Book Title: Gurupad Puja
Author(s): Ajitsagarsuri
Publisher: Shamaldas Tuljaram Shah

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Page 12
________________ गुरुपदपूजा. योगनिष्ठश्रीमद् बुद्धिसागरसूरीश्वरपूजा. जन्म अने बालचरित्ररूप प्रथम जलपूजा ॥१॥ विनयसहित श्रीगुरुपदे, प्रेमे करुं प्रणाम; ज्ञानवडे जेणे दीघो, अंतरमा आराम ॥१॥ अनंत भवमां भटकतां, हेते झाल्यो हाथ; प्रेमदीपकथी पिंडमां, निरख्यो निरमल नाथ ॥ २ ॥ सरस्वती मुजवदनमां प्रेमे पूरो वास: महावीर करुणा करी, पूर्ण मटाडो प्यास ॥३॥ अविचल भक्ति आपजो, बुद्धि सिन्धुमुनिराज । आगमपंथ कीधो सुगम, सदा रहो शिरताज ॥ ४ ।। जप तप संयम सर्व पण, गुरु सेवनथी थाय; सफल को मुज आत्मने, सफल करी मुज काय ॥५॥ ढाल-मारी आंखडलीने आश-ए राग. जय बुद्धिसागर मुनिराज, नरभव सफल को कयों पावन गुर्जदेश, परहित देह धर्यो, ए टेक. सर्व देशनो शिरोमणि छे, गुणनिधि गुर्जर देश जो. ते केरा उत्तम शुभ प्रांते, साबर वहे हमेश; नरभव स. ॥१॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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