Book Title: Sumitra Charitram
Author(s): Harshkunjar Upadhyay
Publisher: Shravak Hiralal Hansraj
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________________ ममित्र चरित्रम् // 26 // हे सत्पुरुष किं नामा / भवान् पात्रेषु दृश्यते // कथं चतुर्विधाहारः / पुनः पुनरिह त्वया // 24 // नीयमानोऽपि सत्कूपा-निर्मलाभ इवाक्षयः // सुगंधः सरसः सर्व-लोकानामर्थपूर्तये // 25 // अर्थ-हे साधुपुरुष ! आपनुं नाम शुं ते कहो ? अने सारा कुवाना निर्मळ पाणीनी जेम तमाराथी वारंवार मनुष्योनी वांछा व पूर्ण करवाने माटे सारा गंधवाळो अने शुभ रसवाळो चार प्रकारनो आहार देवाता छतां केम अक्षय-अखूट जोवाय छे ते जणावो ? // 24 // 25 / / श्रुत्वैतत्सीष्टवं प्राह / दंतकांति किरन्नसो // कुमार सचमत्कारं / मत्स्वरूपमिदं श्रुणु // 26 // - अर्थ-आ प्रमाणे साम्यता युक्त बचनो सांभळीने दातना किरणोने विस्तारतो ते बोल्यो के-'हे कुमार ! आश्चर्यने प्रगटाव नारं मारुं स्वरुप तमे सांभळो-॥ 26 // अत्रैव धननामाभू-व्यवहारिकपुंगवः // वरदत्तामिधस्तस्य / सुतोऽहं सुगुणोऽभवं // 27 // ____ अर्थ-" आज नगरमां धन नामनो श्रेष्ठ व्यवहारी वसतो हतो, तेनो हुं दरदत्त नामनो गुणयुक्त पुत्र छु. // 27 // कृतकोंदयाहाल्ये। पितुर्मातुर्वियोगजं // दुःखं लेभे क्रमेणाहं / त्यक्तो लक्ष्म्याप्यभाग्यतः // 28 // अर्थ-करेला पूर्वकर्मना उदय बळे मने बाल्यावस्थामाज माता-पिताना वियोगर्नु दुःख प्राप्त थयु. त्यारबाद भाग्यदेवीनी 9 अकृपाथी मारी सर्व संपत्ति पण नाश पामी. / / 28 / / DDDDDDDDDDDDDDDDDDDDD ला॥२६॥ A Gunnanasul M.S Jun Gun Aaradnak Trust

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