Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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१८
जीवाजीवाभिगम - २ /-/५७
कालो एवं जाव अंतरदीवियाओ देवित्थियाणं सव्वासिं जहणणेणं अंतीमुहुत्तं उक्कोसेणं वणस्सइकालो |५०1-49
(५८) एयासि णं भंते तिरिक्खजोणित्थियाणं मणुस्सित्थियाणं देवित्थियाणं य कतरा कत राहिंतो अप्पा वा बहुया वा तुल्ला वा विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवाओ मणुस्सित्थियाओ तिरिक्खजोणियाओ असंखेज्जगुणाओ देवित्थियाओ असंखेज्जगुणाओ एयासि णं भंते तिरिक्खजोणित्थियाणं - जलयरीणं थलयरीणं खहयरीणं व कतरा कतराहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्योवाओ खहयातिरिक्खजोणित्थियाओ थलयरतिरिक्खजोणित्थियाओ संखेजगुणाओ जलयरतिरिक्खजोणित्थियाओ संखेज्जगुणाओ एयासि णं भंते मणुस्सित्यीणं-कम्मभूमियाणं अकम्मभूमियाणं अंतरदीवियाण य कतरा कतराहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्योवाओ अंतरदीयग अकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ देवकुरुउत्तरकुरुअकम्मभूमिगमणुस्सि थियाओ दोविल्लाओ संखेज्जगुणाओ हरिवासरम्यगवास अकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ दोवि तुल्लाओ संखेज्जगुणाओ हेमवएरणवय अकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ दोषि तुल्लाओ संखेजगुणाओ भरहेरववकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ दोवि तुल्लाओ संखेज्जगुणाओ पुव्वविदेहेअवरबिदेहकम्म भूमिगमणुस्सित्थियाओ दोवि तुलाओ संखेज्जगुणाओ एवासि णं भंते देवित्थियाणंभवणवासिणीणं वाणमंतरीणं जोइसिणोणं वैमाणिणीणं य कतरा कतराहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्योवाओं वैमाणियदेवित्थियाओ भवणवासिदेवित्थियाओ असंखेजगुणाओ, वाणमंतरदेवित्थियाओ असंखेज्जगुणाओ जोइसियदेवित्थियाओ संखेज्जगुणाओ,
एयासि णं भंते तिरिक्खजोणित्थियाणं- जलयरीणं धलयरीणं खहयरीणं मणुस्सित्थियाणंकम्मभूमियाणं अकम्पभूमियाणं अंतरदीविचाणं देवित्थियाणं भवणवासिणीणं वाणमंतरीणं जोड़सिणीणं वैमाणिणीच कतरा कतराहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिया वा गोयमा सव्वत्थोवाओ अंतरदीवगअकम्मभूमिगमणुस्तित्थियाओ देवकुरुउत्तरकुरु अकम्मभूमिगमणुस्सि- त्थियाओ दोदि तुल्लाओ संखेचगुणाओ हरिवासरम्भगवास अकम्प भूमिगमणुस्सित्थियाओ दोवि तुलाओ संखेज्रगुणाओ हेमवएण्णवय अकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ दोषि तुल्लाओ संखेज्जगुणाओ भरहेरवयकम्मभूमिगमणुस्सित्थियाओ दोवि तुल्लाओं संखेजगुणाओ पुब्वविदेह अवरवि- देहकम्मभूमिगपशुस्मित्थियाओ दोविल्लाओ संबेजगुणाओ बेमाणियदेवित्थियाओ असंखेज्जगुणाओ भवणासेदेवित्थियाओ असंखेज्जगुणाओ खहवरतिरिक्खजोणित्थियाओ असंखेज्जगुणाओ थलयरतिरिक्खिजोणित्थियाओ संखेज्जगुणाओ जलयरतिरिक्खजोणित्थिवाओ संखेज्जगुणाओ वाणमंतरदेवित्थिया संखेज्जगुणाओ जोइसियदेवित्थियाओ संखेजगुणाओ 1491.50
(५९) इत्थवेदस्स णं पंते कम्पस्स केवतियं कालं बंधठिती पत्रत्ता गोयमा जहन्नेणं सागरोवमस्स दिवड्ढो सत्तभागो पत्तिओवमस्स असंखेज्जइभागेणं ऊणो उक्कोसेणं पत्ररस सागरोवमकोडाकोडीओ पनरस वाससबाई अवाहा अबाहूणिया कम्पठिती कम्मणिसे ओ, इत्थवेदे णं भंते किंपगारे पन्नत्ते गोयमा फुंफुअग्गिसमाणे पन्नत्ते सेत्तं इत्थियाओ । ५२/- 51
(६०) से किं तं पुरिसा पुरिसा तिविहा पन्नत्ता तं जहा तिरिक्खजोणियपुरिसा मगुस्सपुरिसा देवपुरिसा से किं तं तिरिक्खजोणियपुरिसा तिरिक्खजोणियपुरिसा तिर्विहा पन्नत्ता तं जहा जलयरा श्रलयरा खहयरा इत्थिभेदो भाणियव्वो जाव खहयरा सेत्तं खहयरा सेत्तं तिरिक्खजोणियपुरिसा से
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