Book Title: Nandanvan Kalpataru 2014 04 SrNo 32
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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सज्जनशतकम
एच्. वि. नागराजराव*
अवातरत् सज्जनरक्षणायै झषादिरूपैर्य इह प्रपञ्चे । तं दुष्टसम्मर्दनमादिदेवं जनार्दनं नम्रशिरा नमामि ॥ १ ॥ श्रीकृष्णोऽवततार सज्जनपरित्राणाय भूमण्डले कंसाख्यं निजधान दुष्टमखिलद्विष्टं ह्यनिष्टाशयम् । गीतां चोपदिदेश पाण्डुतनयं कृत्वा निमित्तं जगत्क्षेमाय श्रुतिलालितं तमतुलानन्दाय वन्दामहे ॥२॥ देवो विमानीकूतराजहंसो यस्याः पतिर्हसगतिः सदा या । ध्यायन्ति यां पूज्यतमाश्च हंसाः सा शारदा मे कवितां ददातु ॥३॥ यः सज्जनानां पथि सर्वविघ्नान् स्वर्णपालीपवनैथुनोति । प्रत्यूहमुत्पादयते खलानां मार्गे च तं वारणवक्त्रमीडे ॥४॥ इन्द्रः पविं गणपती रदनं स्वकीयं विष्णुश्च चक्रमुपयुज्य शिवस्त्रिशूलम् । विघ्नान् निहत्य मम सज्जनवर्णनायां तन्वन्तु मङ्गलमिमे कृतधर्मरक्षाः ॥५॥ हरिरिति हर इति जिन इति नानानाम्ना वदन्ति यद् भक्ताः ।
* राष्ट्रपतिसम्मानभाजनम्; गौरवसन्दर्शनप्राध्यापकः, कर्नाटकसंस्कृतविश्वविद्यालयः, बेङ्गळूरु; गौरवसम्पादकः, सुधर्मा
संस्कृतदिनपत्रिका, मैसूरु ।
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