Book Title: Dravyanuyoga Part 2
Author(s): Kanhaiyalal Maharaj & Others
Publisher: Agam Anuyog Prakashan

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Page 15
________________ सम्मान्य सहयोगी सदस्य स्व. श्री धनराज जी नाहटा, केकड़ी (राज.) आप श्री दीपचन्द जी नाहटा के सुपुत्र थे। चित्रकला, कविता, नाटक कला, व्यायाम आदि में आपकी विशेष रुचि थी। साथ ही धार्मिक ज्ञान, तत्त्वचर्चा तथा वाद-विवाद में भी कुशल थे। स्थानकवासी जैन संघ, केकड़ी के मन्त्री थे। पूज्य स्वामीदास जी म. की परम्परा के प्रति अत्यन्त निष्ठा रखते हुए गुरुदेव मुनि श्री कन्हैयालाल जी म. 'कमल' के अनन्य भक्त थे। श्रमचा संघ के प्रति आपकी गहरी निष्ठा थी। आगम अनुयोग ट्रस्ट के सहयोगी थे। . आपके सुपुत्र लालचंद जी, सुरेशकुमार जी आदि भी धर्मनिष्ठ श्रावक हैं। श्रीमती केलीबाई देवराज जी चौधरी, जैतारण (मारवाड़) आप बहुत ही धार्मिक दानवीर महिला हैं। आपके सुपुत्र श्री शान्तिलाल जी एवं श्री धर्मीचन्द जी चौधरी कर्मठ कार्यकर्ता हैं। आपका व्यवसाय तिरुपति बालाजी में है। आपने अनेक बार बहुत लम्बे-लम्बे मुनि दर्शनार्थ संघ निकाले हैं। स्थान-स्थान पर दान देकर सम्पत्ति का सदुपयोग कर रहे हैं। आपने आगम अनुयोग ट्रस्ट को भी सहयोग प्रदान किया है। स्व. श्री अमरचंद जी लुणावत, हरमाड़ा (अजमेर) आप पूज्य गुरुदेव श्री फतेहचन्द जी महाराज के अनन्य भक्त थे। श्री माणकचन्द जी, श्री धर्मीचन्द जी, श्री प्रेमचन्द जी लुणावत आपके सुपुत्र हैं। आप हरमाड़ा श्रावक संघ के अग्रणी थे। पार्श्वनाथ छात्रावास आपके प्रयत्नों से बना। आपके बड़े सुपुत्र माणकचंद जी मदनगंज में रहते थे। शीलव्रत आदि के प्रत्याख्यान लिए द्वितीय सुपुत्र श्री धर्मीचंद जी दिल्ली रहते हैं। बहुत ही धर्म श्रद्धालु उदार भावना वाले श्रावक हैं। महावीर कल्याण केन्द्र मदनगंज आदि अनेक संस्थाओं के ट्रस्टी हैं। तृतीय सुपुत्र श्री प्रेमचंद जी बहुत ही सेवाभावी धार्मिक श्रावक हैं। पूरे परिवार की उपाध्यायश्री जी के प्रति विशेष श्रद्धा- भक्ति है। अमरचंद मारु चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से अनुयोग प्रकाशन में विशेष योगदान प्राप्त हुआ है। (४)

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