Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 43
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir जोशाजीवाभिगम - ३/ने-२/१०५ अप्पतिद्वाणे नरए नेरइयत्ताए उवण्णा तं जहा-रामे जमदग्गिपुत्ते दढाऊलेच्छतिपुत्ते वसू उवरिचरे सुभूमे कोरल्वे बंपदते दुलणिसुते ते णं तत्थ वेदणं वेदेति-उन्नलं विउलं जाय दुरहियासं, उसिणवेदणिज्जेस णं भंते नरएस नेरइया कैरिसयं उसिणवेदणं पच्चणुब्धवमाणा विहरति गोयमा से जहानामए-कम्पारदारए सिता-तरुणे वलवं जुगवं जुवाणे अप्पायंके पिरणहत्ये दढपाणि-पायपास-पिट्टतरोरुपरिणए घणनिचियवलियवट्टखंधे चम्मेढग दुघण-मुट्टियसमाहयनिचियगायगत्ते उरस्सबलसमण्णागए तलजमलजुयलाहू लंघण-पवण-जवण-पमद्दणसमत्थे छेए दस्खे पट्टे कुसले मेहावी निउणसिप्पोवगए एगं महं अयपिंडं उदगवारगसमाणं गहाय तं ताविय-ताविय कोट्टियकोट्टिय जाव एगाहं वा दुयाहं वा तियाहं वा उककोसेमं अद्धमासं साहणेनासे णं तं सीतं सीतीभूतं अओपएणं संडासएणं गहाय असदभावपट्टवणाए उसिणवेदणिज्जेसु नरएसु पक्खिवेजा से णं तं उम्मिसियणिमिसियंतरेणं पुनरवि पञ्चुद्धरिस्सामित्तिकट्ठ पविरायमेव पासेना पविलीणमेव पासेज्जा पविद्धत्यमेव पासेजा नो चेवणं संचाएति अविरायं वा अविलीणं वा अविद्वत्थ वा पुनरवि पचुद्धरित्तए से जहा वा मत्तमातंगे दुपाए कुंजरे सट्टिहायणे पढमसरयकालसमयंसि वा चरमनिदाघकालसमयंसि वा उपहाभिहए तण्हाभिहए दवग्गिजालाभिहए आउरे झूसिए पिवासिए नुब्बले किलंते एक्कं महं पुखरिणिं पासेना - चाउकोणं समतीरं अनुपुव्यसुजायवप्पगंभीर - सीतलजलं संछण्णपतभिसमुणालं बहुउप्पल - कुमुद - नलिण-सुभग - सोगंधिय पुंडरीय-सयपत्त-सहस्सपत्तकेसर-फुल्योवचियं छप्पयपरिभुञ्जमाणकमलं अच्छविमलसलिलपुत्रं परिहत्थभमंत- मच्छकच्छभं अणेगसउणगणमिहुणय-विरचिय-सहुन्नइयमहुरप्सरनाइयं तं पासइ पासित्ता तं ओगाहइ ओगाहिता से णं तत्य उहंपि पविणेजा तण्डंपि पविणेशा खुहंपि पविणेजा जरंपि पविणेञ्जा दाहंपि पविणेज्जा निदाएजा वा पयलाएन वा सतिं वा रतिं वा घितिं वा मतिं वा उवलभेज्जा सीए सीयभूए संकसमाणे-संकसमाणे साया-सोक्खबहले यावि विहरेशा एवामेव गोयमा असदभावपट्टवणाए उसिणवेदणिज्जेहिंतो नरएहितो नेरइए उट्टिए समाणे जाई इमाई मणुस्सलोयंसि मयंति तं जहागोलियालिंछाणि वा सोडियालिंछाणि वा मंडिवालिंछाणि वा तिलागणीति वा तुसागणीति वा मुसागणीति वा नलागणीति वा अयागराणि वा तंबागराणि वा तउयागराणि वा सीसागराणि वा रुप्पागराणि वा सुवण्णागराणि वा इटावाएति वा कुंभारावाएति वा कवायुयावाएति वा लोहारंवरिसेति वा जंतवाडचुल्लीति वा-तत्ताई समजोतिमूयाई फुल्लकिंसुवसमाणाई उक्कासहस्साई विणिम्मुयमाणाई जालासहस्साई पमुच्चामाणाइं इंगालसहस्साई परिस्खिरमाणाई अंतो-अंतो हुहुयमाणाई चिट्ठति ताई पासइ पासित्ता ताई ओगाहइ ओगाहित्ता से णं तत्य उण्डंपि पविणेजा जाव यावि विहरेज्जा भवेयारूवे सिया नो इणट्टे समटे गोयमा उसिणवेदणिज्जेस नरएस नेरइया एत्तो अणिट्ठतरियंचेव उसिणवेदणं पचणुभवपाणा विहरंति सीयवेदणिजेणं मंते नरएसुनेरइया केरिसयं सीयवेदणं पच्चणुब्भवमाणा विहरंति गोयमा से जहानामए कम्मारदारए सिया तरुणे जुगवं वलयं जाव निउणसिप्पोवगते एगं महं अवपिंड दगवारसमाणं गहाय ताविय-ताविय कोट्टिय-कोटिय जाव एगाहं वा दुयाहं वा तियाहं वा उक्कोसेणं मासं साहणेजा से णं तं उसिणं उप्तिणभूतं अयोमएणं संडासएणं गहाय असल्भावपट्ठवणाए सीयवेदणिज्जेप्तु नरएसु पक्खियेजा से तं उम्मिसियनिमिसियंतरेणं पुनरवि पद्धरिस्सामीति कटु पविरायमेय पासेजा जाव नो चेवणं संचाएजा पुनरवि पच्चुद्धरित्तए से जहानामए मत्तमायंगे जाव For Private And Personal Use Only


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