Book Title: Tajiksara Sangraha
Author(s): Vrundavan Maneklal Joshi
Publisher: Vrundavan Maneklal Joshi

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Page 13
________________ @000000000000000000000000000000000000 10000000000 00000000000 || श्रीमहालक्ष्म्यैनमः ॥ ज्योतिर्विद् वृन्दावन विरचित श्रीताजिकसारसंग्रहग्रन्थस्य प्रशस्ति पञ्चकम्. श्रीगुर्जरे श्रीगुरुसंज्ञकानां कुले द्विजानां जनितेन येन ॥ भाव वृन्दावनशर्मगाऽयमग्रन्थि ग्रन्थो जनताहिताय ॥ १ ॥ यद्यप्यनेकेषु च सत्सु ग्रन्थेष्वस्य प्रयासो न गतार्थ इत्थ ॥ मावेदयत्येव कृतोऽनुवादः ससारिणी गुर्जरटीक्रयाऽयम् ॥ २ ॥ नभोगसिद्धाविनभावसिद्धौ समाप्रवेशादिवसप्रवेशम् ॥ यावत्तथोदाहरणानि यानि गुरोरुपास्ति कथयन्ति तानि ॥ ३ ॥ यत्सौष्टवं तद्दलसुखराम गुरोः कृपायाः फलमत्रमन्ये || यद्येति दोषः सरणिं दृशोत्कर्तुः प्रमादो नरधर्मिकः सः ॥ ४ ॥ महोपकाराय सदाहतो बुधैः कल्पिष्यते ताजिकसारसंग्रहः ॥ अयं हि सच्छात्रगणस्य सर्वथा अनूपरामेण प्रमाणितस्ततः ||१५|| संवत् १९८८ माघशुक्ल २ चन्द्रवासरे ता. ८-२-१९३२ लेः-भावत्कः व्याकरणज्योतिषन्यायादिशास्त्राध्ययनकृतश्रमः सदाशिवात्मजः अनूपरामः शास्त्री. मधुपुर निवासी. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat 000000000000000000000000000000000000000 www.umaragyanbhandar.com

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