Book Title: Agam 14 Jivajivabhigama Uvangsutt 03 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 28
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir परिवत्ति-२ किं तं मस्तपुरिसा मणुस्तपुरिसा तिविहा पन्नत्ता तं जहा- कम्मभूमगा अकम्पभूमगा अंतरदीचगा सेतं मणुस्सपुरिसा से किं तं देवपुरिसा देवपुरिसा चउव्विहा पत्रत्ता तं जहा इत्यीभेदो भाणियव्यो जाव सव्वट्टसिद्धा । ५३ ।-52 (६१) पुरिसस्स णं भंते केवतियं कालं ठिती पत्रत्ता गोयमा जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं तेत्तीस सागरोवमाई तिरिक्खजोणियपुरिसाणं मणुस्सपुरिसाणं जा चेव इत्थीणं ठिती सा चैव भाणियव्वा देवपुरिसाणचि जाव सव्वट्टसिद्धाणं ति ताव ठिती जहा पन्नवणाए तहा भा० १५४ 1-53 (६२) पुरिसे णं भंते पुरिसेत्ति कालओ केवच्चिरं होइ गोयमा जहणेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं सागरोवमसयपुहत्तं सातिरेगं तिरिक्खजोणियपुरिसे णं भंते कालओ केवच्चिरं होइ गोपमा जहनेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं तिष्णि पलिओयमाई पुव्यकोडिपुहत्तमन्महियाई एवं तहेव संचिट्टणा जहा इत्थीणं जाव खहयरतिरिक्खजोणियपुरिसस्स संचिणा माणुस्सपुरिसाणं भंते कालओ केवच्चिरं होइ गोयमा खेत्तं पडुच जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं तिण्णि पलिओ माई पुव्वकोडिपुहत्तमब्भहियाई धम्मचरणं पडुच जहण्णेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं देसूणा पुञ्चकोडी एवं सव्वत्थ जाव पुव्वविदेह-अवरविदेह-कम्मभूमगमनुस्सपुरिसाणं अकम्मभूमगमपुरसपुरिसाणंजहा अकम्मभूमिकमणुस्सित्थीणं जाव अंतरदीवगाणं जच्चेव ठिती सच्चेव संचिगुणा जाव सव्वसिद्धगाणं । ५५)-54 १९ (६३) पुरिसस्स णं भंते केवतियं कालं अंतरं होइ गोयमा जहन्नेणं एक्कं समयं उक्कीगं वणम्सतिकालो तिरिक्खजोणियपुरिसाणं जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं वणरसतिकाली एवं जाव खहयरतिरिक्खजोणियपुरिसाणं, मणुस्सपुरिसाणंभंते केवतियं कालं अंतरं होइ गोवमा खेत्तं पहुच जणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं वर्णस्सतिकालो धम्मचरणं पडुच जहनेणं एक्कं समयं उक्कोसेणं अनंतं कालं-अनंताओ उस्सप्पिणी ओ जाव अवड्ढपोग्गलपरियट्टं देसूणं कम्मभूमकाणं जाव विदेहो जाव धम्मचरणे एकूको समओ सेसं जहित्थीणं जाव अंतरदीवकाणं देवपुरिसाणं जहणेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं वगरसतिकालो, भवणवासिदेचपुरिसाणं ताब जाब सहस्सारो जहणेणं अंतो मुहुतं उक्कोसेणं वणस्पतिकालो, आणतदेवपुरिसाणं भंते केवतियं कालं अंतर होइ गोयमा जहन्नेणं वासपुहतं उक्कोसेणं वणस्पतिकाली एवं जाव गेवेजदेवपुरिसरसवि अनुतरोवबातियदेवपुरिसस जहणेणं वासपुहत्तं उक्को सेणं संखेजाई सागरीबमाई साइरेगाई । ५६/-55 (६४) अप्पाबहुयाणि जहेवित्यीणं जाब- एतेसि णं भंते देवपुरिसाणं भवणवासीणं वाणमंतराणं जोतिसियाणं वैमाणियाणं य कतरे कतरेहिंतो अप्पा वा जाव विसेसाहिबा वा गीयमा सव्यत्थोवा वेमाणियदेवपुरिसा भवणवइदेवपुरिसा असंखेजगुणा वाणमंतर देवपुरिसा असंखेचगुणा जोतिसियदेवपुरिसा संखेजगुणा एतेसि णं भंते तिरिक्खजोणियपुरिसाणं जलचराणं थलवराणं खहवराणं मणुस्तपुरिसाणं- कम्पभूपगाणं अकम्पभूमगाणं अंतरदीवगाणं देवपुरिसाणं भवण- वासीणं जाव वैमाणियाणं सोधम्माणं जाव सव्ववसिद्धगाण य कतरे कतरेहिंतो अप्पा वा जाब गोपमा सव्धोवा अंतरदीवगअक्रम्मभूमगमणुस्सपुरिसा देवकुरुउत्तर- कुरुअकम्पभूमगमणुस्सपुरिसा दोवि संखेज्जगुणा हरिवासरम्भगवास अकम्पभूमगमणुस्सपुरिसा दोविं संखेज्जगुणा हेमवतहेरण्णवतवास अकम्भूमगमणुरसपुरिसा दोवि संखेज्जगुणा भरहेरवतवास- कम्मभूमगमणुस्स पुरिसा दोवि संखेज्ञगुणा पुब्वविदेहे अवरविदेहकम्प भूमगमणुस्रापुरिसा दोवि संखेनगुणा अनुत्तरोववातिय For Private And Personal Use Only

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