Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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पडिवत्ति-१
यणासमाधाए कसाबसमाधाए मारणंतियसमुग्धाए वेउव्यिवसमुग्धाए आहारी निव्याघाएणं छघिसिं वाघायं पडुच प्तिय चउदिसि पंचदिसि उवचाओ देवमणुयनेरइएसु नस्थि ठिती जहणणेणं अंतोमुहत्तं रक्कोसेणं तिष्णि वाससहस्साई सेसं तं चैव एगगतिया दुआगतिया परित्ता असंखेना पन्नत्ता समणाउसो सेतं बायरवाउक्काइया सेत्तं वाउक्काइया ।२७1-26
(३५) से किं तंओराला तसा पाणा ओराला तसा पाणा चउब्विहा पत्नत्ता तं जहा-बेइंदिया तेइंदिया चउरिदिया पंचेंदिया।२८1-27
(३६) से किं तं येइदिया बेइंदिया अनेगविहा पनत्ता तं जहा-पुलाकिपिया जाव समुद्दलिक्खा जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नत्ता तं जहा पन्नत्तगा य अपजत्तगा च तेसिणं भंते जीवाणं कति सरीरमा पत्रत्ता गोयमा तओ सरीरंगा पन्नत्ता तंजहा-ओरालियए तेवए कम्मे तेसि गंभंते जीवाणं केसहालिया सरीरोगाहणा पत्रत्ता गोयमा जहणेणं अंगुलासंखेजइभागं उक्कोसेणं बारसजोवणाई छेवसंघचणा हुंडसंठिया चत्तारि कसाया चत्तारि सण्णाओ तिणि लेसाओ दो इंदिया तओ समुग्धाया-वेयणाकसाया मारणंतिया नोसपणी असण्णी नपुंसगवेवगा पंच पजत्तीओ पंच अपज्जत्तीओ सम्मदिट्टीवि मिच्छादिट्टीवि नो सम्मामिच्छादिट्टी नो चस्खुदंसी अचक्षुदंसणी नो ओहिंदंसणी नो केवलदसणी, ते ण भंतेजीवा किं नाणी अन्नाणी गोचमा नाणीवि अन्नाणीविजे नाणी ते नियमा दुनाणी तं जहा-आभिणियोहियनाणि च सुयनाणि य जे अन्नाणी ते नियमा
अनाणी-मइअन्नाणी व सुयअन्नाणी य नो मनजोगी वइजोगी कायजोगी सागरोवउत्तावि अनागारोवउत्तावि आहारो नियमा छदिसिं उववाओ तिरियमणुस्सेसु नेरइयदेवअसंखेजवासाउयवजेसु ठिती जहन्नेणं अंतोमुहत्तं उक्कोसेणं बारस संवच्छराणि समोहयावि मरंति असमोहयावि परंति कहिं गच्छिति नेरइयदेवअसंखेनवासाउयवजेसु गच्छति दुगइया दुआगइया परिता असंखेज्जा सेत्तं बेइंदिया।२९।-28
(३७) से किं तं तेइंदिया तेइंदिया अनेगविहा पत्रता तं जहा-ओवइया रोहिणिया जाव हत्थिसोंडा जे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पन्नता तं जहा-पजत्तगा व अपनत्तगाय तहेव जहा वेइंदियाणं नवरं-सरीरोगाहणा उक्कोसेणं तिण्णेि गाउयाई तिणि इंदिया ठिती जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं एगूणपन्नराइंदियाई सेसं तहेव दुगइया दुआगइया परित्ता असंखेना पन्नत्ता से तं तेइंदिया।३०1-29
___ (३८) से किं तं चरिंदिया चउरिदिया अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा-अंधिया शेत्तिया जाव गोमयकीडाजे यावण्णे तहप्पगारा ते समासओ दुविहा पत्रत्ता तं जहा-पज्जत्तगा य अपञ्जमा य तेसि णं भंते जीवाणं कति सरीरगा पन्नता गोयमा तओ सरीरंगा पत्रत्ता तं चेव नवरं-सरीरोगाहणाउक्कोसेणं चत्तारि गाउयाइं इंदियाईचत्तारि चक्खुदंसणी अचक्छुदंसणी ठिई उक्कोसेणं छप्पासा सेसं जहा तेइंदियाणंजाव असंखेज्जा पन्नत्तासेतंचउरिदिया।३१1-30
(३९) से किं तं पंचेंदिया पंचेदिया चउव्विहा पत्रत्ता तं जहा-नेरइया तिरिक्खजोणिया मणुस्सा देवा।३२191
(४०) से किं तं नेरइया नेरइया सत्तविहा पन्नत्ता तं जहा रयणप्पभापुढविनेरइया जाय अहेसत्तमपुढविनेरइया ते समासओ दुविहा पत्रत्ता तं जहा-पजत्तगा य अपजत्तगा य तेसिणं भंते जीवाणं कति सरीरंगा पन्नता गोयमा तओ सरीरमा पत्रत्ता तं जहा-वेउव्विए तेयए कम्मए तेसिणं
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