Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 111
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १०२ जीवाजीवापिगप - ३/दी०१२१९ अस्थिणं भंते लवणसमुद्दे बहवे ओराला बलाहका संसेयंति संमुच्छंति वासं वासंति हंता अस्थि जहा णं भंते लवणसमुद्दे बहवे ओराला बलाहका संसेयंति संमुच्छंति वासं वासंति तहाणं बाहिरएसवि समुद्देसु बहवे ओराला बलाहका संसेयंति संमुच्छंति वासं वासंति नो तिणढे समढे से केपट्टेणं भंते एवं वुचति-बाहिरगा णं समुछा पन्ना पुत्रप्पमाणा वोलट्टपाणा बोसट्टमाणा समभरघडताए चिट्ठति गोयमा बाहिरएसुणं समुद्देसुबहवे उदगजोणिया जीवा पोग्गला य उदगत्ताए वक्कमति विउकूकमंति चयंति उववजंति से तेणटेण गोयमा एवं बुन्नति बाहिरगा णं समुद्दा पुत्रा पुत्रप्पमाणा जाव समभरपडताए चिट्ठति।१७०)-169 (२२०) लवणेणं भंते समद्दे केवतियं उबेह-परिवुइबीए पत्रत्तेगोयमालवणस्सणं समुद्दस्स उभओ पासिं पंचानउति-पदेसे गंता पदेसं उब्वेह परिवुड्ढीए पन्नत्ते पंचानउति-बालग्गाई गंता वालागं उबेह-परिवड्दीए पन्नत्ते पंचानउति- लिखाओ गंता लिक्खं उबेह-परिवढीए पन्नते जूवा - जव - जयमझे अंगुल -विहत्यि-रयणी-कच्छी-धण-गाउय-जोयण-जोयणलत-जोयणसहस्साई गंता जोयणसहस्सं उव्येह-परिवुड्ढीए पन्नत्ते लवणे णं मंते समद्दे केवतियंउस्सेह-परिवड्ढीए पत्नत्ते गोयमा लवणस्सणं समुद्दस्स उभओपासिं पंचानउति पदेसे गंता सोलसपएसे उस्सेहपरिवुड्ढीए पनत्रो पंचानउति-वालग्गाई गंता सोलस-वालग्गाई उस्सेह-परिवुड्ढीए एवं जाय पंचानउति-जोयणसहस्साई गंता सोलस-जोयणसहस्साई उस्सेघ-परिवुड्ढीए।१७१]-170 (२२१) लवणस्स णं भंते समुद्दस्स केमहालए गोतित्थे, गो. लवणस्स णं समुदस्स उभओपासिं पंचाणउति जोयणसहस्साई गोतित्ये पत्रत्ते लवणस्स णं भंते समुद्दस्स केमहालए गोतित्यविरहिते खेत्ते गोयमा लवणस्सणं समुदस्स दस जोयणसहस्साइं गोतित्थविरहिते खेत्ते पन्नत्ते लवणस्सणंभंते समुद्दस्स केमहालए उदगमाले गोयमा दस जोयणसहरसाइंउदगमाले पत्रत्ते 1१७२।-171 (२२२) लवणे णं भंते समद्दे किंसंठिए पनते गोयमा गोतित्यसंठिते नायासंठिते सिप्पिसंपुडसंठिते अस्सखंधसंठिते वलभिसंठिते बट्टे वलयागारसंठिते पन्नत्ते लवणेणं भंते समुद्दे केवतियं चकवालविक्खंभेणं केवतियं परिक्खेवणं केवतिय उव्वेहेणं केवतियं उस्सेहेणं केवतियं सव्वग्गेणं पन्नत्ते गोयमा लवणे णं समुद्दे दो जोयणसहयसहस्साईचक्कवालविक्खंभेणं पन्नास जोयणसतसहस्साई एकासीतिं च सहस्साई सतं च एगुणयालं किंचिविसेसूर्ण परिक्खेवेणं एगं जोयणसहस्सं उव्वेधेणं सोलस जोयणसहस्साई उस्सेहेणं सत्तरसजोयणसहस्साइंसब्बग्गेणं।१७३1-172 (२२३) जई णं भंते लवणसमुद्दे दो जोयणसतसहस्साई चकवालविक्खभेणं पन्नरस जोयणसतसहस्साई एकासीतिं च सहस्साई सतं च एगुणयालं किंचिविसेसूर्ण परिक्खेवेणं एग जोयणसहस्सं उब्वेहेणं सोलस जोयणसहस्साइं उस्सेधेणं सत्तरस जोयणस्सस्साइं सव्वग्गेणं परत्ते कहा णं मंते लवणसमुद्दे जंबुद्दीबे दीवं नो ओवीलेति नो उप्पीलेति नो चेव णं एककोदगं करेति गोयमा जंबुद्दीवेणंदीवे भरहेरवएसु वासेसु अरहंता चक्कवट्टी बलदेवा वासुदेवा चारणा विजाधरा समणा सपणीओ सावया सावियाओ मणुया पगतिमद्दया पगतिविणीया पगतिउवसंता पगतिपयणुकोहमाणमायालोभा मिउमद्दवसंपत्रा अल्लीणा भद्दगा विणीता तेसि णं पणिहाए लवणसमुद्दे जंबुद्दीवे दीवं नो ओवीरेति नो उप्पिलेति नो चेव णं एदोगदं करेति चुल्लहिमवंत-सिहरिसु वासहरपव्वतेसुदेवा महिड्ढिया जाव पलिओवमहितीया परिवसंति तेसिणं पणिहाए लवणसमुद्दे जंबुद्दीवं दीवं नो ओवीलेति नो उप्पीलेति नो चेव णं एगोदगं करेति हेमवत-हेरण्णवतेसु यासेसु मणुया For Private And Personal Use Only

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