Book Title: Agam 28 Mool 01 Aavashyak Sutra Sthanakvasi
Author(s): Amarmuni
Publisher: Padma Prakashan

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Page 75
________________ Selesskskskskskskskedisksksksksralasdeskesekaskskskskskskskskskskskskskskskskskskskskskskree (detachment from physical body) in order to recapitulate the digression that might have occurred during the day in activities relating to knowledge, perception, ascetic conduct austerities and the like in my life as mendicant. विधि : इसके पश्चात् नमस्कार सूत्र का मनन करके (देखें पृष्ठ 8 पर) 'सामायिक सूत्र' द्वारा सामायिक की प्रतिज्ञा ग्रहण की जाती है। Procedure: Thereafter Namaskar Sutra is uttered mentally and then the vow of Samayik is undertaken by uttering Samayik Sutra. सामायिक सूत्र - करेमि भंते! सामाइयं सव्वं सावजं जोगं पच्चक्खामि जावज्जीवाए, तिविह तिविहेणं-मणेणं वायाए कारणं न करेमि, न कारवेमि, करंतंपि अन्नं न समणुजाणामि। तस्स भंते! पडिक्कमामि, निंदामि, गरिहामि, अप्पाणं वोसिरामि। ___भावार्थः हे भगवन्! मैं समता भाव रूपी सामायिक व्रत को ग्रहण करता हूं। समस्त सावद्य योगों (पाप रूप व्यापारों) का त्याग करता हूं। जीवन-भर मन, वचन, काया-इन तीनों योगों से न मैं स्वयं पाप कर्म करूंगा, न किसी अन्य से पापकर्म कराऊंगा और पापकर्म करने वालों का अनुमोदन भी नहीं करूंगा। भगवन्! पहले किए गए पापों से मैं निवृत्त होता हूं, उन्हें हृदय से बुरा मानता हूं, आपकी साक्षी से उनकी निन्दा करता हूं, गुरु की साक्षी से गर्दा करता हूं एवं पाप रूप आत्मा का परित्याग करता हूं। Literal Meaning: O Lord! I practice the vow of Samayik in a state of equanimity. I discard all the activities involving violence throughout my life. I shall not engage myself mentally, verbally or physically in any sinful activity. I shall not ask any one to engage in any such act and shall not even support any such acts. O Lord! I detach myself from all sins committed earlier. I consider those sins as bad from the core of my heart. I despise them in your presence. I condemn them at the feet of my spiritual teacher. I discard the soul engrossed in sin. विवेचन : सामायिक शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार है-समस्य आयः समायः, सः प्रयोजनं यस्य तत् सामायिकम्। राग और द्वेष से ऊपर उठकर समता भाव में स्थित होने का प्रयोजन जिससे सिद्ध हो, उसे सामायिक कहा जाता है। आवश्यक सूत्र r // 23 // Ist Chp. : Samayik pasargarasannaprasaramanarayanpass a a

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