Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 46
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पडिवत्ति-३, उद्देसो-ति. - १ रिक्डजोणिया जाव पंचिंदियतिरिक्खजोगिया य से किं तं एगिंदियतिरिक्खजोणिया एगिदियतिरिक्खजोणिया पंचविहा पत्रत्ता तं जहा- पुढिवकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया जाव वणस्स इकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं पुढविक्काइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पन्नता तं जहा सुहुमपुढविकाइयएगिदियतिरिक्खजोणिया बादरपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया प से किं तं सुहुमपुढविकाइएगिदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पत्रत्ता तं जहा- पचत्तसुहुमपुढविकाइयएगिंदिचतिरिक्खजोणिया अपजत्तसुहुमपुढविकाइयएगिदियतिरिक्खजोणिया वादरपुढविकाइएगिंदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पत्रत्ता तं जहा पञ्जत्तबादरपुढविकाइए गिंदियतिरिक्खजोणिया अपज्ञत्तवादरपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया से तं बादरपुढविकाइयएगिंदियतिरिक्खजोपिया से तं पुढविकाइएगिंदिया से किं तं आउकूकाइयएगिंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पत्ता एवं जहेब पुढविकाइयाणं तहेब आउकायभेदो एवं जाय वणस्सतिकाइया से तं वणस्सइकायएगिदियतिरिक्खजोणिया से किं तं वैइंदियतिरिक्खजोणिया बेइंदियतिरिक्खजोगिया दुविधा पन्नत्ता तं जहा-पज्जत्तगवेइंदियतिरिक्खजोणिया अपजत्तगबेइदियतिरिक्खजोणिया से तं बेइंदियतिरिक्खजोणिचा एवं जाव चउरिदिया, से किं तं पंचेदियतिरिक्खजोणिया तिविहा पन्नत्ता जलयर पंचेदिय तिरिक्खजोणिया धलवर पंचेंद्रियतिरिकूखजोणिया खहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं जलबरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुबिहा पन्नत्ता तं जहा - संमुच्छिमजलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य गव्भवकूकंतियजलंयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य से किं तं संमुच्छिमजलय रपंचेंदिबतिरिक्खजोणिया, दुविहा पत्रत्ता तं जहा पञ्जत्तगसंमुच्छिमजलयरपंचेंद्रियतिरिक्खजोगिया अपजत्तगसंमुच्छिमजलयरपंचेंद्रियतिरिक्खजोणिया से तं संमुच्छिमजलवरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं गव्भवकूकंर्तियजलवरपंचेदितिरिक्खजोणिया दुविहा पत्ता तं जहा पत्तगगय्भवकुकंतियजलयर पंचेदिपतिरिक्खजोणिया अपजत्तगगदभवक्कतियजलयरपंचेदिव्यतिरिक्खजोणिया से तं जलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं थलथरपंचेदिंयतिरिक्खजोणिया दुविधा पत्रत्ता तं जहा-चउप्पयथलयपंचेंद्रियतिरिक्खजोणीया परिसप्पथलयरपंचेदियतिरिक्खजोमिया से किं तं चउप्पदथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोगिया, दुविहा पत्रत्ता तं जहा संमुच्छिमचउप्पथलवरपंचेदियतिरिक्खजोणिया गद्भवक्कतियचउप्पयथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य जहेच जलवराणं तहेव चउक्कतो भेदो सेत्तं चप्पदथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं परिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुविहा पत्रत्ता तं जहा- उरपरिसप्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया भुवपरिसप्पथलवरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से किं तं उरपरिसप्पथत्तयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया, दुबिहा पत्रता तं जहा जहेब जलचराणं तहेव चउक्कतो भेदो एवं भूयपरिसमाणवि भाणितव्यं से तं भुयपरिसम्पथलयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया से तं थलयरपंचेंद्रियतिरिक्खजोणिया से किं तं खहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पत्रत्ता तं जहा संमुच्छिमखहयरपंचेदियतिरिक्खजोणिया गद्भवकूकंतियखयरपंचेंद्रियतिरिक्खजोगिया य से किं तं संमुच्छिमखहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया दुविहा पन्नत्ता तं जहा- पचत्तगसंमुच्छिमखहयरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया अपजत्तगसंमुच्छिमखहवरपंचेंदियतिरिक्खजोणिया य एवं गभवकंतियावि जाव पजत्तगगमवक्कतियावि अपजत्तगगव्भवकुकंतियावि खहवरपंचेंदियतिरिक्खजोणियाणं भंते कतिविधे जोणिसंग्रहे पन्नत्ते गोमा तिविहे जोणिसंग्रहे पन्नत्ते तं जहा- अंडया पोयया संमुच्छिमा अंडया तिविधा पत्रत्ता तं जहा For Private And Personal Use Only ३७

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