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( ६८ )
१७. अथ गर्भ मास संख्या ज्ञान द्वारम्
मास ज्ञानस्य पृच्छायां गभिण्या भृगुनन्दनः।
लग्नात्स्याद्यतमे स्थाने मासानाख्याति तावतः ॥१०॥ अर्थात् गर्भिणी के मास ज्ञान के प्रश्न में शुक्र लग्न से जितने संख्यक स्थान पर हो उतने मास का गर्भ कहे।
भाष्य : गर्भ कितने मास का है यह जानने के लिए प्रश्न लग्न से शुक्र जिस भाव में स्थित हो, उस भाव की संख्या के बराबर मास कहने चाहिए। किन्तु यदि शुक्र नवम भाब से आगे हो तो गणना लग्न से न करके पंचम भाव से करनी चाहिए। इस रीति से गर्भ की मास संख्या का अनुमान आसानी से किया जा सकता है। दिन का ज्ञान करने के लिए शुक्र का स्पष्टीकरण कर लें और स्पष्ट शुक्र के जितने भुक्तांश के हो उतने दिन व्यतीत माने । उदाहरणार्थ गर्भ के मास ज्ञान लिए दो व्यक्तियों ने क्रमश: वृषभ और कन्या लग्न में प्रश्न किए। उस दिन शुक्र सिंह राशि के १२ अंश (४/१२) पर था।
वृषभ लग्न से शुक्र चतुर्थ भाव में स्थित होने के कारण यह निश्चय किया गया कि गर्भिणी को चौथा मास चल रहा है। चूंकि शुक्र के भुक्त अंश १२ थे। अत: कहा गया कि गर्भ तीन मास एवं १२ दिन का है। इसी प्रकार कन्या लग्न की कुण्डली में पंचम स्थान (मकर) से आठवें स्थान में शुक्र के होने के कारण आठवां मास या सात गहीने और बारह दिन का गर्भ कहा गया।
उक्त रीति के अलावा लग्न के नवमांश के द्वारा भी गर्भ के मास आदि का निर्धारण किया जा सकता है। लग्न के भोग्य
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