ पृष्ठ २७-३४ ३५-४१ ३-९ १०-१४ १५-४३ १-८ ९-१९ ४० ४० For Private & Personal Use Only श्रमण : अतीत के झरोखे में लेख लेखक जैन दर्शनों में आवश्यक साधना कु० कमला जोशी कर्म की विचित्रता-मनोविज्ञान की भाषा में डॉ० रत्नलाल जैन पार्श्वकालीन जैनधर्म डॉ. विनोद कुमार तिवारी महाकवि माघ ओसवाल थे? श्री माँगीलाल भूतोड़िया कोरंट गच्छ डॉ० शिवप्रसाद भगवान् महावीर की मंगल विरासत पं० सुखलाल संघवी अध्यात्म और विज्ञान प्रो० सागरमल जैन कल्पप्रदीप में उल्लिखित भगवान् महावीर के कतिपय तीर्थक्षेत्र डॉ० शिव प्रसाद भगवान् महावीर की प्रमुख आर्यिकाएँ डॉ० अशोक कुमार सिंह नाणकीय गच्छ डॉ० शिव प्रसाद उत्तराध्ययन में मोक्ष की अवधारणा डॉ० महेन्द्र नाथ सिंह भारतीय संस्कृति और श्रमण परम्परा श्री सौभाग्यमल जैन वेदान्त दर्शन और जैन दर्शन डॉ० सुदर्शनलाल जैन जैन एवं मीमांसा दर्शन में कर्म की अवधारणा डॉ० कृष्णा जैनः सांख्य दर्शन और जैन दर्शन : एक तुलनात्मक अध्ययन डॉ० सुदर्शनलाल जैन आहार-विहार में उत्सर्ग - अपवाद मार्ग का समन्वय डॉ० सुदर्शनलाल जैन जैनागमवर्णित तीर्थंकरों की भिक्षुणियाँ डॉ० अशोक कुमार सिंह ४० 555 w w w w o ouuuaaa ४०६ ४० २०-२९ ३०-३३ २-३४ ३५-३८ २-९ ४० ४० ८ ४०८ ४० ८ ४० ९ ४० ९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ १९८९ www.jainelibrary.org १०-१६ १७-२१ २-१० ११-१५ १७-३० xo
SR No.525034
Book TitleSramana 1998 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year1998
Total Pages370
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size10 MB
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