Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 142
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir परियत्ति ५ १३३ (३५३) सुहुमे णं भंते सुहुमेत्ति कालतो केवचिरं होति गोषमा जहण्णेणं अंतोमुहुतं उक्कोसेणं असंखेजकालं जाव असंखेज्जा लोया सव्वेसिं पुढविकाली जाव सुहुमणिओयस्स पुढविकालो अपज्ञ्जत्तगाणं सव्वेसिं जहृण्णेणवि उक्कोसणवि अंतोमुहुत्तं एवं पञ्चत्तगाणवि सव्वेसिं जहणेणवि उक्को सेणदि अंतोमुहुतं ॥२३२1-231 (३५४) सुहुमस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहणणेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं असंखेचं कालं असंखेजाओ उस्सप्पिणी- ओसप्पिणीओ कालओ खेत्तओ अंगुलस्स असंखेजतिभागी सुहुमपुढविकाइयस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होति गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं अनंतं कालं जाय आवलियाए असंखेज्जतिमागे एवं जाव वाऊ सुहुमवणस्पति-सुहुमनिओगस्स अंतरं जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं जहा ओहियस्स अंतरं एवं अपजत्ता-पचत्तगाणवि [अंतरं] २३३|-232 (३५५) एवं अप्पाबहुगं सव्वत्थोया सुहुमतेउकाइया सुहुमपुढविकाइया विसेसाहिया सुहुनआउ बाऊ विसेसाहिया, सुहुमणिओया असंखेज्जगुणा सुहुमवणस्सतिकाइया अनंतगुणा सुहुमा विसेसाहिबा एवं अपजत्तगाणं पचत्तगाणवि एवं चेव एतेसि णं मंते सुहुमाणं पञ्चत्तापज्जत्ताणं कयरे कयरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा सव्वत्थोवा सुहुमा अपचत्तगा, सुहुमा पत्ता संखेजगुणा एवं जाव सुहुमणिगोया, एएसि णं भंते सुहुमाणं सुहुमपुढविकाइयाणं जाव सुहुमणिओयाण य पञ्जत्ता-पञ्जत्ताण य कचरे कयरहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया दा सव्वत्थोवा सुहुमते काइया अपजत्तगा सुमपुढविकाइयाअपजत्तगा विसेसाहिया सुहुमआउ-काइया अपत्ता विसेसाहिया सुहुमवाउकाइया अपञ्चत्ता विसेसाहिया सुहुमतेउकाइयापचत्तगा संखेज्जगुणा सुहुमपुढवि-आउ वाउपजतगा विसेसाहिया सुहुमणिओया अपत्तगा असंखेजगुणा सुहुमणिओया पञ्चत्तगा संखेज्जगुणा सुहुमवणस्सतिकाइया अपजत्तगा अनंतगुणा सुहुमअपत्ता विसेसाहिया सुहुमवणस्सइकाइया पज्जत्तगा संखेचगुणा सुहुमा पज्जत्ता विसेसाहिया । २३४ -233 (३५६) बायरस्स णं मंते केवतियं कालं किती पत्रत्ता गोयमा जहण्णेणं अंतो मुहुत्तं उक्कोसेणं तेत्तीसं सागरोवमाई ठिई पत्रता एवं बायरतसकाइयस्सवि बायरपुढबीकाइयस्स बावीस वाससहस्साइं बायर आउस्स सत्तवाससहस्सं बायरतेउस्स तिण्णि राइंदिया बायरवाउस्स तण्णि याससहस्साई बायर्वण दस वाससहरसाई एवं पत्तेयसरीरबादरस्सवि निओयस्स जहण्णेणवि उक्कोसेणवि अंतोमु, एवं बायरनिओयस्सवि अपज्ञ्जत्तगाणं सव्वेसिं अंतोमुहुत्तं पञ्जत्तगाणं उक्कोसिया ठिई अंतोमुहुत्तूणा कायव्वा सव्वेसिं [बादरपुढचिकाइयस्स बावीसं वाससहस्साइं बादर आउकाइयस्स सत्त वाससहस्साइं बादरतेक्काइयस्स तिण्णि राईदियाई बादरवाउकाइयस्स तिण्णि वाससहस्साइं बादरवणस्सतिकाइयस्स दसवाससहस्साई पत्तेयबादरवणस्सतिकाइयस्स दस वाससहस्साइं निओदस्स बादरनिओदस्स य अंतोमुहुत्तं जहण्णुक्कस्सं बादरतसकाइयस्स तेत्तीसं सागरोवमाई अपजत्ताणं सव्वेसिं अंतोमुहुत्तं पञ्जत्ताणं उक्कोसा अंतोमुहुत्तूणा निओदस्स बादरणिओदस्य पत्ताणं अंतो मुहुतं जहणेणवि उक्कोसेणवि । पा. । - 1२३५-234 (३५७) बायरे णं भंते बायरेत्तिं कालओ केवचिरं होति गोयमा जहनेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं असंखेनं कालं -असंखेज्जाओ उस्सप्पिणी- ओसप्पिणीओ कालओ खेत्तओ अंगुलस्स असंखेजतिभागो बायरपुढविकाइया आउतेउ वाउपत्तेयसरीरबादरवणस्सइकाइयस्स बायर - निओयस्स For Private And Personal Use Only

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