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________________ १६६ श्रमण : अतीत के झरोखे में Jain Education International For Private & Personal Use Only लेख भक्तामरस्तोत्र की सचित्रप्रतियाँ ह.भक्तामरस्तोत्र के बाद पूर्तिरूप स्तवकाव्य भक्तामरस्तोत्र के श्लोकों की संख्या ४४ या ४८ भगवान् नेमिनाथ का समय-एक विचारणीय समस्या भगवान् नेमिनाथ के समय सम्बन्धी संशोधन भागवद्गीता और जैनधर्म महत्त्वपूर्ण जैन कला के प्रति जैन समाज की उपेक्षा वृत्ति मानतुंगसूरिरचित पंचपरमेष्ठिस्तोत्र महावीरचर्या ग्रन्थ सम्बंधी महापंडित राहुल जी के दो पत्र महावीर-सम्बन्धी एक अज्ञात संस्कृत चरित्र महावीर स्तुति महो० समयसुंदर का एक संग्रहग्रन्थ-'गाथासहस्री' मुनि मेघकुमार-रचित किरातमहाकाव्य की अवचूरि मेघदूत की एक अज्ञात् बालबोधिका पंजिका मेवाड़ में चित्रित कल्पसूत्र की एक विशिष्ट प्रति मौलिक चिन्तन की आवश्यकता रघुवंश की अज्ञात जैन टीका เS * * * * * * , * * * * * * ) ง ई० सन् १९७१ १९७० १९७० १९७२ १९६९ १९६४ १९८० १९७५ १९६६ १९७४ १९५८ १९७२ १९६८ १९६४ १९७७ १९६३ १९६२ पृष्ठ १३-१९ २५-२९ २७-३१ १५-१९ १२-१३ ११-१२ १३-१४ १४-१७ ९-१० ५२-५६ १३-१५ २३-२८ १५-१७ ६३-६४ २४-२६ २०-२३ ३१-३२ www.jainelibrary.org
SR No.525034
Book TitleSramana 1998 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShivprasad
PublisherParshvanath Vidhyashram Varanasi
Publication Year1998
Total Pages370
LanguageHindi
ClassificationMagazine, India_Sramana, & India
File Size10 MB
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