Book Title: Agam 44 Chulika 01 Nandi Sutra
Author(s): Devvachak, Jindasgani Mahattar, Punyavijay
Publisher: Prakrit Granth Parishad

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Page 35
________________ Jain Education Intemational प्राकृतग्रन्थपरिषद ग्रन्थाङ्क ९ पणानाम्याचारामष्टिगाजायजगजीवाजामवियाणानजायजगणदाज नदीसूत्र मतादाजगबंधुजयश्जापियामाहालयवाजयश्यागयतावातिबयाणपहिमा अयशबाइयालजयवादमामव्हावाराससबजयाबायासतद्देत्रिणमाया स्मातराखरतसियालद्द। अयस्यानमाणवायरयासरि टादमा विखहरासघनया स्तदातभरकंडवरित्रयायाधसंजमतव बारयशनामासम्मतयारियल झायणदिवेकरसननादानसयासंघचक सातदेसालपडाय सियतवतियमवरिटाडानशासंघरदसतगवल्सबायसदि घासनविकारयालादविणायचयरयाणदादतालमा.मदव्याधरकनियामाय गाकसरालासावगडणमऊयरिगरिखडम्यनिगरातयबुदमासेवामाता KHNAATERIAL For Private & Personal Use Only - R नरिमन एमालाANTA.३२५.०४-१-५-२ . मर५ तिवाणायाधमकदंवावासमदसाबाअंतगडदमावाणुनाराववाश्यदसावायला वागणवाविवागमवादिहावायवासवदधयणायद्यावदिसवाणुटागोवाशाजाणियाम तालायरियासतंसावाणुमाकिमणुमकवाणुमाकवश्कालंगवतियाणुमायादिकरखा है शिमातालपवतियानसताना एमालामाशामणमयीणाम एवमणायतावादयताएदा हरापातञ्चसयहियामधारयणायमा याएकापायावसंगहालसंवरण शिकारवधितिकरणलवालावडहायला पदावरेखवण्तदायासमणुमायामाशामायापलाएदासम्मलालासंगराएवाईफायहामुदिशाना T A लाखसंतवचाराधा सायश्रीतामुत्साहमाहिमकरणमधएपाधनकलडारिकारापतापुतवईमानकरतिपालनाal नन्दिसूत्रमूलकी 'ल.' संज्ञकातिके प्रथम पत्रकी और अंतिम (३५वे ) पत्रकी द्वितीय पृष्ठि । www.jainelibrary.org

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