Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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पडिबत्ति-३, उद्देसो-ति.-१ जातीकुलकोडीजोणीपमुहसयसहस्सा पन्नत्ता तं जहा-चत्तारिजलजा णं चतारि थलजाणं चत्तारि महारुक्काणं चत्तारि महागुप्मियाणं कति णं भंते वल्लीओ कति वलिसता पन्नत्ता गोपमा चत्तारि वल्लीओ चत्तारि बल्लीसता पन्नत्ता कति णं भंतेलत्ताओ कति लतासता पनत्ता गोयमा अट्ठ लताओ अट्ठ लतासता पन्नत्ता कतिणं मंते हरियकाया कति हरियकायसया पत्रत्ता गोयमातओ हरिचकाया तओ हरिकावसया पन्नत्ता फलसहस्सं च बेंटबद्धाणं फलसहस्सं च नालबद्धाणं ते सव्वे हरितकायमेव समोयति ते एवं सपणुगम्पमाणा-समणुगम्ममाणा समणुगाहिज्जमाणा-समणुगाहिजमाणा समणुपेहिञ्जमाणा-समणुपेहिजमाइणा समणुचिंतिजमाणा-समणुचिंतिजमाणा एएसु चेव दोसुकाएसु समोयरंति तं जहा-तसकाए वेव थावरकाए चेव एवमेव सपुव्वावरणं आजीवदिलुतेणं चउरासीति जातिकुलकोडीजोणीपमुहसतसहस्सा भवंतीति मक्खाया।९९।-98
(१३३) अस्थि णं भंते विमाणाई अच्चीणि अचियावत्ताई अचिप्पपाई अचिकताई अधिवण्णाई अच्चिलेस्साई अचिन्झयाई अन्त्रिसिंगाइं अञ्चिसिट्ठाई अचिकूड़ाई अच्चुत्तरावडिंसगाई हंता अस्थि ते णं मते विपाणा केमहालता पन्नत्ता गोयमा जावतिए णं सूरीए उदेति जावइयएणं च सूरिए अत्थेमेति एवतिवाइं तिण्णोवासंतराइं अत्थेगतियस्स देवास एगे विक्कमे सिता से णं देवे ताए उक्किट्ठाए तुरिवाए जाय दिवाए देवगतीए वीतीवयमाणे-बीतीवयमाणेजहणेणं एकाईवा दुयाई वा उक्कोसेणं छम्मासे वीतीवएजा-अत्यंगतियं विमाणं वीतीवएज्जा अत्यंगतियं विमाणं नो वीतीवएज्जा एमहालताणं गोचमा ते विमाणा पत्रत्ता समणाउसो अस्थि णं भंते विमाणाई सोधीणि सोत्थियावत्ताई सोत्थियपभाई सोस्थियकंताई सोत्थियवण्णाई सोस्थियलेसाई सोत्थियज्झयाई सोस्थिसिंगाई सोस्थिकूडाइं सोस्थिसिट्ठाइं सोत्थुत्तरवडिसगाई हंता अस्थि ते णं भंते विमाणा केसहालता पत्रता गोयमा [जावतिए णं सूरिए उदेति जावइएणं च सूरिए अत्थमेति एवतियाई पंच ओयासंतराई अस्थेगतियस्स देवस्स एगे विक्कमे सिता से णं देवे ताए उक्किट्ठाए जाव देवगतीए धीतीवयमाणे-वीतीवयमाणे जाव समपाउसो, अस्थिणं भंते विमाणाई कामाइंकामावत्ताई [कामप्पमाई कामकंताई कामवण्णाइं कामलेस्साई कामझयाई कामसिंगाई कामकूडाई कामसिट्ठाई] कामुत्तरवडिंसयाई हंता अस्थि ते णं मंते विमाणा केमहालया पन्नत्ता गोयमा (जावतिए णं सूरिए उदेति जावइएणं च सूरिए अस्थमेति एवतियाई सत्त ओवासंतराई अत्थेगतियस्त देवस्स एगे विककमे सिता से णं देवे ताए उकिकट्ठाए जाव समणाउसो) अस्थि णं भंते विमाणाई विजयाई बेजयंताईजवंताई अपराजिताइहंता अस्थि तेणंभंते विमाणा केमहालता पन्नत्ता गोयमा जावतिए ण सूरिए उदेति जावइए णे च सूरिए अत्यत्ति एवइयाइं नव ओवासंतराई [अत्यंगतियस्त देवस्स एगे विक्कमे सि से णं देवे ताए उक्किट्ठाए जाव देवगतीए वीतीवयमाणे-वीतीवयमाणे जहण्णेणं एकाहं वा दुयाहं वा उक्कोसेणं छम्मासे वीतीवएजा] नो चेवणं ते विमाणे वीईवएज्जा एमहालयाणं विमाणा पत्रत्ता समणाउसो १००99
तचाए पडिवत्तीए तिरिक्ख जोणिअस्स पदमो उद्देसओ समतो.
-: ति रिख जो णि य उ स ओ बी ओ :(१३४) कतिविहा णं मंते संसारसमावण्णगा जीया पन्नत्ता गोरमा छब्विहा संसारसपावण्णगा जीया-पुढयिकाइया जाव तसकाइया से किं तं पुढविकाइया दुविहा पन्नत्ता तं सुहमपुढविकाइया वायर-पुढविकाइया से किं तं सुहुमपुढविकाइया दुविहा पजतगाय अपनत्तगा
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