Book Title: Jain Sanskrit Mahakavyo Me Bharatiya Samaj
Author(s): Mohan Chand
Publisher: Eastern Book Linkers
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५७६
जैन संस्कृत महाकाव्यों में भारतीय समाज
विढन्मनोवल्लभाटीका २५५, ४२४ व्यवहारसूत्र ४६२ विनयपिटक ५१०
शकुन्तला ४६५ विनयादित्य ३२२
__ शंकराचार्य ५०१ विवादरत्न २६८
. शतपथब्राह्मण, ३१, ३७, ४२०, 'विशाखदत्त २७
४५६ विश्वकर्मप्रकाश २८५
शतानीक (राजा) ४६३ विश्वकर्मवास्तुशास्त्र २५८, २६२, शत्रुजय महाकाव्य २०४ २६४, २७६
शबर (दार्शनिक) ३७६ विश्वकोष २८३
शब्दरत्नसमन्वयकोष २८३ विश्वनाथ २४
शम्भ (राजा) १ विश्वप्रकाश २८३
शशिप्रभा (राजकुमारी) ४७६, ४६१ विश्वरूप (टीकाकार) २८८ विश्वलदेव (प्रथम) १४३ .
शान्तिनाथ (तीर्थङ्कर) ४७, ६३ ।। विश्वलदेव (द्वितीय) १४३ शान्तिनाथचरित ४५, ४८, ६३, विष्णुधर्मोत्तरपुराण १६८
३२४, ४१३, ४३५, ४५१, विष्णुपुराण ५१०
४९४,५००, ५०५, ५०७ वी. प्रार. मार दीक्षितार १३४,
शान्तिपर्व (महाभारत) १६१ १७२, १७३, १७४, ११७,
शास्त्रसारसमुच्चय ३५१, ३५५ ___ १७८. १८३ .
शिल्परत्न २६०, २८६, २८७ पा० वीरधवल ६१, १४६, ३२२, ३४५
शिशुपालवध ४१, ५३
शीलाङ्काचार्य २८२ वीरनन्दि ४५, ४८, ५४, १३०, , २५४, ३९५, ४०२
शुक्रनीतिसार ७४, १११, १५४, ..
१८३, १९१ . वीरनारायण १४३, १४४
शूर (राजा) ५२५ वीरमित्रोदय २६८, २८८, २९१
श्रीनाथ ५४ वीर्यराम १४४ . .
श्रीपति ४७ वीसलदेव ५६ .
श्रीमद्भगवद्गीता १८७ . वेण्कटाध्वरी ४७
श्रीमद्भागवत पुराण २८१ वेद कुमारी ५२५
श्रीवर्मा (राजकुमार) ८६ वैजयन्ती कोष १७८
श्रीषेण ३६२ वैशम्पायन ७१, १५५, १६८ शृङ्गारवती (राजकुमारी) ४८६, व्यवहारप्रका
__५०३, ५०४, ५०७

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