Book Title: Nandanvan Kalpataru 2014 04 SrNo 32
Author(s): Kirtitrai
Publisher: Jain Granth Prakashan Samiti
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गुर्जरदेश: डो. वासुदेव वि. पाठकः 'वागर्थः'
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो भव्ये भारते रे लोल, भव्ये भारते रे लोल, विश्वेऽखिले विशिष्टे लोल;
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो.... ॥
शं-करौ च शङ्करगोविन्दौ, गुर्जर रे लोल, मान्यौ मोहनमोहनदासौ गुर्जर रे लोल;
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो.... ॥
दयानन्दहेमाचार्याद्याः गुर्जरे रे लोल, रामानुजवल्लभमध्वाद्याः गुर्जर रे लोल;
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो.... ॥
सहजानन्दसमा बहवोऽपि गुर्जर रे लोल, रविशङ्करवल्लभाश्च अस्मद्गुर्जरे रे लोल;
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो.... ॥
महतां सम्मानं भवतीति गुर्जर रे लोल, एवं विकसितमेव समग्रं गुर्जर रे लोल;
धन्यो धन्यो गुर्जरदेशो.... ॥
_ 'गरबा' गानमिदम् ॥ (समूहे, गर्भ-दीप-नृत्यम् = गरबा.)
('गरबा' तु गुजरातस्य समूहनृत्यरूपः विशिष्टः प्रकारः ।)
३५४, सरस्वतीनगर, आंबावाडी अमदावाद-१५, फोन : ०७९-२६५७४५७५४
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