Book Title: Tarangvaikaha
Author(s): Padliptsuri, Nemichandrasuri,
Publisher: Jivanbhai Chotabhai Zaveri
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कहासंबधे
मा.के. सा.
कोषा
सं० तरंग- (च्छे)ओ। एवं विचिंतिऊणं खामेऊण तयं सूरिं ॥९॥ अस्थि विसालनिवेसा भूमियलोइण्णदेवलोगसमा। कुसलजणसंकुला वईकहा || 'कोसल'नि लोए पुरी खाया ॥१०॥ बंभणसमणातिहिदेवपूयपरितोसिया जहिं देवा। गडेति पुत्तकलाओ वसुहाराओ कुडुं
| बेसु ॥११॥ तत्तोव्वयस्स समणस्स आविहिया अविमणा अणन्नमणा। ण(पा)लित्तस्स य गुणलित्तयस्स मइसाहसं सुणहा॥१२॥ पाययद्वं च निचई धम्मकहं सुणह जइ न दुबुद्धी । जो धम्म सुणइ सिवं सो जमविसयं ना ए(पे)च्छिहिइ ॥ १३ ॥ अस्थि समिद्धजणगणो बहुगामसहस्सगोदुसंनिचिओ। 'मगहा' नाम जणवओ कहासु परिपाडियनामो ॥१४॥ निव्वस्स वाणवासो वगयपरचकचोरदुभिक्खो । जो सव्वसम्म[संपयस्स] संपयसमणि को विस्सुश्री लोए ॥१५।। तत्थ पुहइपहाणं रमणेज्जुजाणकाणणवणं । 'रायगिह' तु पअगामरनगरं ? ॥१६॥ तत्थासि कोणिओ नाम विपुलबलाए कोससंपयाजुत्तो। रिउजीविआण कालो सिमि)त्तसुकालो पहइयालो ॥१७॥ समरपरकमनिञ्जिय-अणामियसयलसत्तुसामंतो । जियमबदोसपसरो कुलवंसविभूसणो मूरो ।।१८। तित्थयरस्स भगवओ वीरस्स विलीणगगदोमस्स । सो सासणंमि रत्तो जरमरणविमोकवणंकरंमि ।।१९।। तस्सासि तया तणुजीवरक्खओ सम्बपयइमणकंतो । कुलमाणसीलविसोणनाण जुत्तो नगरसेट्ठी ॥२०॥ सोहग्गवइ गहवइया सोमा पियदमणा पिया तासी(तस्स)। पच्चक्खं धणपालो णे(धण)पालो नाम नामेण ॥२१॥ तस्संतियसि वसती सिद्धिमज्झ (ग)परिग्गगु(ह)ज्जुत्ता। बहमिस्सीपरिवारा जिणवयणविसारया गणिणी ।।२२।। कोमारवंभयारी बहुविहनियमोपवासतणुयंगी। एक्कारसंगसं| पुष्णकरिया सुवयास्स नाम ॥२३।। तिस्सा विणीयविणया सिस्सी पार(ण)न्तचारिया काइ । छट्ठस्स पारणटुं कयनियमावस्सया
१ पूजा । २ अ० त्तयस्त ।
Dearneameramera
॥२॥
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