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( १०३ ) रुष्टा का आगमन विचार
आपसी विवाद, मतभेद या रतिकलह से रुष्ट होकर गयी स्त्री पुनः पति के पास आवेगी या नहीं? इस प्रश्न का विचार करते समय निम्नलिखित योगों का ध्यान रखना चाहिए : (i) प्रश्न लग्न से चतुर्थ पर्यन्त सूर्य और आगे शुक्र हो
तो नहीं लौटेगी। (ii) शुक्र और सूर्य चतुर्थ भाव से आगे हों तो अवश्य
लौट आवेगी। (iii) शुक्र का उदय शीघ्र हुआ हो या वह वक्री हो तो
वह स्वयंमेव शीघ्र आ जावेगी। (iv) शुक्र से पूर्ण चन्द्रमा का सम्बन्ध हो तो शीघ्र और
क्षीण चन्द्रमा का सम्बन्ध हो तो विलम्ब सेआवेगी। न धृता परिणीता वा योगेऽत्र सुखदायिका।
परिणीता धृता वाऽपि पाश्चात्ये सुखदायिका ॥४॥ अर्थात् (धृता एवं परिणीता के) इस योग के प्रसंग में रखैल या विवाहिता स्त्री पहले सुख देने वाली नहीं होती। किन्तु बाद में सुख देती है।
भाष्य : श्लोक ६२ में बताया गया है कि यदि चतुर्थ स्थान में पाप प्रभाव हो तो विवाहिता स्त्री होती है। किन्तु इस योग में सुख (चतुर्थ) भाव पर पाप प्रभाव होने से सुख की हानि स्वाभाविक है। इसी प्रकार सप्तम स्थान पर पाप प्रभाव वश रखैली स्त्री का लाभ होता है। इस योग में सप्तम स्थान में स्थित पाप ग्रहों की लग्न पर पूर्णदृष्टि होने के कारण शरीर-सुख की हानि होना तर्कसंगत है। इस प्रकार इस योग में प्रारम्भ में कष्ट
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