Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 44
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir परिवति-३, उसोने.-२ सायासोक्खवहुले यावि विहरेज्जा एवामेव गोयमा असदभावपट्टवणाए सीतवेदणेहितो नरएहितो नेरइए उच्चट्टिए समाणे जाई इमाइं इहं माणुस्सलोए हवंति तं जहा-हिमाणि वा हिमपुंजाणि वा हिमपडलाणि वा हिमकूडाणि वा सीयाणि वा सीयपुंजाणि वा सीयपडलाणि वा सीयकूडाणि वा तुसाराणि वा तुसारपुंजाणि वा तुसारपद्धलाणि वा तुसारकूड़ाणि या ताई पासति पासित्ता ताई औगाहति ओगाहित्ता से णं तस्य सीतंपि पविणेजा तहपि पविणेना खुहपि पविणेजा जरंपि पविणेजा दाहपि पविणेला निदाएन वा पयलाएजा वा जाव उसिणे उसिणभूए संकसमाणे-संकसमाणे सायासोक्खबहले यावि विहरेजा गोयमा सीयवेयणिज्जेस नरएस नेरइया एत्तो अणिद्वतरियं वेव सीतवेदणं पचणुभवमाणा विहरंति।२०।-89 (१०६) इमीसे गं भंते रयणप्पभाए पुढवीए नेरइयाणं केवतिवं कालं ठिती पत्रत्ता गोयमा जहण्णेणवि उक्कोसेणविठिती भाणितव्या जाव अधेसत्तमाए।९१1-90 (१०७) इमीसे णं मंते रवणप्पमाए पुढवीए नेरइया अनंतरं उव्यट्टिय कहिंगच्छंति कहिं उपवनति - किं नेरइयसु उववतंति किं तिरिक्खजोणिएसु उववजंति एवं उव्वट्टणा भाणितव्वा जहा वक्कंतीए तहाइहविजाव अहेसत्तमाए।९२।-91 (१०८) इमीसे णं भंते रयणपभाए पुढवीए नेरइया केरिसयं पुढविफासं पच्चणुभवमाणा विहरंति गोयमा अणिटुंजाव अमणामं एवं जाव अहेसत्तमाए इमीसे णं भंते रयणप्पभाए पुढवीए नेरइया केरिसय आउफासं पच्चणुभवमाणा विहरंति गोयमा अणिढे जाव अमणामं एवं जाय अहेसत्तमाए एवं जाय वणप्फतिफासं अधेसत्तमाए पुढयीए, इमा णं भंते रयणप्पभापुढवी दोचं पुढविं पणिहाय सव्यमहंतियावाहल्लेणं सबक्खुड्डिया सव्वतेसु हंता गोयमा इमा णं स्यणप्पमापुढवी दोच्चं पुढविं पणिहाय जाव सव्वक्चुड्डिया सव्वंतेसुदीचा गंभंते पुढवीं तच्चं पुढवि पणिहाय सब्बमहंतिवा बाहल्लेणं पुच्छा हंता गोयमा दोच्चा णं पुढवी जाब सबक्खुड्डिया सव्वंतेसु एवं एएणं अभिलावेणंजाबछट्टिया पुढवीअहेसतमं पुढविपणिहाव सबक्खुड्डिया सव्वंतेसु।९३५-92 (१०२) [इमीसे णं भंते रयणप्पभाए पुढवीए निरयपरिसामंतेसु जे पुटविककाइया जाव वणफतिकाइया ते णंभंतेजीवा महाकम्मतरा चेव महाकिरियतराचेव महाआसवतरा चेव महावेयणतरा चेव हंता गोयमा इमीसे णं रयणप्पभाए पुढवीए निरयपरिसामंतेसु तं चेव जाव महावेदणतराचेव एवंजाब अधेसत्तमा] १९४-91-83-1 (११०) इसीसे णं भंते रयणप्पभाए पुढवीएतीसाए नरयावाससयसहस्सेसु इक्कमिक्कंसि निरयावासंसि सच्चेपाणा सबेभूया सव्वेजीवा सव्वेसत्ता पुढवीकाइयत्ताए जाय वणस्सइ-काइयताए नेरइयत्ताए उववन्नपुव्या हंता गोयमा असतिं अदुवा अनंतखुत्तो एवं जाय अहेसत्तमाए [पुढवीए]।९४193 (१११) पुढवीं ओगाहित्ता नरगा संठाणमेव बाहल्लं विखंभपरिक्खेवेवण्णो गंधो य फासोय ॥९॥-1 (११२) तेसिं महालयत्तं उयमा देवेण होइ कायव्वा जीवा य पोग्गला वक्कति तह सासया निरया ||१०|-2 (११३) उववायपरीमाणं अवहारुच्चत्तमेव संघयणं । संठाणवण्णगंधे फासे ऊसासमाहारे ||११|-3 For Private And Personal Use Only

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