Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 50
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ४१ पडिवत्ति-३, उसो-ति-२ अप्पाणेणं विसद्धलेस्संदेवं देवि अणगारंजाणति-पासति हंता जाणति-पासति।१०४/-103 (१३८) अण्णउस्थिया णं भंते एबमाइक्खंति एवं मासेंति एवं पनवेति एवं पवेति-एवं खलु एगे जीवे एगेणं सपएणं दो किरियाओपकरेति तं जहा-सम्मत्तकिरियं च मिच्छत्तकिरियं च जं समयं सम्पत्तकिरियं पकरेति तं समयं पिच्छतकिरियं पकरेति जं समय मिच्छत्तकिरियं पकरेति तं समयं सम्मत्तकिरियंपकोति सम्मत्तकिरियापकरणताए मिच्छत्तकिरियंपकरेति मिच्छत्तकिरियापकरणताए सम्पत्तकिरियं पकरेति एवं खलु एगे जीवे एगेणं सपएणं दो किरियाओपकरेतितं जहासम्मत्तकिरियं च मिच्छत्तकिरियं च से कहमेयं भंते एवं गोयमा जण्णं ते अण्णउत्थिया एवमाइक्खंति जाय एवं परूवेति एवं खलु एगे जीवे एगेणं सपएणं दो किरियाओ पकरेति तहेव जाद सम्पत्तकिरिवंच मिच्छतकिरियं चजेतेएवमाहंसु तं णं मिच्छा अहं पुण गोवमा एवमाइक्खामि जाव परूवेमि-एवं खलु एगे जीवे एगेणं सनएणं एगं किरियं पकरेति तं जहा-सम्मत्तकिरियं वा मिच्छत्तकिरियं वा जं समयं सम्मत्तकिरियं पकरेति नो तं समय मिच्छत्तकिरियं पकरेति जं समयं मिच्छत्तकिरियं पकरेति नो तं समयं सम्मतकिरियं पकरेति सम्नत्तकिरिवाप- करणवाए नो निच्छत्तकिरियं पकरेति मिच्छत्तकिरियापकरणयाए नो सम्मत्तकिरियं पकरेति एवं खलु एगे जीवे एगेणं समएणं एग किरियंपकरेति तं जहा-सम्मत्तकिरियं वा मिच्छत्तकिरियं वा १०५1-104 (१३९) से तं चउविहपडिवत्तीए तिरिक्ख जोणिय उद्देसओ बीओ समत्तो।१०६५-105 तिचाए पडिवत्तीए तिरिक्खजोणि अस्स बीओ उदेसओ सपत्तो. - णु स्सा धि गा रो :-- (१४०) से किं तं मणुस्सा मगुस्सा दुविहा पन्नत्ता तं जहा-संमुच्छिममणुस्सा व गभवकतियमणुस्सा य से किं तं समुच्छिममणुस्सा संमुच्छिममणुस्सा एगागारा पन्नत्ता कहि णं भंते समुच्छिममणुस्सा संमुच्छति गोयमा अंतोमणुरसखेत्ते जहा पन्नवणाए जाव अंतोमुत्तद्धाउया चैव कालं पकरेंति सेत्तं संमछिममणुस्सा ।१०७1-106 (१४१) से किं तं गब्भवक्कंतियमणुस्सा गब्भवक्कंतियमगुस्सा तिविधा पन्नत्ता तं जहाकम्मभूमगाअकम्मभूमगाअंतरदीवगा।१०८1-107 (१४२) से किं तं अंदरदीवगा अंतरदीवगा अट्ठावीसतिविधा पन्नत्ता तं जहा-एगोरुया आभासिता वेसाणिया हयकण्णा गयकण्णा गोकण्णा सक्कुलिकण्णा आयंसमुहा मेंढमुहा अयोमुहा गोमुहा आसमुहा हस्थिमुहा सीहपुहा वाधमुहा आसकण्णा सीहण्णा अकण्णा कण्णापाउरणा उक्कापुहा मेहमुहा वि मुहा विजुदंता घणदंता लट्ठदंता गूढदंता सुद्धदंता।१०९१-108 (१४३) कहि णं पते दाहिणिल्लाणं एगोस्यमणुस्साणं एगोरुवदीये नामं दीवे पन्नत्ते गोचमा जंबुद्दीवे दीवे मंदरस्स पव्ययसस दाहिणे णं चुल्लहिमवंतस्त वासघरपब्वयस्स उत्तरपुरथिमिल्लओ चरिमंताओ लवणसमुदं तिणि जोयणसयाई ओगहित्ता एस्थ णं दाहिणिलाणं एगोरुयमणुस्साणं एगोरुयदीवे नामं दीवे पत्रत्ते-तिणि जोयणसवाई आयामविखंभेणं नव एगणपन्ने जोयणसए किंचि विसेसेण परिक्षवेणं से णं एगाए पउमवरवेदियाए एगेणं च वनसंडेणं सव्वओ समंता संपरिक्खित्ते सा णं पउपवरवेदिया अद्ध जोवणाई उड्ढं उच्चत्तेणं पंच धणुसयाई विक्खंभेणं एगोरुयदीवं समंता परिक्खेवणं पन्नत्ता तीसे णं पउमवरवेदियाए अयमेयासवे वण्णावासे पत्रत्ते तं जहा-वइरामया निम्मा एवं वेतियावण्णओजहा रायपसेणिएतहाभाणियव्यो।११०|-109 (१४४) साणं पउपवरवेतिया एगेणं वणसंडेणं सव्वओ समंता संपरिस्वित्तासेणं वणसंडे For Private And Personal Use Only

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